राजस्थान का भरतपुर जाट राज्य {Bharatpur Jat State of Rajasthan} राजस्थान GK अध्ययन नोट्स

  • जाट मुख्यतः खेती करने वाली जाति है; लेकिन औरंगजेब के अत्याचारों और निरंकुश प्रवृति के राजाओं ने उन्हें एक बड़ी सैन्य शक्ति का रूप दे दिया । मुग़लिया सल्तनत के अन्त से अंग्रेज़ों के शासन तक ब्रज मंड़ल में जाटों का प्रभुत्व रहा ।
  • ब्रज की समकालीन राजनीति में जाट शक्तिशाली बन कर उभरे । जाट नेताओं ने इस समय में ब्रज में अनेक जगहों पर, जैसे सिनसिनी, डीग, भरतपुर, मुरसान और हाथरस जैसे कई राज्यों को स्थापित किया । राजस्थान में जाट राजवंश मुख्यतया भरतपुर एवं धौलपुर राज्य ने रहा।
  • महाराजा सूरजमल (1755−1763) भरतपुर राज्य के दूरदर्शी जाट महाराजा थे। उनके पिता बदन सिंह ने डीग को सबसे पहले अपनी राजधानी बनाया और बाद में सूरजमल ने भरतपुर शहर की स्थापना की।
  • भरतपुर राज्य की नींव महाराजा सूरज मल ने डाली। महाराजा सूरज मल के समय भरतपुर राज्य की सीमा आगरा, धोलपुर, मैनपुरी, हाथरस, अलीगढ़, इटावा, मेरठ, रोहतक, फर्रुखनगर, मेवात, रेवाड़ी, गुड़गांव, तथा मथुरा तक के विस्तृत भू-भाग पर फैली हुई थी।
  • भारत के इतिहास में सूरजमल को ‘जाटों का प्लेटो’ कहकर भी सम्बोधित किया गया है। राजा सूरजमल के दरबारी कवि ‘सूदन’ ने राजा की तारीफ में ‘सुजानचरित्र’ नामक ग्रंथ लिखा।
  • भरतपुर के जाट राजवंश के प्रमुख राजाओं में : बदन सिंह (1722 – 1756), महाराजा सूरज मल (1756-1767) एवं अन्य राजा थे, अंत में महाराजा ब्रजेन्द्र सिंह, (1929-1947) ने भरतपुर राज्य को भारत में शामिल कर लिया था ।

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