किशनगढ़ चित्रकला शैली {Kishangarh Painting Style} राजस्थान GK अध्ययन नोट्स

  • जोधपुर से वंशीय सम्बन्ध होने तथा जयपुर से निकट होते हुए भी किशनगढ़ में एक स्वतंत्र शैली का विकास हुआ।
  • सुन्दरता की दृष्टि से इस शैली के चित्र विश्व-विख्यात हैं। अन्य स्थानों की भाँति यहाँ भी प्राचीन काल से चित्र बनते रहे।
  • किशनगढ़ राज्य के संस्थापक किशन सिंह कृष्ण के अनन्योपासक थे। इसके पश्चात् सहसमल, जगमल व रुपसिंह ने यहाँ शासन किया। मानसिंह व राजसिंह ने यहाँ की कलाशैली के पुष्कल सहयोग दिया।
  • किशनगढ़ शैली का समृद्ध काल राजसिंह के पुत्र सामन्त सिंह (1699 -1764) से जो नागरीदारा के नाम से आधिक विख्यात हैं, से आरंम्भ होता है।
  • इस शैली के चेहरे लम्बे, कद लम्बा तथा नाक नुकीली रहती है। नारी नवयौवना, लज्जा से झुका पतली व लम्बी है। धनुषाकार भ्रू-रेखा, खंजन के सदृश नयन तथा गौरवर्ण है। अधर पतले व हिगुली रंग के हैं। हाथ मेहंदी से रचे तथा महावर से रचे पैर है। नाक में मोती से युक्त नथ पहने, उच्च वक्ष स्थल पर पारदर्शी छपी चुन्नी पहने रुप यौवना सौदर्य की पराकाष्ठा है।
  • राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध चित्र इसी शैली का है,उसका नाम बनी-ठनी है और इसको निहालचन्द ने बनाया था।

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