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साप्ताहिक करेंट अफेयर्स 23 अप्रैल से 28 अप्रैल 2018

बच्चों से रेप पर होगी फांसी की सज़ा, अध्यादेश को मंजूरी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 21 अप्रैल 2018 को एक बड़े फैसले के तहत पोक्सो एक्ट में बदलाव के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी. इस बैठक में ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस’ यानी पॉक्सो एक्ट में संशोधन को हरी झंडी दी गई. इस संशोधन के तहत देश में 12 साल या उससे कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप के दोषियों को फांसी की सजा दी जा सकेगी.

मौजूदा पॉक्सो एक्ट के प्रावधान

दिसंबर 2012 के निर्भया मामले के बाद कानूनों में संशोधन किये गये जिसके तहत पॉक्सो कानून के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है, न्यूनतम सजा सात साल की जेल है. इसमें बलात्कार के बाद महिला की मृत्यु हो जाने या उसके मृतप्राय होने के मामले में एक अध्यादेश के माध्यम से मौत की सजा का प्रावधान शामिल किया गया जो बाद में आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम बन गया.

कैबिनेट निर्णय के तहत नये बदलाव

  • •    12 साल की बच्चियों से रेप पर फांसी की सजा
  • •    16 साल से छोटी लड़की से गैंगरेप पर उम्रकैद की सजा
  • •    16 साल से छोटी लड़की से रेप पर कम से कम 20 साल तक की सजा
  • •    सभी रेप केस में 6 महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा
  • •    नए संशोधन के तहत रेप केस की जांच 2 महीने में पूरी करनी होगी
  • •    अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी
  • •    महिला से रेप पर सजा 7 से बढ़कर 10 साल होगी

पृष्ठभूमि 

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के अलावा और जम्मू कश्मीर के कठुआ में नाबालिग बच्ची के बाद सामने आ रही ऐसी घटनाओं को लेकर देशभर में गुस्से के माहौल था. चारों तरफ से रेप के दोषियों को सजा दिलाने की मांग उठ रही है. इसी पृष्ठभूमि में सरकार बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने की योजना बना रही थी. पॉक्सो कानून के फिलहाल प्रावधानों के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है. वहीं, न्यूनतम सजा 7 साल की जेल है.

200 वर्ष बाद केवल गाय सबसे बड़ी स्तनधारी जीव होगी: अध्ययन

हाल ही में किये गये एक शोध के अनुसार पृथ्वी से विशालकाय जानवरों और विलुप्ति की कगार पर पहुंचे जंतुओं का लुप्त होना इसी प्रकार जारी रहा तो 200 साल बाद गाय सबसे बड़ी स्तनधारी जीव होगी.

अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मेक्सिको के शोधकर्ताओं के द्वारा किये गये अध्ययन की मानें तो आने वाले वर्षों में हाथी, जिराफ और दरियाई घोड़े जैसे जीव विलुप्ति के कगार पर पहुंच जायेंगे तथा गाय एकमात्र ऐसा जीव होगा जो विलुप्ति से बचा रहेगा. शोधकर्ताओं के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन नहीं बल्कि मनुष्य हैं.

शोध के प्रमुख तथ्य

  • •    शोधकर्ताओं का कहना है कि जानवरों का लुप्त होना कोई आकस्मिक घटना नहीं है. यह प्रक्रिया करीब एक लाख 25 हजार वर्षो से चली आ रही है.
  • •    जब अफ्रीका के मूल निवासी प्राचीन मनुष्यों जैसे निएंडरथल ने अन्य महाद्वीपों में फैलना शुरू किया था तब से ही बड़े आकार वाले स्तनधारियों के विलुप्त होने की घटना में तेजी आई.
  • •    मानवीय क्रियाकलापों के कारण बड़े जानवर विलुप्त हुए थे और वर्तमान में भी ऐसा ही हो रहा है.
  • •    अध्ययन में बताया गया है कि एक लाख 25 हजार साल पहले अफ्रीका के स्तनधारी जीवों का औसत आकार अन्य महाद्वीप के जीवों से 50 प्रतिशत कम था. प्लेस्टोसीन काल के अंत से ही प्राचीन मानवों ने स्तनधारियों की विविधता और उनके आकार को प्रभावित करना शुरू कर दिया था.
  • •    प्लेस्टोसीन 26 लाख साल पहले से 11760 वर्ष पहले तक का काल था. समय के साथ जैसे-जैसे मनुष्यों ने पूरे विश्व में फैलना शुरू किया ऊनी गैंडे, मैमथ, ऊंट, जमीन पर रहने वाले विशालकाय स्लॉथ, छोटे मुंह वाले भालू और जंगली बिल्लियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गईं.

शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट में कहा है कि एशिया के बाद अफ्रीका सबसे बड़ा महाद्वीप है और वहां बड़ी संख्या में स्तनधारी जीव रहते हैं. मनुष्यों ने अपने स्वार्थ के लिए इन बड़े जानवरों को अपना शिकार बनाया जिससे इनकी संख्या में गिरावट आ गई.

सैनिक स्कूल में 57 वर्ष में पहली बार लड़कियों को मिला एडमिशन

भारत के सैनिक स्कूलों में अब तक लड़कों को प्रवेश दिया जाता था लेकिन लखनऊ के सैनिक स्कूल ने पहल करते हुए लड़कियों को भी प्रवेश की अनुमति प्रदान की है. इस वर्ष आरंभ हो रहे सत्र के लिए 15 लड़कियों का चयन किया गया है.

घोषणा के मुख्य तथ्य

  • •    सत्र 2018-19 के लिए लगभग 2500 लड़कियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 15 लड़कियों का चयन किया गया.
  • •    इन सभी को नौंवीं कक्षा में दाखिला दिया गया है.
  • •    सभी छात्राओं ने 19 अप्रैल से कक्षा में जाना शुरू किया.
  • •    इन 15 छात्राओं के अतिरिक्त यहां 450 अन्य छात्र भी हैं.
  • •    छात्राओं को प्रवेश देने से पहले स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर में कुछ बदलाव किये गये. लड़कों के हॉस्टल्स में से एक खाली कराकर उसे लड़कियों के लिए तैयार किया गया.

भारत में सैनिक स्कूलों का महत्व

भारत में कुल 27 सैनिक स्कूल हैं. देश के सैनिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से बेहतरीन का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से सैन्य तैयारी के लिए भेजा जाता है. इन स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा वह नींव बनती है जिसके आधार पर आगे चल कर बच्चे देश का सशक्त सैनिक बनते हैं. वर्ष 2016 में एनडीए में दाखिला लेने वाले कुल कैडेट में 29.33% कैडेट इन सैनिक स्कूलों से आए थे. देश के सभी 27 सैनिक स्कूल केंद्र सरकार के अधीन हैं, जबकि लखनऊ का सैनिक स्कूल राज्य सरकार के अधीन है.

लखनऊ सैनिक स्कूल के बारे में
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का सैनिक स्कूल वर्ष 1960 में स्थापित किया गया था जो देश में अपनी तरह का पहला स्कूल था. इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में 27 ऐसे सैनिक स्कूल स्थापित किए जा चुके हैं. लखनऊ के सैनिक स्कूल से 57 साल में 1000 से ज्यादा सेना के अधिकारी बन चुके हैं. यह सैनिक स्कूल देश का पहला स्कूल है जहां के छात्र मनोज पांडेय को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है. जुलाई 2017 में यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक में स्कूल का नाम कैप्टन मनोज पांडेय सैनिक स्कूल किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी.

 

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के पुनर्गठन को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने गांवों के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के पुनर्गठन को मंजूरी दी है. पुनर्गठन के बाद तैयार की गई इस नई योजना की शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के मांडला जिले से करेंगे. प्रधानमंत्री इसी दिन देश भर की ग्राम सभाओं को भी सीधे संबोधित करेंगे.

इसके तहत अगले चार सालों में गांवों के विकास पर 7255 करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे. इनमें लगभग 4500 करोड़ रुपए केंद्र और लगभग 2700 करोड़ राज्य सरकार देगी. योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है.

पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान की मुख्य विशेषताएं

  • योजना के नए स्वरूप के तहत ग्राम पंचायतों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाया जाएगा. साथ ही ग्राम पंचायत के काम-काज में पारदर्शिता लाने पर भी जोर रहेगा.
  • सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्‍त करने के लिए योजना के क्रियान्‍वयन और निगरानी गतिविधयों को सामान्‍य रूप से आपस में जोड़ा जाएगा और मुख्‍य बल मिशन अंत्‍योदय के अंतर्गत चिन्हित पंचायतों और नीति आयोग द्वारा चिंन्हित 115 आकांक्षी जिलों पर होगा.
  • इस योजना का विस्‍तार देश के सभी राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किया जाएगा.
  • योजना में उन क्षेत्रों के ग्रामीण स्‍थानीय शासन के संस्‍थानों को भी शामिल किया जाएगा जहां पंचायतें नहीं हैं.
  • पंचायतों द्वारा की गई प्रगति की क्षेत्रीय स्तर पर सूचना एवं निगरानी के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन ‘एक्शनसाफ्ट’ विकसित किया गया है.
  • इसके साथ ही एक नये पुरस्कार ‘ ग्राम पंचायत विकास योजना ’ की इस वर्ष शुरूआत की गई है. यह देशभर में सर्वश्रेष्ठ योजना बनाने के लिए तीन ग्राम पंचायतों को प्रदान किया जाएगा.
पृष्‍ठभूमि

वित्‍त मंत्री ने 2016-17 के अपने बजट भाषण में सतत विकास लक्ष्‍यों पर कार्य करने के लिए पंचायती राज संस्‍थानों की शासन क्षमता विकि‍सत करने के लिए पुनर्गठित राष्‍ट्रीय ग्राम स्‍वराज अभियान (आरजीएसए) योजना की घोषणा की थी. मंत्रालय की वर्तमान योजना को राष्‍ट्रीय ग्राम स्‍वराज अभियान के रूप में नया रूप देने के लिए नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष की अध्‍यक्षता में एक समिति बनाई गई थी.

फ्रेंच नेशनल असेंबली ने विवादास्पद आव्रजन कानून पारित किया

फ्रांस नेशनल असेंबली द्वारा 22 अप्रैल 2018 को एक विवादास्पद आव्रजन कानून पारित किया जिसके चलते देश में राजनितिक उथल-पुथल शुरू हो गयी है.

विवादास्पद आव्रजन कानून पारित करने से राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों की पार्टी अभूतपूर्व तरीके से दो हिस्सों में बट गई. इस पर 61 घंटों तक बहस चली, जिसके बाद कल इसे पारित किया गया. इस कानून इसके पक्ष में 228 और खिलाफ 139 मत डले जबकि 24 अनुपस्थित रहें. मैक्रों की पार्टी रिपब्लिक ऑन द मूव  (एलआरईएम) पार्टी के भारी समर्थन के दम पर यह पारित हुआ.

राजनीतिक हलचल
हालांकि यह बिल मैक्रो की पार्टी को मिले भारी बहुमत के कारण प्राप्त हुआ लेकिन पार्टी के एक प्रमुख सदस्य जीन मिशेल क्लेमेंट ने बिल पारित होते ही बगावत की घोषणा कर दी तथा वोट न देते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी. फ्रांस के लेफ्ट विंग और राईट विंग के नेताओं ने भी इस कानून के विरोध में अपने मत दिए. यह बिल 20 अप्रैल को पारित होना था लेकिन इस पर चली लंबी बहस के कारण यह वीकेंड तक खिंच गया. इस बिल में 1,000 से भी अधिक संशोधन प्रस्तावित किये गये.

कानून के प्रस्ताव
इसका लक्ष्य आव्रजन पर बेहतर नियंत्रण आश्रय आवेदनों के प्रतीक्षा समय को छह माह करना और आर्थिक प्रवासियों के निर्वासन को आसान बनाना है. इसके शरणार्थियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जायेंगी ताकि वे फ्रांस में बेहतर जीवन जी सकें और निर्वासित जीवन जीने पर मजबूत न हों.

यूरोप में प्रवासी संकट
मध्य पूर्व और अफ़्रीका से रोज़ाना सैकड़ों की तादाद में पहुंच रहे प्रवासियों से यूरोपीय संघ के देश दवाब में हैं. अंतरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन के मुताबिक़, वर्ष 2015 में जनवरी से अगस्त के बीच 3,50,000 प्रवासियों की पहचान की गई. बीते साल 2,80,000 प्रवासियों की शिनाख़्त हुई थी.

 

मेघालय से 27 वर्ष बाद हटाया गया AFSPA, अरुणाचल में आंशिक रूप से जारी

मेघालय से सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून (AFSPA अथवा अफस्पा) को पूरी तरह हटा लिया गया, जबकि अरुणाचल प्रदेश में यह असम सीमा से लगे आठ थाना क्षेत्रों और पड़ोसी म्यांमार से लगे तीन जिलों में लागू रहेगा.

गृह मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार पिछले साल 2017 में मेघालय में उग्रवाद की सबसे कम घटनाएं हुई हैं. चार साल से हिंसा में लगातार गिरावट जारी है. ऐसा दो दशकों में पहली बार देखने को मिला है. वर्ष 2000 की तुलना में 2018 में 85 प्रतिशत कम हमले हुए जिसके कारण अफस्पा की आवश्यकता नहीं रह गई थी.

सितंबर 2017 तक मेघालय के 40 फीसदी क्षेत्र में अफस्पा लागू था जिसे धीरे-धीरे कम करते हुए इसे पूरी तरह हटा दिया गया है. अफस्पा अब अरुणाचल प्रदेश के केवल आठ पुलिस स्टेशनों में ही लागू है, जबकि 2017 में यह 16 थानों में प्रभावी था.

एक अन्य फैसले में गृह मंत्रालय ने पूर्वोत्तर में उग्रवादियों के लिए आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत मदद राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया है. यह नीति 1 अप्रैल 2018 से लागू होगी.

उत्तर पूर्व में हिंसक घटनाएं

वर्षहिंसक घटनाएंमारे गये लोगों की संख्या
20001963907
2014824212
201648448
201730837

अफस्पा (AFSPA) क्या है?

सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून 1958 (AFSPA), उत्तर भारत में वर्ष 1990 से लगातार जारी है. इसे असम में नवम्बर 1990 में हिंसक गतिविधियों के चलते लागू किया गया था जो अभी तक जारी है. अफस्पा दरअसल एक विशेषाधिकार कानून है जिसके तहत सुरक्षा बलों को उस क्षेत्र में शांति कायम करने के लिए विशेष तौर पर तैनात किया जाता है.

  • •    अफ्सपा कानून के तहत सेना के जवानों को किसी भी व्यक्ति की तलाशी केवल संदेह के आधार पर लेने का अधिकार प्राप्त है.
  • •    गिरफ्तारी के दौरान सेना के जवान उस व्यक्ति के घर में घुस कर संदेह के आधार पर तलाशी ले सकते हैं.
  • •    सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) के तहत सेना के जवानों को कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर फायरिंग का भी पूरा अधिकार प्राप्त है.
  • •     संविधान लागू किये जाने के बाद से ही भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ रहे अलगाववाद, हिंसा और विदेशी आक्रमणों से प्रतिरक्षा के लिए मणिपुर और असम में वर्ष 1958 में अफस्पा लागू किया गया था.
  • •    मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस क़ानून से प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है.
  • •    इस कानून का विरोध करने वालों में मणिपुर की कार्यकर्ता इरोम शर्मिला का नाम प्रमुख है, जो इस कानून के खिलाफ 16 वर्षों से उपवास पर थी.

अफस्पा कब लागू किया जाता है?

विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषा, क्षेत्रीय समूहों, जातियों, समुदायों के बीच मतभेद या विवादों के कारण राज्य या केंद्र सरकार एक क्षेत्र को “अशांत” घोषित कर सकती हैं. राज्य या केंद्र सरकार के पास किसी भी भारतीय क्षेत्र को “अशांत” घोषित करने का अधिकार है. अफस्पा अधिनियम की धारा (3) के तहत, राज्य सरकार की राय का होना जरुरी है कि क्या एक क्षेत्र अशांत है या नहीं. यदि ऐसा नहीं है तो राज्यपाल या केंद्र द्वारा इसे खारिज किया जा सकता है. (विशेष न्यायालय) अधिनियम 1976 के अनुसार, एक बार अशांत क्षेत्र घोषित होने के बाद कम से कम 3 महीने तक वहाँ पर स्पेशल फोर्स की तैनाती रहती है.

 

विदेश से पैसा भेजने में भारतीय अव्वल: विश्व बैंक रिपोर्ट

विश्व बैंक ने 23 अप्रैल 2018 को जारी रिपोर्ट में कहा कि वर्ष 2017 में विदेश में बसे भारतीयों ने अपने घर-परिवार के लोगों को 69 अरब डॉलर भेजे (remittance) जो इससे पिछले वर्ष की अपेक्षा 9.9 प्रतिशत अधिक है.

भारत में भेजी गई यह धनराशि पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है लेकिन वर्ष 2014 में प्राप्त हुए 70.4 अरब डॉलर की तुलना में कम है. उल्लेखनीय है कि रेमिटेंस अर्थात् विदेश से भेजा गया धन कमज़ोर अर्थव्यवस्था वाले देशों को मजबूती देता है.

विश्व बैंक रिपोर्ट के मुख्य तथ्य

  • •    भारत के बाद दूसरे स्थान पर चीन है जिसने 64 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस किया है.
  • •    इसके बाद क्रमशः फिलीपिंस 33 बिलियन, मेक्सिको 31 बिलियन के साथ क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहें है.
  • •    पाकिस्तान 20 बिलियन और बांग्लादेश 13 बिलियन के रेमिटेंस के साथ सामान्य रहे जबकि श्रीलंका में 0.09 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है.
  • •    छोटे और मध्य इनकम वाले देशों ने 466 बिलियन डॉलर का आंकड़ा छुआ जो कि पिछले साल 2016 के 429 बिलियन से 8.5 प्रतिशत ज्यादा है.
  • •    वैश्विक स्तर पर उच्च आय वाले देशों ने भी 7 प्रतिशत कि बढ़त हासिल की है.

विश्व बैंक रिपोर्ट के सुझाव

विश्व बैंक के अनुसार रेमिटेंस में उम्मीद से ज्यादा बढ़त के पीछे यूरोप, रूस और अमेरिका में तेजी से बढ़ी विकास दर है, यूरो, रूबल में आई मजबूती और बढ़ी हुई तेल की कीमतों के कारण रेमिटेंस में उछाल देखने को मिला है. रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा है कि 2018 में रेमिटेंस दर मध्य आय वाले देशों में 4.1 फीसदी से बढ़कर 485 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. विश्व स्तर पर यह 642 बिलियन डॉलर के साथ 4.6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है.

इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट में जज बनने वाली देश की पहली महिला वकील होंगी

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट में सीधे जज बनने वाली देश की पहली महिला वकील होंगी. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने लगभग तीन महीने पहले उनका नाम सुप्रीम कोर्ट जज के लिए भेजा था. केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश मान ली है.

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में जज:

इस समय सुप्रीम कोर्ट में 24 जज हैं जिनमें सिर्फ एक ही महिला जज जस्टिस आर भानुमति हैं. इंदु के पदभार संभालने के बाद से वो दूसरी महिला जज होंगी.

सुप्रीम कोर्ट में अब तक की महिला जज:

 

फातिमा बीबी:

सुप्रीम कोर्ट का गठन वर्ष 1950  में हुआ लेकिन वर्ष 1989 में अर्थात् 39 वर्ष बाद एम. फातिमा बीबी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश नियुक्त हुईं. फातिमा बीबी केरल हाईकोर्ट से सेवानिवृत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हुईं थी. वे 29 अप्रैल 1992  को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुईं. बाद में वे तमिलनाडु की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं.

 

सुजाता वी मनोहर:

सुप्रीम कोर्ट में दूसरी महिला न्यायाधीश सुजाता वी मनोहर रहीं. सुजाता वी मनोहर सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर 1994  से 27 अगस्त 1999  तक न्यायाधीश रहीं.

उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में हुई. तत्पश्चात एल्फिंस्टन कॉलेज, मुंबई से स्नातक करने के बाद लेडी मार्गरेट हॉल, ऑक्सफोर्ड, ब्रिटेन चली गईं जहां उन्होने दर्शन शास्त्र, राजनीति शस्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की.

 

रूमा पाल:

इसके बाद जस्टिस रूमा पाल सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीश बनीं. वे 28 जनवरी 2000 से लेकर 2 जून 2006 तक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रहीं.

रूमा पाल ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय से स्नातक, नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी तथा ऑक्सफोर्ड से बैचलर ऑफसिविल लॉ की उपाधि लेने के बाद, वर्ष 1948 में कोलकाता उच्च न्यायालय में वकालत आरंभ किया.

 

ज्ञान सुधा मिश्रा:

झारखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा 30 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुईं तथा 27 अप्रैल 2014 को सेवानिवृत हुईं.

वे झारखण्ड उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं. उनके पिता न्यायमूर्ति सतीश चन्द्र मिश्र पटना उच्च न्यायालय के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश थे.

 

रंजना प्रकाश देसाई:

इसी दौरान जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनीं. जस्टिस देसाई 13 सितंबर 2011  से लेकर 29 अक्टूबर 2014  तक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रहीं.

वे वर्ष 1970 में एल्फिंस्टन कॉलेज मुंबई से कला में स्नातक और वर्ष 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से कानून में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की. वे 30 जुलाई 1973 को कानूनी पेशे में शामिल हो गयी. उन्हें वर्ष 1979 में सरकारी अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया था.

 

आर भानुमति:

इसके बाद 13 अगस्त 2014 को जस्टिस आर भानुमति सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीश नियुक्त हुईं. उनकी सेवानिवृति 19 जुलाई 2020 को होगी.

जस्टिस आर भानुमति ने 16 नवंबर 2013 को झारखंड हाइकोर्ट की चीफ जस्टिस के रूप मे शपथ ली थी. चीफ जस्टिस आर भानुमति का जन्म 20 जुलाई 1955 को हुआ था. उन्होंने वर्ष 1981 में प्रैक्टिस शुरू की. आर भानुमति को 03 अप्रैल 2003 को मद्रास हाइकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था.

 

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इंदु मल्होत्रा:

  • •    इंदु मल्होत्रा का जन्म वर्ष 1956 में बेंगलुरु में हुआ था.
  • •    इनके पिता का नाम ओम प्राकाश मल्होत्रा है और वो भी सुप्रीम कोर्ट में वकील थे.
  • •    इंदु मल्होत्रा की शुरुआती पढ़ाई कॉर्मल कॉन्वेंट स्कूल से की है.
  • •    उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रैजुएशन और फिर मास्टर डिग्री हासिल की है. वे साल 1983 से ये प्रैक्टिस में हैं. वो कई अहम फैसलों में जजों की पीठ में रही हैं.
  • •    लॉ करने से पहले इंदु मल्होत्रा ने कुछ दिनों तक मिरांडा हाउस और विवेकानंद कॉलेज में अध्यापन का भी काम किया है.
  • •    इंदु मल्होत्रा ने पांच साल के अंदर ही सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने के लिए होने वाली परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया था.
  • •    26 नवंबर 1988 को इंदु मल्होत्रा को मुकेश गोस्वामी मेमोरियल अवॉर्ड से नवाजा भी जा चुका है.
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