आज के टॉप करेंट अफेयर्स

सामयिकी: 14 अप्रैल 2020

Current Affairs: 14 April 2020 हम यहां आपके लिए महत्वपूर्ण हालिया और नवीनतम करेंट अफेयर्स प्रदान करने के लिए हैं 14 अप्रैल 2020, हिंदू, इकनॉमिक टाइम्स, पीआईबी, टाइम्स ऑफ इंडिया, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस जैसे सभी अखबारों से नवीनतम करेंट अफेयर्स 2020 घटनाओं को यहा प्रदान कर रहे है। यहा सभी डाटा समाचार पत्रों से लिया गया हे।

हमारे करेंट अफेयर्स अप्रैल 2020 सभी इवेंट्स से आपको बैंकिंग, इंश्योरेंस, SSC, रेलवे, UPSC, क्लैट और सभी स्टेट गवर्नमेंट एग्जाम में ज्यादा मार्क्स हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, आप यहा निचे दिये print बटन पर क्लिक करके PDF प्राप्त कर सकते हे .

Current Affairs: 14 April 2020

1. केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) ने विश्व होम्योपैथी दिवस पर आयोजित किया अंतरराष्ट्रीय वेबिनार

आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) ने 10 अप्रैल, 2020 को होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनेमैन की 265वीं जयंती पर विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया।

एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हुई इस वेबिनार में हजारों लोगों ने भाग लिया, जिसे लाइव स्ट्रीम भी किया गया था। आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येसो नाइक ने अपने उद्घाटन भाषण के दौरान होम्योपैथिक चिकित्सकों के लिए टेलीमेडिसिन दिशानिर्देशों को स्वीकृति देने की घोषणा की और साथ ही आवश्यकता पड़ने पर कोविड कार्यबल के साथ मिलकर आयुष कार्यबल को गतिशील बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

विश्व होम्योपैथी दिवस

  1. आयुर्वेद, एलोपैथ और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों की तरह होम्योपैथी की भी अपनी विशेषताएं होती है। हर साल 10 अप्रैल को सैमुअल हैनीमैन की याद में विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। होम्योपैथी के जनक माने जाने वाले जर्मन मूल के ईसाई फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन का जन्म 10 अप्रैल को ही हुआ था।
  2. इस साल उनकी 265वीं जयंती है। भारत में भी हर साल आयुष मंत्रालय इसकी थीम निर्धारित करता है और देशभर में यह विशेष दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल की थीम, “सार्वजनिक स्वास्थ्य में होम्योपैथी का बढ़ता दायरा (Enhancing the scope of Homoeopathy in Public Health)” है।
  3. होम्योपैथी को वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में जाना जाता है। इसकी दवाओं का असर भले ही धीरे होता है, लेकिन यह रोगों को जड़ से दूर करता है। सबसे खास बात यह कि होम्योपैथी दवाओं के साइडइफेक्ट नहीं के बराबर होते हैं।
  4. प्रैक्टो पर प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी की रोकथाम करने और मैमोरी पॉवर बढ़ाने में अन्य दवाओं की अपेक्षा होम्योपैथी की दवाएं ज्यादा कारगर होती हैं।
  5. भारत वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े होमियोपैथिक दवा निर्माताओं में से एक है। भारत में, होम्योपैथी आयुर्वेद के समान लोकप्रिय है, यह आयुष मंत्रालय की देखरेख में आता है। इस साल, सरकार ने 10 और 11 अप्रैल को कोलकाता में विश्व होम्योपैथी दिवस मनाने का फैसला किया था हालांकि, COVID-19 महामारी के कारण सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है।

2. एनआईएफ ने पशुओं के लिए हर्बल डिवार्मर किया पेश

राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान-भारत (एनआईएफ) ने पशुओं में कृमि के उपचार के लिए रासायनिक विधि के विकल्प के रूप में एक स्वदेशी हर्बल दवा (डिवार्मर) पेश की है। इसका उत्पादन वाणिज्यिक रुप में किया गया है।

  • स्वदेशी हर्बल दवा (डिवार्मर) ‘वर्मीवेट’ के नाम से पेश की गई है। इस दवा के निर्माण के लिए एनआईएफ ने गुजरात के हर्षाभाई पटेल द्वारा भेजे गए एक उपचार विधि पर काम किया जिसके माध्यम से पशुओं में इंडोपारासाइट (कृमि) संक्रमण बीमारी का इलाज किया जाता था। एनआईएफ ने इस स्वदेशी उपचार को अद्भुत पाया।
  • इस स्वदेशी दवा-उपचार के लिए 2007 में पेटेंट का आवेदन किया गया और 29 नवंबर, 2016 को हर्षाभाई पटेल के नाम से पेटेंट दिया गया था। पेटेंट जमीनी स्तर का ज्ञान (ग्रासरूट पेटेंट) के लिए दिया गया है।

प्रष्ठभूमि

  • पशुओं में कृमि संक्रमण एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण दस्त होता है, वजन और खून की कमी होती है तथा प्रजनन स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इससे उत्पादकता और वृद्धि भी प्रभावित होती है।
  • रासायनिक दवाओं के अनुचित प्रयोग से प्रतिरोध पैदा होता है। नियमित जांच के दौरान कृमि की उपस्थिति और रसायन आधारित थेरेपी के द्वारा मृदा स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव के कारण वैकल्पिक स्थायी चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
  • ऐसे परिदृश्य में ज्ञानवान व्यक्तियों की पहचान की जानी चाहिए तथा उन्हें सम्मान और ईनाम दिए जाने चाहिए। ज्ञान आधारित ये अभ्यास पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य देखभाल के लिए पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को शामिल किया जाना चाहिए। इस प्रकार की मान्यता प्राप्त और सामाजिक स्तर पर वांछनीय तकनीकों का समावेश किया जाना चाहिए और समावेशी विकास के लिए वैज्ञानिक आधार पर इसे मान्यता दी जानी चाहिए जिससे समाज को लाभा प्राप्त हो। एनआईएफ ऐसे ही कार्य करता है।

3. बीआरओ ने सामरिक महत्व के श्रीनगर-लेह राजमार्ग को चार महीने बाद खोला

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने लद्दाख को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले सामरिक महत्व के श्रीनगर-लेह राजमार्ग को खोल दिया है। शुरुआत में ज़ोजिला दर्रे से करीब तेल के 18 टैंकरों और अन्य आवश्यक वस्तुओं को लेह/लद्दाख की ओर जाने की अनुमति दी गई है।

  1. ज़ोजिला दर्रे में ताजा बर्फबारी के पश्चात् भी राजमार्ग को खोलने का प्रबंध किया गया है। ज़ोजिला दर्रे पर भारी बर्फबारी के कारण पिछले साल दिसंबर में 425 किलोमीटर राजमार्ग को बंद कर दिया गया था।
  2. विदित है कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आवश्यक वस्तुओं के संचय की आकस्मिक आवश्यकता थी। इसे ध्यान में रखते हुए परियोजना बीकन और परियोजना विजयक की टीम ने 11,500 फीट की ऊंचाई पर ज़ोजिला के आसपास ताजा बर्फ को राजमार्ग से हटाकर सड़क को यातायात के योग्य बना दिया है।
  3. इस साल की बर्फबारी ने पिछले छह दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बीआरओ के प्रोजेक्ट बीकन द्वारा गगनगीर से जीरो प्वाइंट तक बर्फ को हटाने का काम किया गया और यही काम प्रोजेक्ट विजयक  ने दूसरी ओर द्रास की तरफ से किया है।

ज़ोजिला दर्रा

  1. ज़ोजिला या ज़ोजि दर्रा हिमालय का एक प्रमुख दर्रा हैं। ‘ला’ और ‘दर्रा’ शब्दों का अर्थ एक ही है। ज़ोजिला एक उच्च पर्वतीय दर्रा है जो भारतीय लद्दाख क्षेत्र के हिमालय में स्थित है।  यह दर्रा कश्मीर घाटी को अपने पश्चिम में द्रास और सुरू घाटियों से जोड़ता है।
  2. हिमालय पर्वत श्रृंखला के पश्चिमी भाग में राष्ट्रीय राजमार्ग 1 श्रीनगर और लेह के बीच इस दर्रे को पार करता है। चूंकि हर साल सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के कारण वाहन का आवागमन रुक जाता है, इसलिए सारे साल आवागमन बनाये रखने के लिए सभी मौसमी ज़ोजी-ला टनल का निर्माण किया जा रहा है।
  3. वर्ष भर सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए मई, 2018 में 14.2 किमी. लम्बी जोजिला सुरंग का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया है। यह द्वि-दिशीय (Bidirectional) सुरंग होगी।
  4. वर्तमान में दर्रे को पार करने में 3 घंटे से अधिक समय लगता है लेकिन सुरंग बनने के बाद इसे केवल 15 मिनट में पार किया जा सकेगा। यह सुरंग सेना और लद्दाखी लोगों की रणनीतिक आवश्यकता थी क्योंकि यह दर्रा LOC के करीब है और आतंकवादियों द्वारा शत्रुतापूर्ण कार्यों के लिए संवेदनशील है।
  5. सन 1948 में पाकिस्तान ने इस दर्रे पर क़ब्ज़ा कर लिया था, परन्तु भारतीय सेना ने आश्चर्यजनक रूप से इतनी ऊंचाई पर टैंको का इस्तेमाल करते हुए ऑपरेशन ‘बाइसन’ के तहत इस पर पुनः कब्ज़ा किया था।

सीमा सड़क संगठन (BRO – Border Roads Organization)

  1. बीआरओ एक ऐसा संगठन है जो पूरे देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण और रखरखाव करता है और सशस्त्र बलों की सामरिक जरूरतों के लिए काम करता है । इसका गठन 7 मई 1960 को हुआ था।
  2. इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है और यह रक्षा मंत्रालय के अधीन है।

4. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने नई दिल्ली में वेब पोर्टल ‘युक्ति’ किया लांच

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ ने नई दिल्ली में वेब पोर्टल युक्ति (ज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवोन्मेषण के साथ कोविड से लड़ता युवा भारत/ यूथ इंडिया कम्बेटिंग कोविड विद नॉलेज टेक्नालॉजी एंड इनोवेशन) लांच किया है।

  • यह मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा की गई कोशिशों एवं पहलों की निगरानी एवं रिकार्ड करने के लिए एक अनूठा पोर्टल और डैशबोर्ड है। इस पोर्टल का उद्देश्य बेहद समग्र एवं व्यापक तरीके से कोविड -19 की विभिन्न चुनौतियों के विभिन्न आयामों को कवर करना है।
  • यह विशेष रूप से कोविड से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान में संस्थानों की विभिन्न पहलों एवं प्रयासों, संस्थानों द्वारा सामाजिक पहलों और छात्रों के समग्र कल्याण में बेहतरी के लिए उठाये जाने वाले कदमों को कवर करेगा। यह पोर्टल व्यापक रूप से शैक्षणिक समुदाय को सेवाओं की प्रभावी प्रदायगी के लिए गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों ही मानदंडों को कवर करेगा।
  • यह पोर्टल विभिन्न संस्थानों को कोविड-19 की अभूतपूर्व स्थिति के कारण उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों एवं भविष्य की अन्य पहलों के लिए उनकी कार्यनीतियों को साझा करने की भी अनुमति देगा।
  • यह पोर्टल मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं संस्थानों के बीच एक दुतरफा संचार चैनल की भी स्थापना करेगा जिससे कि मंत्रालय संस्थानों को आवश्यक सहायता प्रणाली उपलब्ध करा सके। यह पोर्टल इस चुनौतीपूर्ण समय में छात्र संवर्धन नीतियों, प्लेसमेंट से संबंधित चुनौतियों एवं छात्रों के शारीरिक एवं मानसिक कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों में सहायता करेगा।
  • विदित है कि कोविड -19 के खतरे के बाद, सरकार का उद्देश्य शैक्षणिक समुदाय को शारीरिक एवं मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ रखना भी है ताकि शिक्षार्थियों के लिए एक सतत उच्च गुणवत्तापूर्ण अध्ययन वातावरण को बनाया जा सके।

5. खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने दोहरी परत वाले खादी मास्क किए विकसित

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने सफलतापूर्वक एक दोहरी परत वाले खादी मास्क का विकास कर लिया है और उसे बड़ी मात्रा में इन मास्क की आपूर्ति करने के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। कॉटन के दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकने वाले ये मास्क 7 इंच लंबे और 9 इंच चौड़े होंगे, इनमें तीन सलवटें होंगी और बांधने के लिए कोनों में चार पट्टियां होंगी। एक मीटर खादी के कपड़े में 10 डबल लेयर वाले मास्क बनाए जाएंगे।

  1. केवीआईसी इन मास्क के निर्माण के लिए दो परत वाले खादी कपड़े का खास तौर पर उपयोग कर रहा है क्योंकि ये अंदर की नमी को 70 फीसदी बनाए रखने में मदद करता है, और हवा को गुजरने के लिए एक आसान मार्ग प्रदान करता है, जिस कारण से ये सबसे अच्छा, आसानी से उपलब्ध, जेब में आ सकने वाला वैकल्पिक फेस मास्क है।
  2. ये मास्क ज्यादा विशेष इसलिए हैं क्योंकि ये हाथ से बुने हुए खादी के कपड़े से बने हैं जो कि सांस लेने योग्य होते हैं, आसानी से उपयोग किए जा सकते हैं और धोने योग्य व बायोडिग्रेडेबल होते हैं।
  3. वर्तमान में जम्मू के पास नगरोटा में खादी सिलाई केंद्र को एक मास्क सिलाई केंद्र में बदल दिया गया है, जो प्रति दिन 10,000 मास्क का उत्पादन कर रहा है, वहीं शेष ऑर्डर श्रीनगर में या आसपास के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों और खादी संस्थानों में बांटे जा रहे हैं।
  4. कोरोना महामारी से लड़ने के लिए फेस मास्क सबसे महत्वपूर्ण उपकरण हैं। डीटी फैब्रिक से तैयार ये मास्क भारत का एकमात्र ऐसा समाधान है जो चिकित्सा दिशानिर्देशों का सटीक मिलान करते हुए गुणवत्ता और मांग के पैमाने को पूरा कर सकता है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग कैसे कर रहा है मदद?

  1. देश भर में स्थानीय प्रशासन का समर्थन करने के लिए केवीआईसी अध्यक्ष द्वारा सभी खादी संस्थानों को अपील जारी की गई है कि वे कम से कम 500 मास्क अपने संबंधित जिलों के जिला कलेक्टरों को उपयोग और आगे वितरण के लिए मुफ्त में दें।
  2. केवीआईसी में 2400 सक्रिय खादी संस्थान हैं और इस कदम से देश भर में 12 लाख मास्क प्रदान किए जाएंगे। अपील के बाद कई खादी संस्थानों ने जिला कलेक्टरों को 500 मास्क प्रदान करने शुरू कर दिए हैं।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग

  1. खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) संसद के ‘खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम 1956’ के तहत भारत सरकार द्वारा निर्मित एक वैधानिक निकाय है। यह भारत में खादी और ग्रामोद्योग से संबंधित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार) के अंतर्गत आने वाली एक शीर्ष संस्था है।
  2. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में खादी एवं ग्रामोद्योगों की स्थापना करना और विकास करने के लिए योजना बनाना, प्रचार करना, सुविधाएं और सहायता प्रदान करना है जिसमें यह आवश्यकतानुसार ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्यरत अन्य एजेंसियों की सहायता भी ले सकता है।
  3. अप्रैल 1957 में इसने पूर्व के अखिल भारतीय खादी एवं ग्रामीण उद्योग बोर्ड का पूरा कार्यभार इसने संभाल लिया है।
  4. इसका मुख्यालय मुंबई में है, जबकि अन्य संभागीय कार्यालय दिल्ली, भोपाल, बेंगलुरु, कोलकाता, मुंबई और गुवाहाटी में स्थित हैं। संभागीय कार्यालयों के अलावा, इसके स्वयं के विभिन्न कार्यक्रमों का कार्यान्वयन करने के लिए 29 राज्यों में भी इसके कार्यालय हैं।
  5. वर्तमान में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष वी. के. सक्सेना हैं।

6. चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 1.5-2.8 प्रतिशत रहेगी: विश्वबैंक

विश्वबैंक ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को जबर्दस्त झटका दिया है। इससे देश की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन 1991 के उदारीकरण के बाद सबसे खराब रहेगा।

  1. विश्वबैंक ने ‘दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था’ पर केंद्रित रिपोर्ट में कहा कि 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर 1.5 से 2.8 प्रतिशत के बीच रहेगी। रिपोर्ट में कहा है कि 2019-20 में भारतीय अथव्यवस्था की वृद्धि दर 4.8 से 5 प्रतिशत के बीच रहेगी।
  2. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 का झटका ऐसे समय लगा है जबकि वित्तीय क्षेत्र पर दबाव की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में पहले से सुस्ती है। इस महामारी पर अंकुश के लिए सरकार ने देशव्यापी पाबंदी लागू की है। इससे लोगों की आवाजाही रुक गई है और वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी वजह से वजह से घरेलू आपूर्ति और मांग प्रभावित होने के चलते 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 1.5 से 2.8 प्रतिशत रह जाएगी। वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने के चलते घरेलू निवेश में सुधार में भी देरी होगी।
  3. रिपोर्ट कहती है कि अगले वित्त वर्ष यानी 2021-22 में कोविड-19 का प्रभाव समाप्त होने के बाद अर्थव्यवस्था पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर सकेगी। हालांकि, इसके लिए अर्थव्यवस्था को वित्तीय और मौद्रिक नीति के समर्थन की जरूरत होगी।
  4. विश्व बैंक ने भी अन्य वैश्विक एजेंसियों के साथ सुर में सुर मिलाते हुए कोविड-19 के मद्देनजर वृद्धि दर का अनुमान घटाया है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर चार प्रतिशत किया है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया है।
  5. फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर दो प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 5.5 से 3.6 प्रतिशत कर दिया है। मूडीज इन्वेस्टर सर्विसेज ने 2020 के कैलंडर वर्ष में भारत की वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। पहले उसने इसके 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

विश्व बैंक

  • विश्व बैंक विशिष्ट संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों को पुनर्निमाण और विकास के कार्यों में आर्थिक सहायता देना है। विश्व बैंक समूह पांच अन्तरराष्ट्रीय संगठनों का एक ऐसा समूह है जो सदस्य देशों को वित्त और वित्तीय सलाह देता है। इसका मुख्यालय वॉशिंगटन, डी॰ सी॰ में स्थित है।

विश्व बैंक के समूह निम्नलिखित पाँच अंतर्राष्ट्रीय संगठन हैं –

  • i)   पुनर्निर्माण और विकास के लिये अंतर्राष्ट्रीय बैंक (International Bank for Reconstruction and Development-IBRD)
  • ii)  अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (International Finance Corporation-IFC)
  • iii) अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (International Development Association-IDA)
  • iv) निवेश विवादों के निपटारे के लिये अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (International Centre for Settlement of Investment Disputes-ICSID)
  • v)  बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (Multilateral Investment Guarantee Agency-MIGA)
  • वर्तमान में विश्व बैंक के अध्यक्ष अमेरिका के डेविड आर. मल्पास है जिन्होंने क्रिस्ट्लीना जीओर्जीवा का स्थान लिया है।

7. बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मुजीबुर रहमान के दोषी अब्दुल माजिद को फांसी

बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मुजीबुर रहमान की हत्या के दोषी अब्दुल माजिद को ढाका की सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई है। राष्ट्रपति अब्दुल हमीद द्वारा 08 अप्रैल को दया याचिका ठुकराए जाने के बाद माजिद की मौत की सजा को चार दिनों के भीतर ही अंजाम दे दिया गया है।

  • लगभग 25 साल तक भारत में छिपे रहने के बाद उसे हाल ही में ढाका से गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसे फांसी देने का रास्ता साफ हो गया था।
  • माजिद ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उसने बंगबंधु रहमान की हत्या की है। माजिद, रहमान की हत्या में शामिल रहे उन दर्जनों लोगों में से एक है जिनकी फांसी की सजा को 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। 1998 में निचली अदालत ने कुछ सैन्य अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाई थी जो कि रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या में शामिल रहे थे।
  • बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और उनके अधिकतर परिजनों की 15 अगस्त 1975 को की गई हत्या का दोषी पाए जाने पर 12 पूर्व सैन्य अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई थी। दोषियों में से पांच को 2010 में फांसी दे दी गई थी जबकि एक की प्राकृतिक कारणों से मौत हो गई थी।

बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान

  • शेख़ मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के संस्थापक नेता, महान अगुआ एवं प्रथम राष्ट्रपति थे। उन्हें सामान्यत: बंगलादेश का जनक कहा जाता है। वे अवामी लीग के अध्यक्ष थे उन्होंने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सशस्त्र संग्राम की अगुवाई करते हुए बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई थी।
  • वे बांग्लादेश के प्रथम राष्ट्रपति बने और बाद में प्रधानमंत्री भी बने थे वे ‘शेख़ मुजीब’ के नाम से भी प्रसिद्ध थे इन्हें ‘बंगबन्धु’ की पदवी से सम्मानित किया गया था। 15 अगस्त 1975 की सुबह बांग्लादेश की सेना के कुछ बाग़ी युवा अफ़सरों के हथियारबंद दस्ते ने ढाका स्थित राष्ट्रपति आवास पर पहुंच कर राष्ट्रपति शेख़ मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी थी।
  • अप्रत्याशित हमले में मुजीब परिवार का कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा था। उनकी दो बेटियाँ संयोगवश बच गईं, जो घटना के समय जर्मनी में थीं। उनमें एक शेख हसीना और दूसरी शेख़ रेहाना थीं।
  • अपने पिता की हत्या के बाद शेख़ हसीना हिन्दुस्तान रहने लगी थीं। वहीं से उन्होंने बांग्लादेश के नए शासकों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया था। 1981 में वह बांग्लादेश लौटीं और सर्वसम्मति से अवामी लीग की अध्यक्ष चुन ली गईं। शेख़ हसीना ही वर्तमान में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं।

8. वाराणसी के संकट मोचन मंदिर का 97वां प्रसिद्ध संगीत समारोह

उत्तर प्रदेश में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में हर साल होने वाला प्रसिद्ध संगीत समारोह, इस बार कोविड-19 लॉकडाउन के कारण डिजिटल रूप मे शुरू हो गया है। छह दिनों तक चलने वाले वार्षिक संगीत समारोह में इस बार डिजिटल तरीके से कलाकार अपनी प्रस्तुति देगें।

  • समारोह में श्रोता सिर्फ और सिर्फ हुनमान जी ही होंगे। देश के नामचीन कलाकार देश या विदेश में जहां भी होंगे, वहीं से फेसबुक लाइव के जरिए प्रस्तुति देंगे। मंदिर में बड़ी स्क्रीन लगाकर हनुमान जी को इसका श्रवण कराया जाएगा।
  • डिजिटल संगीत समारोह के लिए अब तक तीन दर्जन से ज्यादा कलाकारों ने अपनी स्वीकृति दी है। इनमें पंडित जसराज, पंडित राजन-साजन मिश्र, पंडित अजय पोहनकर, अजय चक्रवर्ती, उस्ताद राशिद खां, पंडित राममोहन और कृष्णमोहन महराज जैसे नामचीन कलाकार शामिल हैं।

प्रष्ठभूमि

  • प्रत्येक वर्ष अप्रैल के महीने में (हनुमान जयंती के अवसर पर), यह मंदिर “संकट मोचन संगीत समरोह” नामक एक शास्त्रीय संगीत और शास्त्रीय नृत्य समारोह का आयोजन करता है, जिसमें भारत के संगीतकार और कलाकार हिस्सा लेते हैं। इस प्रकार का पहला समारोह लगभग 88 साल पहले आयोजित किया गया था।
  • आरंभ के कई वर्षों तक संकट मोचन संगीत समारोह सिर्फ तीन दिन का होता था। कालांतर में आयोजन के दिवसों की संख्या में विस्तार हुआ। पहले चरण में संगीत समारोह तीन से बढ़ा कर चार दिन का किया गया लेकिन कलाकारों की बढ़ती संख्या और संगीत रसिकों के विस्तारित होते लगाव को देखते हुए इसे छह दिन का कर दिया गया है। समारोह में शामिल होने के लिए देश-विदेश से संगीत रसिक यहां पहुंचते हैं।

9. प्रधानमंत्री ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को 13 अप्रैल को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी बहादुरी वर्षों तक भारतीयों को प्रेरित करती रहेगी।
  • प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘मैं आज के दिन जलियांवाला बाग में बेरहमी से मार दिए गए शहीदों को नमन करता हूं। हम उनकी वीरता एवं बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे।’’

जलियांवाला बाग हत्याकांड

  • यह भारत के आधुनिक इतिहास की अत्यंत दुखद घटना है जिसमें निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाई गई थी। जलियांवाला बाग में लोग राष्ट्रीय क्रांतिकारी नेता सत्यपाल सिंह एवं सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में इकट्ठा हुए थे।
  • रेगीनाल्ड डायर ने विरोध में इकट्ठा हुए लोगों को सरकार विरोधी माना तथा सभास्थल पर पहुँचकर निहत्थे लोगों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। बैशाखी त्योहार होने के कारण इस बाग में आमजन की भीड़ ज्यादा थी।
  • डायर ने अपनी रिपोर्ट में 200-300 लागों के मारे जाने की बात कही थी जबकि हण्टर आयोग ने यह आँकड़ा 379 बताया जिसमें लगभग 1500 लोग घायल हुए थे। यह घटना 13 अप्रैल, 1919 को हुई थी इस घटना के बदले स्वरुप क्रांतिकारी ऊधम सिंह ने लंदन में माइकल ओ डायर की हत्या की थी।
  • इस घटना के करीब 21 साल बाद (13 मार्च, 1940) क्रांतिकारी उधम सिंह ने जनरल ओ डायर की हत्या कर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लिया था। उधम सिंह को 31 जुलाई, 1940 को ब्रिटेन सरकार ने लंदन में फांसी दे दी थी। माइकल ओ डायर जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब का उपराज्यपाल था तथा इसी ने रेगीनाल्ड डायर को गोलियां चलाने की स्वीकृति दी थी।
  • इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी थी।
  • इस नरसंहार के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गई ‘नाइटहुड’ की उपाधि त्याग दी थी। इस हत्याकांड की जाँच के लिये कॉन्ग्रेस ने मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की थी।
  • 1997 में ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। 2013 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि “ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी” लेकिन इस घटना पर ब्रिटेन ने अभी तक माफ़ी नहीं मांगी है।

10. मशहूर शास्त्रीय संगीत गायिका शांति हीरानंद का निधन

  • मशहूर शास्त्रीय संगीत गायिका और पद्मश्री से सम्मानित शांति हीरानंद चावला का गुरुग्राम स्थित एक अस्पताल में निधन हो गया है। वह 87 साल की थीं। शांति हीरानंद लंबे समय से बीमार चल रही थीं।
  • गौरतलब है कि शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में शांति हीरानंद काफी मशहूर थीं। उन्होंने ठुमरी, दादरा और गजल में बेगम अख्तर से संगीत की शिक्षा हासिल की थी। शांति हीरानंद ने संगीत के गजल प्रारूप में भी काफी नाम कमाया था।
  • उन्होंने इस्लामाबाद, लाहौर,बोस्टन, न्यूयॉर्क, टोरंटो,और वाशिंगटन सहित दुनियाभर में कई जगह पर अपनी प्रस्तुति से दर्शकों के दिलों को जीता था।
  • शांति हीरानंद का जन्म लखनऊ में 1932 में हुआ था. कम उम्र में ही उन्हें संगीत से लगाव हो गया था। शांति हीरानंद के पिता एक बिजनेसमैन थे जो 1940 के दशक में लाहौर चले गए थे। सिंधी पैरेंट्स ने घर के पास स्थित म्यूजिक स्कूल में संगीत सीखने के लिए उन्हें प्रेरित किया था। लाहौर में शांति हीरानंद अपने टीचर से संगीत सीख रही थीं। टीचर ने ही शांति हीरानंद को एआईआर लखनऊ में गाने में मदद की थी। शांति हीरानंद एआईआर लखनऊ में ‘हफ्ते का गीत’ गाने के लिए जाया करती थीं।
DSGuruJi - PDF Books Notes
Don`t copy text!