Current Affairs Hindi

संसद ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019, पारित हो चुका है

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 क्या है?

  1. नागरिकता (संशोधन) विधेयक -2019 बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता प्रदान करेगा। ये छह समुदाय हैं – हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख।
  2. वर्तमान में, किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए कम से कम 11 साल तक यहां रहना अनिवार्य है।
  3. बिल इस अवधि को घटाकर छह साल कर देगा। यह इन समुदायों के लोगों को छह वर्षों में भारतीय नागरिकता प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा।
  4. यह नागरिकता के लिए कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए नागरिकता अधिनियम 1955 में कुछ संशोधन करेगा।

अवैध प्रवासी कौन हैं?

नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती है। वे लोग, जिन्होंने पासपोर्ट और वीजा जैसे वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया है या वैध दस्तावेजों के साथ भारत आए हैं, लेकिन इसमें उल्लिखित अवधि से अधिक समय तक यहां रहते हैं, को इस कानून के तहत अवैध प्रवासी माना जाता है।

अवैध प्रवासियों के लिए क्या प्रावधान हैं?

नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, अवैध प्रवासियों को या तो जेल में रखा जा सकता है या विदेश अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत उनके देश वापस भेज दिया जा सकता है। लेकिन 2015 और 2016 में, केंद्र सरकार ने 1920 और 1946 के कानूनों में कुछ संशोधन किए गए। इसने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारत में रहने की छूट दी। इसका मतलब है कि अगर इन समुदायों से संबंधित लोग वैध दस्तावेजों के बिना भारत में रहते हैं, तो उन्हें न तो कैद किया जा सकता है और न ही निर्वासित किया जा सकता है। यह छूट उन धार्मिक समूहों को दी गई है जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत पहुंच चुके हैं।

READ  प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीण व मनरेगा में राजस्थान को मिले 11 पुरस्कार

पृष्ठभूमि

बिल पहली बार 19 जुलाई 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसे 12 अगस्त 2016 को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था। समिति ने 7 जनवरी 2019 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। बिल को अगले दिन लोकसभा में पारित किया गया था। 8 जनवरी, 2019, लेकिन उस समय राज्यसभा में बिल पेश नहीं किया गया था। संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, यदि किसी विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिल जाती है, लेकिन राज्यसभा में पारित नहीं हो पाता है, तो इसे दोनों सदनों में फिर से पेश किया जाएगा।

DSGuruJi - PDF Books Notes

Leave a Comment