मेवाड़ी बोली {Mewari Dialect} राजस्थान GK अध्ययन नोट्स

  • यह बोली दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों में मुख्य रुप से बोली जाती है।
  • यह मारवाड़ी के बाद राजस्थान की महत्वपूर्ण बोली के विकसित और शिष्ट रूप के दर्शन हमें 12 वीं एवं 13 वीं शताब्दी में ही मिलने लगते है।
  • मेवाड़ी का शुद्ध रूप मेवाड़ के गांवों में ही देखने को मिलता है।
  • मेवाड़ी में लोक साहित्य का विपुल भण्डार है। महाराणा कुंभा द्वारा रचित कुछ नाटक इसी भाषा में है।
  • इस बोली में मारवाड़ी के अनेक शब्दों का प्रयोग होता है। केवल ए और औ की ध्वनि के शब्द अधिक प्रयुक्त होते हैं।

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