जाम्भोजी राजस्थान {Jambhoji GK} राजस्थान GK अध्ययन नोट्स

  • जन्म : वि. संवत् 1508 भाद्रपद बदी 8 कृष्ण जन्माष्टमी को अर्द्धरात्रि कृतिका नक्षत्र में (सन् 1451)
  • जन्म स्थान: पींपासर जिला नागौर (राज.), यह सुरापुर, जांगला में स्थित है।
  • पिताजी : ठाकुर श्री लोहटजी पंवार
  • काकाजी : श्री पुल्होजी पंवार (इनको प्रथम बिश्नोई बनाया था।)
  • सात वर्ष तक मौन एवं सत्ताईस वर्ष गायें चराने के बाद, 34 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर समराथल धोरे पर गमन एवं सन्यास धारण।
  • विश्नोई समाज में उनतीस नियमों का पालन करना आवश्यक है। इस सम्बन्ध में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है, जो इस प्रकार है- उन्नतीस धर्म की आखडी हिरदे धरियो जोय, जम्भोजी कृपा करी नाम विश्नोई होय।
  • जाम्भोजी महाराज का भ्रमण व्यापक था। 51 वर्ष तक देश-विदेशों में भ्रमण किया। राजा-महाराजा, अमीर -गरीब, साधु-गृहस्थों को विभिन्न चमत्कार दिखाए। उपदेश दिए एवं वि.सं. 1593 मिंगसर बदी नवमी चिलतनवमी के दिन लालासर की साथरी पर निर्वाण को प्राप्त हुए।
  • जाम्भोजी की शिक्षाओं पर अन्य धर्मों का प्रभाव स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर होता है। उनकी शिक्षाओं पर वैष्णव सम्प्रदाय तथा नानकपंथ का भी बड़ा प्रभाव है। इस सम्प्रदाय में गुरु दीक्षा एवं डोली पाहल आदि संस्कार साधुओं द्वारा सम्पादित करवाये जाते हैं, जिनमें कुछ महन्त भी भाग लेते हैं।

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