राजस्थान के जिले राजस्थान GK नोट्स

जयपुर जिला {Jaipur District} राजस्थान GK अध्ययन नोट्स

1. महत्वपूर्ण तथ्य

  • जयपुर जिले का कुल क्षेत्रफल = 14,068 किमी²
  • जयपुर जिले की जनसंख्या (2011) = 66,63,971
  • जयपुर जिले का संभागीय मुख्यालय = जयपुर
  • जयपुर, जिसे गुलाबी नगर के नाम से भी जाना जाता है, भारत में राजस्थान राज्य की राजधानी है।
  • आमेर के तौर पर यह जयपुर नाम से प्रसिद्ध प्राचीन रजवाड़े की भी राजधानी रहा है।
  • जयपुर अपनी समृद्ध भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
  • 1876 में तत्कालीन महाराज सवाई रामसिंह ने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से आच्छादित करवा दिया था। तभी से शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा है।

2. भौगोलिक स्थिति

  • भौगोलिक स्थिति: उत्तर- 26.92°, पूर्व- 75.82°
  • जयपुर सूखी झील के मैदान में बसा है जिसके तीन ओर की पहाड़ियों की चोटी पर पुराने क़िले हैं।
  • यह बड़ा सुनियोजित नगर है। बाज़ार सब सीधी सड़कों के दोनों ओर हैं और इनके भवनों का निर्माण भी एक ही आकार-प्रकार का है। 3. इतिहास
  • जयपुर राजस्थान का एक नगर तथा पुरानी रियासत था। जयपुर शहर भूतपूर्व जयपुर रियासत की राजधानी था।
  • जयपुर शहर की स्थापना 1728 में आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने की थी।
  • 18वीं शाताब्दी में मुग़लों के पतन के साथ ही जयपुर और जोधपुर की रियासतों में बार-बार लड़ाईयाँ होती रहीं। सन् 1818 ई. में एक संधि हुई, जिसने ब्रिटिश वर्चस्व की स्थापना की और रियासत में ब्रिटिश सेना पुनर्व्यवस्था ले आई।
  • स्वाधीनता के उपरान्त जयपुर रियासत भारत में विलीन हो गयी। पुराना जयपुर थोड़े उठे हुए मैदान पर स्थित है और पाँच द्वारों के साथ-साथ सात किलोमीटर लंबी पंक्तिबद्ध दीवार से घिरा हुआ है।
  • जयपुर को आधुनिक शहरी योजनाकारों द्वारा सबसे नियोजित और व्यवस्थित शहरों में से गिना जाता है। देश के सबसे प्रतिभाशाली वास्तुकारों में इस शहर के वास्तुकार विद्याधर चक्रवर्ती का नाम सम्मान से लिया जाता है।

4. कला एवं संस्कृति

  • यह राजस्थानी परंपरा एवं संस्कृति की छाप छोड़ने वाले एक संभाग है ।
  • राजस्थानी चित्रकला की एक प्रभावी शैली का जन्म जयपुर से हुआ जो राजस्थान का दूसरा बड़ा राज्य था।
  • हिंदु एंव जैन धर्म को मानने वाले लोग की संख्या सबसे अधिक है। सिख और इस्लाम धर्म को मानने वाले भी अच्छी संख्या में है। यहां ईसाई एवं पारसी धर्म के अनुयायी बहुत कम हैं।

5. शिक्षा

  • जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय स्थित है जो एक प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान है ।
  • इसके अलावा कई वोकेशनल कोर्सेज और डिग्री कॉलेज भी यहां है।
  • जयपुर में तकनिकी शिक्षा के लिए एक मालवीय NIT, 60 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थान, डिप्लोमा कॉलेज एवं अन्य निजी संस्थान है
  • महाराजा एवं महारानी कॉलेज यहाँ के प्रसिद्द संस्थान है ।
  • सवाई मानसिंह एक प्रमुख मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल है ।

6. खनिज एवं कृषि

  • क्वार्ट्ज एवं फेल्डस्पार (सिरैमिक मिनरल्स) के भंडार जयपुर, सिकर, झुनझुनू, उदयपुर, पाली एवं सिरोही में भी बड़े पैमाने पर मौजूद हैं।
  • जयपुर के निकट राजावास गांव में एल. पी. जी. के लिए विश्व की सबसे लंबी पाइप लाइन लगाई जा रही है।
  • लौह अयस्क के बड़े भंडार जयपुर जिले के मोरीजा बानोल, चैमु, रामपुरा में हैं
  • कालाडेरा(जयपुर), में ग्रेनाइट का उत्पादन होता है
  • राजस्थान में जेम स्टोन औद्योगिक पार्क जयपुर में स्थित है
  • राजस्थान में सर्वाधिक औद्योगिक इकाईयां जयपुर जिले में स्थापित हैं

7. प्रमुख स्थल

  • जयपुर शहर में बहुत से पर्यटन आकर्षण हैं, जैसे जंतर मंतर, जयपुर, हवा महल, सिटी पैलेस, गोविंद देवजी का मंदिर, बी एम बिड़ला तारामण्डल, आमेर का किला, जयगढ़ दुर्ग आदि।
  • जयपुर के रौनक भरे बाजारों में दुकानें रंग बिरंगे सामानों से भरी हैं, जिनमें हथकरघा उत्पाद, बहुमूल्य पत्थर, हस्तकला से युक्त वनस्पति रंगों से बने वस्त्र, मीनाकारी आभूषण, पीतल का सजावटी सामान, राजस्थानी चित्रकला के नमूने, नागरा-मोजरी जूतियाँ, ब्लू पॉटरी, हाथीदांत के हस्तशिल्प और सफ़ेद संगमरमर की मूर्तियां आदि शामिल हैं।
  • प्रसिद्ध बाजारों में जौहरी बाजार, बापू बाजार, नेहरू बाजार, चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया बाजार और एम.आई. रोड़ के साथ लगे बाजार हैं।

8. नदी एवं झीलें

  • जयपुर में जलमहल, गलता, रामगढ़ बांध, चंदलाई, सांभर, छापरवाड़ा प्रमुख बांध एवं झीलें हैं
  • जयपुर में बाणगंगा, बांडी, मोरल, मासी प्रमुख नदियां हैं

9. परिवहन और यातायात

  • जयपुर शहर, अजमेर , दिल्ली, और अन्य शहरों से रेलमार्ग और सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
  • जयपुर में एक अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा है।

10. उद्योग और व्यापार

  • जयपुर वाणिज्यिक व्यापार केन्द्र है। यहाँ के उद्योगों में इंजीनियरिंग और धातुकर्म, हथकरघा बुनाई, आसवन व शीशा, होज़री, क़ालीन, कम्बल, जूतों और दवाइयों का निर्माण प्रमुख है।
  • जयपुर के विख्यात कला व हस्तशिल्प में आभूषणों की मीनाकारी, धातुकर्म व छापे वाले वस्त्र के साथ-साथ पत्थर, संगमरमर व हाथीदांत पर नक़्क़ाशी शामिल है।
  • बड़े पैमाने पर उद्योग धन्धों में यहाँ जयपुर मेटल एण्ड इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, नेशनल बाल बीयकिंरग फैक्ट्री, जयपुर स्पीनिंग एन्ड विविंग मिल्स, मान इन्डस्ट्रियल कारपोरेशन आदि हैं।
  • यहाँ के छोटे पैमाने के उद्योगों में मुख्य हैं – जवाहारात, मीनाकारी तथा जवाहारातों की जड़ाई, खादी व ग्राम उद्योग, हाथ का बना काग़ज़, खिलौने, हाथी दांत, सांगानेरी छपाई, बंधेज व रंगाई का काम, लाख का काम, जूते बनाई, गोटा किनारी का काम। यहां के पीतल के नक़्क़ाशी करने वालों तथा मूर्ति कारों की कला सम्पूर्ण भारत में विख्यात है।
  • जयपुर जवाहारातों का प्रमुख केन्द्र है। यहाँ रत्नों की कटाई, व बनाई बड़ी कुशलता से की जाती है। विशेषकर पन्ने की खरड़ के नगीने, मणिया, नीलम, मणाक आदि बनाने में यह स्थान विशेष प्रसिद्ध है।
  • यहाँ के हाथी दांत के खिलौने कला की दृष्टि से बहुत सुन्दर बनते हैं। हाथी दांत की यहां चूड़ियाँ भी बनाई जाती है। हाथी दाँत से बनी विभिन्न वस्तुऐं – मूर्तियाँ, खिलौने, शृंगारदान, फूल पत्तियाँ आदि विदेशों को भी काफ़ी जाती है।
  • यहाँ के चाँदी, पीतल, चन्दन, लकड़ी व कुट्टी के खिलौने भी बहुत प्रसिद्ध है। इनमें रंग भराई भी बड़ी कुशलता से की जाती है।
  • जयपुर के निकट ही सांगानेर में कपड़ों की रंगाई, छपाई तथा बन्धेज प्राचीन काल से प्रसिद्ध चली आ रही है। यहां की छींटे गुजरात, व मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में काफ़ी लोकप्रिय है।

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