History General Knowledge Questions Answer, इतिहास सामान्य ज्ञान

41. .प्रसिद्ध दस राजाओं का युद्ध (दाशराज युद्ध) किस नदी के तट पर लड़ा गया?

a. गंगा
b. ब्रह्मपुत्र
c. कावेरी
d. परुष्णी

Ans: d. परुष्णी

Notes: ‘परुष्णी नदी’ पंजाब राज्य की प्रसिद्ध रावी नदी या इरावती नदी का ही वैदिक नाम है। ऐसा जान पड़ता है कि परुष्णी नाम वैदिक काल में ही प्रचलित था, क्योंकि परवर्ती साहित्य में इस नदी का नाम इरावती मिलता है। ऋग्वेद के अनुसार परुष्णी नदी के तट पर ही तृत्स गण के राजा सुदास ने दस राजाओं की सम्मिलित सेना को हराया था। इसी कारण से यह युद्ध ‘दाशराज युद्ध’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ था। परुष्णी

42. मौर्यकालीन गुफ़ाओं में सर्वाधिक प्राचीन गुफ़ा निम्न में से किस पहाड़ी पर है?

a. नागार्जुन पहाड़ी
b. नीलगिरि पहाड़ी
c. बराबर पहाड़ी
d. राजगीर पहाड़ी

Ans: c. बराबर पहाड़ी

Notes: बराबर पहाड़ी’बराबर पहाड़ी’ बिहार के गया ज़िले में स्थित है। इस पहाड़ी में सात प्राचीन गुफ़ाएँ विस्तृत प्रकोष्ठों के रूप में निर्मित हैं। इन सात गुफ़ाओं में से तीन में अशोक के अभिलेख अंकित हैं। इनसे विदित होता है कि मूलतः इनका निर्माण अशोक के समय आजीवक सम्प्रदाय के भिक्षुओं के निवास के लिए करवाया गया था। बराबर पहाड़ी पर स्थित चार में से तीन गुफ़ाओं में अशोक के शिलालेख होने से यह ज्ञात होता है कि दो गुफ़ाएँ अशोक द्वारा शासन के 12वें वर्ष और क्रमशः 19वें वर्ष में भिक्षुओं को दान में दी गयीं। बराबर पहाड़ी

43. .निम्न में से किस ग्रंथ में शूद्रों के लिए ‘आर्य’ शब्द का प्रयोग हुआ है?

a. अर्थशास्त्र
b. मुद्राराक्षस
c. पाणिनि का अष्टाध्यायी
d. बृहत्कथामंजरी

Ans: a. अर्थशास्त्र

Notes: ‘अर्थशास्त्र’ हिन्दू धर्म ग्रन्थों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्ध तथा महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसके रचनाकार कौटिल्य हैं। सम्भवतः आचार्य चाणक्य (कौटिल्य या विष्णुगुप्त) द्वारा रचित इस कृति को भारत का पहला राजनीति का ग्रन्थ माना जाता है। लगभग 6000 श्लोकों वाले इस ग्रन्थ से मौर्य काल के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिलती है। अर्थशास्त्र ग्रन्थ

44. भूमिदान का प्रथम उल्लेख कब मिला?

a. मौर्यों के समय में
b. शुंगों के समय में
c. सातवाहनों के समय में
d. गुप्तों के समय में

Ans: c. सातवाहनों के समय में

Notes: मौर्य साम्राज्य की शक्ति क्षीण होने पर ‘प्रतिष्ठान’, गोदावरी नदी के तट पर स्थित पैठन, को राजधानी बनाकर सातवाहन वंश ने अपनी शक्ति का उत्कर्ष प्रारम्भ किया था। इस वंश का प्रथम राजा सिमुक था, जिसने 210 ई. पू. के लगभग अपने स्वतंत्र राज्य की नींव डाली। तीसरी सदी ई.पू. के अन्तिम चरण में प्रारम्भ होकर सातवाहनों का यह स्वतंत्र राज्य चार सदी के लगभग तक क़ायम रहा। भारत के इतिहास में लगभग अन्य कोई राजवंश इतने दीर्घकाल तक अबाधित रूप से शासन नहीं कर सका। सातवाहन साम्राज्य

45. .वशिष्ठीपुत्र पुलुमावी ने द्वितीय सदी के मध्य में सातवाहन राज्य की राजधानी किसे बनाया?

a. औरंगाबाद
b. प्रतिष्ठान
c. मदुरा
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

Ans: b. प्रतिष्ठान

46. .वैदिक नदी ‘कुभा’ (काबुल नदी) का स्थान कहाँ निर्धारित होना चाहिए?

a. अफ़ग़ानिस्तान में
b. चीनी तुर्किस्तान में
c. कश्मीर में
d. पंजाब में

Ans: a. अफ़ग़ानिस्तान में

Notes: अफ़ग़ानिस्तान का ध्वजअफ़ग़ानिस्तान या ‘अफ़ग़ान इस्लामिक गणराज्य’ जंबूद्वीप (एशिया) का एक देश है। यह दक्षिणी मध्य एशिया में अवस्थित देश है, जो चारों ओर से ज़मीन से घिरा हुआ है। प्रायः इसकी गिनती मध्य एशिया के देशों में होती है, लेकिन देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्व तो कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में कश्मीर तथा चीन, उत्तर में तज़ाकिस्तान, कज़ाकिस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान और पश्चिम में ईरान स्थित हैं। अफ़ग़ानिस्तान

47. भारत के किस स्थल की खुदाई से लौह धातु के प्रचलन के प्राचीनतम प्रमाण मिले हैं?

a. तक्षशिला
b. अतरंजीखेड़ा
c. कौशाम्बी
d. हस्तिनापुर

Ans: b. अतरंजीखेड़ा

Notes: ‘अतरंजीखेड़ा’ उत्तर प्रदेश के एटा ज़िलांतर्गत गंगा की सहायक काली नदी के तट पर स्थित एक प्रागैतिहासिक स्थल है। इस स्थल की खोज 1961-1962 ई. में कनिंघम ने की थी। कनिंघम ने चीनी यात्री युवानच्वांग द्वारा उल्लिखित ‘पि-लो-शा-न’ नामक स्थल का अतरंजीखेड़ा से समीकरण किया है। अवशेषों के आधार पर यहाँ की संस्कृति को चार स्तरों में बांटा गया है, जिनमें से तीसरे स्तर ‘चित्रितधूसर मृद्भाण्ड संस्कृति’ में लौह उपकरणों के प्राप्त होने की बात कही गई है। अतरंजीखेड़ा

48. .निम्नलिखित में से ‘कर्म का सिद्धांत’ किससे संबंधित है?

a. न्याय से
b. मीमांसा से
c. वेदांत से
d. वैशेषिक से

Ans: b. मीमांसा से

Notes: ‘मीमांसा’ शब्द का अर्थ किसी वस्तु के स्वरूप का यथार्थ वर्णन है। वेद के मुख्यत: दो भाग हैं- प्रथम भाग में ‘कर्मकाण्ड’ बताया गया है, जिससे अधिकारी मनुष्य की प्रवृत्ति होती है। द्वितीय भाग में ‘ज्ञानकाण्ड’ बताया गया है, जिससे अधिकारी मनुष्य की निवृत्ति होती है। कर्म तथा ज्ञान के विषय में कर्ममीमांसा और वेदान्त की दृष्टि में अन्तर है। वेदान्त के अनुसार कर्मत्याग के बाद ही आत्मज्ञान संभव है। कर्म तो केवल चित्तशुद्धि का साधन है। मोक्ष की प्राप्ति तो ज्ञान से ही हो सकती है, परन्तु कर्ममीमांसा के अनुसार मुमुक्षुजन को भी कर्म करना चाहिए। मीमांसा

49. ‘चरक संहिता’ नामक पुस्तक किस विषय से संबंधित है?

a. अर्थशास्त्र
b. राजनीति
c. चिकित्सा
d. धर्म

Ans: c. चिकित्सा

50. .यज्ञ संबंधी विधि-विधानों का पता चलता है-

a. ऋग्वेद से
b. सामवेद से
c. ब्राह्मण ग्रंथों से
d. यजुर्वेद से

Ans: d. यजुर्वेद से

Notes: यजुर्वेद का आवरण पृष्ठ’यजुष’ शब्द का अर्थ है- ‘यज्ञ’। यजुर्वेद मूलतः कर्मकाण्ड ग्रन्थ है। इसकी रचना कुरुक्षेत्र में मानी जाती है। यजुर्वेद में आर्यों की धार्मिक एवं सामाजिक जीवन की झांकी मिलती है। इस ग्रन्थ से पता चलता है कि आर्य ‘सप्त सिंघव’ से आगे बढ़ गए थे और वे प्राकृतिक पूजा के प्रति उदासीन होने लगे थे। यजुर्वेद के मंत्रों का उच्चारण ‘अध्वुर्य’ नामक पुरोहित करता था। यजुर्वेद कर्मकाण्ड प्रधान ग्रंथ है। इसमें यज्ञों और हवनों के नियम और विधान हैं। यजुर्वेद

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