History General Knowledge Questions Answer, इतिहास सामान्य ज्ञान

21. .”हिन्दुस्तान तलवार के ज़ोर पर जीता गया था।” यह कथन किसका है?

a. लॉर्ड ऑकलैण्ड
b. लॉर्ड एलगिन द्वितीय
c. लॉर्ड कर्ज़न
d. लॉर्ड डलहौज़ी

Ans: b. लॉर्ड एलगिन द्वितीय

Notes: लॉर्ड लैन्सडाउन के बाद जनवरी, 1894 ई. में लॉर्ड एलगिन द्वितीय भारत का वाइसराय बना था। लॉर्ड एलगिन द्वितीय ने भारत पर ब्रिटिश शासन के विषय में कहा था कि “भारत को तलवार के बल पर विजित किया गया है, और तलवार के बल पर ही इसकी रक्षा की जायेगी”। इसके शासन काल में 1895 ई. से 1898 ई. तक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पंजाब में भयंकर अकाल पड़ा। एलगिन द्वितीय ने सर जेम्स लायल की अध्यक्षता में एक ‘अकाल आयोग’ की नियुक्त की थी। लॉर्ड एलगिन द्वितीय

22. विष्णु के दस अवतारों की जानकारी का स्रोत निम्न में से किस पुराण में है?

a. भागवत पुराण
b. मत्स्य पुराण
c. विष्णु पुराण
d. मार्कण्डेय पुराण

Ans: b. मत्स्य पुराण

Notes: मत्स्यपुराण का आवरण पृष्ठवैष्णव सम्प्रदाय से सम्बन्धित ‘मत्स्यपुराण’ व्रत, पर्व, तीर्थ, दान, राजधर्म और वास्तु कला की दृष्टि से एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुराण है। हिन्दू धर्म में इस पुराण का धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस पुराण की श्लोक संख्या चौदह हज़ार है। इसे दो सौ इक्यानवे (291) अध्यायों में विभाजित किया गया है। इस पुराण के प्रथम अध्याय में ‘मत्स्यावतार’ की कथा है। उसी कथा के आधार पर इसका यह नाम पड़ा है। इस पुराण का सबसे महत्त्वपूर्ण आख्यान ‘सावित्री-सत्यवान’ की कथा है। पतिव्रता स्त्रियों में सावित्री की गणना सर्वोपरि की जाती है। मत्स्य पुराण

23. .किस विदेशी यात्री ने कृष्ण को ‘हेराक्लीज’ कहा?

a. फ़ाह्यान
b. ह्वेनसांग
c. मेगस्थनीज़
d. हेलिओक्लीज़

Ans: c. मेगस्थनीज़

Notes: कृष्ण तथा अर्जुन’मैगस्थनीज़’ के अनुसार मौर्य काल में बहुविवाह की प्रथा का प्रचलन था। शिक्षा व्यवस्था ब्राह्मण करते थे। दास प्रथा का प्रचलन नहीं था। मैगस्थनीज़ ने भारतीय लोगों की ईमानदारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि- “चोरी प्रायः नहीं होती थी”। उसने भारत के वासियों की धार्मिक भावना पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि- “यहाँ के लोग ‘डायोनियस’ (शिव) एवं ‘हेराक्लीज’ (कृष्ण) की उपासना करते थे”। उसने अपनी यात्रा के विवरण में पाटलिपुत्र का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत किया है। उसने पाटलिपुत्र को ‘पालिब्रोथा’ नाम से सम्बोधित किया है। अपने वर्णन में उसने पाटलिपुत्र को सोन नदी एवं गंगा नदी के संगम पर स्थित तत्कालीन भारत का सबसे बड़ा नगर बताया है। मेगस्थनीज़

24. “आगरा तथा फ़तेहपुर सीकरी दोनों ही लन्दन से बड़े हैं”। यह कथन किसका है?

a. बर्नियर
b. रॉल्फ़ फ़्रिंच
c. हॉकिन्स
d. थॉमस रो

Ans: b. रॉल्फ़ फ़्रिंच

Notes: विदेशी यात्री रॉल्फ़ फ़्रिंच के यात्रा विवरणों के आधार पर ही अंग्रेज़ ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत में अपने व्यापार की योजना बनाई थी। रॉल्फ़ फ़्रिंच ने भारतीयों तथा उनके रीति-रिवाजों के बारे में विस्तार से लिखा है। अपने एक कथन में उसने आगरा एवं फ़तेहपुर सीकरी को लन्दन से भी बड़ा बताया है। रॉल्फ़ फ़्रिंच ने भारत में व्याप्त ‘बाल विवाह’ तथा ‘सती प्रथा’ का भी उल्लेख किया है। रॉल्फ़ फ़्रिंच, विदेशी यात्री

25. .बौद्ध धर्म की किस शाखा में मंत्र, हठयोग एवं तान्त्रिक आचारों को प्रधानता दी गई है?

a. महायान
b. हीनयान
c. वज्रयान
d. उपर्युक्त सभी

Ans: c. वज्रयान

Notes: बौद्ध धर्म का प्रतीक’वज्रयान’ एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ हीरा या तड़ित का वाहन है, जो तांत्रिक बौद्ध धर्म भी कहलाता है। भारत व उसके पड़ोसी देशों में, विशेषकर तिब्बत में बौद्ध धर्म का महत्त्वपूर्ण विकास समझा जाता है। बौद्ध धर्म के इतिहास में वज्रयान का उल्लेख महायान के आनुमानिक चिंतन से व्यक्तिगत जीवन में बौद्ध विचारों के पालन तक की यात्रा के लिये किया गया है। ‘वज्र’ शब्द का प्रयोग मनुष्य द्वारा स्वयं अपने व अपनी प्रकृति के बारे में की गई कल्पनाओं के विपरीत मनुष्य में निहित वास्तविक एवं अविनाशी स्वरूप के लिये किया जाता है। वज्रयान

26. .प्रसिद्ध ‘विजयविट्ठल मन्दिर’, जिसके 56 तक्षित स्तंभ संगीतमय स्वर निकालते हैं, कहाँ अवस्थित है?

a. वेल्लोर
b. काँची
c. हम्पी
d. श्रीरंगम

Ans: c. हम्पी

Notes: लक्ष्मी नरसिम्हा, हम्पी’हम्पी’ मध्यकालीन हिन्दू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था। यह प्राचीन शानदार नगर अब मात्र खंडहरों के रूप में ही अवशेष अंश में उपस्थित है। हम्पी में कृष्णदेव राय के शासन काल में बनाया गया प्रसिद्ध ‘हज़ाराराम मन्दिर’ विद्यमान हिन्दू मन्दिरों की वास्तुकला के पूर्णतम नमूनों में से एक है। मन्दिर की दीवारों पर रामायण के सभी प्रमुख दृश्य बड़ी सुन्दरता से उकेरे गये हैं। यह मन्दिर राजपरिवार की स्त्रियों की पूजा के लिये बनवाया गया था। ‘विट्ठलस्वामी मन्दिर’ भी विजयनगर शैली का एक सुन्दर नमूना है। मन्दिर के कल्याणमंडप की नक़्क़ाशी इतनी सूक्ष्म और सघन है कि यह देखते ही बनता है। मन्दिर का भीतरी भाग 55 फुट लम्बा है। हम्पी

27. मौर्यकालीन भारत में भूमि कर, जो कि राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, किस अधिकारी द्वारा एकत्रित किया जाता था?

a. अग्रोनोमाई
b. सीताध्यक्ष
c. शुल्काध्यक्ष
d. अक्राध्यक्ष

Ans: b. सीताध्यक्ष

Notes: चन्द्रगुप्त मौर्य का टिकटमौर्य काल में राजकीय भूमि पर दासों, कर्मकरों और क़ैदियों द्वारा कृषि-कर्म कराया जाता था। दास और कर्मकरों को भोजन आदि दिया जाता था और कार्य के दौरान नक़द मासिक वेतन भी दिया जाता था। परन्तु ऐसी भी राजकीय भूमि होती थी, जिस पर ‘सीताध्यक्ष’ द्वारा खेती नहीं कराई जाती थी। ऐसी भूमि पर करद कृषक खेती किया करते थे। ‘सीताध्यक्ष’ राजकीय कृषि विभाग का अध्यक्ष होता था, जिसके द्वारा राजकीय भूमि से राज्य को सर्वाधिक कर प्राप्त होता था। मेगस्थनीज़, स्ट्राबो तथा ऐरियन इत्यादि यूनानी लेखकों के अनुसार सारी भूमि राजा की होती थी। वे राजा के लिए खेती करते थे और ¼ भाग राजा को लगान देते थे। मौर्यकालीन भारत, मौर्य काल, मौर्य काल का शासन प्रबंध

28. .’अष्ट दिग्गज’ निम्न में से किस राजा से सम्बन्धित थे?

a. शिवाजी
b. कृष्णदेव राय
c. राजेन्द्र प्रथम
d. यशोवर्मन

Ans: b. कृष्णदेव राय

Notes: ‘कृष्णदेव राय’ (1509-1529 ई.) तुलुव वंश के वीर नरसिंह का अनुज था, जो 8 अगस्त, 1509 ई. को विजयनगर साम्राज्य के सिंहासन पर बैठा। उसके शासन काल में विजयनगर ऐश्वर्य एवं शक्ति के दृष्टिकोण से अपने चरमोत्कर्ष पर था। कृष्णदेव राय का शासन काल ‘तेलुगु साहित्य का क्लासिकी युग’ माना जाता है। उसके दरबार को तेलुगु के आठ महान् विद्वान् एवं कवि, जिन्हें अष्ट दिग्गज कहा जाता था, सुशोभित करते थे। अत: उसे ‘आन्ध्र भोज’ कहकर भी पुकारा जाता था। ‘अष्ट दिग्गज’ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण अल्लसानि पेद्दन को “तेलुगु कविता का पितामह” की उपाधि प्रदान की गई थी। उसकी मुख्य कृति है- ‘स्वारोचिष-सम्भव’ या ‘मनुचरित’ तथा ‘हरिकथा सार’। कृष्णदेव राय

29. जैन साहित्य को निम्नलिखित में से इस नाम से भी जाना जाता है?

a. आगम
b. निगम
c. ग्रन्थ
d. बखार

Ans: a. आगम

Notes: जैन धर्म का प्रतीक चिह्नभगवान महावीर के उपदेश जैन धर्म के मूल सिद्धान्त हैं, जिन्हें ‘आगम’ कहा जाता है। ये अर्ध-मागधी प्राकृत भाषा में हैं। इन्हें आचारांगादि बारह अंगों में संकलित किया गया है, जो ‘द्वादशंग आगम’ कहे जाते हैं। वैदिक संहिताओं की भाँति जैन आगम भी पहले ‘श्रुत’ रूप में ही थे। महावीर स्वामी के बाद भी कई शताब्दियों तक उन्हें लिपिबद्ध नहीं किया गया था। श्वेताम्बर और दिगम्बर शाखाओं में जहाँ अनेक बातों में मतभेद था, वहीं आगमों को लिपिबद्ध न करने में दोनों एक मत थे। आगम

30. .उन्नीसवीं सदी के महानतम पारसी समाज सुधारक कौन थे?

a. जमशेदजी
b. रूस्तम बहरामजी
c. नवलजी टाटा
d. बहरामजी एम. मल्लबारी

Ans: d. बहरामजी एम. मल्लबारी
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