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सामयिकी: 27 मार्च 2020

हम यहां आपके लिए महत्वपूर्ण हालिया और नवीनतम करेंट अफेयर्स प्रदान करने के लिए हैं 27 मार्च 2020, हिंदू, इकनॉमिक टाइम्स, पीआईबी, टाइम्स ऑफ इंडिया, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस जैसे सभी अखबारों से नवीनतम करेंट अफेयर्स 2020 घटनाओं को यहा प्रदान कर रहे है। यहा सभी डाटा समाचार पत्रों से लिया गया हे।

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1. एआरसीआई ने आंतरिक दहन इंजनों की ईंधन दक्षता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी की विकसित

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास केन्द्र, इंटरनेशनल एडवांस्ड सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मटेरियल्स (ARCI – International Advanced Centre for Powder Metallurgy & New Materials) ने एक अल्ट्राफास्ट लेजर सरफेस टेक्सचरिंग तकनीक विकसित की है, जो आंतरिक दहन इंजनों की ईंधन दक्षता में सुधार कर सकती है।

क्या है लेजर सरफेस टेक्सचरिंग?

  • इस तकनीक में, एक स्पंदित लेजर बीम के माध्यम से बेहद नियंत्रित तरीके से वस्तुओं की सतह पर सूक्ष्म-गर्तिका अथवा खांचे का निर्माण किया जाता है। इस तरह के टेक्सचर, ड्राई स्लाईडिंग स्थितियों में और तेल की आपूर्ति (स्नेहक टंकी) को बढ़ाने जैसे प्रभावों को भी नियंत्रित करते हैं और यह घर्षण गुणांक को कम करते हुए घिसने की दर को कम कर सकते हैं।
  • माइक्रो-सरफेस टेक्सचर के आकार, बनावट और घनत्व को सटीक नियंत्रण प्रदान करने वाली लेजर सरफेस माइक्रो-टेक्सचरिंग घर्षण और घिसाव पर प्रभावशाली रूप से नियंत्रण बनाती है।

क्या है प्रौद्योगिकी?

  • टेक्सचर सरफेसों का निर्माण 100 एफएस पल्स ड्यूरेशन लेजर का उपयोग करते हुए ऑटोमोटिव आंतरिक दहन इंजन पुर्जों, पिस्टन रिंग्स और सिलेंडर लाइनर्स पर किया गया था। लगभग 5-10 माइक्रोन डीप और 10-20 माइक्रोन व्यास की सूक्ष्म-गर्तिका को लेजर बीम के माध्यम से नियमित पैटर्न का उपयोग करते हुए बनाया गया हैं।
  • निर्मित किए गए टेक्सचर का इंजन परीक्षण रिंग में शीतलक और स्नेहक तेल के साथ विभिन्न गतियों और तापमान पर परीक्षण किया गया, और यह देखा गया कि पिस्टन रिंग्स पर इस टैक्सचर के उपयोग से स्नेहक ईंधन की खपत में 16% की कमी आई है। 10 घंटे की ल्यूब ऑयल खपत परीक्षण से पता चलता है कि टैक्सचर रिंग्स में लगने वाले घर्षण में भी काफी कमी हुई है।
  • वस्तुओं की सतह पर सूक्ष्म-गर्तिका अथवा खांचे के पैटर्न के निर्माण से सतह स्थलाकृति में परिवर्तन होता है जो अतिरिक्त हाइड्रोडाइनामिक दबाव उत्पन्न करता है, जिससे सतहों की भार-वहन क्षमता बढ़ जाती है। इसलिए यह ड्राई स्लाइडिंग स्थितियों और ईंधन की आपूर्ति (स्नेहक टंकी) को बढ़ाने जैसे प्रभावों को भी नियंत्रित करने के साथ-साथ घर्षण गुणांक को भी कम करते हुए घिसने की दर कम कर देते हैं।

2. कैबिनेट ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पुनर्पूंजीकरण को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 2019-20 के बाद एक और वर्ष के लिए यानी 2020-21 तक आरआरबी को न्यूनतम नियामकीय पूंजी प्रदान कर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया को जारी रखने को अपनी स्वीकृति दे दी है।

  • इसके तहत उन आरआरबी को न्यूनतम नियामकीय पूंजी दी जाएगी जो 9% के ‘पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर)’ को बनाए रखने में असमर्थ हैं, जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट नियामकीय मानदंडों में उल्लेख किया गया है।
  • आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति ने आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना के लिए केंद्र सरकार के हिस्से के रूप में 670 करोड़ रुपये (यानी 1340 करोड़ रुपये के कुल पुनर्पूंजीकरण सहयोग का 50%) का उपयोग करने को भी मंजूरी दी है। हालांकि, इसमें यह शर्त होगी कि प्रायोजक बैंकों द्वारा समानुपातिक हिस्सेदारी को जारी करने पर ही केंद्र सरकार का हिस्सा जारी किया जाएगा।

ह्या होंगे इसके लाभ?

  • आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आरआरबी को अपने कुल ऋण का 75% ‘पीएसएल (प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण देना)’ के तहत प्रदान करना पड़ता है। आरआरबी मुख्यत: छोटे एवं सीमांत किसानों, सूक्ष्म व लघु उद्यमों, ग्रामीण कारीगरों और समाज के कमजोर वर्गों पर फोकस करते हुए कृषि क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों की कर्ज तथा बैंकिंग संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। बेहतर सीआरएआर से बैंक ऋण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे।
  • इसके अलावा, आरआरबी ग्रामीण क्षेत्रों के सूक्ष्म/लघु उद्यमों और छोटे उद्यमियों को भी ऋण देते हैं। ‘सीआरएआर’ बढ़ाने के लिए पुनर्पूंजीकरण या नई पूंजी संबंधी सहयोग मिलने पर आरआरबी अपने पीएसएल लक्ष्य के तहत उधारकर्ताओं की इन श्रेणियों को निरंतर ऋण देने में समर्थ साबित होंगे, अत: वे ग्रामीण आजीविकाओं के लिए निरंतर सहयोग देना जारी रखेंगे।

क्या है पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर)?

  • 2007 के वित्तीय क्षेत्र के संकट की बात करें तो  प्रमुख परिणामों में से एक यह है कि वित्तीय नियामक या केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों के लिए ज्यादा सख्त नहीं थे। वित्तीय नियामक या केंद्रीय बैंक ने पाया कि वाणिज्यिक बैंकों सहित वित्तीय संस्थानों की गैर-विफलता सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका इन संस्थानों में पूंजी-जोखिम की तैयारी सख्त होना है।
  • पूँजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) या पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) वह अनुपात है जो बैंकों द्वारा वितरित परिसंपत्तियों (ज्यादातर ऋण) के संदर्भ में मापा जाता है मतलब बैंक को उच्च परिसंपत्तियों को वितरित करने के लिए उच्च पूंजी होनी चाहिए।
  • उदाहरण के लिए, यदि बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करके सरकार को ऋण दिया है, तो उसे कोई पूंजी रखने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकारी प्रतिभूतियों के लिए ऋण का जोखिम शून्य है और इसलिए, सरकारी प्रतिभूतियों के लिए जोखिम भार शून्य है।
  • लेकिन जोखिमपूर्ण संपत्ति के मामले में बैंक को जोखिम भार रखना होगा जैसे रियल स्टेट के लिए जोखिम भार 300% है। यहां, अगर सीआरएआर 9% है (100% के जोखिम वाले वजन के साथ मानक संपत्ति के लिए) तो रियल स्टेट को लोन देने के लिए बैंक को 27% सीआरएआर रखना होगा; जैसे एक बैंक को रियल एस्टेट सेक्टर को 100 करोड़ रुपये का ऋण देने के लिए 27 करोड़ रुपये रखने चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • आरआरबी के पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) के लिए प्रकटीकरण मानदंडों को मार्च 2008 से लागू करने संबंधी आरबीआई के निर्णय को ध्यान में रखते हुए डॉ. के.सी. चक्रबर्ती की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था।
  • समिति की सिफारिशों के आधार पर ‘आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना’ को कैबिनेट ने 10 फरवरी, 2011 को आयोजित अपनी बैठक में मंजूरी दी थी, ताकि विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र और पूर्वी क्षेत्र में कमजोर आरआरबी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए आकस्मिक निधि के रूप में 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि के साथ 40 आरआरबी को 2,200 करोड़ रुपये की पुनर्पूंजीकरण सहायता प्रदान की जा सके।
  • अत: हर साल 31 मार्च को आरआरबी के सीआरएआर की जो स्थिति होती है उसके आधार पर ही राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) उन आरआरबी की पहचान करता है, जिन्हें 9% के अनिवार्य सीआरएआर को बनाए रखने के लिए पुनर्पूंजीकरण संबंधी सहायता की आवश्यकता होती है।
  • वर्ष 2011 के बाद  2,900 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के साथ आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना को चरणबद्ध ढंग से वर्ष 2019-20 तक बढ़ाया गया था, जिसमें भारत सरकार की 1,450 करोड़ रुपये की 50% हिस्सेदारी शामिल थी।  अब इसे 2020-21 के लिए बढाया गया है।

3. कोविड-19 के लिए इस्तेमाल हो सकता है एमपीलैड्स का कोष

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के क्रम में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अभी तक कई रोकथाम संबंधी उपाय किए हैं। मंत्रालय ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में आ रही चुनौतियों का समाधान करने के लिए संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के अंतर्गत निधि के उपयोग के लिए एकमुश्त वितरण को अनुमति देने के संबंध में एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया है।

  • इससे मरीजों के चिकित्सकीय परीक्षण और जांच के वास्ते सरकारी अस्पतालों/ डिस्पेंसरियों के लिए उपकरणों की खरीद को संसद सदस्य द्वारा निधि की स्वीकृति देना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही उनके लिए अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में अन्य संबंधित सुविधाओं की स्थापना का रास्ता साफ हो जाएगा।
  • एमपीलैड्स दिशा-निर्देशों में संशोधन के तहत संसद सदस्य अब एमपीलैड्स के अंतर्गत आने वाली निधि को निम्नलिखित कार्यों में उपयोग कर सकते हैं:-
  • i)   चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मचारियों को एक व्यक्ति का तापमान रिकॉर्ड करने और नजर बनाए रखने में सक्षम बनाने के लिए इन्फ्रा-रेड थर्मामीटर्स (गैर अनुबंध) के लिए।
  • ii)  चिकित्सा कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षित करने और उन्हें कुशलता से काम के लिए सक्षम बनाने के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की व्यवस्था, जिससे कोविड-19 बीमारी के प्रसार का जोखिम न्यूनतम हो जाए।
  • iii) रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों और प्रवेश के अन्य बिंदुओं पर थर्मल इमेजिंग स्कैनर या कैमरा लगाना, जिससे एक सुरक्षित दूरी से तापमान जानना संभव हो सके।
  • iv) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्वीकृत कोरोना परीक्षण किट के लिए।
  • v)  स्वीकृत सुविधाओं के भीतर आईसीयू वेंटिलेटर और आइसोलेशन/ क्वारंटीन वार्ड की स्थापना के लिए।
  • vi) चिकित्सा कर्मचारियों के लिए फेस मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर तथा कोविड-19 से बचाव, नियंत्रण और उपचार के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्वीकृत कोई अन्य चिकित्सा उपकरण।

संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स)

  • सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी ‘एमपीलैड’ योजना 23 दिसंबर, 1993 को पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव द्वारा शुरू की गई थी ताकि सांसदों को ऐसा तंत्र उपलब्ध कराया जा सके जिससे वे स्थानीय लोगों की ज़रूरतों के अनुसार स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण और सामुदायिक बुनियादी ढाँचा सहित उन्हें बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने के लिये विकासकारी कार्यों की सफ़ारिश कर सकें।
  • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLAD) के कार्यान्वयन का दायित्व सौंपा गया है। योजना के तहत प्रत्येक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए तक की लागत के कार्यों के बारे में ज़िला कलेक्टर को सुझाव देने का विकल्प दिया गया है।
  • राज्यसभा सांसद उस राज्य के किसी एक अथवा अधिक ज़िलों में कार्यों की सिफारिश कर सकता है, जहाँ से वह निर्वाचित हुआ है। लोकसभा तथा राज्यसभा के नामित सदस्य इस योजना के तहत देश के किसी भी राज्य में अपनी पसंद के एक या अधिक ज़िलों का चुनाव कर कार्य कर सकते हैं।

4. कनाडा लौटने वाले यात्रियों के लिए 14 दिन का संगरोध (Quarantine) होगा अनिवार्य

कनाडा ने संगरोध (Quarantine) अधिनियम के तहत कनाडा लौटने वालों के लिए अनिवार्य रूप से अलगाव सुनिश्चित किया है। उप प्रधान मंत्री क्रिस्टलीय फ्रीलैंड ने कहा कि इस अधिनियम के तहत 14 दिनों के अलगाव की आवश्यकता होगी।

  • यह कनाडा के बाहर से कनाडा में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए एक कानूनी दायित्व होगा। आवश्यक श्रमिकों को इससे बाहर रखा गया है। उप प्रधान मंत्री ने कहा कि दंड की घोषणा बाद में की जाएगी।
  • इस अधिनियम में सीमा पार करने वाले ट्रक ड्राइवरों और स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों को छूट दी गई है। ध्यातव्य है कि कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहले से ही सभी गैर-आवश्यक यात्रा के लिए अपनी आम सीमा को बंद कर दिया है लेकिन आवश्यक सेवाएं अभी भी जारी हैं। कनाडा खाद्य और चिकित्सा जैसे आवश्यक सामानों के लिए सीमा पार व्यापार पर निर्भर करता है।
  • यह अधिनियम यात्रियों को संगरोध (Quarantine) के स्थानों पर जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन जैसे सबवे लेने से रोकता है। इसके अलावा, यह अधिनियम यात्री जनता के कमजोर सदस्यों के साथ संगरोध (Quarantine)  की अनुमति नहीं देता है, जो बीमारी को पकड़ने के उच्च जोखिम में हैं।
  • कुछ समय पूर्व कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने यह घोषणा की थी कि उनकी सरकार अगले चार महीनों के लिए उन श्रमिकों को 2,000 कनाडाई डॉलर (यूएस $ 1,395)/महीने देगी, जो महामारी के परिणामस्वरूप अपनी आय के स्रोत को खो चुके हैं।

संगरोध (Quarantine)

  • संक्रामक रोगों या नाशीजीवों (pest) के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से लोगों या सामान की आवाजाही और दूसरों से घुलने-मिलने पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाता है, जिसे संगरोध या क्वारंटीन (Quarantine) कहते हैं। संगरोध करने का उद्देश्य संक्रामक रोगों से ग्रसित अथवा संक्रामक रोगियों के सम्पर्क में आए लोगों के आवागमन को अत्यन्त सीमित करना होता है।
  • ‘क्वारंटीन’ (Quarantine) यह लैटिन मूल का शब्द है। इसका मूल अर्थ चालीस है। पुराने समय में जिन जहाजों में किसी यात्री के रोगी होने अथवा जहाज पर लदे माल में रोग प्रसारक कीटाणु होने का संदेह होता तो उस जहाज को बंदरगाह से दूर चालीस दिन ठहरना पड़ता था। ग्रेट ब्रिटेन में प्लेग को रोकने के प्रयास के रूप में इस व्यवस्था का आरम्भ हुआ था।

5. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कोरोना के प्रभाव से निपटने के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान

कोरोना वायरस से प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1.7 लाख करोड़ के स्पेशल पैकेज का ऐलान किया है। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि गरीबों के लिए खाने का प्रबंध किया जाएगा। इसके अलावा डीबीटी के जरिए अकाउंट में पैसे ट्रांसफर भी किए जाएंगे।

  • इसके अलावा, सरकार ने जो बड़ा ऐलान किया है, उसमें 3 महीनों तक एम्प्लॉयी और एम्प्लॉयर दोनों के हिस्से का योगदान सरकार करेगी। उन सभी ऑफिसेस के लिए है जिनमें 100 से ज्यादा एम्प्लॉयी हैं।
  • वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे कोरोना वायरस से लोगों को बचा रहे डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ को 50 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर दिया जा रहा है। इनमें आशा वर्कर्स और डॉक्टर आशा वर्कर, नर्स और अन्य मेडिकल स्टॉफ शामिल हैं। इससे 20 लाख मेडिकल कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।
  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला-प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ गरीब लोगों को कवर किया जाएगा। इस योजना के तहत अगले तीन महीने तक पांच किलो चावल/गेहूं मुफ्त में दिया जाएगा। इसके अलावा एक किलो दाल हर परिवार को मुफ्त में मिलेगा।
  • योजना के तहत आठ कैटिगरीज में किसान, मनरेगा, गरीब विधवा-पेंशनर्स-दिव्यांग, जनधन योजना-उज्ज्वला स्कीम, सेल्फ हेल्प ग्रुप (वुमन), ऑर्गनाइज्ड सेक्टर वर्कर्स (EPFO), कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को मिलेगा डीबीटी का लाभ मिलेगा। बुजुर्ग, दिव्यांग और विधवा को एकमुश्त 1000 रुपये दो किस्तों मे दी जाएगी। यह अगले तीन महीने में दिया जाएगा। यह राशि अलग से मिलेगी।
  • देश में मनरेगा योजना का लाभ 5 करोड़ परिवारों को मिलता है। मनरेगा दिहाड़ी अब 182 से बढ़ाकर 202 रुपये कर दी गई है। जनधन योजना वली करीब साढ़े 20 करोड़ महिलाओं के खाते में अगले 3 महीने तक डीबीटी के जरिए हर महीने 500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।
  • इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई घोषणाएं की थीं। उन्होंने इनकम टैक्स रिटर्न भरने, जीएसटी रिटर्न, आधार-पैन लिंकिंग आदि के लिए समयसीमा को बढ़ाने का ऐलान किया था। वित्तीय वर्ष 18-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की तारीख को 30 जून तक बढ़ाया गया था। लेट भुगतान 12 फीसदी से 9 फीसदी किया गया था। ये राहत उन लोगों के लिए है जो 30 मार्च तक नहीं कर पाने की स्थिति में हैं।

6. ‘क्वांटम केमिस्ट्री आधारित सॉफ्टवेयर’ विकसित करने में जुटे आईआईटी बॉम्बे के ‘इन्स्पायर’ फेलो

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘इन्स्पायर संकाय पुरस्कार’ से नवाजे गए आईआईटी बॉम्बे के डॉ. अचिंत्य कुमार दत्ता अपने शोध समूह के साथ क्वांटम केमिस्ट्री के लिए नए तरीके विकसित करने और उन्हें अत्यंत प्रभावकारी एवं फ्री सॉफ्टवेयर में इस्तेमाल करने पर काम कर रहे हैं, ताकि जलीय डीएनए से इलेक्ट्रॉन के संयोजन का अध्ययन किया जा सके क्योंकि कैंसर के विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) आधारित उपचार में इसके व्यापक निहितार्थ हैं।

  • क्वांटम केमिस्ट्री के ये नव विकसित कारगर तरीके इस शोध समूह को व्यापक जलीय परिवेश में डीएनए से इलेक्ट्रॉन के संयोजन से संबंधित श्रोडिंगर समीकरण को हल करने में समर्थ बनाते हैं। डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड या डीएनए मानव शरीर में आनुवांशिक जानकारियों अथवा सूचनाओं का वाहक है। वहीं, दूसरी ओर डीएनए से इलेक्ट्रॉन का संयोजन दरअसल मानव कोशिकाओं को विकिरण क्षति पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।
  • क्वांटम केमिस्ट्री के लिए नए सिद्धांतों को विकसित करने में भारतीय वैज्ञानिक ही सबसे आगे हैं। हालांकि, इन सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से उपयोगी या काम में आने लायक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में परिणत करने की दिशा में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हो पाई है। बड़ी तेजी से विकसित हो रहे भारतीय आईटी उद्योग और अंतरराष्ट्रीय ख्याति वाले अनगिनत अत्यंत प्रतिभाशाली सॉफ्टवेयर प्रोफेशनलों को देखते हुए यह आश्चर्य की ही बात है।

क्वांटम केमिस्ट्री

  • क्वांटम केमिस्ट्री दरअसल रसायन शास्त्र की नई शाखाओं में से एक है जिसके तहत प्रयोगशाला में कोई प्रयोग किए बिना ही परमाणुओं और अणुओं के रासायनिक गुणों को परखने की कोशिश की जाती है। इसके बजाय क्वांटम केमिस्ट्री में वैज्ञानिक अणुओं से संबंधित श्रोडिंगर समीकरण को हल करने की कोशिश करते हैं और इससे वास्तव में माप किए बिना ही उस विशेष अणु के बारे में हर मापने योग्य मात्रा प्राप्त हो जाती है।
  • हालांकि, श्रोडिंगर समीकरण के अनुप्रयोग से उत्पन्न गणितीय समीकरण काफी जटिल होते हैं और केवल कंप्यूटर का उपयोग करके ही इन्हें हल किया जा सकता है। अत: इन समीकरणों को हल करने के लिए नए सिद्धांतों को विकसित करना और अत्यंत कारगर कंप्यूटर प्रोग्राम लिखना आवश्यक है।

श्रोडिंगर समीकरण

  • क्वांटम यांत्रिकी में, श्रोडिंगर समीकरण हमें यह बताता है की किसी भौतिक निकाय की क्वांटम अवस्था समय के अनुसार कैसे बदलती है| इसे ऑस्ट्रिया के भौतिक विज्ञानी इरविन श्रोडिंगर द्वारा 1925 में स्थापित तथा 1926 में प्रकाशित किया गया था| चिरसम्मत यांत्रिकी (classical mechanics) में गति की समीकरण (ईक्वेशन ऑफ मोशन) न्यूटन के दूसरे नियम में या ऑयलर लग्रांजी समीकरण के रूप में हमे समय प्रारंभिक स्थिति और सिस्टम के विन्यास के बारे मे बताता है| परंतु क्वांटम यांत्रिकी की मानक व्याख्या में तरंग-फलन हमें भौतिक अवस्था की पूर्ण जानकारी देता है| श्रोडिंगर समीकरण ना केवल परमाणु, आणविक और उपपरमाण्विक अवस्था की जानकारी देता है बल्कि मैक्रो सिस्टम (स्थूल-काय), सम्भवतः पूरे ब्रह्मांड की जानकारी भी देता है|

7. पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को कोरोना वायरस होने का संदेह

क्लामेंट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग जैसे मुद्दे पर शक्तिशाली देशों जिम्मेदार ठहराने वाली पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि उन्हें और उनके पिता स्वांते थनबर्ग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। वह अपने पिता के साथ आइसोलेशन में चली गई हैं और लोगों से अपील कर रही हैं कि वे घरों में रहें।

  • न्यू साइंटिस्ट को दिए इंटरव्यू में ग्रेटा (17) में कोविड19 के लक्षण नजर आए हैं। ये लक्षण यूरोप में साथ में ट्रेन में सफर करने के बाद दिखे हैं। हालांकि, वह जोर देती हैं कि उनका टेस्ट नहीं हुआ है क्योंकि स्वीडन में सिर्फ उनका टेस्ट हो रहा है जिनमें गंभीर लक्षण दिख रहे हैं और उनका जिनसे ज्यादा खतरा है।
  • जलवायु परिवर्तन को लेकर आवाज उठाने वाली स्वीडन की इस 16 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता को टाइम पत्रिका का ‘पर्सन ऑफ द ईयर 2019’ घोषित किया गया था।

पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थॉनबर्ग

  • दुनिया के सातवें सबसे अमीर और संपन्न देश स्वीडन में रहने वाली ग्रेटा थॉनबर्ग पिछले एक वर्ष से ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ आक्रामक अभियान पर है और उसके प्रयासों का ही नतीजा है कि उनके देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 8 प्रतिशत की कमी आई है।
  • स्टॉकहोम में 3 जनवरी 2003 को जन्मी ग्रेटा की मां एक अन्तर्राष्ट्रीय ओपेरा सिंगर मालेना एमान हैं, जबकि पिता स्वांते थनबर्ग भी अभिनय की दुनिया में एक जाना माना नाम हैं।
  • वह कहने को छोटी सी लड़की है पर दुनिया को पर्यावरण के खतरे से बचाने के लिए हर मंच पर दस्तक देती है। स्कूल से छुट्टी लेकर स्वीडन की संसद के सामने धरना प्रदर्शन करने से शुरूआत करने वाली ग्रेटा संयुक्त राष्ट्र के मंच से दुनियाभर के बड़े नेताओं को पर्यावरण को बर्बाद करने के लिए फटकार लगाती है और फिर अगले ही पल उन्हें आने वाले खतरे से आगाह करते हुए कुछ ठोस कदम उठाने की गुहार लगाती है।
  • 2018 में 15 वर्ष की उम्र में ग्रेटा ने स्कूल से छुट्टी ली और स्वीडन की संसद के सामने प्रदर्शन किया। उसके हाथ में एक बड़ी सी तख्ती थी, जिसपर बड़े अक्षरों में ‘स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट’ लिखा था। देखते ही देखते उसका अभियान रफ्तार पकड़ गया और बहुत से स्कूलों के बच्चे पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम में ग्रेटा के हमकदम बन गए।
  • इस वर्ष ग्रेटा थॉनबर्ग को 2019 नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। यदि ग्रेटा इस पुरस्कार को जीत जाती तो वे नोबेल शांति पुरस्कार की सबसे युवा विजेता बन जाती। इससे पहले मलाला यूसुफ़जई ने 2014 में 17 वर्ष की आयु में नोबेल शांति पुरस्कार जीता था।

8. नेशनल बुक ट्रस्ट की पहल स्टेहोमइंडियाविथबुक्स

देशभर में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया गया है। जिसके चलते 14 अप्रैल तक सभी को अपने- अपने घर में रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले सभी स्कूल और कॉलेजों को भी बंद कर परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। ऐसे में कई डिजिटल प्लैटफॉर्म स्टूडेंट्स और लोगों की मदद करने के लिए फ्री एक्सेस दे रहे हैं।

  • इसी बीच नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) ने एक सराहनीय पहल की है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के तहत आने वाले एनबीटी ने लोगों को घरों में रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए #स्टेहोमइंडियाविथबुक्स (#Stay Home India With Books) की शुरूआत की है।
  • इस पहल के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट की वेबसाइट के जरिए बेस्ट सेलिंग किताबों को फ्री में डाउनलोड कर पढ़ा जा सकता है। ये किताबें हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बंग्ला, गुजराती सहित भारत की तमाम भाषाओं में हैं। इस पहल के तहत मिजो से लेकर बोडो और नेपाली, पंजाबी, तेलगू, ऊर्दू और संस्कृत भाषाओं में बेस्ट सेलिंग किताबों को फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास

  • राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (एनबीटी), सन् 1957 में भारत सरकार (उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय) द्वारा स्थापित एक शीर्ष निकाय है। एनबीटी का उद्देश्य अँग्रेजी, हिंदी तथा भारतीय भाषाओं में उच्च कोटि के साहित्य का प्रकाशन और पुस्तकों के प्रोन्नयन को प्रोत्साहित करना तथा ऐसा साहित्य लोगों को उचित मूल्यों पर उपलब्ध करवाना है; साथ ही, पुस्तक सूची का प्रकाशन करना, पुस्तक मेलों/प्रदर्शनियों तथा संगोष्ठियों की व्यवस्था करना और लोगों में पुस्तक पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाना है।
  • एनबीटी द्वारा वार्षिक नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का आयोजन किया जाता है, जो एफ्रो-एशियाई क्षेत्र में सबसे बड़ा पुस्तक उत्सव है। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले ने पिछले चार दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों के बीच एक उच्च ख्याति अर्जित की है।
  • एनबीटी द्वारा 1993 में ‘राष्ट्रीय बाल साहित्य केंद्र’ की स्थापना की गई, जो विभिन्न भारतीय भाषाओं में बाल साहित्य के प्रकाशन की निगरानी, समन्वयन, आयोजन और सहायता का कार्य करता है। राष्ट्रीय बाल साहित्य केंद्र कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों का आयोजन करने तथा विद्यालयी स्तर पर पठन-रुचि को बढ़ावा देने के लिए पाठक मंचों की स्थापना को प्रोत्साहित करने में सक्रिय है।
  • एनबीटी प्रतिवर्ष 1 अगस्त को अपना स्थापना दिवस मनाता है। इस अवसर पर साहित्यिक कार्यक्रम तथा अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
  • 15 से 25 आयु-वर्ग के सभी युवाओं को वर्ष 2025 तक सक्रिय पाठक बनाने के उद्देश्य से एनबीटी ने ‘नेशनल एक्शन प्लान फॉर रीडरशिप डेवेलपमेंट एमंग द यूथ’ (युवा वर्ग में पाठकगण विकास हेतु राष्ट्रीय कार्य-योजना) (एनएपीआरडीवाई) का संचालन किया। एनएपीआरडीवाई के अंतर्गत पहला प्रमुख कदम यह लिया गया कि देश भर के ग्रामीण और शहरी युवाओं के बीच राष्ट्रीय युवा पाठकवर्ग का सर्वेक्षण किया गया, जिसका दायित्व एनसीएईआर (नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकॉनामिक रिसर्च) ने निभाया। इसका उद्देश्य पाठकगण स्वरूपों तथा युवाओं की पठन-आवश्यकताओं का निर्धारण करना था। एक रिपोर्ट के रूप में इस सर्वेक्षण का प्रकाशन एनबीटी द्वारा किया जा चुका है।
  • वर्ष 1982 में शुरू हुआ राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह, देश-भर में पुस्तकों एवं पुस्तक पढ़ने की अभिरुचि के प्रोन्नयन हेतु एनबीटी की एक पहल है। प्रत्येक वर्ष 14 से 20 नवंबर तक राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह मनाया जाता है, जिसके दौरान एनबीटी देश-भर में अनेक पुस्तक प्रोन्नयन गतिविधियों तथा साहित्यिक कार्यक्रमों यथा पुस्तक प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठियाँ, चर्चाएँ, लेखक से मिलिए कार्यक्रम, कार्यशालाएँ तथा अन्य साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन करता है।

9. मशहूर अभिनेत्री निम्मी का 87 वर्ष की उम्र में निधन

भारत की मशहूर निम्मी का निधन हो गया है। वह 87 वर्ष की थीं और लंबे वक्त से बीमार चल रही थीं। वह बढ़ती उम्र की कई समस्याओं से पीड़ित थीं और काफी महीनों से व्हीलचेयर पर थीं। उन्होंने एक निजी अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली।

  • निम्मी का 50 और 60 के शुरुआती दशक में जबरदस्त स्टारडम था। उन्होंने ‘बरसात’ से अपना फिल्मी डेब्यू किया था और लोगों का दिल जीता था। इसके बाद उन्होंने ‘अमर’, ‘दाग’, ‘दीदार’, ‘बसंत बहार’, ‘मेरे महबूब’, ‘कुंदन’ जैसी फिल्मों में काम किया।
  • उनका असली नाम नवाब बानो था और निम्मी नाम फिल्म निर्माता राज कपूर ने दिया था जिन्होंने अंदाज फिल्म के सेट पर एक शर्मीली किशोरी के रूप में निम्मी को पहली बार देखा था।

10. ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर खड़े तीन क्रूज़ जहाजों के हजारों यात्रियों को जहाज से उतरने की इजाज़़त नहीं

ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर खड़े तीन क्रूज़ जहाजों के हजारों यात्रियों को कोविड-19 के फैलाव की आशंका को देखते हुए जहाज से उतरने की इजाज़़त नहीं दी जा रही है।

  • सैर-सपाटा कराने वाले अर्टानिया और मेग्निफिका नाम के ये दो जहाज पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के फ्रीमेंटल बंदरगाह पर लंगर डाले हुए है जबकि तीसरा जहाज वास्को डी गामा बंदरगाह में पहुंचने वाला है।
  • सरकार का कहना है कि जहाज के किसी भी यात्री या चालक दल के सदस्य को किसी भी हालत में सडकों और गलियों में घुमने की इजाज़़त नहीं होगी। ऑस्ट्रेलिया में अब तक कोरोना वायरस के दो हजार चार सौ मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इस महामारी का प्रकोप फैलने के बाद से आठ मौतें हो चुकी है।

ऐसी ही कहानी है डायमंड प्रिंसेस क्रूज पोत की

  • डायमंड प्रिंसेस क्रूज पोत के एक यात्री को कोविड-19 वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद  5 फरवरी को इस पोत को जापान के योकोहामा तट पर अलग खड़ा कर दिया गया था। बाद में जांच के बाद सैकड़ों यात्रियों को जहाज से बाहर जाने की अनुमति दे दी गई थी।
  • यह क्रूज जहाज 50 देशों के 3,700 से अधिक यात्रियों और क्रू सदस्यों के साथ जापान के तट पर पहुंचा था। इस जहाज को उस समय अलग कर दिया गया था जब अधिकारियों ने पाया कि हांगकांग में उतरा एक यात्री कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाया गया है।

नोवेल कोरोना वायरस/ कोविड-19

  • चीन में पाए गए इस वायरस को पहले ‘नोवेल कोरोनावायरस’ नाम दिया गया था। इस वायरस से प्रभावित व्यक्ति में निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जुकाम, बुखार, खांसी, कंपकंपी आदि इस वायरस की चपेट में आने के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। कोविड-19 की पहली बार चीन की सरकार ने दिसम्बर 2019 में पुष्टि की थी। इसे नोवेल भी कहा गया था क्योंकि इस तरह का वायरस पूरी दुनिया में पहली बार मिला है।
  • यदि इसके नामकरण की बात करें तो कोरोनावायरस (कोविड-19)  को इसका नाम लैटिन शब्द से मिला है। लैटिन में कोरोना का मतलब क्राउन (Crown) होता है। इस वायरस की सतह पर भी क्राउन की तरह स्पाइक्स की सीरीज बनी होती है। यहीं से इसे कोरोना नाम मिला है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्राथमिक जांच से मिली जानकारी इस वायरस को समुद्री खाद्य बाजार से जोड़ती है। कोरोना वायरस विषाणुओं का परिवार है। यह वायरस ऊंट, बिल्ली तथा चमगादड़ सहित पशुओं में पाया जाता है। दुर्लभ स्थिति में पशु कोरोना वायरस बढ़कर लोगों को भी संक्रमित कर सकता है।
  • अभी तक कोरोना वायरस का कोई विशेष इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। इस विषाणु से होने वाली बीमारी की रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन का भी नहीं खोजी गई है।
  • ये वायरस कुछ बीमारियों के रोगियों को गंभीर परिणाम दे सकता है, जैसे- सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS)।
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