आज के टॉप करेंट अफेयर्स

सामयिकी: 25 मार्च 2020

1.  24 मार्च को मनाया गया विश्व क्षयरोग दिवस

विश्व क्षयरोग दिवस प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है इसी कड़ी में 2020 का विश्व क्षयरोग दिवस ‘यह समय है (It’s Time) ’ विषय के साथ मनाया जा रहा है जो  वैश्विक नेताओं द्वारा प्रतिबद्धताओं पर कार्य करने के लिए किये जा रहे प्रयासों पर जोर देता है।

  • यह दिवस इस वैश्विक बीमारी को खत्म करने के प्रयासों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बनाने के लिए मनाया जाता है। डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा वर्ष 1882 में 24 मार्च को क्षयरोग (टीबी) जीवाणुओं की खोज की गई थी डॉ. रॉबर्ट कोच के प्रयासों को याद रखने के लिए ही 24 मार्च का चयन किया गया है।
  • इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सभी हितधारकों से अपील की है कि वे “टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान” के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों को मजबूती प्रदान करने के लिए एकजुट हो कर यह सुनिश्चित करें कि यह अभियान वास्तव में एक ‘जनआंदोलन’ बन जाए।

टीबी (तपेदिक/क्षयरोग)

  • तपेदिक या ट्यूबरोक्युलोसिस (टी.बी) मायकोबेक्टिरियम ट्यूबरोक्युलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है। तपेदिक का फैलाव इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति द्वारा लिये जानेवाले श्वास-प्रश्वास के द्वारा होता है। केवल एक रोगी पूरे वर्ष के दौरान 10 से भी अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है।
  • टी.बी. का टीका- बीसीजी (BCG), बच्चों में तपेदिक के प्रसार को कुछ सीमा तक कम करता है।
  • डायरेक्टली ऑबज़र्व्ड ट्रीटमेन्ट, शॉर्ट-कोर्स (DOTS) टी.बी. के उपचार के लिये उपयोग में ली जाने वाली प्रणाली है। तपेदिक के इलाज़ के लिये कम से कम छह महीने के उपचार की आवश्यकता होती है।
  • भारत में हर साल 20 लाख लोग टीबी की चपेट में आते हैं लगभग 5 लाख प्रतिवर्ष मर जाते हैं। यदि एक औसत निकालें तो दुनिया के 30 प्रतिशत टीबी रोगी भारत में पाए जाते हैं।

‘टीबी हारेगा देश जीतेगा’ अभियान

  • सितम्बर 2019 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय टीबी प्रसार सर्वेक्षण के साथ एक नए अभियान ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ की शुरुआत की थी।
  • इसके तहत सरकार ने सभी जिलों के 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सों में रोगी मंचों की स्थापना की है ये जिला फोरम प्रभावितों की आवाज को सामने लाएंगे  और टीबी से संबंधित सेवाओं तक पहुंचने में रोगियों एवं उनके परिवारों के सामने आने वाली जमीनी चुनौतियों को उजागर करेंगे।

सरकार के प्रयास

  • राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम (एनटीपी) की शुरूआत भारत सरकार ने वर्ष 1962 में बीसीजी टीकाकरण और टीबी उपचार से जुड़े जिला टीबी केंद्र मॉडल के रूप में की थी। वर्ष 1978 में बीसीजी टीकाकरण को टीकाकरण विस्तारित कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानांतरित कर दिया गया था।
  • डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 1993 में टीबी को वैश्विक आपातकाल घोषित किया। उसने क्षय रोग की चिकित्सा के लिए प्रत्यक्ष प्रेक्षित थेरेपी, छोटा-कोर्स (डॉट्स/डाइरेक्टली ऑब्जर्व्ड शॉर्ट कोर्स), अर्थात् सीधे तौर पर लिए जाने वाला छोटी अवधि के उपचार की स्थापना की तथा सभी देशों से इसे अपनाने की सिफ़ारिश की। भारत सरकार ने वर्ष 1993 में एनटीपी को संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के रूप में लागू किया। डॉट्स की आधिकारिक तौर पर शुरूआत वर्ष 1997 में आरएनटीसीपी (Revised National TB Control Programme) रणनीति के अंतर्गत की गयी थी तथा इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2005 के अंत तक पूरे देश को कवर किया गया था।
  • वर्ष 2006 से 2011 के दौरान अपने दूसरे चरण में आरएनटीसीपी ने गुणवत्ता और सेवाओं की पहुंच में सुधार किया तथा सभी मामलों का पता लगाने और उपचारित करने के लक्ष्य के लिए कार्य किया गया। ये लक्ष्य वर्ष 2007 से 2008 तक प्राप्त किए गए थे। इन उपलब्धियों के बावजूद अनियंत्रित और अनुपचारित मामलों ने टीबी महामारी को जारी रखा।
  • हालांकि वर्ष 2025 तक भारत से टीबी उन्मूलन के लिए पांच वर्ष पहले का  वैश्विक लक्ष्य रखा गया है।  राष्ट्रीय और राज्य सरकारों, विकास भागीदारों, नागरिक समाज संगठनों, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों, निजी क्षेत्र, और कई अन्य लोगों सहित भारत में टीबी उन्मूलन के लिए प्रासंगिक सभी हितधारकों की गतिविधियों के मार्गदर्शन के लिए एक ढांचा आरएनटीसीपी द्वारा तैयार किया गया है, जिसका नाम “क्षय रोग उन्मूलन वर्ष 2017-2025 हेतु राष्ट्रीय रणनीतिक योजना” है।

 

2. भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने

मध्य प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। राज्य के राज्यपाल लालजी टंडन ने राजभवन में चौहान को एक सादे समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी।

  • शिवराज चौहान पहली बार वह 29 नवंबर 2005 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद वह 12 दिसंबर 2008 में दूसरी बार सीएम बने थे। 8 दिसंबर 2013 को शिवराज ने तीसरी बार सीएम पद की शपथ ली थी।

सरकार बनाने का गणित

  • पूर्व में 22 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस नेतृत्व की सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। ये सभी विधायक कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए मध्य प्रदेश के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक थे।
  • मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या 230 है जिनमें से दो सीटें खाली हैं। बाईस सदस्यों के त्यागपत्र देने से विधानसभा की प्रभावी संख्या दो सौ छह रह गई थी। किसी भी पार्टी को सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए एक सौ चार का जादुई आंकडा छूना था।
  • कांग्रेस के सदस्यों की संख्या सदन में एक सौ चौदह थी, लेकिन इन इस्तीफों के बाद विधानसभा में यह संख्या बानवे रह गई थी। पार्टी को बहुजन समाज पार्टी के दो, समाजवादी पार्टी के एक और चार निर्दलीय सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। इन्हें मिलाकर कांग्रेस के समर्थन में अधिकतम 99 विधायक थे जिससे कांग्रेस बहुमत से पांच सीटें कम रह रह गई थी जबकि इस समय भारतीय जनता पार्टी के सदन में एक सौ सात विधायक हैं जो वर्तमान विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने के लिए काफी हैं।

मुख्यमंत्री की शपथ का संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 164(3) के अनुसार, किसी मंत्री द्वारा पद ग्रहण करने से पहले, राज्यपाल/उप-राज्यपाल तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिये दिये गए प्रारूपों के अनुसार उसको पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएगा।
  • तीसरी अनुसूची के अनुसार किसी राज्य के मंत्री की शपथ का प्रारूप यह है- ‘मैं, शपथ ग्रहण करने वाले का नाम, ईश्वर की शपथ लेता/लेती हूँ/ सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता/करती हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा/रखूँगी, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा, मैं ——— राज्य के मंत्री के रूप में अपने कर्त्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा/करूँगी तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूँगा/करूँगी।’
  • अनुच्छेद 164 से यह स्पष्ट होता है कि शपथ का सार तत्त्व पवित्र होता है तथा शपथ लेने वाले व्यक्ति को इसे संविधान में प्रदत्त प्रारूप के अनुसार ही पढ़ना है।
  • यदि कोई व्यक्ति शपथ लेने के दौरान शपथ के प्रारूप से भटक जाता है तो शपथ दिलाने वाले व्यक्ति (इस मामले में राज्यपाल) की ज़िम्मेदारी है कि वह शपथ लेने वाले व्यक्ति को रोककर उसे शपथ को सही तरीके से पढ़ने के लिये कहे।

 

3. राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन

भारत के राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के लिए 2020-21 एक महत्वपूर्ण वर्ष है। देश की कंप्यूटिंग शक्ति को बढ़ावा देने के लिए अपनी तरह का पहला प्रयास है। जिसकी शुरुआत 2015 में की गई थी।

मिशन का उद्देश्य

  • इस मिशन की स्थापना देश को सुपरकंप्यूटिंग बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए की गई थी ताकि भारत में सुपरकंप्यूटरों के डिजाइन तैयार करने और स्वदेश में उनका निर्माण करने की क्षमता उत्पन्न करके शैक्षणिक समुदाय, अनुसंधानकर्ताओं, एमएसएमई, और स्टार्टअप्स की बढ़ती अभिकलनात्मक मांगों को पूरा किया जा सके।
  • 2022 तक देश के राष्ट्रीय महत्व के शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में कुछ टेरा फ्लॉप्स2 (टीएफ) से लेकर टेरा फ्लॉप्स (टीएफ) के सैकड़ों और 3 पेटा फ्लॉप्स (पीएफ) के बराबर या उससे अधिक की तीन प्रणालियों के साथ सुपर कंप्यूटरों का एक नेटवर्क स्थापित करना है।
  • कुल 15-20 पीएफ की परिकल्पना वाले सुपरकंप्यूटरों के इस नेटवर्क को 2015 में मंजूरी दी गई थी और बाद में इसमें संशोधन करके इसे कुल 45 पीएफ (45000 टीएफ) का कर दिया गया था, जो उसी लागत के भीतर 6 गुना अधिक गणना शक्ति वाला और बड़ी और जटिल कम्प्यूटेशनल समस्याओं को हल करने में सक्षम था।

मिशन का संचालन

  • राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन को इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया गया है और केन्द्र द्वारा उन्नत कंप्यूटिंग (सी-डैक), पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के विकास के लिए लागू किया गया है।

अब तक मिशन के आउटकम

  • जगह-जगह संशोधित इस मिशन के साथ, पहले सुपरकंप्यूटर को 2019 में स्वदेशी रूप से असेम्बल किया गया था, जिसे परम शिवाय कहा जाता है इसे आईआईटी (बीएचयू) में स्थापित किया गया था और इसका प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किया गया था।
  • इसी तरह के सिस्टम परम शक्ति और परम ब्रह्म IIT-खड़गपुर और IISER, पुणे में स्थापित किए गए थे। वे वेदर एंड क्लाइमेट, कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनामिक्स, बायोइनफॉरमैटिक्स और मैटेरियल साइंस जैसे डोमेन  एप्लिकेशन से लैस हैं।

आगे के लक्ष्य

  • अप्रैल 2020 तक तीन और सुपर कंप्यूटर स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है, आईआईटी-कानपुर, जेएन सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च, बेंगलुरु और आईआईटी-हैदराबाद में एक-एक सुपरकम्यूटर लगाया जाएगा। इनमें 6 पीएफ की सुपरकंप्यूटिंग सुविधा प्रदान की जाएगी।
  • देश भर में विभिन्न आईआईटी, एनआईटी, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और आईआईएसईआर में इस वर्ष दिसंबर तक 11 नई प्रणालियां स्थापित किए जाने की संभावना है, जिसमें भारत में डिजाइन की गई अनेक उप-प्रणालियां और माइक्रोप्रोसेसर्स होंगे, जिन्हें 10.4 पेटाफ्लॉप्स की संचयी क्षमता में लाया जाएगा।
  • लगभग 60-70 संस्थानों को सुपरकंप्यूटिंग सुविधा प्रदान करने और हजारों से अधिक सक्रिय शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, और इसी तरह अन्य के लिए तैयार, एनएसएम ने गति पकड़ ली है और वह न केवल देश के लिए एक कंप्यूटर अवसंरचना बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है बल्कि देश के लिए क्षमता निर्माण भी कर रहा है ताकि सुपरकंप्यूटर विशेषज्ञों की अगली पीढ़ी तैयार हो सके।

सुपर कंप्यूटर

  • सुपर कंप्यूटर, ऐसे कंप्यूटर होते हैं जो आज के समय में गणना-शक्ति तथा हर मामलों में साधारण उपयोग में लाए जाने वाले कंप्यूटर्स से बहुत अधिक तेज़ होते हैं। ये कंप्यूटर्स बहुत बड़े-बड़े परिकलन, अति दीर्घ और अति सूक्ष्म गणनाएं तीव्रता से कर सकता है। इसमें एक साथ कई और किसी भी प्रकार की जटिलतम समस्या का तुरंत हल निकाल सकते हैं। वर्तमान में उपलब्ध कंप्यूटरों में सुपर कंप्यूटर सबसे अधिक तीव्र क्षमता, दक्षता व सबसे अधिक स्मृति क्षमता वाला कंप्यूटर है।
  • आधुनिक परिभाषा के अनुसार, वे कंप्यूटर, जो 500 मेगाफ्लॉप की क्षमता से कार्य कर सकते हैं, सुपर कंप्यूटर कहलाते है। सुपर कंप्यूटर एक सेकंड में एक अरब गणनाएं कर सकता है। इसकी गति को मेगा फ्लॉप से नापते है।
  • इस समय विश्व का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर चीन का सनवे ताइहुलाइट (Sunway TaihuLight) है विश्व का दूसरा सबसे तेज सुपर कंप्यूटर भी चीन का टियान -2 (Tianhe-2) है वहीँ भारत की बात करें तो प्रत्यूष (Cray XC40) भारत में सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर है।

 

4. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 महामारी तेजी से फैलने की चेतावनी जारी की

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 महामारी तेजी से फैल रही है। लेकिन इसके प्रकोप को रोकना अब भी संभव है। ये चेतावनी ऐसे समय आई है, जब विश्व भर में नोवल कोरोना वायरस के संक्रमण से 15 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई हैं। संक्रमित लोगों की संख्या तीन लाख 41 हजार से अधिक हो गई है।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस  ने बताया कि कोविड-19 महामारी त्वरित गति से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि चीन में वायरस के संक्रमण की शुरूआत से 67 दिन के अंदर विश्वभर में एक लाख लोग संक्रमित हुए थे। अगले 11 दिनों में संक्रमित लोगों की संख्या दो लाख हो गई थी। जबकि संक्रमण को तीन लाख लोगों तक पहुंचने में केवल चार दिन लगे।
  • आगे उन्होंने कहा कि इसे भी वास्तविक संख्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि कई देश केवल अत्यधिक गंभीर मामलों की ही जांच कर रहे हैं।
  • संक्रमण से बचाव का संदेश फैलाने के उद्देश्य से टेड्रोस ने कहा कि लोगों को अपने घरों में रहना चाहिए और सामाजिक स्तर पर अन्य लोगों से दूरी बनाये रखने के उपाय करने चाहिए। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इस तरह के उपाय बहुत महत्वपूर्ण है।
  • संक्रमण के फैलाव को धीमा करने के लिए रक्षात्मक उपायों के साथ आक्रमक उपायों की भी आवश्यकता है, इसके लिए हर संदिग्ध मामले की जांच करनी चाहिए, संक्रमित या संदिग्ध व्यक्ति को अलग-थलग रखना चाहिए, प्रत्येक पुष्ट मामले की निगरानी करनी चाहिए और उनके सम्पर्क में आये सभी व्यक्तियों का पता लगाकर क्वैरन्टीन करना चाहिए।
  • इस अवसर पर टेड्रोस ने कोविड-19 का टीका और दवाई विकसित करने के लिए अनुसंधान और विकास कार्य में लगे लोगों की प्रशंसा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोविड-19 का कोई प्रभावी इलाज नहीं है।

नोवेल कोरोना वायरस/ कोविड-19

  • चीन में पाए गए इस वायरस को पहले ‘नोवेल कोरोनावायरस’ नाम दिया गया था बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भ्रम दूर करने के लिए इसे कोविड-19 नाम दिया। इस वायरस से प्रभावित व्यक्ति में निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जुकाम, बुखार, खांसी, कंपकंपी आदि इस वायरस की चपेट में आने के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्राथमिक जांच से मिली जानकारी इस वायरस को समुद्री खाद्य बाजार से जोड़ती है लेकिन यह पुख्ता जानकारी नहीं है। कोरोना वायरस विषाणुओं का परिवार है जो वायरस ऊंट, बिल्ली तथा चमगादड़ सहित पशुओं में पाया जाता है। दुर्लभ स्थिति में पशु कोरोना वायरस बढ़कर लोगों को भी संक्रमित कर सकता है।
  • कोविड-19 की पहली बार चीन की सरकार ने दिसम्बर 2019 में पुष्टि की थी। इसे नोवेल भी कहा गया है क्योंकि इस तरह का वायरस पूरी दुनिया में पहली बार मिला है।
  • यदि इसके नामकरण की बात करें तो कोरोनावायरस को इसका नाम लैटिन शब्द से मिला है। लैटिन में कोरोना का मतलब क्राउन (Crown) होता है। इस वायरस की सतह पर भी क्राउन की तरह स्पाइक्स की सीरीज बनी होती है। यहीं से इसे कोरोना नाम मिला है।
  • अभी तक कोरोना वायरस का कोई विशेष इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। इस विषाणु से होने वाली बीमारी की रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन भी नहीं खोजी गई है। यह वायरस कुछ बीमारियों के रोगियों को गंभीर परिणाम दे सकता है, जैसे- सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS)।

विश्व स्वास्थ्य संगठन

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गयी थी। इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। डब्ल्यूएचओ का मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में स्थित है।
  • यह विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 194 सदस्य देश हैं। भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है।
  • इथियोपिया के डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वर्तमान महानिदेशक हैं।

 

5. वित्त विधेयक बिना चर्चा के संसद से हुआ पारित

  • लोकसभा ने वित्त विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिया है जिसके साथ ही संसद में आम बजट 2020-21 पारित होने की प्रकिया पूरी हो गई है। कोरोना वायरस की वजह से बने हालात के बीच निचले सदन ने बिना चर्चा के वित्त विधेयक को मंजूरी दे दी है।
  • सदन ने सरकार के संशोधनों को स्वीकार करते हुए ध्वनिमत से वित्त विधेयक को मंजूरी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त विधेयक पर सरकारी संशोधन पेश किए थे बाद में राज्यसभा ने भी वित्त विधेयक को बिना चर्चा के लौटा दिया।
  • यह पहला मौक़ा नहीं है कि वित्त विधेयक को बिना किसी चर्चा के पास कर दिया गया हो। 16वीं लोकसभा में 2018 में भी वित्त विधेयक को बिना किसी चर्चा के पास कर दिया गया था और उस समय लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन थीं।

वित्त विधेयक के प्रावधान

  • इसके पास हो जाने के बाद केंद्रीय बजट 2020 में सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को संसद की अनुमति मिल गई है जो कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए है।
  • विधेयक में कर में संशोधन के प्रस्तावों को भी मंज़ूरी मिल गई है जिसमें अन्य बातों के अलावा निगमित कर में 15% की छूट दी गई है। इस विधेयक में आयकर अधिनियम के तहत “निवासी” की परिभाषा को बदल दिया गया है।
  • वर्तमान में उसी को भारत का निवासी समझा जाता है अगर उसके वैश्विक आय पर भारत में कर लगाया जाता है, अगर वे भारत में 182 दिनों से अधिक समय तक रहते हैं। पर अब इस समय सीमा को घटाकर 120 दिन कर दिया गया है।
  • इस प्रावधान को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी कि आयकर अधिनियम की धारा 6 के संशोधन से जो वास्तविक अनिवासी भारतीय हैं उनकी कमाई पर असर पड़ेगा। इस मुद्दे पर बढ़ते विवाद को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने 2 फ़रवरी को एक स्पष्टीकरण जारी किया था कि नए प्रावधान का मतलब उन भारतीय नागरिकों को कर के दायरे में लाना नहीं है जो दूसरे देशों में वैध तरीक़े से काम कर रहे हैं।

क्या है वित्त विधेयक?

  • सरकार के कराधान प्रस्तावों को मूर्त रूप देने की व्यवस्था करने वाले वित्त विधेयक (संविधान के अनुच्छेद 117 (1) में वर्णित), जिसे सामान्य बजट प्रस्तुत किए जाने के तुरन्त बाद लोक सभा में पुरःस्थापित किया जाता है, को विनियोग विधेयक पारित किए जाने के पश्चात् विचार करने और पारित किए जाने के लिए लिया जाता है।
  • नए शुल्क लगाने और संग्रहीत करने या मौजूदा शुल्कों में परिवर्तन से संबंधित विधेयक के कतिपय उपबंध अनन्तिम कर संग्रहण अधिनियम के अन्तर्गत एक घोषणा द्वारा उस दिन के समाप्त होने के पश्चात् तत्काल प्रभाव से लागू हो जाते हैं; जिस दिन विधेयक को पुरःस्थापित किया गया है। संसद को वित्त विधेयक पुरःस्थापित किए जाने के 75 दिनों के भीतर इसे पारित करना होता है।

 

6. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आठ महीने की हिरासत के बाद आज रिहा

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को करीब 7 महीने की हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया है।  दो हफ्ते पहले उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला को भी हिरासत से रिहा किया गया था। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती को अभी भी पीएसए के तहत हिरासत में रखा गया है।

  • पिछले हफ्ते उमर अब्दुल्ला की बहन की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कहा था कि वे अगले सप्ताह तक उमर अब्दुल्ला कि हिरासत के बारे में अपना फैसला न्यायालय को सूचित करें।
  • चार अगस्त 2019 को उन्हें एहतियातन नजरबंद किया गया था। इसकी अवधि पूरी होने के बाद पांच फरवरी को उन पर जन सुरक्षा अधिनियम में निरुद्ध कर दिया गया था क्योंकि पिछले साल 5 अगस्त को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटा दिया था और राज्य को लद्दाख और कश्मीर के रूप में राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांट दिया था।

क्या है जन सुरक्षा कानून जिसके तहत हिरासत में थे उमर अब्दुल्ला?

  • साल 1978 में शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को इमारती लकड़ी की तस्करी को रोकने और तस्करों को ‘प्रचलन से बाहर’ रखने के लिए जम्मू-कश्मीर में लागू किया था। जन सुरक्षा अधिनियम उन लोगों पर लगाया जा सकता है, जिन्हें लोगों की सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो।
  • जन सुरक्षा कानून के तहत 16 वर्ष से अधिक उम्र के  किसी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। वर्ष 2010 में इसमें संशोधन किया गया था, जिसके तहत बिना ट्रायल के ही लोगों को 6 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक कर सकती है।
  • जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत के आदेश संभागीय आयुक्तों या ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किये जा सकते हैं। इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार हिरासत में लिये गए किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई मुकदमा, अभियोजन या कोई अन्य कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी।
  • यह “बेरहम” (Draconian) इसीलिए कहा जाता है क्योंकि यदि जम्मू-कश्मीर सरकार को यह आभास हो कि किसी व्यक्ति के कृत्य से राज्य की सुरक्षा को खतरा है तो उसे 2 वर्षों तक प्रशासनिक हिरासत में रखा जा सकता है। साथ ही यदि किसी व्यक्ति के कृत्य से सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने में कोई बाधा उत्पन्न होती है तो उसे 1 वर्ष की प्रशासनिक हिरासत में लिया जा सकता है। यह कानून उस व्यक्ति पर भी लागू किया जा सकता है जो पहले से ही पुलिस हिरासत में है।
  • जन सुरक्षा कानून का तार्किक उपयोग जरूरी है किन्तु जम्मू-कश्मीर में शुरुआत से ही इसका तार्किक उपयोग नहीं किया गया वर्ष 1990 तक तत्कालीन सरकारों द्वारा राजनीतिक विरोधियों को हिरासत में लेने के लिए इसका उपयोग किया गया।
  • जुलाई 2016 में आतंकवादी बुरहान वानी के सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद कश्मीर में पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। इसके बाद सरकार ने अलगाववादियों पर नकेल कसने के लिए जन सुरक्षा कानून को लागू किया था।

 

7. राज्यसभा की रिक्त हो रही सीटों पर निर्वाचन आयोग ने चुनाव किया स्थगित

निर्वाचन आयोग ने आगामी अप्रैल माह में राज्यसभा की रिक्त हो रही 55 सीटों पर होने वाले चुनाव को कोरोना वायरस के संक्रमण से उपजे संकट को देखते हुये स्थगित कर दिया है। आयोग द्वारा जारी बयान में इस आशय के फैसले की जानकारी देते हुये बताया गया कि जल्द ही चुनाव की नई तारीख की घोषणा की जायेगी।

  • उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को आयोग द्वारा 17 राज्यों की 55 राज्यसभा सीटों के लिये 26 मार्च को चुनाव कराने की घोषणा की गई थी। राज्यसभा की 55 सीटों के लिए चुनाव होने थे, जिनमें से 37 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये गये थे बाकी की 18 सीटों के लिए चुनाव होने हैं।
  • आयोग ने कहा कि यातायात सहित अन्य सेवाओं पर अस्थायी रोक को देखते हुये राज्यसभा की सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को स्थगित करने का फैसला किया है। आयोग जल्द ही चुनाव की नई तारीख की घोषणा करेगा।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 153 में उल्लेख है कि उचित वजहों को देखते हुए निर्वाचन आयोग धारा 30 या धारा 39 की उप धारा (1) के अंतर्गत अधिसूचना में संशोधन करके किसी भी चुनाव को पूरा करने का समय बढ़ा सकता है। इस क्रम में चुनाव आयोग ने अधिनियम की धारा 153 के प्रावधानों के तहत संबंधित चुनाव को स्थगित कर दिया है और इसकी समयसीमा बढ़ा दी है।

कैसे होता है राज्यसभा सदस्यों का चुनाव?

  • राज्यसभा में किस राज्य से कितने सांसद होंगे यह उस राज्य की जनसंख्या के हिसाब से तय रहता है। राज्यसभा के सदस्य का चुनाव राज्य विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं। प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों की संख्या ज़्यादातर उसकी जनसंख्या पर निर्भर करती है।
  • इसे समझने के लिए उत्तर प्रदेश का उदाहरण लेते हैं। यहां विधायकों की कुल संख्या 403 है अब प्रत्येक सदस्य को राज्यसभा पहुंचने के लिए कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए इसे कैसे निकाला जाता है यह तय करने के लिए कुल विधायकों की संख्या को जितने सदस्य चुने जाने हैं उसमें एक जोड़कर विभाजित किया जाता है।
  • उदाहरण स्वरुप 10 राज्यसभा सदस्यों का चयन होना है। इसमें 1 जोड़ने से यह संख्या 11 होती है अब कुल सदस्य 403 हैं तो उसे 11 से विभाजित करने पर 36.66 आता है। इसमें फिर 1 जोड़ने पर यह संख्या 37.66 हो जाती है यानी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद बनने के लिए उम्मीदवार को 37 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी।
  • एक उम्मीदवार को चुने जाने के लिए न्यूनतम मान्य वोट चाहिए होते हैं। वोटों की गिनती सीटों की संख्या पर निर्भर करती है। इन चुनवों में एक विशेष तरीके से वोटिंग होती है। इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहते हैं। सिंगल वोट यानी मतदाता एक ही वोट देता है, लेकिन वह कई उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकता के आधार पर वोट देता है। अर्थात् वह बैलेट पेपर पर यह बताता है कि उसकी पहली पसंद कौन है और दूसरी, तीसरी कौन।
  • यदि पहली पसंद वाले वोटों से विजेता का फैसला नहीं हो सका, तो उम्मीदवार के खाते में वोटर की दूसरी पसंद को नए सिंगल वोट की तरह ट्रांसफर किया जाता है। इसलिये इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।

भारत निर्वाचन आयोग

  • भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए गया था। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत 25 जनवरी 1950 को की गयी थी।
  • आयोग में वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। जब यह 1950 में गठित हुआ तब से और 15 अक्टूबर 1989 तक केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित यह एक एकल-सदस्यीय निकाय था। 16 अक्टूबर, 1989 से 1 जनवरी, 1990 तक यह तीन-सदस्यीय निकाय बन गया था फिर यह 2 जनवरी, 1990 से 30 सितम्बर, 1993 तक यह एक एकल-सदस्यीय निकाय बन गया और फिर 1 अक्टूबर, 1993 से अब तक यह तीन-सदस्यीय निकाय है।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करता है। मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या आयु 65 साल, जो पहले हो, का होता है। चुनाव आयुक्त की प्रतिष्ठा और वेतन भारत के सर्वोच्च न्यायलय के न्यायधीश के सामान होते है। मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता हैं।
  • भारत निर्वाचन आयोग के पास विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति आदि चुनाव से सम्बंधित कमान होती है जबकि ग्रामपंचायत, नगरपालिका, महानगर परिषद् और तहसील एवं जिला परिषद् के चुनाव की कमान सम्बंधित राज्य निर्वाचन आयोग के पास होती है।
  • वर्तमान में भारत के निर्वाचन आयोग में 3 आयुक्त कार्यरत हैं जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोरा हैं जबकि चुनाव आयुक्त के पद पर अशोक लवासा और सुशील चंद्रा हैं।

 

8. प्रधानमंत्री ने डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सामाजिक सशक्तिकरण और सेवा भाव से जुड़े डॉ. लोहिया के महान कार्य और उनके विचार देशवासियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।’

डॉ. राम मनोहर लोहिया

  • डॉ. राममनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जनपद में (वर्तमान-अम्बेडकर नगर जनपद) अकबरपुर नामक स्थान में हुआ था। उनके पिताजी हीरालाल पेशे से अध्यापक व राष्ट्रचिंतक थे।
  • उनके पिताजी गाँधीजी के अनुयायी थे। जब वे गांधीजी से मिलने जाते तो राम मनोहर को भी अपने साथ ले जाया करते थे। इसके कारण गांधीजी के विराट व्यक्तित्व का उन पर गहरा असर हुआ। पिताजी के साथ 1918 में अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन में वे पहली बार शामिल हुए थे।
  • लोकमान्य गंगाधर तिलक की मृत्यु के दिन विद्यालय के लड़कों के साथ 1920 में पहली अगस्त को हड़ताल की थी। गांधी जी की पुकार पर 10 वर्ष की आयु में उन्होंने स्कूल त्याग दिया था। 1921 में फैजाबाद किसान आंदोलन के दौरान जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात हुई। 1924 में प्रतिनिधि के रूप में कांग्रेस के गया अधिवेशन में शामिल हुए थे। 1925 में मैट्रिक की परीक्षा में प्रथम आए। उनकी इंटर की दो वर्ष की पढ़ाई बनारस के काशी विश्वविद्यालय में हुई थी। उन्होंने कॉलेज के दिनों से ही खादी पहनना शुरू कर दिया था।
  • इण्टर पास करने के बाद सन् 1927 में लोहिया कलकत्ता आ गए। उन्होंने सेंट जेवियर्स तथा स्काटिश चर्च जैसे ख्यातिनामा महाविद्यालय को छोड़कर विद्यासागर महाविद्यालय में प्रवेश लिया था, जो उस समय “भेंड़ों की सराय” के नाम से जाना जाता था। लेकिन इस कॉलेज के प्राचार्य राष्ट्रीय विचारधारा से सम्बद्ध थे और लोहिया राष्ट्रीय विचारधारा के पूर्णत: समर्थक थे। लोहिया का अंग्रेज़ी भाषा पर ख़ासा अधिकार था।
  • 1930 जुलाई को लोहिया अग्रवाल समाज के कोष से पढ़ाई के लिए इंग्लैंड रवाना हुए। वहाँ से वे बर्लिन गए। विश्वविद्यालय के नियम के अनुसार उन्होंने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो॰ बर्नर जेम्बार्ट को अपना प्राध्यापक चुना। 3 महीने में जर्मन भाषा सीखी। 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने दाण्डी यात्रा प्रारंभ की। जब नमक कानून तोड़ा गया तब पुलिस अत्याचार से पीड़ित होकर पिता हीरालाल जी ने लोहिया को विस्तृत पत्र लिखा।
  • 1928 से अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन में सक्रिय हुए, साइमन कमिशन के बहिष्कार के लिए छात्रों के साथ आंदोलन किया तथा कलकत्ता में युवकों के सम्मेलन में जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष तथा सुभाषचंद्र बोस और लोहिया विषय निर्वाचन समिति के सदस्य चुने गए।
  • 9 अगस्त 1942 को जब गांधी जी व अन्य कांग्रेस के नेता गिरफ्तार कर लिए गए, तब लोहिया ने भूमिगत रहकर ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को पूरे देश में फैलाया। लोहिया, अच्युत पटवर्धन, सादिक अली, पुरूषोत्तम टिकरम दास, मोहनलाल सक्सेना, रामनन्दन मिश्रा, सदाशिव महादेव जोशी, साने गुरूजी, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, अरूणा आसिफअली, सुचेता कृपलानी और पूर्णिमा बनर्जी आदि नेताओं का केन्द्रीय संचालन मंडल बनाया गया। लोहिया पर नीति निर्धारण कर विचार देने का कार्यभार सौंपा गया।
  • देश में गैर-कांग्रेसवाद की अलख जगाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया चाहते थे कि दुनियाभर के सोशलिस्ट एकजुट होकर मजबूत मंच बनाए। लोहिया भारतीय राजनीति में गैर कांग्रेसवाद के शिल्पी थे और उनके अथक प्रयासों का फल था कि 1967 में कई राज्यों में कांग्रेस की पराजय हुई, हालांकि केंद्र में कांग्रेस जैसे-तैसे सत्ता पर काबिज हो पायी। हालांकि लोहिया 1967 में ही चल बसे लेकिन उन्होंने गैर कांग्रेसवाद की जो विचारधारा चलायी उसी की वजह से आगे चलकर 1977 में पहली बार केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकारी बनी। लोहिया मानते थे कि अधिक समय तक सत्ता में रहकर कांग्रेस अधिनायकवादी हो गयी थी और वह उसके खिलाफ संघर्ष करते रहे।

 

9. कारोबार सुरक्षित रखने में मदद के लिए इन्वेस्ट इंडिया बिजनेस इम्युनिटी प्लेटफार्म की शुरुआत

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत भारत की राष्ट्रीय निवेश संवर्धन और सुविधा एजेंसी (Investment Promotion & Facilitation Agency) ने इन्वेस्ट इंडिया बिज़नेस इम्युनिटी प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है। इस प्लेटफार्म को इन्वेस्ट इंडिया की वेबसाइट पर डाला गया है।

  • इसका उद्देश्य  व्यवसायों और निवेशकों को कोविड-19 (कोरोना वायरस) से निपटने के लिए भारत की ओर से की गई वास्तविक तैयारियों की ताजा जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करना है। यह प्लेटफ़ॉर्म कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियों, इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारो की विभिन्न पहलों पर नवीनतम जानकारी प्रदान करता है और ई-मेल के माध्यम से और व्हाट्सएप पर प्रश्नों का उत्तर उपलब्ध कराता है।
  • चौबीसों घंटे काम करने वाला यह प्लेटफार्म कारोबार से संबंधित शिकायतों को निपटाने में भी मदद करता है। इसे विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों की विशेषज्ञों की एक टीम ने तैयार किया है जो सभी तरह के प्रश्नों का तत्काल समाधान उपलब्ध कराती है।
  • इन्वेस्ट इंडिया ने सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्योगों की जरुरतों और आवश्यकताओं से जुडे सवालों के समाधान के लिए लघु उद्योग विकास बैंक के साथ साझेदारी की भी घोषणा की है।
  • प्लेटफॉर्म में कोविड-19 की जांच की सुविधा वाले स्थानों , इसके लिए विशेष अनुमति तथा स्थानों से जुड़ी विशिष्ट जानकारी पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न शामिल हैं। यह पोर्टल प्रमुख भारतीय कंपनियों द्वारा कोरोना वायरस से निपटने के लिए अपने यहां की गई तैयारियों जैसे की कर्मचारियों को लाने ले जाने वाले वाहनों को नियमित रूप से संक्रमण मुक्त करना, अपने उत्पादों की बिक्री के लिए वैकल्पिक बाजारों में ऑर्डर देना, बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली को स्थगित करना, चिकित्सा कार्य बल गठित करना, प्रशिक्षुओं से घर जाने का अनुरोध करना, कारोबार जारी रखने की योजना तैयार करना, आगंतुकों के प्रवेश पर रोक, हवाई यात्रा को स्थगित करना,  वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग और टेली-कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग तथा ऑनलाइन समाधान और अन्य अनूठी पहल विकसित करना शामिल है।
  • यह बिजनेस इम्युनिटी प्लेटफ़ॉर्म लोगों को उन सभी सूचनाओं तक पहुंच प्राप्त करने में मदद करेगा, जो उन्हें अपने घरों में आराम से रहते हुए चाहिए। इस प्लेटफार्म के जरिए, इन्वेस्ट इंडिया का लक्ष्य सुविधाओं को आपके द्वार तक लाना है।

प्रष्ठभूमि

  • ऐसे समय में जबकि कोविड-19 सामान्य जीवन को बाधित कर रहा है, देश भर के व्यवसायों पर इस संकट के प्रभाव का लगातार आकलन किया जा रहा है। सरकार ने अपनी ओर से, व्यवसायों के लिए समय पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कारोबारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इन दिशा-निर्देशों का उनके व्यवसायों के लिए क्या मतलब है। व्यवसायों द्वारा संकट की अनिश्चितता को महसूस किए जाने के बीच यह प्लेटफ़ॉर्म 21 मार्च, 2020 को लॉन्च किया गया था।

 

10. साओ पाउलो स्टेडियम बना ओपन एयर अस्पताल

 

साओ पाउलो के पाकाएम्बू स्टेडियम को कोरोना वायरस संक्रमण के बीच ओपन एयर अस्पताल बना दिया गया है। इस 45000 की क्षमता वाले स्टेडियम में 200 से अधिक बिस्तर लग सकते हैं। यह 10 दिन में पूरी तरह से तैयार हो जायेगा।

  • चूंकि स्टेडियम के आसपास कई बड़े अस्पताल हैं इसीलिए इसे उचित कदम कहा जाएगा और यह क़दम इसीलिए उठाया गया है ताकि मौजूदा हालात से निपटने के लिए अस्पतालों की क्षमता बढाई जा सके।
  • ब्राजील के शीर्ष फुटबॉल क्लबों ने कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में मदद के लिए अपने स्टेडियम स्वास्थ्य विभाग को देने की पेशकश की है। इन पर फील्ड अस्पताल और क्लीनिक बनाए जा सकते हैं। देश में फुटबॉल आगामी सूचना तक स्थगित कर दिया गया है।
  • ब्राजील में अब तक कोविड-19 के 1600 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें 25 लोगों की मौत हो चुकी है।

 

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