आज के टॉप करेंट अफेयर्स

सामयिकी: 24 मार्च 2020

1. ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए छात्र लिखना-पढ़ना जारी रखें: रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कोविड-19 से बचने के लिए शिक्षण संस्थानों की ऐहतियातन बंदी अवधि के दौरान छात्रों से उपलब्ध ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए अपनी पढ़ाई लिखाई जारी रखने की अपील की है।

  • मंत्री ने शिक्षण संस्थानों से डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा देने और छात्रों को विभिन्न डिजिटल/ई-लर्निंग प्लेटफार्मों के बारे में जागरूक करने का आग्रह किया है, जो ऑनलाइन शिक्षा के लिए एमएचआरडी द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
  • नीचे दिए गए पोर्टलों और एप्लीकेशनों पर लॉगिन और विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक सुविधाएं मुफ्त हैं।

स्कूली शिक्षा के लिए उपलब्ध मानव संसाधन विकास मंत्रालय के कुछ डिजिटल पहल/प्लेटफॉर्म इस प्रकार हैं:

i)   दिक्षा:

  • दिक्षा कार्यक्रम के तहत विभिन्न भाषाओं में 12वीं कक्षा के लिए सीबीएसई, एनसीआरटी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तैयार किए किए 80000 ई-बुक्स उपलब्ध हैं। पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को क्यूआर कोड के माध्यम से भी देखा जा सकता है। इस ऐप को iOS और गूगल प्ले स्टोर के जरिये डाउनलोड किया जा सकता है।

ii)  ई-पाठशालाः

  • एनसीआरटी ने इस वेब पोर्टल पर कक्षा 1 से 12वीं तक के लिए विभिन्न भाषाओं में 1886 ऑडियो, 2000 वीडियो, 696 ई-बुक्स (ई-पब्स) और 504 फ्लिप बुक अपलोड किए हैं। इसका भी ऐप डाउनलोड किया जा सकता है।

 

(iii)        मुक्त शैक्षिक संसाधनों का राष्ट्रीय भंडारण (NROER – National Repository of Open Educational Resources)

  • एनआरओईआर पोर्टल पर कुल 14527 फाइल्स उपलब्ध हैं जिनमें विभिन्न भाषाओं में 401 संकलन, 2779 दस्तावेज़, 1345 इंटरैक्टिव, 1664 ऑडियो, 2586 चित्र और 6153 वीडियो शामिल हैं। इसकी वेबसाइट पर ये सभी सामग्री उपलब्ध है।

स्कूली और उच्च शिक्षा के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्लेटफॉर्म निम्नानुसार हैं:

i)   स्वयं

  • स्वयं इंजीनियरिंग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान, कानून और प्रबंधन पाठ्यक्रम सहित सभी विषयों में स्कूली (कक्षा 11वीं से 12वीं) और उच्च शिक्षा (स्नातक, स्नातकोत्तर कार्यक्रम) दोनों को कवर करने वाले 1900 पाठ्यक्रमों की सामग्री मुहैया कराने वाला राष्ट्रीय ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म है।
  • स्वयं की एक अनूठी विशेषता यह है कि, यह पारंपरिक शिक्षा के साथ एकीकृत है। स्वयं पाठ्यक्रम के लिए (अधिकतम 20%) अंक दिए जा सकते हैं।

ii)  स्वयं प्रभा

  • डी2एच पर 32 ऐसे टीवी चैनल हैं जिन पर पूरे सप्ताह 24 घंटे शैक्षिक सामग्री यानी शिक्षा संबंधी कार्यक्रमों का प्रसारण होता है। इन चैनलों को पूरे देश में डीडी फ्री डिश सेट टॉप बॉक्स और एंटेना के जरिये देखा जा सकता है।
  • चैनल के कार्यक्रमों की सूची और अन्य विवरण पोर्टल पर उपलब्ध हैं। ये चैनल स्कूली शिक्षा (कक्षा IX से XII) और उच्च शिक्षा (स्नातक, स्नातकोत्तर, इंजीनियरिंग, स्कूली बच्चों से इतर, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और शिक्षक प्रशिक्षण) दोनों को कवर करते हैं।
  • इसमें कला, विज्ञान, वाणिज्य, परफार्मिंग आर्ट, सामाजिक विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, कानून, चिकित्सा, कृषि और मानविकी विषयों संबंधी सामग्री शामिल है।

 

2. सरकार ने कोविड-19 के नियंत्रण के लिए 21 चिकित्सा विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति गठित की

केंद्र सरकार ने देश में कोविड-19 की रोकथाम के लिए जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति गठित की है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के पॉल को 21 सदस्यों वाली इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

  • केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक समिति के सह-अध्यक्ष बनाये गये हैं।
  • इसके अलावा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के महानिदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, दिल्ली के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र के निदेशक डॉ. सुजीत सिंह, पुणे के संक्रामक रोग संस्थान के निदेशक डॉ. संजय पुजारी और केरल के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. रंजन खोबरागडे को सदस्य के रूप में समिति में शामिल किया गया है।

 

3. रुपया 95 पैसे गिरकर 76 के स्तर से नीचे आया

 

  • भारतीय रुपया 23 मार्च को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 पैसे की गिरावट के साथ 76.15 के स्तर पर आ गया है यह रुपया का सर्वकालिक निम्न स्तर है। इस दौरान देश में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों और घरेलू इक्विटी बाजार में भारी बिकवाली के चलते रुपये पर दबाव देखने को मिला है।
  • 23 मार्च को विदेशी मुद्रा बाजार में कमजोर शुरुआत के साथ रुपया 75.90 पर खुला और आगे गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 76.15 के निचले स्तर पर आ गया। रुपये में पिछले बंद भाव के मुकाबले 95 पैसे से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है क्योंकि रुपया 20 मार्च (शुक्रवार) को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 75.20 पर बंद हुआ था।

भारतीय मुद्रा के लगातार गिरने की वजह

  • विदित है कि निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। देश में इस समय कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बढ़कर करीब 400 हो चुकी है। इस बीमारी के चलते दुनिया भर में लाखों लोग संक्रमित हैं और 14,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
  • फेडरल रिज़र्व रेट में वृद्धि और अमरीकी सरकार से ऋण लेने की दर बढ़ने से जोख़िम की स्थिति पैदा हुई है जिसकी वजह से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं में गिरावट देखी जा रही है।

रुपये में गिरावट के परिणाम

  • आयात : भारतीय रूपये के कमज़ोर होने के कारण आयातकों को नुकसान होगा, आयात करने के लिए भारतीय कंपनियों तथा सरकार को पहले के मुकाबले अधिक राशी अदा करनी पड़ेगी।
  • निर्यात : भारतीय रुपये के कमज़ोर होने से आयातकों को लाभ होगा, डॉलर को रुपये ने कन्वर्ट करने से आयातकों को पहले की मुकाबले अधिक अधिक राशि मिलेगी।
  • अर्थव्यवस्था : भारतीय रुपये में गिरावट होने के कारण आयात महंगे हो जायेंगे। इससे तेल की कीमतें बढेंगी (भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है), इससे भारत के चालू खाता घाटा पर दबाव पड़ेगा।

 

4. ट्राइफेड ने आदिवासी उद्यमिता के विकास के लिए पेश किया “आदिवासियों के लिए तकनीक” कार्यक्रम

ट्राइफेड ने 5 करोड़ आदिवासी उद्यमियों के जीवन में बदलाव के उद्देश्य से एक विशेष “आदिवासियों के लिए तकनीक” परियोजना का शुभारम्भ किया है।

  • ट्राइफेड और आईआईटी-कानपुर ने आदिवासी उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम के आयोजन के पहले चरण में आईआईटी-रुड़की, आईआईएम इंदौर, कलिंगा सामाजिक विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर और सृजन, जयपुर के साथ मिलकर इसकी पेशकश की है।
  • एमएसएमई मंत्रालय द्वारा समर्थित ट्राइफेड की पहल “आदिवासियों के लिए तकनीक” का उद्देश्य प्रधानमंत्री वन धन योजना (पीएमवीडीवाई) के अंतर्गत नामांकित वन्य फसल बीनने वाले आदिवासियों में क्षमता विकास और उनमें उद्यमशीलता कौशल विकसित करना है। इसके तहत प्रशिक्षुओं को छह हफ्ते तक चलने वाले 30 दिन के कार्यक्रम से गुजरना होगा, जिसमें 120 सत्र होंगे।
  • आदिवासियों के लिए तकनीक कार्यक्रम के अंतर्गत भागीदार वन्य उपज के मूल्य वर्धन और प्रसंस्करण में उद्यमशीलता से जुड़ी पाठ्यक्रम सामग्री का विकास करेंगे। इस पाठ्यक्रम में उपलब्धि की प्रेरणा और सकारात्मक मनोविज्ञान, उद्यमशीलता क्षमताएं, उत्पाद की स्थिति- ग्रेडिंग/स्टोरिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, उत्पाद प्रमाणन, बैंकेबल परियोजना रिपोर्ट तैयार करने, बाजार सर्वेक्षण, कारोबारी योजना तैयार करने, वितरण चैनल- खुदरा बिक्री, विनिर्माताओं के साथ आपूर्ति अनुबंध, अच्छी विनिर्माण प्रक्रिया (जीएमपी), पूर्ण गुणवत्ता नियंत्रण (टीक्यूसी), स्वच्छ परिचालन प्रबंधन, परिचालन और वित्तीय विवरण, कारोबार रणनीति एवं विकास, डिजिटल साक्षरता और आईटी स्वीकार्यता आदि शामिल हैं।

वन धन योजना

  • 14 अप्रैल, 2018 को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीजापुर, छत्तीसगढ़ में अम्बेडकर जयंती के महोत्सव के दौरान इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य गैर-लकड़ी के छोटे वन उत्पादन (MFP), वन की वास्तविक संपत्ति का उपयोग करके जनजातियों के लिए आजीविका उत्पादन करना है।
  • इसके लिए, योजना उन्हें वन उत्पादन के मूल्यवर्धन के लिए कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण भी प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान और कौशल को प्रौद्योगिकी और आईटी की मदद से और निखारना है। इसका मुख्य उद्देश्य जनजातीय जमाकर्ताओं और कारीगरों की एमएफपी-केंद्रित आजीविका के विकास को बढ़ावा देना है।
  • इसे प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करके केंद्रीय स्तर पर जनजातीय मामलों के मंत्रालय के माध्यम से तथा राष्ट्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी के रूप में भारत के जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) द्वारा लागू किया जा रहा है।
  • वन धन विकास केंद्र: वन संपदा से समृद्ध जनजातीय जिलों में वन धन विकास केंद्र जनजातीय समुदाय के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। ट्राइफेड 28 राज्यों के 3.6 लाख जनजातीय वन्य उपज बीनने वालों के लिए 1,200 “वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके)” की स्थापना कर रहा है। एक सामान्य वीडीवीके में 15 स्व सहायता समूह (एसएचजी) होते हैं और एक एसएचजी में 20 आदिवासी होते हैं।
  • वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और प्राथमिक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुविधा की स्थापना करते हैं। स्थानीय रूप से इन केंद्रों का प्रबंधन प्रबंध समिति द्वारा किया जाता है।

ट्राइफेड (TRIFED)

  • भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (TRIFED – द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) को भारत सरकार द्वारा 1987 में स्थापित किया गया था ट्राइफेड का मूल उद्देश्य आदिवासी लोगों द्वारा जंगल से एकत्र किये गए या इनके द्वारा बनाये गए उत्पादों को बाजार में सही दामों पर बिकवाने की व्यवस्था करना है।
  • भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड) जनजातीय मंत्रालय के अंतर्गत बहु-राज्य सहकारी सोसायटी है। ट्राइफेड राष्ट्रीय जनजातीय क्रॉफ्ट एक्सपो “आदि महोत्सव” जैसे प्रदर्शनियां भी आयोजित करता है और जनजातीय उत्पादों के विपणन को प्रोत्साहित करता है। यह जनजातीय दस्तकारों को सुविधा उपलब्ध कराता है, ताकि वे बाजार आवश्यकताओं का जायजा लेने के लिए कला प्रेमियों के साथ सीधी बातचीत कर सकें। पिछले कुछ वर्षों में उत्पादों की बिक्री के लिए यह जनजातीय दस्तकारों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहा है।
  • ट्राइफेड का मुख्य कार्यालय नई दिल्ली में है इसके प्रधान कार्यालय के अलावा देश के विभिन्न स्थानों पर इसके 13 क्षेत्रीय कार्यालयों का नेटवर्क है। ट्राइफेड, जनजातीय मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की सर्वोच्च संस्था है।

 

5. हंटिंगटन बीमारी में एक प्रमुख कोशिकीय ढ़ांचे का खुलासा

डॉ. अमिताभ मजूमदार के नेतृत्व में पुणे में नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस (एनसीसीएस) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर लाइफ साइंसेज में अपने काम पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। जिसमें बताया है कि रोगजनक हंटिंगिन प्रोटीन कोशिकाओं में समग्र प्रोटीन उत्पादन में कमी का कारण बनती हैं।

  • इस टीम में एनसीसीएस से हिरण्मय जोयाग, विघ्नेश घाटपांडे, मेघल देसाई, मैथली सरकार एवं अंशु रैना और एसपी पुणे विश्वविद्यालय से मृणालिनी शिंदे, रुता चिताले, अंकिता देव एवं तानिया बोस शामिल हैं।

क्या है हंटिंगटन रोग?

  • हंटिंगटन रोग (एचडी) मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला एक प्रगतिशील आनुवंशिक विकार है जिसके कारण अनियंत्रित गतिविधियां, संतुलन एवं गतिविधियों समन्वय न होना, संज्ञानात्मक क्षमताओं में गिरावट, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और स्मृति ह्रास, मनोभाव में बदलाव और व्यक्तित्व परिवर्तन जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
  • एचटीटी नामक जीन में उत्परिवर्तन (mutation) के कारण यह बीमारी होती है। एचटीटी जीन हंटिंगटिन नामक प्रोटीन के उत्पादन में शामिल होते हैं। वे प्रोटीन बनाने के लिए निर्देश देते हैं। जब जीन उत्परिवर्तित होते हैं तो वे असामान्य हंटिंगटिन प्रोटीन के उत्पादन के लिए असामान्य निर्देश देते हैं और इससे क्लंप्स यानी गुच्छ बन जाते हैं। ये क्लंप्स मस्तिष्क की कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को बाधित करते हैं। इससे अंततः मस्तिष्क में न्यूरॉन्स की मृत्यु हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप हंटिंगटन रोग होता है।

हालांकि यह ज्ञात है कि असामान्य हंटिंगटिन प्रोटीन द्वारा तैयार क्लंप्स कई कोशिकीय प्रक्रियाओं को बाधित करते हैं लेकिन अभी यह ज्ञात नहीं है कि क्या वे कोशिका में अन्य प्रोटीन के निर्माण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

क्या है अध्ययन?

  • वैज्ञानिकों की एक टीम ने फलों पर लगने वाली मक्खियों में एचटीटी जीन का अध्ययन करने के दौरान देखा कि रोगजनक हंटिंगिन प्रोटीन कोशिकाओं में समग्र प्रोटीन उत्पादन में कमी का कारण बनता है। हंटिंगटिन क्लंप्स ओआरबी2 नामक एक अन्य प्रोटीन के एक साथ अणुओं को इकट्ठा (सिक्वेस्टर) करते हैं जो प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया में शामिल है।
  • उन्होंने अनुमान लगाया कि हंटिंगटिन क्लंप्स संभवतः ओआरबी2 अणुओं का निर्माण करते हैं और वे प्रोटीन बनाने से जुड़े अपने सामान्य कार्य को पूरा करने के लिए अनुपलब्ध थे। इससे कोशिका में प्रोटीन में कमी देखी गई। इसे स्पष्ट करने के लिए उन्होंने कोशिकाओं को अधिक मात्रा में ओआरबी2 उत्पादन करने के लिए प्रेरित किया और पाया कि इससे वास्तव में दोषपूर्ण हंटिंगटिन प्रोटीन के प्रतिकूल प्रभाव को कम किया गया। इस प्रकार यह उनके अनुमानों के मुताबिक रहा।
  • मनुष्यों में सीपीईबी नामक प्रोटीन का परिवार फल मक्खियों में ओआरबी2 प्रोटीन जैसा ही होता है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन को आगे बढ़ाया और पाया कि सीपीईबी प्रोटीन भी ओआरबी2 प्रोटीन अणुओं के समान रोगजनक हंटिंगटिन क्लंप्स द्वारा अलग किया जाता है। इससे पता चलता है कि फल मक्खियों में इस समूह द्वारा किए गए अध्ययन से मिली जानकारी मानव में एचडी को समझने के लिए प्रासंगिक और मूल्यवान हैं।
  • ओआरबी2 प्रोटीन फल मक्खियों में स्मृति के रखरखाव के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए हंटिंगटिन क्लंप्स द्वारा ओआरबी2 का प्रच्छादन एचडी से संबंधित स्मृति रोगों के लिए प्रासंगिक हो सकता है। डॉ. मजूमदार के इन खुलासों से उम्मीद की जा रही है कि इस बीमारी को बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे की खोज का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

6. लुप्तप्राय घरेलू गौरैया को चाहिए मानवीय संरक्षण

घरेलू गौरैया, एक समय हमारे तत्कालिक पर्यावरण का अभिन्न अंग हुआ करता था, लेकिन लगभग दो दशक पहले सभी जगहों से गायब हो गया है। आम पक्षी जो हमारे घरों के क्षिद्रों में रहता था और हमारे बचे हुए भोजन को खाया करता था, आज इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की सूची में यह एक लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में आता है।

घरेलू गौरैया और मानव का इतिहास

  • वैज्ञानिक अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि घरों में रहने वाले गौरैये सभी जगहों पर हमारा अनुसरण करते हैं और हम जहां पर नहीं रहते हैं, वे वहां पर नहीं रह सकते हैं। बेथलहम की एक गुफा से 4,00,000 साल पुराने जीवाश्म के साक्ष्य मिले हैं, जिससे पता चलता है कि घरों में रहने वाले गौरैयों ने प्रारंभिक मनुष्यों के साथ अपना स्थान साझा किया था।
  • रॉयल सोसायटी ऑफ लंदन की 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंसानों और गौरैयों के बीच का बंधन 11,000 साल पुरानी बात है और घरेलू गौरैया के स्टार्च-फ्रेंडली होना हमें अपने विकास से जुड़ी कहानी को बताते हैं। अध्ययन में कहा गया कि कृषि के द्वारा तीन अलग-अलग प्रजातियों – कुत्तों, घरेलू गौरैयों और मनुष्यों में इसी प्रकार के अनुकूलन की शुरूआत हुई।
  • कृषि की शुरुआत के आसपास, शहरी घरेलू गौरैये अन्य जंगली पक्षियों से अलग हो गए; इसके पास जीन की एक जोड़ी है, AMY2A, जो इसको जटिल कार्बोहाइड्रेट को पचाने में मदद करता है, यही कारण है कि यह स्टार्च गेहूं और चावल वाले हमारे प्यार को साझा करता है।

क्या है घरेलू गौरैया की संख्या में कमी का कारण?

  • संरक्षणवादी हमारे घरों की प्रतिकूल वास्तुकला, हमारी फसलों में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग, ध्वनि प्रदूषण जो ध्वनिक पारिस्थितिकी को बाधित करते हैं और वाहनों से निकले हुए धुएं को घरेलू गौरैये की संख्या में गिरावट का कारण बताते हैं।
  • इस बारे में बहस कि क्या डिजिटल क्रांति ने हवाई मार्गों को अवरूद्ध कर दिया है वह अनिर्णायक है, लेकिन आम लोगों का कहना है कि यह महज एक संयोग नहीं है कि 1990 के दशक के उत्तरार्ध में घरेलू गौरैया गायब होना शुरू हुआ, जब मोबाइल फोन का भारत में आगमन में हुआ था।

विश्व गोरैया दिवस

  • वैज्ञानिक- संरक्षणकर्ता मोहम्मद दिलावर द्वारा संचालित “नेचर फॉरएवर” नामक संगठन द्वारा चलाए गए एक जोरदार अभियान के कारण, 20 मार्च ‘विश्व गौरैया दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा और 2012 में घरेलू गौरैया को दिल्ली का राजकीय पक्षी घोषित किया गया था।

 

7. गिरावट के साथ शुरू हुए बाजार में लगा लोअर सर्किट

  • कोरोना वायरस को लेकर जैसे-जैसे नए अपडेट्स आते जा रहे हैं और मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे शेयर बाजार की भी गिरावट बढ़ती जा रही है। बाज़ार में इस कदर हाहाकार मचा है कि 23 मार्च को 10 फ़ीसदी का लोअर सर्किट लगने के बाद कारोबार 45 मिनट के लिए रोक दिया गया। 9 बजकर 58 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने कारोबार रोकने की घोषणा की थी।
  • बाज़ार खुलने के एक घंटे के भीतर ही निवेशकों को तक़रीबन 10 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका था। मार्च के महीने में ये दूसरा मौक़ा है जब लोअर सर्किट के कारण बाज़ार में कारोबार रोकना पड़ा है। इससे पहले कोरोना ने 13 मार्च 2020 को भी डराया था और 10 फ़ीसदी गिरावट के बाद बाज़ार में कारोबार रोकना पड़ा था।
  • भारतीय शेयर बाज़ार के इतिहास में ये पहली बार है जब एक ही महीने में दो लोअर सर्किट लगे हैं और इस कारण कारोबार रोकना पड़ा है इससे पहले, हर्षद मेहता घोटाला सामने आने पर 28 अप्रैल 1992 को बाज़ार में निचला सर्किट लगा था।

क्या होता है लोअर सर्किट?

  • शेयर बाजार में दो सर्किट ब्रेकर होते हैं- लोअर और अपर जब शेयर बाजार एक निर्धारित सीमा से ज्यादा गिरने लगे, तो लोअर सर्किट लगाया जाता है। इसके लिए भी सेबी की ओर से 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी की सीमा निर्धारित की गई है। वहीं अपर सर्किट शेयर बाजार में तब लगाया जाता है, जब यह एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है। सेबी की ओर से अपर सर्किट के लिए तीन स्थितियां- 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी की निर्धारित की गई हैं।

i)   10 पर्सेंट का सर्किट – पहला 10 पर्सेंट का सर्किट अगर दोपहर 1 बजे से पहले लगता है तो एक घंटे के लिए कारोबार रोक दिया जाता है। 45 मिनट के लिए पूरा कारोबार रुकता है और 15 मिनट की प्री-ओपन सेशन होता है। यदि सर्किट 1 बजे के बाद लगता है तो कारोबार 30 मिनट के लिए रुकता है। शुरुआती 15 मिनट तक कारोबार पूरी तरह बंद रहता है और 15 मिनट का प्री ओपन सेशन होता है। यदि सर्किट 2:30 के बाद लगता है तो कारोबार नहीं रुकता। कारोबार साढ़े 3 बजे तक जारी रहता है।

ii)  15 पर्सेंट का सर्किट – यदि शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स में 15 फीसदी की गिरावट 1 बजे से पहले आती है, तो कारोबार 2 घंटे के लिए रोक दिया जाता है। इसमें शुरुआती 1 घंटा और 45 मिनट तक कारोबार पूरी तरह रुका रहता है और 15 मिनट का प्री ओपन सेशन होता है। यदि यह सर्किट दोपहर 1 बजे के बाद लगता है, तो कारोबार एक घंटे के लिए रुक जाता है। इसमें शुरुआती 45 मिनट तक कारोबार पूरी तरह रोक दिया जाता है और 15 मिनट का प्री ओपन सेशन होता है। 2.30 बजे के बाद यदि सर्किट लगता है को कारोबार नहीं रुकता और खत्म होने के समय तक चलता रहता है।

iii) 15 पर्सेंट का सर्किट – अगर शेयर बाजार में किसी भी समय 20 पर्सेंट वाला सर्किट लग जाता है तो कारोबार अगले सत्र तक के लिए रोक दिया जाता है।

 

8. हार्वे वेंस्टीन का कोरोना वायरस टेस्ट आया पॉज़िटिव

यौन शोषण व रेप केस में 23 साल की सज़ा काट रहे पूर्व हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वेंस्टीन (68) का कोरोना वायरस का टेस्ट पॉज़िटिव आया है। न्यूयॉर्क करेक्शन्स ऑफिसर्स यूनियन के प्रमुख माइकल पावर्स ने बताया कि हार्वे वेंस्टीन को आइसोलेशन में रखा गया है और उनके संपर्क में आए स्टाफ के कुछ लोगों को क्वारंटीन किया गया है। हार्वे वेंस्टीन के खिलाफ यौन शोषण व रेप केस को मी-टू अभियान के तहत उजागर किया गया था।

मी-टू अभियान

  • यह महिलाओं पर होने वाले यौन उत्पीड़न, शोषण और बलात्कार के खिलाफ आंदोलन है, जिसमें महिलाएं #MeToo हैशटैग के साथ अपनी कहानियां बताती हैं। वे बताती हैं कि उनकी ज़िंदगी में कब किसी प्रभावशाली या उनके करीबी शख्स ने उनका यौन उत्पीड़न किया है।
  • #MeToo के साथ महिलाएं ताज़ा मामलों से लेकर दशकों पुराने मामले सामने लेकर आईं हैं कि किस तरह उन्हें प्रभाव या शारीरिक ताकत ने मजबूर करके उनका यौन उत्पीड़न किया गया है। #MeToo के साथ उन महिलाओं की कहानियां सबसे ज़्यादा सामने आईं हैं, जिनका वर्क प्लेस पर यौन उत्पीड़न किया गया है।
  • #MeToo आंदोलन की असल शुरुआत तो 2006 में हुई थी, लेकिन यह प्रचलन में अक्टूबर 2017 में आया। 16 अक्टूबर 2017 को अमेरिकी एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने यौन हमले और उत्पीड़न की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने #MeToo का इस्तेमाल किया था।
  • अमेरिका की सोशल ऐक्टिविस्ट और कम्युनिटी ऑर्गनाइज़र तराना बर्क ने सबसे पहले 2006 में ‘माइस्पेस’ नाम के सोशल नेटवर्क पर #MeToo का इस्तेमाल किया था। ऐसा उन्होंने रंगभेद की शिकार महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की कहानी बयां करते हुए लिखा था।
  • इसका कुछ असर भारत में भी देखने को भी मिला है। कई महिलाओं ने बताया कि कैसे उनके वर्क प्लेस पर उनका यौन उत्पीड़न किया गया है। लेकिन, भारत में यह आंदोलन सही मायनों में 25 सितंबर 2018 को शुरू हुआ, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था भारत में इस अभियान के तहत कई जाने-माने लोगों पर आरोप लगाये गए थे।
  • हालांकि, यह बात दावे के साथ नहीं कही जा सकती कि इस हैशटैग के साथ जितने भी इल्ज़ाम लगाए गए, वो सारे सही ही हैं। तमाम महिलाओं ने सिर्फ कहानियां बताईं, लेकिन जिसे आरोपी बनाया, उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है।

 

9. लोकसभा में रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक पेश

 

लोकसभा में 23 मार्च को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक 2020 पेश किया गया निचले सदन में गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कुछ सदस्यों के विरोध के बीच उक्त विधेयक को पेश किया।

  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विरोध कर रहे सदस्यों को शांत करते हुए कहा कि अभी विधेयक सिर्फ पेश किया जा रहा है। जब इस पर चर्चा होगी तब सदस्यों को बोलने का पर्याप्त मौका दिया जायेगा।

विधेयक के प्रावधान

  • विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय अनुसंधान एवं विभिन्न पक्षकारों के साथ सहयोग के माध्यम से नई जानकारियां सृजित करेगा तथा पुलिस एवं व्यवस्था, दंड न्याय प्रणाली एवं प्रशासन सुधार के संबंध में विशेष ज्ञान एवं नये कौशल, प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करेगा।
  • इस विधेयक के तहत गुजरात के गांधीनगर स्थित रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय को उन्नत करके राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा देने का प्रस्ताव है।
  • इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय के संबंध दुनिया के अन्य देशों के विश्वविद्यालयों के साथ होंगे जो समकालीन अनुसंधान के आदान प्रदान, शैक्षणिक सहयोग, पाठ्यक्रम डिजाइन, तकनीकी जानकारी एवं प्रशिक्षण तथा कौशल विकास प्रयोजनों पर आधारित होंगे।
  • दूर-दराज क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए मुक्त एवं दूरस्थ पाठ्यक्रम चलाने का भी प्रावधान इस विधेयक में है। विश्व के अन्य देशों में मौजूदा रक्षा विश्वविद्यालयों की तरह राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय को खुद के नियमों द्वारा संचालित करने का प्रस्ताव है।

प्रष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय स्थापित करने का विचार सर्वप्रथम 1967 में सामने आया था। बाद में सन् 2000 में कारगिल समीक्षा समिति और मंत्रियों के समूह ने भी इसे स्थापित करने की सिफारिश की थी।

 

10. 2020 टोक्यो ओलंपिक्स में ऐथलीट नहीं भेजने का ऐलान करने वाला पहला देश बना कनाडा

  • कनाडा ओलंपिक अधिकारियों ने ओलिंपक खेलों को स्थगित करने की मांग की है। इसके अलावा यह भी कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण के खतरे को देखते हुए कनाडा जुलाई 2020 में अपनी ओलंपिक टीम नहीं भेज पाएगा।
  • ओलंपिक खेलों का आगाज 24 जुलाई को होना है, लेकिन कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते खतरे तथा आईओसी की अनिश्चित स्थिति के बीच कनाडा पहला ऐसा देश हो गया है, जिसने जुलाई में होने पर ओलंपिक खेलों से हटने की बात कही है।
  • जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भी कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ओलंपिक खेलों को स्थगित किया जा सकता है।
  • आईओसी टोक्यो ओलंपिक को स्थगित करने पर चार सप्ताह के भीतर फैसला लेगी। आईओसी का कहना है कि वह जापान सरकार, वैश्विक खेल अधिकारियों, प्रसारकों और प्रायोजकों से बात करके फैसला लेगी।
  • दुनियाभर के देशों ने कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच ओलंपिक खेलों को स्थगित करने की बात कही है और लगातार दबाव बढ़ने के बाद अब आईओसी को ओलंपिक खेलों को लेकर आखिरी फैसला लेना होगा। कोरोनावायरस संक्रमण से दुनियाभर में 3.3 लाख से ज्यादा लोग पॉजिटिव पाए जा चुके हैं, जबकि 14.5 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, पहले ही दुनियाभर में कोरोनावायरस संक्रमण के चलते तमाम स्पोर्ट्स इवेंट्स स्थिगित हो चुके हैं।
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