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सामयिकी: 23 मार्च 2020

1. लोकसभा ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान विधियां संशोधन विधेयक को दी मंजूरी

लोकसभा ने ‘भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान विधियां (संशोधन) विधेयक, 2020’ को ध्वनिमति से मंजूरी दे दी है इसके तहत सार्वजनिक निजी साझेदारी के तहत चल रहे पांच आईआईआईटी संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने का प्रावधान है।

  • फरवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) अधिनियम संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दी गई थी।

विधेयक के प्रावधान

  • इस विधेयक से सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला और रायचूर में सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत 5 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों को सांविधिक दर्जा प्रदान होगा तथा उन्हें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (सार्वजनिक निजी भागीदारी) अधिनियम, 2017 के तहत मौजूदा 15 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में घोषित किया जाएगा।
  • इससे वे किसी विश्वविद्यालय अथवा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की तरह प्रौद्योगिकी स्नातक (बी.टेक) अथवा प्रौद्योगिकी स्नातकोत्तर (एम.टेक) अथवा पीएच.डी डिग्री के नामकरण का इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत हो जाएंगे। इससे ये संस्थान सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश में एक सशक्त अनुसंधान सुविधा विकसित करने के लिए आवश्यक पर्याप्त छात्रों को आकर्षित करने में भी सक्षम हो जाएंगे।
  • सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला तथा रायचूर के आईआईआईटी संस्थानों को औपचारिक बनाना इस विधेयक का उद्देश्य है। ये आईआईआईटी संस्थान, संस्था पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत संस्थाओं के रूप में काम कर रहे हैं।
  • अब उन्हें सार्वजनिक निजी भागीदारी प्रारूप की योजना के तहत स्थापित अन्य 15 आईआईआईटी संस्थानों की तरह, आईआईआईटी (पीपीपी) अधिनियम, 2017 के तहत शामिल किया जाएगा।

2. मंत्रिमंडल ने संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0) योजना को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC – Electronics Manufacturing Clusters) के माध्यम से सामान्य सुविधाओं के साथ विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC2.0) योजना को वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।

  • संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0) योजना इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMCs) और सामान्य सुविधा केंद्र (CFCs) दोनों की स्थापना को आसान बनायेगी। इस योजना के प्रयोजन के लिए, एक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (ईएमसी) कुछ न्यूनतम सीमा के भौगोलिक क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा, जहां ESDM (Electronics System Design and Manufacturing)   इकाइयों के लिए बुनियादी ढांचे और अन्य सामान्य सुविधाओं के विकास की संभावनाएं हों।
  • यह उम्मीद की जाती है कि ये इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर ESDM (Electronics System Design and Manufacturing)  क्षेत्र के विकास में, उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में तथा नवाचार में सहायता करेंगे इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर ESDM क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करके, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और कर राजस्व में वृद्धि करके क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को उत्प्रेरित करेंगे।
  • प्रस्तावित ईएमसी 2.0 योजना का कुल परिव्यय 3762.25 करोड़ रुपये है जिसमें 3,725 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता और आठ वर्षों की अवधि के दौरान 37.25 करोड़ रुपये का प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी व्यय शामिल हैं।

लाभ

योजना ESDM (Electronics System Design and Manufacturing) क्षेत्र में निवेश के प्रवाह को आकर्षित करने और अधिक से अधिक रोजगार के अवसरों का नेतृत्व करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचा आधार तैयार करेगी। योजना के लिए अपेक्षित आउटपुट परिणाम निम्नलिखित हैं:

  • i)    इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार बुनियादी ढांचे और प्लग एंड प्ले सुविधा की उपलब्धता
  • ii)   इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नया निवेश
  • iii)  विनिर्माण इकाइयों द्वारा निर्मित नौकरियां;
  • iv)  विनिर्माण इकाइयों द्वारा भुगतान किए गए करों के रूप में राजस्व

पृष्ठभूमि

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु आवश्यक अवसंरचना परिवेश के निर्माण के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (ईएमसी 2.0) योजना को अधिसूचित किया जिसके तहत अक्टूबर 2017 तक आवेदन आमंत्रित किए गए। स्वीकृत परियोजनाओं हेतु धनराशि के वितरण के लिए पांच वर्षों की अवधि (यानी वर्ष 2022 तक) तय है। ईएमसी योजना के तहत देश भर में 15 राज्यों में कुल 3,565 एकड़ क्षेत्र में फैले 20 नए ईएमसी और 3 साझा सुविधा केंद्रों (सीएफसी) को मंजूरी दी गई है। इन पर 3,898 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसमें 1577 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता शामिल है।
  • भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के 1,90,356 करोड़ रुपये (29 अरब अमेरिकी डॉलर) से बढ़कर वित्त वर्ष 2018-19 में 4,58,006 करोड़ रुपये (70 अरब अमेरिकी डॉलर) के स्तर पर पहुंच गया। अत: इस दौरान लगभग 25 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) रही। वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की हिस्सेदारी 1.3 प्रतिशत (वर्ष 2012) से बढ़कर 3.0 प्रतिशत (वर्ष 2018) हो गई। वर्तमान में भारत की जीडीपी में इसका योगदान 2.3 प्रतिशत है।

3. सामूहिक प्रतिरक्षा रोक सकती है कोरोनावायरस की माहमारी को

कोरोनावायरस के कारण होने वाली बीमारी के प्रकोप ने “सामूहिक प्रतिरक्षा” के रूप में जानी जाने वाली प्रणाली को वापस सुर्खियों में ला दिया है क्योंकि यह इस महामारी के रोकथाम में सहायक सिद्ध हो सकती है।

सामूहिक प्रतिरक्षा क्या है?

सामूहिक प्रतिरक्षा एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है जहां एक आबादी में पर्याप्त लोगों में संक्रमण के लिए प्रतिरक्षा होती है जो उस बीमारी को प्रभावी ढंग से फैलने से रोकने में सक्षम होती है। ध्ताताव्य है कि सामूहिक प्रतिरक्षा के लिए, यह मायने नहीं रखता है कि टीकाकरण आवश्यक हो।

  • जैसे कोरोनावायरस संक्रमण (COVID-19) से ज्यादातर लोग संक्रमित हो गये हैं, ऐसे और भी लोग होंगे जो ठीक हो गए और जो फिर भविष्य के संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षित भी हो गए है यही सामूहिक प्रतिरक्षा को दर्शाता है।
  • लंदन के स्कूल ऑफ़ हाइजीन में इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज़ के एक प्रोफेसर मार्टिन हिबर्ड ने कहा “जब लगभग 70% आबादी संक्रमित और ठीक हो जाती है, तो बीमारी के प्रकोप की संभावना बहुत कम हो जाती है क्योंकि अधिकांश लोग संक्रमण के प्रति प्रतिरोधी होते हैं” इसे सामूहिक प्रतिरक्षा कहा जाता है।
  • नए कोरोनोवायरस प्रकोप के साथ, वर्तमान सबूत बताते हैं कि एक संक्रमित व्यक्ति औसतन दो और तीन अन्य लोगों के बीच संक्रमित है। इसका मतलब यह है कि, अगर कोई अन्य उपाय नहीं किया जाता है, तो 50% और 70% आबादी के बीच सामूहिक प्रतिरक्षा होती है जो इस महामारी से बचाव में सहायक सिद्ध होगी।

प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system)`

  • संक्रामक रोगों का निवारण करने की शरीर की शक्ति को प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं। प्रतिरक्षा  प्रणाली (Immune system) किसी जीव के भीतर होने वाली उन जैविक प्रक्रियाओं का एक संग्रह है, जो रोगजनकों और अर्बुद कोशिकाओं को पहले पहचान और फिर मार कर उस जीव की रोगों से रक्षा करती है। यह विषाणुओं से लेकर परजीवी कृमियों जैसे विभिन्न प्रकार के एजेंट की पहचान करने मे सक्षम होती है, साथ ही यह इन एजेंटों को जीव की स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों से अलग पहचान सकती है, ताकि यह उन के विरुद्ध प्रतिक्रिया ना करे और पूरी प्रणाली सुचारु रूप से कार्य कर सके।

4. केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने COVID-19 से प्रभावित सेक्टरों के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा करने की बात कही

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोरोनोवायरस से प्रभावित सेक्टरों के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा “जल्द से जल्द” की जाएगी, हालांकि पैकेज की घोषणा कब तक की  जाएगी, इसकी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

  • केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि मंत्रालय संकट से निपटने के लिए कार्ययोजना बनाने के लिए एक आंतरिक बैठक करेगा व स्थिति का जायजा लेने के लिए मंत्रियों और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ बात की      जायेगी।

प्रष्टभूमि

  • पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को अपने संबोधन में कहा था कि सरकार COVID- 19 से प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक राहत पैकेज पर निर्णय लेने के लिए एक COVID-19 आर्थिक प्रतिक्रिया कार्य बल का गठन करेगी। अंत यह घोषणा इसका ही परिणाम है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित टास्क फोर्स पर, केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि “कार्यबल का गठन अभी नहीं किया गया है, लेकिन तात्कालिकता      को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय इस बैठक को आयोजित कर रहा है।
  • वित्तीय क्षेत्र के लिए राहत उपायों के बारे में, सीतारमण ने कहा, “सेबी नियमों की एक सूची के साथ आया है जो बाजारों को थोड़ा स्थिर रखने का भी प्रयास करेगा।
  • समग्र अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विमानन, आतिथ्य और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों पर कोविड-19 के गंभीर प्रभाव के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया।

5. मालदीव सार्क देशों के लिए बनाए गए आपात राहत कोष में दो लाख डॉलर देगा

मालदीव सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन-सार्क देशों के लिए बनाए गए आपात राहत कोष में दो लाख डॉलर देने का वायदा किया है।

  • मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा कि कोरोना कोष बनाने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल स्वागत योग्य है। मालदीव सरकार ने इस कोष में योगदान करने का फैसला राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलेह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्य दल की बैठक के बाद लिया है।
  • मालदीव में अब तक कोरोना वायरस के 13 मामले पॉजिटव पाए गए हैं। इनमें से दो का इलाज किया जा चुका है और शेष का उपचार जारी है। मालदीव सरकार की सहायता के लिए भारतीय डॉक्टरों का एक दल मालदीव में है।

COVID19 इमरजेंसी फंड

  • कुछ समय पूर्व भारत के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने COVID-19  महामारी से निपटने के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सार्क (SAARC) देशों से चर्चा की थी व  इस दौरान पीएम मोदी ने इमरजेंसी फंड बनाने की पेशकश की थी जिसमें से सार्क के देश मदद ले सकेंगे।
  • वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद में मोदी के अलावा श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह, नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली, भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य ममलों पर विशेष सहायक जफर मिर्जा शामिल हुए थे।
  • यह एक वॉलंटियरी फंड है, जिसमें सभी देश अपनी मर्जी के मुताबिक योगदान दे सकते हैं इस कोष में सर्वप्रथम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी  करीब 74 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई थी।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क)

  • दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। संगठन के सदस्य देशों की जनसंख्या (लगभग 1.5 अरब) को देखा जाए तो यह किसी भी क्षेत्रीय संगठन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है। इसकी स्थापना 8 दिसम्बर 1985 को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान द्वारा मिलकर की गई थी। अप्रैल 2007 में संघ के 14 वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवा सदस्य बन गया था।

6. राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र को शामिल करने को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष्मान भारत के एक हिस्से के रूप में आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र (AYUSH Health and Wellness Centre – AYUSH HWC) को शामिल करने को मंजूरी दी है।

  • आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र के संचालन के प्रस्ताव पर वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 की पांच साल की अवधि के दौरान कुल 3399.35 करोड़ रुपये (केन्द्र सरकार 2209.58 करोड़ और राज्य सरकार 1189.77 करोड़ रुपये वहन करेगी) का कोष उपलब्ध कराया गया है।

राष्ट्रीय आयुष मिशन में शामिल करने के उद्देश्य–

  • मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था के साथ मिलकर निवारक, आरोग्यकर, पुनर्सुधारक और उपशामक स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए आयुष सिद्धांतों और अभ्यासों पर आधारित एक संपूर्ण वेलनेस मॉडल बनाना।
  • आयुष सेवाएं उपलब्ध कराकर जरूरतमंद लोगों को उपचार का नया विकल्प मुहैया कराना।
  • आयुष सेवाओं में रहन-सहन, योग, औषधीय पौधों को लेकर सामुदायिक जागरूकता को शामिल करना और आयुष व्यवस्था के सामर्थ्य के अनुसार चयनित स्वास्थ्य स्थिति के लिए दवाइयों का प्रावधान करना।

राष्ट्रीय आयुष मिशन में शामिल करने के संभावित लाभ –

  • कम खर्च पर सामान्य स्वास्थ्य कवर हासिल करने के लिए पहुंच में वृद्धि।
  • द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर बोझ में कमी।
  • ‘स्वयं-देखभाल’ मॉडल की वजह से अतिरिक्त खर्च में कटौती।
  • एसडीजी-3 को लागू करने में आयुष का एकीकरण जैसा कि नीति आयोग ने आज्ञापित किया है।
  • लक्षित क्षेत्रों में वैध संपूर्ण वेलनेस मॉडल।

पृष्ठभूमि:

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में आयुष उपचार व्यवस्था (आयुर्वेद, योगा एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी) की संभावनाओं को संपूर्ण देखभाल की बहुवादी व्यवस्था की मुख्यधारा में लाने की वकालत की गई है।
  • भारत सरकार ने फरवरी 2018 में समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं मुहैया कराने के लिए मौजूदा उप स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बदलकर 1.5 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र खोलने का फैसला लिया था।
  • इसके बाद यह भी फैसला लिया गया कि आयुष मंत्रालय कुल स्वास्थ्य उपकेंद्रों के 10 फीसदी केंद्रों को आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र के रुप में संचालित करेगा जिसकी संख्या 12,500 होगी।
  • इस प्रस्ताव का विज़न लोगों को स्वत: देखभाल के जरिए बीमारियों से बचने और अतिरिक्त खर्च बचाने में सक्षम बनाना और जरूरतमंद लोगों को उपचार का एक नया विकल्प मुहैया कराना है।

7. उत्तरी सिक्किम में तीस्ता नदी पर निर्मित पुल यातायात के लिए खुला

उत्तरी सिक्किम में लाचेन के नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए सीमा सड़क संगठन  ने चुंगथांग कस्बे के निकट मुंशीथांग में तीस्ता नदी पर बने 360 फुट लम्बे झूला पुल को यातायात के लिए खोल दिया है।

  • 758 सीमा सड़क कार्यबल (BRTF – Border Roads Task Force) की 86 सड़क निर्माण कंपनी (Road Construction Company) ने स्वास्तिक परियोजना के अतंर्गत अक्टूबर 2019 में इस पुल का निर्माण शुरू किया था और जनवरी 2020 में यह बनकर तैयार हो गया था।
  • इसके अतंर्गत पुल के संपर्क मार्गों का निर्माण भी किया गया है। इस पुल से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दुर्गम इलाकों में तैनात सैन्यबलों के लिए ढुलाई आसान हो जाएगी।
  • जून 2019 में इसी स्थान पर बना 180 फुट लम्बा पुल बादल फटने से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे सिक्किम के उत्तरी जिले में संचार व्यवस्था भी ठप हो गई थी। प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र के माध्यम से ही सम्पर्क बना हुआ था।

8. भारत और बेल्जियम के बीच प्रर्त्यपण संधि के हस्ताक्षर और अभिपुष्टि को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत गणराज्य और बेल्जियम के बीच प्रर्त्यपण संधि के हस्ताक्षर और अभिपुष्टि को मंजूरी दी है। संधि के माध्यम से बेल्जियम को और बेल्जियम से प्रत्यर्पित होने वाले आतंकियों, आर्थिक अपराधियों और अन्य अपराधियों के प्रर्त्यपण को कानूनी आधार प्राप्त होगा।

  • अभिपुष्टि के बाद भारत और बेल्जियम के बीच अभिपुष्टि-पत्रों के आदान-प्रदान के दिन से संधि लागू हो जाएगी।
  • नयी संधि स्वतंत्रता-पूर्व 1901 में ब्रिटेन और बेल्जियम के बीच में हुई संधि का स्थान लेगी जो भारत पर भी लागू की गई थी। वर्तमान में उक्त संधि ही भारत और बेल्जियम के बीच लागू है। स्वतंत्रता-पूर्व संधि में अपराधों की संख्या सीमित है जिसके कारण यह उपयोगी नहीं रह गई है।

प्रर्त्यपण का अर्थ

  • एक अपराध जो दोनों देशों के कानूनों के अन्तर्गत दंडनीय है और जिसमें एक वर्ष के कारावास या अधिक कड़े दंड का प्रावधान है। जब किसी सजा प्राप्त व्यक्ति के प्रर्त्यपण की मांग की जाती है तो शेष सजा की अवधि कम से कम 6 महीने होनी चाहिए जब प्रर्त्यपण का अनुरोध किया गया हो। टैक्स, राजस्व और वित्त से जुड़े अपराधों को भी इस संधि के दायरे में रखा गया है।

प्रत्यर्पण संधि 

  • प्रत्यर्पण संधि दो देशों के बीच होने वाली वह संधि है, जिसके अनुसार देश में अपराध करके किसी दूसरे देश में जाकर रहने वाले अपरधियों को उस देश को लौटा दिया जाता है या उस देश के खिलाफ अपराध करने वाले अपरधियों  को उस देश को लौटा दिया जाता है।
  • भारत ने अब तक 47 देशों/क्षेत्रों के साथ प्रत्यर्पण संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनके नाम हैं अफगानिस्तान, आस्ट्रेलिया, अजरबेजान, बहरीन, बांग्लादेश, बेलारूस, बेल्जियम, भूटान, ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, चिली, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, इंडोनेशिया, ईरान, इजरायल, कजाकिस्तान, कुवैत, मलेशिया, मॉरीशस, मैक्सिको, मंगोलिया, नेपाल, नीदरलैंड्स, ओमान, फिलिपींस, पोलैंड, पुर्तगाल, कोरिया गणराज्य, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, स्विट्जरलैंड, ताजिकिस्तान, थाइलैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, युक्रेन, संयुक्त राज्य अमरीका, उज्बेकिस्तान और वियतनाम। इनके अतिरिक्त भारत ने 9 अन्य देशों के साथ प्रत्यर्पण व्यवस्थाएं की हैं जिनके नाम हैं क्रोएशिया, फिजी, इटली, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, स्वीडन, सिंगापुर, श्रीलंका और तंजानिया।
  • ये संधियां अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए एक कानूनी तंत्र उपलब्ध कराती हैं और एक संविदाकार राष्ट्र द्वारा दूसरे संविदाकार राष्ट्र से प्रत्यर्पण के अनुरोध की स्थिति में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाली परिस्थितियों और शर्तों का विशेष उल्लेख करती हैं।

9. अमरीका ने कोविड-19 के कारण मैक्सिकों के साथ लगी सीमा बंद की

अमरीका ने सभी गैर-जरूरी यात्राओं के लिए मैक्सिको से लगी दक्षिणी सीमा 21 मार्च से बंद करने की घोषणा की है। कोविड-19 महामारी को देखते हुए कनाडा से लगी सीमा पहले ही बंद कर दी गई है।

  • कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आकर 230 से अधिक अमरीकी नागरिकों की मौत  हुई है। 18 हजार से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और कैलिफोर्निया में संक्रमित लोगों की संख्या अधिक है।
  • वाशिंगटन में अब तक 74 लोगों की मौत हुई है और एक हजार चार सौ लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। न्यूयॉर्क में 39 और कैलिफोर्निया में 21 लोग इसके शिकार हो चुके हैं।

अमरीकी अर्थव्यवस्था के लिए दस खरब डॉलर की योजना घोषित

  • अमरीकी सीनेट ने इस महामारी का आर्थिक असर कम करने के उद्देश्य से अमरीकी अर्थव्यवस्था के लिए घोषित दस खरब डॉलर की योजना का ब्यौरा सामने रखा है। इसके तहत ही अमरीका के राष्ट्रपति ने देश के लोगों की मदद के लिए आपातकालीन आर्थिक सहायता संबंधी विधेयक पर हस्ताक्षर किये हैं।
  • फैमिलीज़ फर्स्ट कोरोना वायरस रिस्पांस एक्ट (Families First Coronavirus Response Act)  के नाम से लाए गए विधेयक के तहत प्रभावित कर्मियों को बीमार होने पर सवैतनिक छुट्टी देने और कोविड-19 का परीक्षण मुफ्त कराने के प्रावधान हैं।
  • इसके जरिये अमरीकी सरकार की ओर से नोवेल कोरोना की महामारी से निपटने के लिए जारी प्रयासों के तहत बेरोजगारी संबंधी बीमा, खाद्य सहायता और चिकित्सकीय सहायता के लिए रकम को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
  • इस विधेयक में आर्थिक स्थिति से परे जाकर उन सभी योग्य कर्मियों के लिए नोवेल कोरोना वायरस के मुफ्त परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी, जो बीमार हैं, सबसे अलग रह रहे हैं, किसी पीडि़त व्यक्ति की तीमारदारी कर रहे हैं या किसी ऐसे बच्चे का ध्यान रख रहे हैं जिसका स्कूल बंद हो चुका है। उन सभी व्यक्तियों को वेतन का भुगतान जारी रखा जायेगा।
  • प्रतिनिधि सभा और सीनेट से पारित इस कानून को नोवेल कोरोना वायरस से निपटने के अमरीकी संघीय सरकार के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। इससे वायरस के कारण अमरीकी लोगों के स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा पर होने वाले असर पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।

10. पूर्व फुटबॉल कप्तान पीके बनर्जी का निधन

भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान और महान खिलाड़ी रह चुके प्रदीप कुमार बनर्जी का शुक्रवार को निधन हो गया है। पीके बनर्जी ने कोलकाता में आखिरी सांस ली। वे 83 साल के थे और पिछले कुछ समय से काफी बीमार चल रहे थे।

  • 1961 में अजुर्न पुरस्कार और 1990 में पद्म श्री से नवाजे जा चुके बनर्जी 1962 में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम के सदस्य थे। बनर्जी ने फाइनल में भारत के लिए गोल भी किया था।
  • अपने करियर में पीके बनर्जी ने कुल 45 फीफा फर्स्ट क्लास मैच खेले और 14 गोल किए। उनका करियर 85 मैचों का था, जिनमें उन्होंने कुल 65 गोल किए थे।
  • तीन एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पीके बनर्जी ने दो बार ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। फुटबॉल के लिए उनकी सेवाओं के लिए फीफा ने 2004 में अपने सर्वोच्च सम्मान-फीफा ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया था।
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