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Current Affairs: 22 May 2020

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Current Affairs: 22 May 2020

1. भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरदेशीय जल पारगमन एवं व्यापार प्रोटोकौल पर द्वितीय परिशिष्ट, 2020

अंतरदेशीय जल पारगमन एवं व्यापार पर प्रोटोकौल के द्वितीय परिशिष्ट, 2020 पर भारत की तरफ से बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त एवं बांग्लादेश की तरफ से सचिव (जहाजरानी) ने 20 मई, 2020 को हस्ताक्षर किए गए हैं।

  • यह भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरदेशीय जलमार्गों के जरिये पारगमन एवं व्यापार पर दीर्घकालिक और समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला प्रोटोकौल है। यह प्रोटोकौल, जिस पर पहली बार 1972 (बांग्लादेश की आजादी के तुरंत बाद) दोनों देशों के बीच साझा इतिहास और मित्रता का प्रतिबिंब है।
  • अंतिम बार इसका 2015 में पांच वर्षां के लिए नवीकरण किया गया था, जिसमें विभिन्न हितधारकों को दीर्घकालिक आश्वासन देते हुए पांच और वर्षों की अवधि के लिए इसके आटोमैटिक नवीकरण का प्रावधान था।
  • प्रोटोकौल पर स्थायी समिति एवं जहाजरानी सचिव स्तर बातचीत दोनों मित्र पड़ोसियों के बीच चर्चा करने एवं प्रोटोकौल को और प्रभावी बनाने के लिए संस्थागत व्यवस्था है।
  • अक्तूबर 2018 में नई दिल्ली में एवं दिसंबर, 2019 में ढाका में इन बैठकों में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई चर्चाओं के दौरान प्रोटोकौल रूटों के विस्तार, नए रूटों के समावेश एवं दोनों देशों के बीच व्यापार को सुगम बनाने के लिए नए पोर्टस ऑफ कॉल की घोषणा को लेकर प्रमुख निर्णय लिए गए। इन निर्णयों को प्रोटोकौल के द्वितीय परिशिष्ट पर हस्ताक्षर करने के साथ और प्रभावी बना दिया गया है।

रूटों की संख्या बढ़ी

  • भारत बांग्लादेश प्रोटोकौल (आईबीपी) रूटों की संख्या 8 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है प्रोटोकौल में आईबीपी रूट संख्या 9 और 10 के रूप में गुम्ती नदी (93 किमी) के सोनामुरा-दौदखंडी विस्तार का समावेशन त्रिपुरा और भारत तथा बांग्लादेश के आर्थिक केंद्रों से सटे राज्यों की कनेक्टिविटी में सुधार लाएगा और दोनों देशों के परिक्षेत्र की सहायता करेगा। यह रूट 1 से लेकर 8 तक सभी वर्तमान आईबीपी रूटों को कनेक्ट करेगा।
  • राजशाही-धुलियन-राजशाही रूटों का प्रचालन और अरिचा (270 किमी) तक उनका विस्तार बांग्लादेश में अवसंरचना के संवर्द्धन में सहायता करेगा, क्योंकि यह इस रूट के जरिये बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से तक स्टोन चिप्स/एग्रगेट की परिवहन लागत में कमी लाएगा। यह दोनों तरफ लैंड कस्टम स्टेशनों पर भीड़भाड़ भी कम करेगा।
  • रूट संख्या (1) और (2) (कोलकाता-शिलघाट-कोलकाता) तथा रूट संख्या (3) और (4) (कोलकाता-करीमगंज-कोलकाता) में भारत में कोलाघाट को जोड़ा गया है। रूट संख्या (3) और (4) (कोलकाता- करीमगंज -कोलकाता) तथा रूट संख्या (7) और (8) (करीमगंज-शिलघाट-करीमगंज) को भारत में बदरपुर तक विस्तारित कर दिया गया है। इन रूटों में बांग्लादेश में घोरासाल को भी जोड़ा गया है।

पोर्टस ऑफ काल भी बढे

  • वर्तमान में प्रोटोकौल के तहत भारत और बांग्लादेश दोनों में ही छह-छह पोर्टस ऑफ काल है। पांच और पोर्टस ऑफ काल तथा दो और विस्तारित पोर्टस ऑफ काल जोड़े गए हैं जिससे प्रत्येक देश में संख्या बढ़ कर 11 पोर्टस ऑफ काल तथा दो विस्तारित पोर्टस ऑफ काल हो गई है।
  • नए पोर्टस ऑफ काल के रूप में भारत में जोगीगोफा और बांग्लादेश में बहादुराबाद का समावेशन मेघालय, असम एवं भूटान को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। जोगीगोफा भी महत्वपूर्ण बन जाएगा क्योंकि वहां एक मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क बनाये जाने का प्रस्ताव है। नए पोर्टस ऑफ काल भारत बांग्लादेश प्रोटोकौल रूट पर ट्रांसपोर्ट किए जाने वाले कार्गो की लोडिंग एवं अनलोडिंग में सक्षम बनायेंगे और यह नए लोकेशन तथा उनके परिक्षेत्र के आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

2. कोणार्क सूर्य मंदिर और कोणार्क शहर के शत प्रतिशत सोलराइजेशन की योजना का शुभारंभ

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ओडिशा में कोणार्क सूर्य मंदिर और कोणार्क शहर के शत प्रतिशत सोलराइजेशन योजना का शुभारंभ किया है। भारत सरकार ने ऊर्जा के आधुनिक उपयोग तथा प्राचीन सूर्य मंदिर के बीच तालमेल के संदेश को प्रकट करने तथा सौर ऊर्जा के महत्व को प्रोत्साहन देने के लिए ओडिशा में ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर को ‘सूर्य नगरी’ के रूप में विकसित करने के उद्देश्य के साथ इस योजना का शुभारंभ किया है।

  • इस योजना में भारत सरकार की ओर से नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के माध्यम से लगभग 25 करोड़ रूपये की सहायता सहित 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) के साथ 10मेगावाट ग्रिड कनेक्टेड सौर परियोजना और सौर वृक्ष, सौर पेयजल कियोस्क जैसे विविध सौर ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों, बैटरी स्टोरेज सहित ऑफ ग्रिड सौर संयंत्रों की स्थापना आदि की परिकल्पना की गई है।
  • इस योजना का कार्यान्वयन ओडिशा नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (ओआरईडीए)द्वारा किया जाएगा। यह योजना सौर ऊर्जा के साथ कोणार्क शहर की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करेगी।

कोणार्क सूर्य मंदिर

  • कोणार्क का सूर्य मंदिर पुरी के पवित्र शहर के पास पूर्वी ओडिशा राज्य में स्थित है और यह सूर्य देवता को समर्पित है।
  • यह सूर्य देवता के रथ के आकार में बना एक भव्य भवन है; इसके 24 पहिए सांकेतिक डिजाइनों से सज्जित हैं और इसे छ: अश्वखींच रहे हैं। यह ओडिशा की मध्यकालीन वास्तुकला का अनोखा नमूना है और भारत का प्रसिद्ध तीर्थ है।
  • इसका निर्माण 1250 ए. डी. में पूर्वी गंगा राजा नरसिंह देव – 1 (ए. डी. 1238 – 64) के कार्यकाल में किया गया था। इसमें कोणार्क सूर्य मंदिर के दोनों ओर 12 पहियों की दो कतारें है। इस मंदिर को 1984 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किया गया था।
  • इनके बारे में कुछ लोगों का मत है कि 24 पहिए एक दिन में 24 घण्टों का प्रतीक है, जबकि अन्य का कहना है कि ये 12 माह का प्रतीक हैं। समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय इसे ब्लैक पगोडा कहते थे, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह जहाज़ों को किनारे की ओर आकर्षित करता था और उनका नाश कर देता था।
  • कोणार्क का मंदिर न केवल अपनी वास्तुकलात्मक भव्यता के लिए जाना जाता है बल्कि यह शिल्पकला के गुंथन और बारीकी के लिए भी प्रसिद्ध है। यह कलिंग वास्तुकला की उपलब्धियों का उच्चतम बिन्दु है जो भव्यता, उल्लास और जीवन के सभी पक्षों का अनोखा ताल मेल प्रदर्शित करता है।

3. मानव संसाधन विकास मंत्री ने सीबीएसई द्वारा तैयार 3 पुस्तिकाओं का किया विमोचन

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिक्षा के मूल्य-आधारित वैश्विक मानकों को अपनाने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा तैयार की गई तीन हैंडबुक्स का विमोचन किया है।

  • इन पुस्तिकाओं से साइबर सुरक्षा की बेहतर समझ विकसित करने, दक्षता में सुधार लाने, कौशल और नेतृत्व का अनुभव प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जो निम्न हैं –

i)   साइबर सेफ्टी

  • ‘साइबर सेफ्टी – ए हैंडबुक फॉर स्टुडेंट्स ऑफ सेकेंडरी एंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल्स’ नौंवीं से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के बीच साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए तैयार की गई है।
  • यह पुस्तिका इंटरनेट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले उन किशोरों के लिए सही मार्गदर्शिका साबित होगी, जिन्हें अक्सर विभिन्न प्रकार के सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

ii)  इन परसूट ऑफ एक्सीलेंस

  • ‘इन परसूट ऑफ एक्सीलेंस-ए हैंडबुक फॉर प्रिंसिपल्स’ के माध्यम से स्कूलों के प्रधानाचार्यों को बोर्ड की प्रणालियों और अन्य उपयोगी जानकारी से अवगत कराया जाएगा।
  • यह स्कूलों और सीबीएसई प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी।

iii) टवेंटी फर्स्ट सेंचुरी स्किल्स

  • ‘टवेंटी फर्स्ट सेंचुरी स्किल्स : ए हैंडबुक’ के माध्यम से सीबीएसई सभी को 21वीं सदी के कौशलों से अवगत कराएगा और उन कौशलों का अपने दैनिक जीवन में उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगा।

4. कैबिनेट की “सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना” को स्वीकृति

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 हजार करोड़ रूपए के परिव्यय के साथ अखिल भारतीय स्तर पर असंगठित क्षेत्र के लिए एक नई केन्द्र प्रायोजित “सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (Scheme for Formalisation of Micro food processing Enterprises)” को स्वीकृति दे दी है।

  • यह केन्द्र प्रायोजित योजना है। जिसमें व्यय को 60:40 के अनुपात में भारत सरकार और राज्यों के द्वारा साझा किया जाएगा।
  • इसके तहत 2,00,000 सूक्ष्म-उद्यमों को ऋण से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी। योजना को 2020-21 से 2024-25 तक के लिए 5 वर्ष की अवधि हेतु कार्यान्वित किया जाएगा।
  • 10 लाख तक ऋण या सूक्ष्म उद्यमों की वैध परियोजना का 35 प्रतिशत तक के ऋण पर क्रेडिट लिंक सब्सिडी मिलेगी। लाभार्थी का योगदान न्यूनतम 10 प्रतिशत और ऋण का शेष होगा।
  • योजना को अखिल भारतीय स्तर पर प्रारंभ किया जाएगा। कार्यशील पूँजी और छोटे उपकरणों के लिए सदस्यों हेतु ऋण के लिए एसएचजी को (4 लाख रूपए प्रति एसएचजी) की प्रारंभिक पूँजी दी जाएगी।
  • इस योजना में आकांक्षापूर्ण जिलों में मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, महिला उद्यमियों और उद्यमियों को ऋण तक पहुँच बढ़ाया जाना शामिल है।

प्रशासनिक और कार्यान्वयन तंत्र

  • इस योजना की निगरानी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रिस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (आईएमईसी) के द्वारा केन्द के स्तर पर की जाएगी।
  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य/संघ शासित प्रदेशों की एक समिति एसएचजी/ एफपीओ/क़ोओपरेटिव के द्वारा नई इकाईयों की स्थापना और सूक्ष्म इकाईयों के विस्तार के लिए प्रस्तावों की निगरानी और अनुमति/अनुमोदन करेगी।
  • राज्य/संघ शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न गतिविधियों को शामिल करते हुए वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेंगे।
  • इस कार्यक्रम में तीसरे पक्ष का एक मूल्याँकन और मध्यावधि समीक्षा तंत्र भी बनाया जाएगा।

राज्य/संघ शासित प्रदेश नोडल विभाग और एजेन्सी

  • राज्य/संघ शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक नोडल विभाग और एजेन्सी को अधिसूचित करेगें।
  • राज्य/संघ शासित प्रदेश नोडल एजेंसी (एसएनए) राज्य/संघ शासित प्रदेशों में इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए उत्तरदायी होने के साथ-साथ राज्य/संघ शासित प्रदेश स्तर उन्नयन योजना की तैयारी और प्रमाणीकरण, समूह विकास योजना, इकाईयों और समूहों आदि को सहायता प्रदान करते हुए जिला, क्षेत्रीय स्तर पर स्रोत समूह के कार्य की निगरानी करेगी।

राष्ट्रीय पोर्टल और एमआईएस

  • एक राष्ट्रीय पोर्टल की स्थापना की जाएगी जहाँ आवेदक/ व्यक्तिगत उद्यमी इस योजना में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना की सभी गतिविधियों को राष्ट्रीय पोर्टल पर संचालित किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

  • करीब 25 लाख अपंजीकृत खाद्य प्रसंस्करण उद्यम है जो इस क्षेत्र का 98 प्रतिशत है और ये असंगठित और अनियमित हैं। इन इकाईयों का करीब 68 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है और इनमें से 80 प्रतिशत परिवार आधारित उद्यम हैं।
  • यह क्षेत्र बहुत सी चुनौतियों जैसे ऋण तक पहुँच न होना, संस्थागत ऋणों की ऊँची लागत, अत्याधुनिक तकनीक की कमी, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के साथ जुड़ने की असक्षमता और स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों के साथ अनुपालन का सामना करता है।
  • इस क्षेत्र को मजबूत करने से व्यर्थ नुकसान में कमी, खेती से इतर रोजगार सृजन अवसर और किसानों की आय को दुगना करने के सरकार के लक्ष्य तक पहुँचने में महत्वपूर्ण रूप से मदद मिलेगी।

5. छत्तीसगढ़ में शुरू हुई राजीव गांधी किसान न्याय योजना

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शहादत दिवस पर छत्तीसगढ़ में सरकार ने किसानों के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुआत की है। इस मौके पर दिल्ली से कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गाधी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े और इस योजना की शुरुआत की।

  • इस योजना के तहत किसानों को 5700 करोड़ रुपये की नगद राशि दी जाएगी। इस राशि की पहली किस्त योजना की शुरुआत के साथ ही खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी गई है। पहली किस्त में किसानों के खाते में 1500 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है।
  • इस योजना के तहत खरीफ 2019 में पंजीकृत और उपार्जित रकबे के आधार पर धान, मक्का और गन्ना (रबी) फसल के लिए 10 हजार प्रति एकड़ की दर से किसानों को सहायता अनुदान की राशि उनके खातों में हस्तांतरित की गई है।
  • इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 19 लाख किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। लाभ लेने वालों में 9 लाख 53 हजार 706 सीमांत किसान, 5 लाख 60 हजार 285 लघु किसान और 3 लाख 20 हजार 844 बड़े किसान हैं। सभी लोगों के खाते में पहली किस्त ट्रांसफ कर दी गई है। साथ 18.43 करोड़ रुपये की राशि गन्ना उत्पादक किसानों को मिला है।
  • खरीफ 2020 से आगामी वर्षों के लिए धान, मक्का, गन्ना, दलहन-तिलहन फसल के पंजीकृत /अधिसूचित रकबे के आधार पर निर्धारित राशि प्रति एकड़ की दर से किसानों को कृषि सहायता अनुदान को तौर पर दी जाएगी।

दूसरे चरण में भूमिहीन कृषि मजदूरों को किया जाएगा शामिल

  • छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी ‘न्याय’ योजना के द्वितीय चरण में शामिल करने का फैसला किया है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूरों को ‘न्याय’ योजना के द्वितीय चरण में शामिल करने का फैसला किया है।
  • मुख्यमंत्री बघेल ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी है। यह समिति दो माह में विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगी।

6. प्रवासियों के लिए खाद्यान्नों के आवंटन हेतु ‘आत्म निर्भर भारत’ पैकेज को स्वीकृति

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने करीब 8 करोड़ प्रवासियों/फँसे हुए प्रवासियों के लिए केन्द्रीय भंडार से दो माह (मई और जून, 2020) तक प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम निःशुल्क खाद्यान के आवंटन को पूर्वव्यापी स्वीकृति दे दी है।

  • इससे करीब 2,982.27 करोड़ रूपए की खाद्य सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अंतराराज्य परिवहन और लदाई-उतराई प्रभार और डीलरों की अतिरिक्त राशि/अतिरिक्त डीलर लाभ के लिए दिए जाने वाले करीब 127.25 करोड़ रूपए का वहन पूरी तरह से केन्द्र सरकार के द्वारा किया जाएगा।
  • इसके फलस्वरूप, भारत सरकार से मिलने वाली कुल अनुमान खाद्य सब्सिडी करीब 3,109.52 करोड़ होगी। यह आवंटन कोविड-19 के कारण हुए आर्थिक व्यवधान से प्रवासियों/फँसे हुए प्रवासियों के द्वारा सामना की जा रही कठिनाईयों को कम किया जा सकेगा।

7. एनबीएफसी/एचएफसी की नकदी की समस्या के समाधान के लिए विशेष नकदी योजना को मंज़ूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और आवास वित्त कंपनियों की नकदी की स्थिति में सुधार के लिए एक नई विशेष नकदी योजना शुरु करने के प्रस्ताव को अपनी मंज़ूरी दे दी है।

  • यह योजना एनबीएफसी को निवेश ग्रिड या जारी किए गए बॉन्ड के लिए बेहतर रेटिंग दिलाने का अधिकार भी देगी। इस योजना के संचालित होने और गैर-बैंकिंग क्षेत्र से धन प्रवाह को बढ़ाने में आसानी होने की संभावना है।
  • आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना के विपरीत, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और एनबीएफसी के बीच कई द्विपक्षीय सौदे शामिल हैं, एनबीएफसी को अपने मौजूदा परिसंपत्ति पोर्टफोलियो को अलग करने की जरूरत होती है और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से धन प्रवाह शामिल होता है। प्रस्तावित योजना एसपीवी और एनबीएफसी के बीच अपनी मौजूदा परिसंपत्ति को अलग किए बिना वन स्टेप व्यवस्था होगी।

विशेष उद्देश्य संवाहक (एसपीवी) का होगा गठन

  • सार्वजनिक क्षेत्र का एक बड़ा बैंक स्ट्रेस्ड संपत्ति फंड (एसएएफ) का प्रबंधन करने के लिए एक एसपीवी का गठन करेगा जो भारत सरकार की गारंटी के साथ ब्याज वाली विशेष प्रतिभूतियां जारी करेगी और उसे सिर्फ भारतीय रिज़र्व बैंक ही खरीदेगा।
  • ऐसी प्रतिभूतियों की खरीद प्रक्रिया का इस्तेमाल एनबीएफसी/एचएफसी के लघु अवधि के ऋणों को हासिल करने के लिए एसपीवी ही करेगा। इस योजना को वित्तीय सेवा विभाग प्रभाव में लाएगा जो विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा।
  • एसपीवी जरूरत के हिसाब से प्रतिभूतियां जारी करेगा जो प्रतिभूतियों की बकाया राशि पर निर्भर करेगा और यह राशि 30,000 करोड़ से अधिक नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर इसे अभिष्ट राशि तक बढ़ाई जा सकती है।

पृष्ठभूमि:

  • 2020-21 के बजट भाषण में यह घोषणा की गई है कि एनबीएफसी/एचएफसी को अतिरिक्त नकदी की सुविधा प्रदान करने के लिए एक तंत्र तैयार किया जाएगा जो आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना (पीसीजीएस) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। कोविड-19 की वजह से उभरती स्थिति के कारण वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए उपरोक्त बजट घोषणा को लागू करने अति आवश्यक है।

8. सुपर चक्रवाती तूफान अम्फान के लिए ओडिशा तथा बंगाल NDRF की में 20 टीमें तैनात

सुपर साइक्लोन अम्फान ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तबाही फैलाना शुरू कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि अम्फान सुंदरबन क्षेत्र के निकट पश्चिम बंगाल तट को क्रॉस कर रहा है. हवा की सबसे ज्यादा रफ्तार साउथ और नॉर्थ 24 परगना और ईस्ट मेदिनीपुर जिलों में होगी, जो 155-165 से 185Km/hr तक होगी।

  • राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक एस एन प्रधान ने कहा कि तूफान अम्फान की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव कार्यों के लिए ओडिशा में मौजूद सभी 20 टीमों को राज्य में तैनात कर दिया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल में भी इतनी टीमों को लगाया गया है।
  • देशभर से छह बटालियनों से 24 टीमों को किसी भी वक्त तैनात करने के लिए तैयार रखा गया है।प्रधान ने कहा कि टीमों को अब कोविड-19 के खतरे को दिमाग में रखते हुए काम करना होगा और वे पीपीई किटों से लैस हैं।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force)

  • मध्य नब्बे के दशक और उसके बाद के दशक में आपदा मोचन और तैयारी के लिए बहुत अंतरराष्ट्रीय बहस और चर्चा हुई उनमें उल्लेखनीय और अधिक प्रभावशाली योजनायें यूकोहामा रणनीति योजना (1994) और ह्योगो फ्रेमवर्क फ़ॉर एक्शन (2005) थीं जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाई गई थी।
  • इसी अवधि के दौरान भारत को उड़ीसा सुपर साइक्लोन (1999), गुजरात भूकंप (2001) और हिंद महासागर सुनामी (2004) जैसी अपनी कुछ गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा। जिसके कारण  व्यापक आपदा प्रबंधन योजना की आवश्यकता महसूस हुई।
  • इन सभी आपदाओं पर काबू पाने के लिए 26 दिसंबर, 2005 को आपदा प्रबंधन अधिनियम को लागू किया गया। इसी के तहत आपदा प्रबंधन के लिए नीतियों, योजनाओं और दिशानिर्देशों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन किया गया ।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम में प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के लिए विशेष प्रतिक्रिया के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के गठन के लिए वैधानिक प्रावधान हैं। तदनुसार, 2006 में 8 बटालियन के साथ एनडीआरएफ का गठन किया गया था। वर्तमान में, एनडीआरएफ में 12 बटालियन की ताकत है, जिसमें प्रत्येक बटालियन में 1149 कर्मी हैं।

9. 15वें वित्त आयोग ने स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में उच्चस्तरीय समूह का किया पुनर्गठन

पन्द्रहवें वित्त आयोग ने स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में अपने उच्च-स्तरीय समूह का पुनर्गठन कर दिया है। यह फैसला कोविड-19 महामारी के प्रकोप और भविष्य में देश में इसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के तौर-तरीके तैयार करने के लिए किया गया है।

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया इस उच्च-स्तरीय समूह के प्रमुख हैं और इसमें अब दिल्ली स्थित यकृत और पित्त-रोग विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉक्टर एस. के. सरीन तथा महाजन इमेजिंग के संस्थापक डॉक्टर हर्ष महाजन को भी शामिल किया गया है।
  • वित्त आयोग का उच्च-स्तरीय दल कोविड-19 महामारी के संदर्भ में अपनी पहले की सिफारिशों की समीक्षा करेगा। यह समूह स्वास्थ्य संबंधी जनशक्ति और देश में अगले पांच वर्षों के लिए संसाधनों की अनुमानित आवश्यकता का भी नए सिरे से आकलन किया जाएगा।
  • समूह इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन की आवश्यकता के बारे में भी गहरी पड़ताल करेगा। इस गठन के बाद वित्त आयोग के स्वास्थ्य संबंधी पुनर्गठित उच्च-स्तरीय समूह की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक आयोजित की गई।

पंद्रहवां वित्त आयोग

  • 15वें वित्त आयोग का गठन एन.के. सिंह की अध्यक्षता में किया गया था और आयोग के अन्य सदस्यों में अजय नारायण झा, अशोक लाहिड़ी, रमेश चंद्र, अनूप सिंह और सचिव अरविंद मेहता हैं।
  • 15वें वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत 27 नवंबर, 2017 को किया था, ताकि वह 01 अप्रैल, 2020 से 31 मार्च, 2025 तक की पांच वर्षीय अवधि के लिए सुझाव दे सके।
  • 15वां वित्त आयोग शर्तों  से  केंद्र के सहकारी संघवाद के विरुद्ध भी कहा जा रहा है। 15वें वित्त आयोग द्वारा 2011 की जनगणना को ध्यान में रखते हुए राज्यों के बीच संसाधनों का  आवंटन किये जाने की अनुशंसा की गई है (वर्तमान में इस हेतु 1971 की जनगणना का उपयोग किया जाता है) इससे उन दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की ज़्यादा संभावना है, जो दशकों से अपनी आबादी को नियंत्रित करने के लिये बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कम जनसंख्या वृद्धि स्वाभाविक रूप से ‘कम प्रजनन दर’ से जुड़ी हुई है, जो बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास का एक परिणाम है।

10. ‘पीएमयूवाई’ के लाभार्थियों को अब तक ‘6.8 करोड़ मुफ्त एलपीजी सिलेंडर’ वितरित किए गए

कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए किए गए आर्थिक उपायों के तहत भारत सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी)’ के नाम से एक गरीब-अनुकूल योजना शुरू की है।

  • इस योजना के तहत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय 3 महीनों तक 8 करोड़ से भी अधिक पीएमयूवाई (प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना) लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर प्रदान कर रहा है, जो 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी है।
  • 20 मई 2020 तक तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने इस पैकेज के तहत पीएमयूवाई लाभार्थियों को कुल 679.92 लाख सिलेंडर वितरित किए हैं।
  • लाभार्थियों के खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से अग्रिम तौर पर धनराशि दे दी गई थी, ताकि इस सुविधा का लाभ उठाने में कोई कठिनाई न हो।
  • एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में काम करने वाले कर्मचारी न केवल सिलेंडर की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करते रहे हैं, बल्कि स्वच्छता और विभिन्न स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों के बारे में लाभार्थियों के बीच जागरूकता भी उत्पन्न करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना

  • “स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन” के नारे के साथ केंद्र सरकार ने 1 मई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व में एक सामाजिक कल्याण योजना – “प्रधानमंत्री उज्जवला योजना” की शुरूआत  उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से की थी। इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन मिलते हैं।
  • योजना से एलपीजी के उपयोग में वृद्धि होगी और स्वास्थ्य संबंधी विकार, वायु प्रदूषण एवं वनों की कटाई को कम करने में मदद मिलेगी। इस योजना के तहत लाभार्थी को मुफ्त कनेक्शन के लिए सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को 1600 रुपए की सब्सिडी देती है।
  • यह योजना एक धुँआरहित ग्रामीण भारत की परिकल्पना करती है और वर्ष 2019 तक 5 करोड़ परिवारों, विशेषकर गरीबी रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को रियायती एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था जिसे समय से पहले पा लिया गया था।
  • पहले लक्ष्य पाने के बाद सरकार ने इसे बढाकर आठ करोड़ कर दिया था। फिर प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना का लक्ष्य आठ करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया गया, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के पास आठ करोड़ से अधिक पात्र लाभार्थी गैस कनेक्शन के लिए आवेदन कर चुके हैं।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना (पीएमयूवाई) में ज्यादा लोगों को शामिल करने के लिए केंद्र ने कई बार पात्रता का दायरा बढाया है। शुरुआत में  2011 की जनगणना के मुताबिक बीपीएल परिवारों को इस योजना में शामिल किया गया था। फिर एससी एसटी परिवार, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी, अंत्योदय अन्न योजना व अति पिछड़ा वर्ग को भी पात्रता की श्रेत्री में शामिल किया गया है।
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