आज के टॉप करेंट अफेयर्स

Current Affairs: 20 May 2020

करेंट अफेयर्स: 20 मई 2020 हम यहां आपके लिए महत्वपूर्ण हालिया और नवीनतम करेंट अफेयर्स प्रदान करने के लिए हैं 20 मई 2020, हिंदू, इकनॉमिक टाइम्स, पीआईबी, टाइम्स ऑफ इंडिया, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस जैसे सभी अखबारों से नवीनतम करेंट अफेयर्स 2020 घटनाओं को यहा प्रदान कर रहे है। यहा सभी डाटा समाचार पत्रों से लिया गया हे।

हमारे करेंट अफेयर्स अप्रैल 2020 सभी इवेंट्स से आपको बैंकिंग, इंश्योरेंस, SSC, रेलवे, UPSC, क्लैट और सभी स्टेट गवर्नमेंट एग्जाम में ज्यादा मार्क्स हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, आप यहा निचे दिये print बटन पर क्लिक करके PDF प्राप्त कर सकते हे .

Current Affairs: 20 May 2020

1. सरकार ने शेकटकर समिति की सिफारिशों को किया लागू

  • सरकार ने सीमा पर ढांचागत संरचना निर्माण से संबंधित लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेकटकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की समिति (सीओई) की तीन महत्वपूर्ण सिफारिशों को स्वीकार किया है और इन्हें लागू किया है।
  • ये सिफारिशें सडकों के निर्माण में तेजी लाने से संबंधित थीं और इससे सीमावर्ती क्षेत्र, सामाजिक-आर्थिक रूप से विकसित हो रहे थे।

तीन महत्वपूर्ण सिफारिशें

  • इसमें प्रथम शिफारिश सीमा पर ढांचागत संरचना निर्माण से संबंधित मामले पर है, इस हेतु सरकार ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की अधिकतम क्षमता से अतिरिक्त सड़क निर्माण कार्य को आउटसोर्स करने के लिए सीओई की सिफारिश को लागू किया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले सभी कार्यों के निष्पादन के लिए इंजीनियरिंग खरीद अनुबंध (ईपीसी) मोड को अपनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • दूसरी सिफारिश आधुनिक निर्माण संयंत्रों की स्थापना करने और उपकरणों व मशीनरी की खरीद करने से सम्बंधित है। इसे लागू करते हुए बीआरओ की खरीद क्षमता को 7.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। बीआरओ घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार की खरीद कर सकती है।
  • तृतीय सिफारिश को भूमि अधिग्रहण और वन एवं पर्यावरण मंजूरी जैसी सभी वैधानिक स्वीकृति को भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की मंजूरी का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा, निष्पादन के इंजीनियरिंग खरीद अनुबंध (ईपीसी)  मोड को अपनाने के साथ, कार्य प्रारंभ करने का आदेश तभी दिया जाता है, जब वैधानिक मंजूरी के 90 प्रतिशत हिस्से में स्वीकृति प्राप्त की कर ली गयी गई हो। इस प्रकार परियोजना की शुरूआत से पहले पूर्व मंजूरी प्राप्त करने से सम्बंधित सीओई की सिफारिश को लागू किया गया है।

2. नेहरू युवा केन्द्र कोरोना के प्रति लोगों को कर रहा जागरूक

नेहरू युवा केन्द्र के युवा स्वयंसेवक कोरोना की रोकथाम में जुटे हुए हैं। टीम के सदस्य घर लौटे प्रवासियों की मदद कर उन्हें मास्क और भोजन वितरण कर रहे हैं। युवा स्वयंसेवकों द्वारा लोगों से आरोग्य सेतु मोबाइल डाउनलोड करने की अपील भी की जा रही है।

  • इसके अलावा नेहरू युवा केन्द्र के स्वयंसेवक विभिन्न ग्राम सभाओं और क्वारंटाइन सेंटरों में जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। स्वयंसेवक सोशल डिस्टेंसिंग की जानकारी के साथ ही दीवारों और सड़कों पर प्रेरणादायक चित्रों के माध्यम से भी लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

नेहरू युवा केन्द्र

  • नेहरू युवा केन्द्र की स्थापना सन 1972 में हुई थी। बाद के समय में जब राजीव गाँधी की सरकार बनी, तब 1987-88 में यह भारत सरकार के अंतर्गत युवा मामलों और खेल मंत्रालय के तहत ‘नेहरू युवा केन्द्र संगठन’ बन गया।
  • नेहरू युवा केन्द्र संगठन (नेयुकेसं)  विश्व में अपने प्रकार की जमीनी स्तरीय सबसे बडी स्वयंसेवी संस्था है। यह स्वैच्छिकता, स्व-सहायता और सामुदायिक प्रतिभागिता के सिद्धांतों के आधार पर 13-35 वर्ष के युवाओं की शक्ति को सही दिशा देता है।
  • इन वर्षों में नेहरू युवा केन्द्र संगठन ने, जहाँ इसके नेहरू युवा केन्द्र स्थापित हैं वहा गांवों में युवा मंडलों का नेटवर्क स्थापित किया है। युवा मंडलों के गठन द्वारा विकास हेतु युवा शक्ति का उपयोग करने के लिए क्षेत्रों की पहचान करना नेहरू युवा केन्द्र संगठन का मुख्य लक्ष्य है।
  • यह युवा मंडल जमीनी स्तर पर ग्राम स्तरीय युवाओं के स्वैच्छिक कार्य समूह होते हैं जो कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में शामिल करते हैं। युवा मंडलों के इस नेटवर्क में ही नेहरू युवा केन्द्र संगठन की मुख्य शक्ति निहित है। युवा मंडल ग्राम आधारित संस्थायें हैं, जो कि सामुदायिक विकास और युवा सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्यरत हैं। युवा मंडलों का गठन युवा सदस्यों द्वारा किया जाता है जोकि 15-35 वर्ष की आयु के होते हैं।

3. अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर ‘संग्रहालयों का पुनर्जीवन और सांस्कृतिक स्थल’ विषय पर वेबिनार

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थलों का विकास (Development of Museums and Cultural Spaces) ने अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने के लिए 18 मई को एक वेबिनार की मेजबानी की और महामारी के बाद के भारत में स्थायी सांस्कृतिक संगठनों के गठन के लिए बातचीत की शुरूआत की है।

  • इस अवसर पर भारतीय और वैश्विक स्तर के अग्रणी सांस्कृतिक संस्थानों, रचनात्मक व्यवसायों, स्टार्टअप, नीति निर्माताओं और मीडिया के लिए आयोजित, वेबिनार के विशेषज्ञों ने संस्कृति और रचनात्मक उद्योग के लिए आगे बढ़ने के तरीके पर चर्चा की गई।
  • चर्चा के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक सांस्कृतिक स्थलों की नये सिरे से कल्पना करना तथा सांस्कृतिक विरासत के सामाजिक और आर्थिक मूल्यों का अधिकतम लाभ उठाना और स्थानीय दर्शकों और पर्यटकों को जोड़ने के लिए क्षमता निर्माण के लिए नवीन विचारों का परिचय देना था।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा बनाए गए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) ने इस वेबिनार के संचालन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करके संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थलों का विकास (Development of Museums and Cultural Spaces), संस्कृति मंत्रालय को सहयोग दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस

  • यह हर साल 18 मई को मनाया जाता है। इसे सबसे पहले 1983 में मनाया गया था। इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस हर साल मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को संग्रहालय और पुरातन चीजों की महत्ता के प्रति जागरूक करना है।
  • भारत में इस दिन कई संग्रहालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें लोगों को संग्रहालय के बारे में विस्तार से बताया जाता है। हालांकि, कोरोना वायरस महामारी के चलते इस साल सामूहिक कार्यक्रम नहीं आयोजित किए जा रहे हैं। फिर भी लोग वेबिनार कर इस उत्सव को मना रहे हैं।
  • इस साल अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस की थीम “समानता के लिए संग्रहालय: विविधता और समावेश” (Museum for Equality: Diversity and Inclusion) है।
  • 1977 में इंटरनैशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम (ICOM – International Council of Museums) ने अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस की शुरुआत की थी। 1977 से फिर 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाने लगा।
  • यूनेस्को के अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर के संग्रहालयों की संख्या 2012 से लगभग 60 प्रतिशत बढ़ कर करीब 95,000 संस्थानों तक पहुंच गई है और इसने इसको दर्शाया है कि पिछले एक दशक में राष्ट्रीय सांस्कृतिक नीतियों में इस क्षेत्र को कितना महत्व मिला है।

4. MOHUA ने कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग के परिणामों की घोषणा की

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कूड़ा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग के परिणामों की घोषणा की है। सरकार ने  अंबिकापुर (छत्तीसगढ़), राजकोट, सूरत, मैसूर, इंदौर और नवी मुंबई को ‘कूड़ा मुक्त पांच सितारा शहर’ घोषित किया है।

  • सरकार द्वारा जारी इस रैंकिंग में 65 शहरों को 3 स्टार की रैंकिंग प्रदान की गई है वहीँ 70 शहरों को 1 स्टार की रैंकिंग प्रदान की गई है।
  • स्टार रेटिंग मूल्यांकन के हालिया चरण में, 1435 शहरों ने आवेदन किया था। आकलन के दौरान, 1210 क्षेत्र मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा 1.19 करोड़ नागरिक प्रतिक्रियाएं और 10 लाख से अधिक भू-टैग किए गए चित्र एकत्र किए गए और 5175 ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों का दौरा किया गया था।
  • इस अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने स्टार रेटिंग ऑफ गारबेज फ्री सिटीज के लिए संशोधित प्रोटोकॉल भी लॉन्च किया।  प्रोटोकॉल को समग्र रूप से तैयार किया गया है, जिसमें नालियों और जल निकायों की सफाई, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट, आदि जैसे घटक शामिल हैं जो कचरा मुक्त शहरों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • जबकि इस प्रोटोकॉल का मुख्य जोर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) पर है, यह रूपरेखा में परिभाषित पूर्वापेक्षाओं के एक सेट के माध्यम से स्वच्छता के कुछ न्यूनतम मानकों को सुनिश्चित करने का भी ध्यान रखता है।

प्रष्ठभूमि

  • कचरा मुक्त स्थिति प्राप्त करने के लिए शहरों के लिए एक तंत्र को संस्थागत बनाने और शहरों को स्वच्छता के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने हेतु मंत्रालय द्वारा जनवरी 2018 में स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल लॉन्च किया गया था।

5. वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की घोषणा की

  • केन्द्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारामन ने 17 मई को नई दिल्ली में शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई पहल करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि मानव पूंजी में निवेश राष्ट्र की उत्पादकता और समृद्धि में निवेश के समान है।

वित्त मंत्री ने इस दिशा में निम्नलिखित पहलों की घोषणा की:

1.   पीएम ई-विद्या

  • पीएम ई-विद्या  नाम से एक व्यापक पहल शुरू की जाएगी जो डिजिटल/ऑनलाइन/ऑन-एयर शिक्षा से संबंधित सभी प्रयासों को एक साथ जोडेगी। यह शिक्षा के लिए वैकल्पिक पहुंच उपलब्ध कराएगा।
  • इसमें दीक्षा (एक राष्ट्र-एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म) जो सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता ई-सामग्री प्रदान करने के लिए देश का डिजिटल बुनियादी ढांचा बन जाएगा; टीवी (एक कक्षा-एक चैनल) जहां कक्षा 1 से 12 तक प्रत्येक छात्र के लिए प्रति ग्रेड एक समर्पित चैनल होगा जो गुणवत्ता युक्त शैक्षिक सामग्री तक पहुंच प्रदान करेगा।
  • इसमें स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए एमओओसीएस प्रारूप में स्वयंम ऑनलाइन पाठ्यक्रम; आईआईटीजेई/नीट की तैयारी के लिए आईआईटीपीएएल; सामुदायिक रेडियो और सीबीएसई शिक्षा वाणी के माध्यम से ब्राडकास्ट; और डिजिटल रूप से सुगम्य सूचना प्रणाली (डेसी) पर विकसित एनआईओएस वेबसाइट/यूट्यूब पर सांकेतिक भाषा में विकसित की गई अध्ययन सामग्री शामिल है। इससे देशभर के लगभग 25 करोड़ स्कूली बच्चों को फायदा होगा।

2.   मनोदर्पण पहल

  • वैश्विक महामारी की मौजूदा स्थिति में, यह महत्वपूर्ण है कि हम छात्रों, शिक्षकों और उनके परिवारों को मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान करें। इस दिशा में मनोदर्पण पहल की शुरुआत की जा रही है।
  • इसके लिए एक वेबसाइट, एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर, काउंसलरों की राष्ट्रीय सूची, इंटरैक्टिव चैट प्लेटफॉर्म शुरु किया गया है। इस पहल से देश के सभी स्कूली बच्चों साथ उनके माता-पिता और शिक्षक भी लाभान्वित होंगे।

उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग का विस्तार

  • सरकार खुली, दूरी और ऑनलाइन शिक्षा नियामक ढांचे को उदार बनाकर उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग का विस्तार कर रही है। शीर्ष 100 विश्वविद्यालय ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू करेंगे।
  • साथ ही, पारंपरिक विश्वविद्यालयों और ओडीएल कार्यक्रमों में ऑनलाइन घटक भी वर्तमान 20% से बढ़ाकर 40% किया जाएगा। यह विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लगभग 7 करोड़ छात्रों को सीखने के अवसर प्रदान करेगा।

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा तैयार करने का निर्णय

  • सीखने पर ध्यान केंद्रित करने वाले छात्रों के लिए अनुभवनात्मक और सहज सीखने की प्रक्रिया के साथ-साथ उनमें रचनात्मक सोच और कौशल को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम में भारतीय लोकाचार और मूल्य निहित होने चाहिए तथा उसे वैश्विक स्तर पर आवश्यक कौशल के अनुरुप ढाला जाना चाहिए। इसलिए, वैश्विक बेंचमार्क के अनुरुप ही छात्रों और शिक्षकों के भविष्य के लिए एक नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा तैयार करने का निर्णय लिया गया है।

राष्ट्रीय साक्षरता और न्यूमेरसी मिशन

  • देश में प्रत्येक बच्चे तक ग्रेड 3 में साक्षरता और न्यूमरेसी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता और न्यूमेरसी मिशन शुरू किया जाएगा।
  • इसके लिए, शिक्षकों में क्षमता निर्माण, एक मजबूत पाठ्यक्रम ढांचा, सीखने की सामग्री को आकर्षक बनाने-  ऑनलाइन और ऑफलाइन, सीखने के परिणामों और उनके माप सूचकांकों, मूल्यांकन तकनीकों तथा सीखने की प्रगति पर नज़र रखने जैसे कार्यों को एक व्यवस्थित रूप दिया जाएगा। इस मिशन से 3 से 11 वर्ष के आयु वर्ग के लगभग 4 करोड़ बच्चे लाभान्वित होंगे।

6. संयुक्त राष्ट्र की टीम ने इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ नए सबूत हासिल किए

संयुक्त राष्ट्र की एक जांच टीम ने कहा है कि उसने इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के खिलाफ इराक में सबूतों के नए स्रोत एकत्र करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिनमें 20 लाख से अधिक कॉल रिकॉर्ड शामिल हैं, जिससे 2014 में यज़ीदी अल्पसंख्यकों विरोधी अपराधों को अंजाम देने वालों के खिलाफ मामले मजबूत होंगे।

  • जांच टीम ने जून 2014 में तिकरित एयर अकादमी के निहत्थे कैडेटों और सैन्य कर्मियों की सामूहिक हत्याओं और 2014 से 2016 तक मोसुल में इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों द्वारा किए गए अपराधों की जांच में भी प्रगति की बात कही है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, जांच टीम ने कहा कि वह कानून के लंबित मुद्दे को लेकर इराक की सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है, ताकि देश को इस्लामिक स्टेट के युद्ध अपराधों, मानवता विरोधी अपराधों और नरसंहार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल सके।
  • रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘आने वाले छह महीनों में, टीम कोशिश करेगी कि सरकार इस अवसर का इस्तेमाल करे, ताकि टीम द्वारा एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर कार्यवाही शुरू की जा सके।’’
  • टीम का कहना है कि इस्लामिक स्टेट समूह का कभी इराक और सीरिया दोनों देशों के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा था, लेकिन उसे करारी हार का सामना करना पड़ा है। वह खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है, लेकिन उसके लड़ाके अभी भी हमले करते रहे हैं।

प्रष्ठभूमि

  • आतंकवादी समूह के लड़ाकों और समर्थकों के अत्याचार ने उस क्षेत्र में जख्म के गहरे निशान छोड़े हैं। इराक के यज़ीदी अल्पसंख्यक की हजारों महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया था और उन्हें गुलाम बना लिया गया था, जबकि पुरुषों को मार डाला गया था।
  • इसीलिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2016 में सीरिया में युद्ध अपराधों या मानवता विरोधी अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने और मामले की जांच करने में सहायता के लिए एक स्वतंत्र पैनल की स्थापना की थी।

7. जाकिर नाइक के पीस टीवी पर पर लगा 3 लाख पाउंड का जुर्माना

ब्रिटेन में मीडिया पर निगरानी रखने वाले नियामक ‘ऑफकॉम’ ने विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक के पीस टीवी नेटवर्क पर देश में ‘‘नफरत फैलाने वाले भाषण’’ और ‘‘अत्यधिक आपत्तिजनक’’ विषयवस्तु प्रसारित करने के मामले में तीन लाख पाउंड का जुर्माना लगाया है।

  • संचार सेवाओं के लिए ब्रिटेन के नियामक ने प्रसारण संबंधी उसके नियम तोड़ने पर पीस टीवी उर्दू के लाइसेंस धारकों पर दो लाख पाउंड और पीस टीवी पर एक लाख पाउंड का जुर्माना लगाया है।
  • नियामक ने कहा, ‘‘हमारी जांच में यह पाया गया है कि पीस टीवी उर्दू और पीस टीवी पर प्रसारित कार्यक्रमों में नफरत फैलाने वाले भाषण और अत्यधिक आपत्तिजनक विषयवस्तु दिखाई गई है। इससे अपराध भड़कने की भी आशंका थी।’
  • ऑफकॉम ने एक बयान में कहा, ‘‘हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यह सामग्री प्रसारण संबंधी हमारे नियमों का पालन करने में गंभीर असफलताओं को दर्शाती है और इसके लिए जुर्माना लगाए जाने की आवश्यकता है।
  • पीस टीवी पर ‘लॉर्ड प्रोडक्शन लिमिटेड’ का मालिकाना हक है और पीस टीवी उर्दू का लाइसेंस ‘क्लब टीवी’ के पास है। दोनों की मूल कंपनी ‘यूनिवर्सल ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड’ है जिसका मालिक नाइक (54) है।

भारत में वांछित है जाकिर नाइक

  • विवादित इस्लामिक प्रचारक नाइक घृणा फैलाने वाले भाषणों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और धनशोधन के मामले में भारत में वांछित है। वह 2016 में भारत से मलेशिया चला गया था, जहां उसे स्थायी निवास की अनुमति मिल गई थी। भारत ने उसके प्रत्यर्पण के लिए पिछले सप्ताह मलेशिया सरकार से औपचारिक रूप से अनुरोध किया था। उसके ‘‘आपत्तिजनक व्यवहार’’ के कारण 2010 में ब्रिटेन में उसके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

8. मध्य प्रदेश ने प्रवासी मजदूरों के लिए चरण पादुका पहल शुरू की

एक मार्मिक पहल के अंतर्गत मध्य प्रदेश राज्य से गुजरने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए चरण पादुका अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत, नंगे पैर जाने वाले प्रवासी मजदूरों को उनके दर्द को कम करने के लिए जूते और चप्पल प्रदान किए जा रहे हैं।

  • सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यह अभियान अधिकांश स्थानों पर पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है। चरण पादुका अभियान इंदौर के राऊ पुलिस स्टेशन से शुरू हुआ था। पुलिस के अनुसार इस पहल को जनता का पूरा समर्थन मिल रहा है।
  • अब यह मानवीय पहल दमोह, उमरिया और सागर सहित मप्र के कई शहरों में फैल गई है। उमरिया के एसपी ने कहा कि हम प्रवासी मजदूरों के दर्द को कम करने और उन्हें सम्मानपूर्वक उनके घरों में भेजने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस की इस पहल से प्रवासी मजदूर भी बहुत खुश हैं।

9. आईसीसी में अनिल कुंबले कमिटी ने गेंद पर लार के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की

क्रिकेट में गेंद को चमकाने के लिए बरसों से इस्तेमाल की जा रही लार या थूक के इस्तेमाल पर अब प्रतिबन्ध लग सकता है। अनिल कुंबले की अध्यक्षता वाली आईसीसी क्रिकेट कमिटी ने इसकी सिफारिश की है। अब इन सिफारिशों को मंजूरी के लिए आईसीसी बोर्ड के सामने रखा जाएगा।

  • कमिटी ने कहा कि मौजूदा दौर में हम सभी असमान्य स्थिति का सामना कर रहे हैं। इस समय कमिटी की ये सभी सिफारिशें अंतरिम हैं, जिनसे सभी की सुरक्षा का ख्याल रखा जा सके और क्रिकेट को वापस पटरी पर लाया जा सके।
  • कमिटी ने मेडिकल टीम द्वारा दिए गए इस सलाह को भी माना कि पसाने से इस वायरस के फैलने की उम्मीद बहुत कम है। ऐसे में गेंद को चमकाने के लिए इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने की जरूरत नहीं है।
  • आईसीसी द्वारा जारी विज्ञप्ति में अनिल कुंबले ने कहा, ‘गेंद को चमकाने के लिए लार का इस्तेमाल, खासतौर से लाल गेंद फॉर्मेट में होता है, जिससे गेंद को स्विंग कराने में मदद मिलती है लेकिन ऐसा करने से अब सेहत पर खतरा दिख रहा है।’ विदित है कि पिछले महीने से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि सुरक्षा मानकों के तहत आईसीसी इसे प्रतिबंधित कर देगा।
  • गेंद पर लार के इस्तेमाल पर रोक को अगर मान्यता मिलती है तो यह कहा जा सकता है कि यह क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत होगी। इससे पहले माइकल होल्डिंग और वकार यूनिस जैसे पूर्व दिग्गज फास्ट बोलर इस आइडिया को बकवास बता चुके हैं।

10. ऐथलीट आयोग का चुनाव 1 साल के लिए स्थगित

अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) ने ऐथलीट आयोग के चुनाव को एक साल तक के लिए स्थगित कर दिया है। चुनाव इस साल होने थे, जिसमें राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (एनओसी) के 30 उम्मीदवारों का चयन चार पदों के लिए होना था।

  • कोरोनावायरस महामारी के कारण टोक्यो ओलिंपिक के एक साल के लिए स्थगित होने के बाद आईओसी कार्यकारी बोर्ड (ईबी) ने ऐथलीट आयोग के चुनाव को भी आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।
  • आईओसी के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा, ‘आईओसी कार्यकारी बोर्ड इस बात को लेकर एकमत था कि यह एक मुश्किल समय है और हमें आयोग में ऐथलीटों के पूरे प्रतिनिधित्व की जरूरत है। इस समय ऐथलीटों की आवाज काफी महत्वपूर्ण है और हमारे पास कोई भी पद खाली नहीं रहना चाहिए।’
  • जिन चार ऐथलीटों को उनके साथियों द्वारा चुना जाएगा वे इन चार सदस्यों की जगह लेंगे, जिनमें आईओसी एसी चेयर कर्स्टी कोवेंट्री (जिम्बाब्वे), वाइस-चेयर डंका बारटेकोवा (स्लोवाकिया), टोनी एस्टुंगेट (फ्रांस) और जेम्स एस्किन्स (ऑस्ट्रेलिया) शामिल हैं।

ऐथलीट आयोग

  • आईओसी के ऐथलीट आयोग में 23 सदस्य होते हैं। इनमें 12 सदस्य सीधे अपने साथियों द्वारा चुने हुए होते हैं जबकि अन्य 11 की नियुक्ति होती है। इनका कार्यकाल अधिकतम आठ वर्षों का होता है। प्रत्येक ओलिंपिक खेलों के समय चुनाव का आयोजन किया जाता है।
DSGuruJi - PDF Books Notes