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Current Affairs: 21 May 2020

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Current Affairs: 21 May 2020

1. भारतीय रेलवे ने 12000 एचपी का अपना सबसे शक्तिशाली इंजन सफलतापूर्वक चलाया

बिहार स्थित मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोको फैक्ट्री द्वारा निर्मित 12000 एचपी के पहले ‘मेड इन इंडिया’ इंजन को भारतीय रेलवे द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन स्टेशन से सफलतापूर्वक चलाया गया। इंजन का नाम डब्ल्यूएजी12 (WAG12 ) नंबर 60027 है।

  • ट्रेन पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद डिवीजन से लंबी दौड़ के लिए दीनदयाल उपध्याय स्टेशन से रवाना हुई, जिसमें 118 वैगन जुड़े हुए थे और जो पं. दीनदयाल उपध्याय जंक्शन से डेहरी-ओन-सोन, गढ़वा रोड होते हुए बरवाडीह तक गई।
  • इसके  संचालन के बाद भारत दुनिया का छठा ऐसा देश बन गया है जो स्वदेश में ही ज्यादा हॉर्स पावर का इंजन बनाने वाले देशों के प्रतिष्ठित क्लब में शामिल हो गया है। यही नहीं, पूरी दुनिया में पहली बार बड़ी रेल लाइन की पटरी पर उच्च हॉर्स पावर के इंजन का संचालन किया गया है।
  • इस इंजन के प्रारूप की डिलीवरी मार्च 2018 में की गई थी। परीक्षण के परिणामस्वरूप उभरे डिजाइन से जुड़े मुद्दों को सुलझाते हुए बोगियों सहित पूरे इंजन को फिर से डिजाइन किया गया है। इंजन के नए डिजाइन का निरीक्षण आरडीएसओ ने मधेपुरा कारखाने में किया और 16 नवंबर 2019 को कारखाने से इसकी रवानगी के लिए अपनी मंजूरी दे दी गई थी।
  • इस रेल इंजन ने 18 मई, 2020 को दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन से शिवपुर के बीच अपनी पहली वाणिज्यिक दौड़ लगाई है।

इंजन की विशेषताएं

  • यह इंजन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए कोयला रेलगाड़ियों की आगे की आवाजाही के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। इसमें लगे हुए सॉफ्टवेयर और एंटीना के माध्यम से इसके रणनीतिक उपयोग के लिए इंजन पर जीपीएस के जरिए करीबी नजर रखी जा सकती है।
  • यह इंजन पारंपरिक ओएचई लाइनों वाली रेलवे पटरियों के साथ-साथ अत्यंत ऊंची ओएचई (Over Head Equipment) लाइनों वाले समर्पित माल गलियारों (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) पर भी परिचालन करने में सक्षम है। इंजन में दोनों ही तरफ वातानुकूलित ड्राइवर कैब हैं।
  • इंजन पुनरुत्पादक ब्रेकिंग सिस्टम से लैस है जो परिचालन के दौरान पर्याप्त ऊर्जा बचत सुनिश्चित करता है। ये उच्च हॉर्स पावर वाले इंजन मालवाहक ट्रेनों की औसत गति को बढ़ाकर अत्यधिक इस्तेमाल वाली पटरियों पर भीड़ कम करने में मदद करेंगे।
  • मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (एमईएलपीएल) 11 वर्षों में 800 अत्याधुनिक 12000 एचपी के इलेक्ट्रिक फ्रेट लोकोमोटिव का निर्माण करेगी। दुनिया में सबसे शक्तिशाली इलेक्ट्रिक इंजनों में से एक होने की बदौलत यह मालगाड़ियों की गति बढ़ा देगा और इसके साथ ही देश भर में पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और भारी मालगाड़ियों की आवाजाही सुनिश्चित करेगा, जिससे यातायात में भीड़-भाड़ कम होगी।
  • परियोजना के तहत  बिहार के मधेपुरा में प्रति वर्ष 120 इंजनों के निर्माण की क्षमता वाले कारखाने के साथ टाउनशिप भी स्थापित की गई है। यह परियोजना देश में 10,000 से भी अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन करेगी। कंपनी द्वारा परियोजना में पहले ही 2000 करोड़ रुपये से भी अधिक का निवेश किया जा चुका है।
  • इस कारखाने के साथ  मधेपुरा में सामाजिक-आर्थिक विकास को भी इस परियोजना द्वारा नई गति दी जा रही है। सीएसआर पहल के तहत मधेपुरा में स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अनेक कौशल केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
  • उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे ने देश में भारी माल के ढुलाई परिदृश्य में बदलाव लाने के लिए भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश परियोजना के हिस्से के रूप में मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (एमईएलपीएल) के साथ खरीद-सह-रखरखाव समझौता किया है। यह भारतीय रेलवे की ‘मेक इन इंडिया’ पहल है।

प्रष्ठभूमि

  • यह इंजन ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत निर्मित किया गया है। मधेपुरा फैक्ट्री गुणवत्ता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों के साथ तैयार की गई सबसे बड़ी एकीकृत नई (ग्रीनफील्ड) यूनिट है। 120 इंजनों (लोकोमोटिव) की उत्पादन क्षमता वाला यह कारखाना 250 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • यह परियोजना वर्ष 2018 में शुरू हुई और भारत के प्रधानमंत्री ने 10 अप्रैल 2018 को इस परियोजना का उद्घाटन किया था।

2. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया ‘चिकित्सा सेतु’ एप का लोकार्पण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के मोबाइल एप ‘चिकित्सा सेतु’ का लोकार्पण किया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा लॉन्च किया गया मोबाइल एप ‘चिकित्सा सेतु’ देश का पहला चिकित्सक प्रशिक्षण एप है।

  • यह एप कोविड-19 के संक्रमण से बचाव व उपचार के लिए कार्य कर रहे कोरोना वॉरियर्स  चिकित्सकों, पैरामेडिकल व नर्सिंग स्टाफ, सफाई कर्मियों, अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों आदि के लिए तैयार किया गया है।
  • एप में छोटे-छोटे वीडियो के माध्यम से कोविड-19 से बचाव, पीपीई किट, एन-95 मास्क का प्रयोग, संक्रमित मरीजों को शिफ्ट करने के सम्बन्ध में उपयोगी जानकारी दी गई है।
  • ‘चिकित्सा सेतु’ एप की सामग्री चिकित्सकों के फीडबैक पर आधारित है। यह एप आम जनमानस के लिए भी उपयोगी है। एप मूलतः हिन्दी में है, लेकिन इसे अन्य भाषाओं में भी डब किया जा सकता है।
  • एप में कोरोना वायरस से संबंधित हेल्पलाइन के नम्बर तथा भारत सरकार के दिशा-निर्देश भी उपलब्ध हैं। एप के माध्यम से वेबिनार भी आयोजित किया जा सकता है।
  • चिकित्सा सेतु’ एप को आईएएस प्रशांत शर्मा ने विकसित किया है। ट्रेनिंग विडियो किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ ने बनाए हैं, जबकि नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्मार्ट गवर्नेंस, हैदराबाद ने तकनीक सहयोग दिया है।

3. आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ के पार हुई

  • आयुष्मान भारत ने एक करोड़ लाभार्थियों का आंकड़ा पार कर लिया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने  कहा कि 2 साल से भी कम समय में आयुष्मान भारत ने बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस  योजना का कई जिंदगियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘आयुष्मान भारत से जुड़े हमारे डॉक्टरों, नर्सों, हेल्थकेयर वर्करों और बाकी सभी दूसरे लोगों को शाबाशी। उनकी कोशिशों ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थकेयर प्रोग्राम बनाया है। इस पहल ने कई भारतीयों खासकर गरीबों और वंचितों के विश्वास को जीता है।’
  • इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत की एक करोड़वीं लाभार्थी पूजा थापा के साथ टेलीफोन पर बात की।’ प्रधानमंत्री ने थापा के साथ बातचीत का आडियो क्लिप भी जारी किया है।

आयुष्मान भारत योजना

  • आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, भारत सरकार की एक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसे 23 सितंबर, 2018 को पूरे देश में लागू किया गया था। 2018 के बजट सत्र में स्वर्गीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस योजना की घोषणा की थी।
  • इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। इसके अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक परिवार को 5 लाख तक का कैशरहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाता है। इसके तहत कोरोना को भी कवर किया गया है।
  • इसका लक्ष्य 10 करोड़ परिवार (लगभग 50 करोड़ लोग) को इस योजना के अंतर्गत लाना है। इसके अलावा बाकी बची आबादी को भी इस योजना के अन्तर्गत लाने की योजना है।
  • इस योजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 सितंबर 2018 को दीनदयाल उपाध्याय की जयन्ती के दिन झारखण्ड  के रांची से आरम्भ किया था।

4. पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी की जयंती

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 19 मई, 2020 को राष्ट्रपति भवन में पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी तथा उनके छायाचित्र के सामने पुष्प अर्पित किए।

नीलम संजीव रेड्डी

  • नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई, 1913 को इल्लुर ग्राम, अनंतपुर ज़िले में हुआ था जो आंध्र प्रदेश में है। आंध्र प्रदेश के कृषक परिवार में जन्मे नीलम संजीव रेड्डी की छवि कवि, अनुभवी राजनेता एवं कुशल प्रशासक के रूप में थी। इनके पिता का नाम नीलम चिनप्पा रेड्डी था जो कांग्रेस पार्टी के काफ़ी पुराने कार्यकर्ता और प्रसिद्ध नेता टी. प्रकाशम के साथी थे।
  • नीलम संजीव रेड्डी भारत के ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होते हुए प्रथम बार विफलता हाथ लगी और दूसरी बार उम्मीदवार बनाए जाने पर राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। प्रथम बार इन्हें वी. वी. गिरि के कारण बहुत कम अंतर से हार स्वीकार करनी पड़ी थी।
  • तब यह कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए गए थे।  दूसरी बार गैर कांग्रेसियों ने इन्हें प्रत्याशी बनाया और वह विजयी हुए। संजीव रेड्डी भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे, जो निर्विरोध निर्वाचित हुए।
  • केंद्र की राजनीति में आने से पूर्व रेड्डी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे जब वह राष्ट्रीय राजनीति में आए तो प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इन्हें केन्द्र में स्टील एवं खान मंत्रालय प्रदान किया। 1964 में ही यह राज्यसभा के लिए मनोतीत हुए और 1967 तक इसके सदस्य बने रहे।
  • जनवरी 1966 से मार्च 1967 तक वह प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में रहे। इन्होंने यातायात, जहाजरानी, नागरिक उड्डयन एवं टूरिज्म का कार्य कैबिनेट मंत्री के रूप में देखा।
  • 1967 के लोक सभा चुनाव में रेड्डी हिन्दपुर से निर्वाचित हुए, जो आंध्र प्रदेश की ही सीट थी। 17 मार्च 1967 को इन्हें लोक सभा का स्पीकर बनाया गया। लेकिन 19 जुलाई 1969 को इन्होंने लोकसभा के स्पीकर पद से त्यागपत्र दे दिया क्योंकि वे कांग्रेस पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव हेतु उम्मीदवार बनाए गए थे।

5. धरती के आखिरी तस्मानियन बाघ का दुर्लभ वीडियो आया

नेशनल फ़िल्म एंड साउंड आर्काइव ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (NFSA) द्वारा धरती के आखिरी तस्मानियन बाघ का एक वीडियो जारी किया गया है जो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है विदित है कि ये बाघ अब विलुप्त हो चुके हैं।

  • इस वीडियो को 1935 में फिल्माया गया था। इस तस्मानियन बाघ का नाम बेंजामिन था। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस बाघ को होबार्ट के चिड़ियाघर में रखा था। इसी जगह विडियो को शूट किया गया था।
  • 7 सितंबर को रिकॉर्डिंग के एक साल बाद तस्मानियन बाघ की मौत हो गई थी। 7 सितंबर को ही ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय खतरा प्रजाति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

तस्मानियन बाघ

  • द ऑस्ट्रेलियन म्यूज़ियम के अनुसार, तस्मानियन बाघ एक बार पूरे महाद्वीपीय ऑस्ट्रेलिया में रहता था लेकिन लगभग 2,000 साल पहले मुख्य भूमि पर विलुप्त हो गया था तथा इसकी आबादी तब तस्मानिया के द्वीप तक सीमित थी। तस्मानिया में इसकी गिरावट और विलुप्ति कुत्तों की शुरूआत से मानी जाती है।
  • ये बाघ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते थे जो कुत्ते जैसे दीखते थे लेकिन इनकी विशिष्ट धारीदार पीठ के कारण इन्हें तस्मानियाई बाघ के रूप में भी जाना जाता था।

6. सोलर मिनिमम ने बढ़ाई चिंता

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सूरज को लेकर एक नई जानकारी दी है इस जानकारी में वैज्ञानिकों ने बताया है कि सूर्य के सतह पर होने वाली घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से कमी दर्ज की गई है। वैज्ञानिक भाषा में इसे सोलर मिनिमम का नाम दिया गया है।

  • इस प्रक्रिया के तहत सूरज पर बनने वाले सन स्पॉट का निर्माण बंद हो गया है और सूरज का मैग्नेटिक फील्ड भी कमजोर पड़ता जा रहा है। यही कारण है कि हमारे सोलर सिस्टम में अतिरिक्त कॉस्मिक किरणों का प्रवेश हो रहा है।
  • साल 2020 में पिछले पांच महीने से सूरज में कोई भी नया सन स्पॉट दिखाई नहीं दिया है. इनकी संख्या सूरज में गिरकर 76 फीसदी रह गई है। जबकि  साल 2019 में यह 77 प्रतिशत था. सन स्पॉट ही सूरज को गरम बनाए रखते हैं। इनकी कमी होने की वजह से सूरज ठंडा हो रहा है।
  • रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के वैज्ञानिकों ने बताया कि सूर्य की सतह पर प्रत्येक 11 साल में ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं। यह प्रकृति का चक्र है, कुछ दिनों में सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र अपने पुराने रूप में लौटा आएगा।

सोलर मिनिमम से क्या है चिंता

  • इससे डाल्टन मिनिमम जैसी घटना फिर से हो सकती है। बता दें कि डाल्टन मिनिमम के कारण 1790 से 1830 के दौरान धरती पर भारी तबाही देखने को मिली थी। इस कारण भयंकर ठंड से यूरोप में कई नदियां जम गईं थीं।
  • ये कास्मिक रेज अंतरिक्ष में मौजूद एक्ट्रोनॉट्स के अलावा धरती के वायुमंडल के लिए भी खतरनाक होगी।

7. कॉयर जियो टेक्सटाइल्स ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए मंजूर

कॉयर जियो टेक्सटाइल्स, को ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए एक अच्छी सामग्री के रूप में स्वीकार किया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास एजेंसी ने कहा है कि पीएमजीएसवाई-III के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग किया जाएगा।

  • केन्द्रीय एमएसएमई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हम अब कॉयर जियो टेक्सटाइलकासड़क निर्माण में उपयोग कर सकते हैं। इस निर्णय से कॉयर उद्योग को विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के इस कठिन समय में बढ़ावा मिलेगा।”
  • सड़क निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई की नई प्रौद्योगिकी दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावों के प्रत्येक बैच के सडकों की कुल लम्बाई के 15 प्रतिशत में नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके निर्माण किया जाना है।
  • इनमें से 5 प्रतिशत सड़कों का निर्माण आईआरसी (Indian Roads Congress) मान्यता प्राप्त प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया जाना है। आईआरसी ने अब ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए कॉयर जियो टेक्सटाइल्स को मान्यता दी है।
  • इन निर्देशों के अनुसार, पीएमजीएसवाई -III के तहत 5 प्रतिशत ग्रामीण सड़कों का निर्माण कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके किया जाएगा। तदनुसार कॉयर जियो टेक्सटाइल्सका उपयोग करके आंध्र प्रदेश में 164 किलोमीटर, गुजरात में 151 किलोमीटर, केरल में 71 किलोमीटर, महाराष्ट्र में 328 किलोमीटर, ओडिशा में 470 किलोमीटर, तमिलनाडु में 369 किलोमीटर और तेलंगाना में 121 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
  • इस प्रकार 7 राज्यों में कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके 1674 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए एक करोड़ वर्ग मीटर कॉयर जियो-टेक्सटाइल्स की आवश्यकता होगी। इसकी अनुमानित लागत 70 करोड़ रु है।

कॉयर जियो टेक्सटाइल्स

  • कॉयर जियो टेक्सटाइल्स एक पारगम्य फैब्रिक है तथा प्राकृतिक, मजबूत, अत्यधिक टिकाऊ, टूट-फूट, मोड़ एवं नमी प्रतिरोधी है व किसी भी सूक्ष्मजीव (माइक्रोबियल) के हमले से मुक्त है।
  • इस निर्णय देश में कॉयर जियो -टेक्सटाइल के लिए एक बड़ी बाजार संभावना बनेगी और कोविड-19 से प्रभावित कॉयर उद्योग के लिए यह एक वरदान सिद्ध होगा।

8. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को कैबिनेट की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी है।  योजना का उद्देश्य नीली क्रांति के माध्यम से देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास को सुनिश्चित करना है।

  • कुल 20050 करोड रुपए की अनुमानित लागत वाली यह योजना, केन्द्रीय येाजना और केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू की जाएगी। इसमें केन्द्र की हिस्सेदारी 9407 करोड रूपए, राज्यों की हिस्सेदारी 4880 करोड रुपए तथा लाभार्थियों की हिस्सेदारी 5763 करोड रुपए होगी।
  • इस योजना को वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा। योजना के दो घटक होंगे। पहला केन्द्रीय योजना और दूसरा केन्द्र प्रायोजित योजना। केन्द्रीय योजना के दो वर्ग होंगे (i) लाभार्थी वर्ग और (ii) गैर लाभार्थी वर्ग। केन्द्र प्रायोजित योजना को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है
  • i)   उत्पादन और उत्पादकता को प्रोत्साहन
  • ii)  अवसंरचना और उत्पादन बाद प्रंबधन
  • iii) मत्स्य पालन प्रबंधन और नियामक फ्रेमवर्क

योजना का वित्त पोषण

  • केन्द्रीय परियोजना के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय जरुरतों की पूर्ति केन्द्र की ओर की जाएगी। इसमें लाभार्थी वर्ग से जुडी गतिविधियों को चलाने का काम पूरी तरह से राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड सहित केन्द्र सरकार का होगा। इसमें सामान्य लाभार्थियों वाली परियोजना का 40 प्रतिशत जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति तथा महिलाओं से जुडी परियोजना का 60 प्रतिषण वित्त पोषण केन्द्र सरकार करेगी।

लाभ

  • मत्स्य पालन क्षेत्र की गंभीर कमियो को दूर करते हुए उसकी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल होगा। मत्स्य पालन क्षेत्र में 9 प्रतिशत की सालाना दर से वृद्धि के साथ 2024 25 तक 22 मिलियन मेट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
  • मत्स्य पालन के लिए गुणवत्ता युक्त बीज हासिल करने तथा मछली पालन के लिए बेहतर जलीय प्रबंधन को बढावा मिलेगा।
  • मछली पालन के लिए आवश्यक अवसंरचना और मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित की जा सकेगी।
  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन से सीधे या परोक्ष रूप से जुडे हुए सभी लोगों के लिए रोजगार और आय के बेहतर अवसर बनेंगे।
  • मछली पालन क्षेत्र में निवेश आकर्शित करने में मदद मिलेगी जिससे मछली उत्पाद बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
  • वर्ष 2024 तक मछली पालन से जुडे किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी।
  • मछली पालन क्षेत्र तथा इससे जुडे किसानों और श्रमिकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी

9. कैबिनेट ने ‘प्रधानमंत्री वय वंदना योजना’ के विस्तार को दी स्वीकृति

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और वृद्धावस्था आय सुरक्षा को समर्थ बनाने के लिए 31 मार्च 2020 से अगले तीन वर्षों अर्थात 31 मार्च 2023 तक प्रधानमंत्री  वय  वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) का विस्तार किया है।

वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई)

  • प्रधानमंत्री  वय  वंदना योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक समाजिक सुरक्षा योजना है जो क्रय मूल्य/वार्षिक अंशदान पर सुनिश्चित रिटर्न के आधार पर उनको न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित कराने की मंशा रखती है।
  • प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को साल 2014-15 में लॉन्च किया गया था। भारतीय नागरिक जो कि 60 वर्ष की उम्र से ऊपर के हैं, वो प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) में निवेश करने के पात्र हैं।
  • यह योजना 10 साल के लिये 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष मासिक देय (8.30 प्रतिशत प्रतिवर्ष) का निश्चित रिटर्न सुनिश्चित कराती है। इस योजना को सेवा कर और जीएसटी से छूट दी गई है। इस योजना में स्वयं या पति या पत्नी की किसी भी गंभीर/टर्मिनल बीमारी के इलाज के लिये समय पूर्व निकासी की अनुमति भी है।
  • समय पूर्व निकासी के मामले में योजना क्रय मूल्य की 98 प्रतिशत राशि वापस की जाएगी। 10 वर्षों की पॉलिसी अवधि के दौरान पेंशनधारक की मृत्यु पर लाभार्थी को क्रय मूल्य का भुगतान कर दिया जाएगा।
  • पिछले 50 वर्षों में भारत की जनसंख्या लगभग तीन गुनी हो गई है, लेकिन बुजुर्गों की संख्या चार गुना से भी ज़्यादा हो गई है।  दुनिया के ज़्यादातर देशों में बुजुगों की संख्या दोगुनी होने में 100 से अधिक वर्ष लग गए, लेकिन भारत में इनकी संख्या केवल 20 वर्षों में ही दुगुनी हो गई।

10. 20 मई को मनाया गया विश्व मधुमक्खी दिवस

  • हर साल 20 मई, को पूरी दुनिया में ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ यानी World Bee Day 2020 मनाया जाता है।
  • यह दिवस हमारे अस्तित्व यानी मधुमक्खियों और परागणकों के महत्व, सतत विकास में उनके योगदान और उनके संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
  • 2020 में ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ की थीम “Bee Engaged”  है।
  • विश्व मधुमक्खी दिवस पर लोगों को मधुमक्खी पालन, बागवानी और कृषि फसलों पर पर-परागण के महत्व की जानकारी दी जाती है। इस आयोजन में मधुमक्खी पालन और बाग़बानी के उत्पादों जैसे-शहद, रायल जैली, बी-पोलेन, प्रपोलिस और बी-वैक्स आदि के बारे में लोगों को विस्तार से जानकारी दी जाती है।
  • यह आयोजन मधुमक्खी पालन, बागवानी एवं कृषि फसलों से जुड़े किसानों-व्यवसायियों के लिए लाभदायक माना गया है।

प्रष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र आम सभा (जनरल असेम्बली) ने वर्ष 2017 में 20 मई को पूरे विश्व में मधुमक्खी दिवस मनाने का संकल्प लिया था। पहली बार 20 मई 2018 को ये दिवस मनाया गया था।
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