आज के टॉप करेंट अफेयर्स

सामयिकी: 19 – 20 अप्रैल 2020

Current Affairs: 19 – 20 April 2020 हम यहां आपके लिए महत्वपूर्ण हालिया और नवीनतम करेंट अफेयर्स प्रदान करने के लिए हैं 19 – 20 अप्रैल 2020, हिंदू, इकनॉमिक टाइम्स, पीआईबी, टाइम्स ऑफ इंडिया, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस जैसे सभी अखबारों से नवीनतम करेंट अफेयर्स 2020 घटनाओं को यहा प्रदान कर रहे है। यहा सभी डाटा समाचार पत्रों से लिया गया हे।

हमारे करेंट अफेयर्स अप्रैल 2020 सभी इवेंट्स से आपको बैंकिंग, इंश्योरेंस, SSC, रेलवे, UPSC, क्लैट और सभी स्टेट गवर्नमेंट एग्जाम में ज्यादा मार्क्स हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, आप यहा निचे दिये print बटन पर क्लिक करके PDF प्राप्त कर सकते हे .

Current Affairs: 19 – 20 April 2020

1. केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लॉन्च किया किसान रथ एप

गेहूं जैसी रबी फसलों की कटाई के बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ‘कृषि रथ’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया है ताकि किसान कोविड-19 के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान अपनी कृषि उपज को मंडियों तक आसानी से पहुंचा सकें।

  • इस ऐप के माध्यम से किसान अपने घर बैठे ट्रक, ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनरी किराये पर बुला सकता है। किसान रथ ऐप पर फिलहाल कुल 5.7 लाख ट्रक उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान अपनी जरूरत के हिसाब से उबर टैक्सी की तर्ज पर बुक कर सकते हैं।
  • कृषि रथ ऐप पर किसानों को कृषि उपज की मात्रा का का ब्यौरा देना होगा। उसके बाद परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली नेटवर्क कंपनी किसानों को उस कृषि उपज को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ट्रक और किराये का ब्यौरा देगी। पुष्टि मिलने के बाद, किसानों को ऐप पर ट्रांसपोर्टरों का विवरण मिलेगा और वे ट्रांसपोर्टरों के साथ बातचीत कर सकते हैं और उपज को मंडी तक पहुंचाने के लिए सौदे को अंतिम रूप दे सकते हैं।
  • कृषि मंत्रालय के अनुसार किसान द्वारा दर्ज ढुलाई के माल की मात्रा व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों दोनों को दिखाई देगी। इसमें कहा गया है कि कारोबारियों को अपने क्षेत्रों में बिक्री के लिए उपलब्ध कृषि उपज का पता चल जाएगा और वे विभिन्न किसानों के द्वारा भेजे जा सकने वाले कृषि वस्तुओं को जुटाकर उसे खेत से उठाने के लिए ट्रक की व्यवस्था कर सकते हैं।
  • बुक करते समय ही ट्रांसपोर्टर से किराया, लोडिंग और अनलोडिंग के बारे में मोल भाव किया जा सकता है और किसान अपनी किसी भी उपज को अपनी जरूरत के हिसाब से संबंधित मंडियों में भेज सकता है।

2. नोवल कोरोनावायरस के लिए निष्क्रिय वायरस टीका

सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के शोधकर्ता नोवल कोरोनवायरस के लिए एक निष्क्रिय वायरस टीका विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। निष्क्रिय टीके अपनी सुरक्षा और आसान उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इस वायरस की प्रगति और घातक प्रभाव को रोकने के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी और सुनिश्चित तरीका माना जाता है।

  • दुनिया भर में विभिन्न संगठन इस वायरस के लिए कोई टीका खोजने की दिशा में काम कर रहे हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्तमान में 42 से अधिक संभावित उम्मीदवारों को सूचीबद्ध किया है।

क्या है निष्क्रिय वायरस टीका?

  • निष्क्रिय वायरस टीका विकसित करने के लिए सक्रिय वायरस को बड़ी संख्या में कल्चर किया जाता है और फिर किसी रसायन या गर्मी से उन्हें मारा जाता है। हालांकि पैथोजेन यानी रोगजनक को मार दिया जाता है या उसकी प्रजनन क्षमता को खत्म कर दिया जाता है।
  • लेकिन वायरस के विभिन्न हिस्से बरकरार रहते  हैं, उदाहरण के लिए, स्पाइक प्रोटीन जिसके साथ यह कोशिकाओं में प्रवेश करता है। प्रतिरक्षा प्रणली द्वारा पहचान की जाने वाली एंटीजन (रासायनिक संरचना) को छोड़ दिया जाता है।
  • जब यह मृत माइक्रोब प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली को तत्काल प्रतिक्रिया करते हुए विशिष्ट एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी का उत्पादन शुरू कर देती है। वह इस बात को जाने बिना ऐसा करती है कि रोगजनक मृत है। निष्क्रिय पोलियो टीका और रेबीज के टीके इसी तरह बनाए जाते हैं।
  • चूंकि रोगजनक मर चुका है इसलिए वह न तो प्रजनन कर सकता है और न ही हल्के रोग का कारण बन सकता है। इस प्रकार यह बुजुर्ग और बीमार जैसे कम प्रतिरक्षा वाले लोगों को भी सुरक्षित रखता है।

क्या है चुनौती?

  • मानव मेजवान के बाहर इस वायरस का कल्चर करना सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौती है। चूंकि नोवल कोरोनोवायरस मानव कोशिकाओं पर जीने के लिए विकसित हुआ है, विशेष रूप से सक्रिय एसीई2 रिसेप्टर्स वाले कोशिकाओं में, इसलिए सेल लाइन के सही स्रोत का पता लगाने के लिए मानव शरीर के बाहर इस वायरस का कल्चर इस तकनीक के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सीसीएमबी अफ्रीका के पेट्री डिश में पाए जाने वाले हरे बंदर से एपिथेलियल सेल लाइन का उपयोग कृत्रिम कल्चर के लिए और इस घातक वायरस को काटने के लिए कर रहा है। सेल लाइन के कुछ अन्य विकल्पों पर भी गौर किया जाएगा ताकि सही का पता लगाया जा सके जिस पर कोरोनावायरस संक्रमित, विकसित और वृदि़ध कर सके।
  • उन कोशिकाओं का निरीक्षण किया जाएगा और यदि कोशिकाओं में परिवर्तन दिखाई देता है, जिसमें कोशिकाओं की मृत्यु और वायरस को छोड़ना शामिल है, तो कल्चर सकारात्मक होगा।
  • नोवल कोरोनवायरस के लिए एक सही सेल कल्चर तकनीक की खोज से इसकी दवा विकसित करने में भी मदद मिलेगी। जब वायरस कोशिकाओं को संक्रमित कर देता है तो उसके खिलाफ संभावित दवाओं का परीक्षण किया जा सकता है।
READ  Top Hindi News Headlines – 21 September 2019

3. सरकार ने पैरासिटामोल से बनी औषधियों के निर्यात पर लगी रोक हटाई

केन्द्र सरकार ने पैरासिटामोल से बनी औषधियों के निर्यात पर लगी रोक तत्काल प्रभाव से हटा दी है। इसमें फिक्स्ड डोज कम्बीनेशन भी शामिल है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस बारे अधिसूचना जारी कर दी है।

  • विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में कहा है कि पेरासिटामोल से बनने वाले फार्मुलेशंस (फिक्स्ड डोज मिश्रण) को तुरंत प्रभाव से निर्यात के लिए खोल दिया गया है। हालांकि पेरासिटामोल बनाने में काम आने वाले माल के निर्यात पर रोक जारी रहेगी।
  • केंद्र सरकार ने 3 मार्च को पेरासिटामोल सहित 26 दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।  छह अप्रैल को 24 दवाओं में प्रयुक्त होने वाले रसायनों और फार्मुलेशंस के निर्यात से रोक हटा ली थी। इसमें पेरासिटामोल को छोड़ दिया गया था।

पेरासिटामोल

  • पेरासिटामोल या एसिटामिनोफेन व्यापक रूप से प्रयुक्त की जाने वाली एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) और एंटीपायरेटिक (बुखार कम करने वाली) दवा है। इसका प्रयोग आम तौर पर बुखार, सर दर्द और अन्य छोटे मोटे दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है और यह असंख्य सर्दी और फ्लू के उपचार में काम में ली जाने वाली दवाओं का प्रमुख अवयव है।
  • भारत ने अप्रैल-जनवरी 2019-20 के दौरान 5.41 अरब डॉलर के पेरासिटामोल फार्मूलेशंस का निर्यात किया था। जबकि 2018-19 में इसका कुल निर्यात 5.8 अरब डॉलर था।

4. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने के लिए तीन चरणों की योजना की घोषणा की

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कोविड-19 महामारी के कारण संकट में फंसी देश की अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने के लिए तीन चरणों की योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत राज्यों के गवर्नर को धीरे-धीरे लॉकडाउन में छूट देने की अनुमति दी गयी है।

  • तीन चरणों वाली योजना का खुलासा करते हुए बताया गया है कि प्रशासन जल्द ही नए संघीय दिशानिर्देश जारी करेगा। इनके तहत राज्यों के गवर्नरों को चरणबद्ध ढंग से अनुमति दी जाएगी ताकि वे घरों में बंद 95 फीसदी नागरिकों पर घरों में रहने के लिए लगाए गए सख्त नियमों में ढील दें।
  • विदित है कि इस योजना में सामाजिक दूरी के प्रतिबंधों में ढील देने की कोई जगह नहीं है। ट्रंप ने ‘ओपनिंग अप अमेरिका’ नामक एक दस्तावेज गवर्नरों के साथ साझा किया है, जिसमें राज्यों को फिर से खोलने की इस त्रिस्तरीय योजना की सिफारिश की गई थी।
  • अभी अमेरिका की 95 प्रतिशत से अधिक आबादी अपने घरों में बंद है और 2.2 करोड़ से अधिक अमेरिकियों ने बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन दिया है। अमेरिका में 6,40,000 से अधिक अमेरिकी कोरोना वायरस की चपेट में आए और 32,000 से अधिक लोगों ने जान गंवा दी है।

योजना के तीन चरण निम्न हैं –

  • i)   योजना के पहले चरण में राज्यों को 14 दिन तक संक्रमण में कमी पर नजर रखनी होगी और उसके उपरांत लॉकडाउन के नियमों में ढील देनी होगी।
  • ii)  योजना के दूसरे चरण में लॉकडाउन के कारण घरों तक सीमित सभी संवेदनशील व्यक्तियों को दूरसंचार के ज़रिये काम करने को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • iii) तीसरे चरण में साफ-सफाई की आदतों और सामाजिक दूरी बनाए रखने के साथ सामान्य व्यक्तियों को अनिवार्य रूप से काम पर लौटने को कहा जाएगा।

5. बंगलादेश तटरक्षकों ने दक्षिण-पूर्वी तट से 382 रोहिंग्या शरणार्थी बचाएं

बंगलादेश के तटरक्षकों ने दक्षिण-पूर्वी तट से 382 रोहिंग्या शरणार्थियों को बचा लिया है। ये भूखे शरणार्थी समुद्र में पिछले दो महीने से चक्कर लगा रही एक बड़ी नौका में सवार थे।

  • रोहिंग्या मुसलमानों का जहाज मलेशिया नहीं पहुंच पाया जिसकी वजह से ये लोग कई हफ्ते तक समुद्र में भटकते रहे। समुद्र में रहने के दौरान इस नौका पर सवार तीस रोहिंग्याओं की मौत हो गई और उनके शव को समुद्र में फैक दिया गया।
  • बचाए गए रोहिंग्या मुसलमानों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। इनमें से कई लोगों की हालत इतनी खराब हो गई थी कि वे ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे थे।
  • बंगलादेश के तटरक्षकों ने एक सूचना के आधार पर इन शरणार्थियों को ढूंढने का काम शुरू किया था। सभी रोहिंग्याओं को कॉक्स बाजार के पास तेकनाफ शहर लाया गया है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि इन रोहिंग्याओं में से कोई म्यांमार के रखाइन प्रांत का तो नहीं है।

कौन हैं रोहिंग्या शरणार्थी?

  • बौद्ध बहुलता वाले म्यामांर में रोहिंग्या समुदाय के लोगों को लंबे समय से बांग्लादेश का “बंगाली” माना जाता रहा है, जबकि उनके परिवार पीढ़ियों से इस देश में रह रहे हैं। इन्हें बौद्ध धर्म के लोगों ने हिंसात्मक गतिविधियों से खदेड़कर म्यांमार से बाहर कर दिया है।
  • म्यांमार रोहिंग्याओं को अपना नागरिक नहीं मानता है इन्हें न ही कोई सरकार पहचान पत्र प्रदान किया गया है और न ही इन्हें मतदान में भाग लेने का अधिकार दिया गया है। इनमें से लगभग सभी को 1982 से नागरिकता नहीं दी गई है। उनके पास कहने के लिए अपना कोई देश तो नहीं है, साथ ही उन्हें आवाजाही की स्वतंत्रता और अन्य मूलभूत अधिकार भी प्राप्त नहीं हैं।
  • म्यांमार में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले संगठन ARSA (अराकान रोहिंग्या सेल्वेशन आर्मी) ने भी रोहिंग्या तथा बौद्ध धर्म के लोगों के मध्य कड़वाहट को फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, यह संगठन आतंकवादी गतिविधियों से बौद्ध धर्म के लोगों केा शिकार बनाता था जिससे दोनों समुदायों में घृणा का प्रसार हुआ।
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ने म्यांमार को 23 जनवरी 2020 के फैसले में आदेश दिया था कि वह रोहिंग्या लोगों का जनसंहार रोकने के लिए अपनी शक्ति के अनुसार सभी कदम उठाए। न्यायालय के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अब्दुलकवी अहमद यूसुफ ने कहा था कि “अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का विचार है कि म्यांमार में रोहिंग्या सबसे अधिक असुरक्षित हैं।”
  • पश्चिमी अफ्रीकी देश गाम्बिया बड़े पैमाने पर आगज़नी, नरसंहार और दुष्कर्म के कारण लगभग सात लाख 40 हजार रोहिंग्या मुसलमानों के म्यांमा से पलायन कर बांग्लादेश पहुंचने का मामला अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले गया था। सत्तावन सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन, कनाडा और नीदरलैंड्स ने गाम्बिया की पहल का समर्थन किया था।
READ  टॉप करेंट अफ़ेयर्स आज की न्यूज़ हेडलाइंस- 15 दिसंबर 2019

6. ब्रिटेन ने कोविड-19 का टीका बनाने के लिए नया कार्यबल किया गठित

ब्रिटेन ने कोरोना वायरस के टीके की तत्काल खोज और इसके विकसित होने के बाद उद्योगों को इसके व्यापक पैमाने पर निर्माण के लिए तैयार करने के संबंध में कार्यबल गठित किया है। मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वेलेंस के नेतृत्व में नया ‘वैक्सीन टास्कफोर्स’ कारोबार, उद्योग और शोध-शिक्षण क्षेत्र के बीच सहयोग है।

  • ‘वैक्सीन टास्कफोर्स’ का लक्ष्य टीका विकसित करने, उद्योगों और शोध संस्थानों तक संसाधन एवं सहयोग पहुंचाने और इसके निर्माण में आ रही किसी बाधा को हटाने के लिए नियमों की समीक्षा के प्रयासों के बीच समन्वय बिठाना है।
  • इसके साथ ही ब्रिटेन सरकार ने 21 नये अनुसंधान परियोजनाओं की भी घोषणा की है जिन्हें इलाज के तरीके एवं टीके विकसित करने के लिए सरकारी कोष से 1.4 करोड़ पाउंड की निधि दी जाएगी।
  • साथ ही पूरे ब्रिटेन के जनरल प्रैक्टिश्नर (जीपी) सर्जरी को इस अभूतपू्र्व परीक्षण में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
  • इसके अलावा ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में एक अनुसंधान के तहत मलेरिया रोधी दवा पर परीक्षण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह उच्च जोखिम वाले समूहों में लोगों पर कोविड-19 के प्रभावों को कम कर सकता है या नहीं।

प्रष्ठभूमि

  • ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 18 अप्रैल को बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से देश के अस्पतालों में आज 847 लोगों की मौत हो गयी है। ब्रिटेन में अभी तक संक्रमण से 14,576 लोगों की मौत हुई है। 18 अप्रैल को हुई मौतों की संख्या 17 अप्रैल (861) के मुकाबले कुछ कम है।
  • ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 5,599 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। देश में अभी तक करीब एक लाख नौ हजार लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।

7. चीन ने मृतक संख्या में किया संशोधन, मरने वालों की संख्या 4,632 हुई

कोविड-19 मामलों के आंकड़े छिपाने को लेकर हो रही अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच चीन ने मृतकों की संख्या में 17 अप्रैल को संशोधन किया है। चीन ने कोरोना वायरस के उत्पत्ति केंद्र वुहान शहर में मृतकों की संख्या में 1,290 का इजाफा किया है, जिससे चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 4,632 हो गई है।

  • वुहान नगरपालिका मुख्यालय द्वारा 17 अप्रैल तक कोरोना वायरस के पुष्ट मामले रिपीट पुष्ट किए गए कुल मामलों में 325 की वृद्धि की गयी जो बढ़कर 50,333 हो गए और मृतकों की संख्या 1,290 की वृद्धि की गयी। इस तरह कोरोनावायरस से मौतों की पुष्टि के बाद मृतक संख्या 3,869 हो गई है।
  • वुहान नगरपालिका मुख्यालय ने एक अधिसूचना में कहा कि संशोधन संबंधित कानूनों और नियमों और इतिहास, लोगों और मृतकों के प्रति जिम्मेदार होने के सिद्धांत के अनुसार किए गए हैं। इन संशोधित आंकड़ों के बाद चीन में कोविड-19 से हुई मौतों की कुल संख्या बढ़कर 4,632 हो गई है। कुल मामलों की संख्या भी बढ़कर 82,692 हो गई है।
  • चीन राष्ट्रीय आयोग (एनएचसी) के आंकड़ों के अनुसार, 16 मार्च तक कोरोना वायरस के कुल मामले 82,367 थे, जिनमें 3,342 मौतें शामिल थीं। आयोग ने बताया कि 1,081 मरीजों का इलाज चल रहा है और 77,944 लोगों को ठीक होने के बाद छुट्टी दे दी गई है।
  • चीन ने स्वीकार किया कि कई मामलों में मौत का कारण जानने में गलती हुई या कई मामलों का पता ही नहीं चल पाया।

प्रष्ठभूमि

  • कोरोना वायरस के मामलों की संख्या और इसकी गंभीरता को कथित तौर पर छिपाने को लेकर अमेरिका और अन्य राष्ट्रों द्वारा चीन की तीखी आलोचना के बीच आंकड़ों में यह संशोधन किया गया है। पिछले दिसंबर से ही वुहान शहर से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलना शुरू हुआ था। ऐसा माना जा रहा है कि यह वुहान के स्थानीय हुनान सी फूड मार्केट से फैला है। चीन में तबाही मचाने के बाद अब यह संक्रमण दुनियाभर में फैल चुका है।

8. रैपिड ऐंटी बॉडी टेस्ट करने वाला पहला राज्य बना राजस्थान

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बताया है कि अब राज्य में कोरोना वायरस का रैपिड ऐंटी बॉडी टेस्ट शुरू हो गया है और यह टेस्ट करने वाला राजस्थान पहला राज्य है। उन्होंने बताया कि पहले दिन 60 जांच की गईं जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव पाई गईं। वहीं, राज्य में कोरोना के मामले बढ़कर 1,270 हो गए हैं।

READ  Hindi Current Affairs: 18 April 2020 सामयिकी

क्या है रैपिड ऐंटी बॉडी टेस्ट?

  • रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के अंतर्गत मरीज के खून का सैंपल लिया जाता है। इसमें यह देखते हैं कि संदिग्ध मरीज के खून में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी काम कर रही है या नहीं।
  • रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट से ये कनफर्म नहीं होता कि किसी शख्स में कोरोना वायरस है या नहीं। बस ये पता चलता है कि उसमें कोरोना वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी बन रही हैं या नहीं। यानी ये कोरोना मरीजों की संभावित पहचान करने में मददगार है।
  • इस टेस्ट से पता चलता है कि क्या शरीर में कोरोना वायरस आया था या नहीं। ऐंटीबॉडी पॉजेटिव आती है तो पीसीआर करवाने की सलाह दी जाती है। अगर वह भी पॉजेटिव आई तो यानी कोरोना है। अगर नहीं तो यानी पुराना इंफेक्शन हो सकता है। ऐसे में अलग रहने की सलाह दी जाती है। अगर दोबारा रिपोर्ट नेगेटिव आई तो शख्स घर जा सकता है।
  • फिलहाल सरकार पीसीआर (पोलीमरेज चेन रिएक्शन) टेस्ट कर रही है। इसमें नाक या गले के नमूने लिए जाते हैं और नतीजे आने में 5 घंटे का वक्त लगता है। जबकि ऐंटी बॉडी टेस्ट में 30 मिनट में नतीजे आते हैं।
  • रियल टाइम पीसीआर के मुकाबले रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट बेहतर है। एक तो ये रियल टाइम पीसीआर के मुकाबले सस्ता है। वहीं दूसरी ओर इसमें समय भी कम लगता है। महज 15-30 मिनट में ही इसका नतीजा आ जाता है, जबकि रियल टाइम पीसीआर का नतीजा आने में 5 घंटे का वक्त लग जाता है और इस समय के दौरान इंफेक्शन काफी लोगों में फैल सकता है।

9. व्हाइट हाउस के कोरोना वायरस सलाहकार परिषद में भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना शामिल

भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट पार्टी के कांग्रेसमैन  रो खन्ना को व्हाइट हाउस कोरोना वायरस सलाहकार परिषद में नियुक्त किया गया है।

  • खन्ना (43) व्हाइट हाउस के ‘ओपनिंग अप अमेरिका अगेन कांग्रेशनल ग्रुप’ में नामित एकमात्र भारतीय-अमेरिकी सांसद हैं, इस परिषद् में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों के सांसद और सीनेटर शामिल हैं।
  • इस सलाहकार परिषद की प्रथम बैठक में कई विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें ‘पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं, अर्थव्यवस्था को सक्रिय करने के तरीके, चिकित्सा बिलिंग, आवश्यक और गैर-आवश्यक श्रमिकों के बीच अंतर को स्पष्ट करना, मानसिक स्वास्थ्य और छोटे व्यवसायों के लिए राहत प्रदान करने संबंधी कई मुद्दे शामिल थे।
  • ‘पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ अमेरिकी लघु व्यापार प्रशासन (एसबीएस) की तरफ से कारोबारियों को दिया जाने वाला कर्ज है ताकि कोरोनावायरस के इस दौर में उनके कर्मी काम करते रहें।
  • अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के अनुसार अमेरिका में 16 अप्रैल तक मृतकों की संख्या 32,917 पहुंच गई है। देश में इसके संक्रमण के 6,67,800 मामले सामने आये हैं।

10. अमेरिका ने कोविड-19 से निपटने के लिए भारत को 59 लाख डॉलर की स्वास्थ्य सहायता दी

अमेरिका ने कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए भारत को करीब 59 लाख डॉलर की स्वास्थ्य सहायता दी है।

  • विदेश विभाग ने 16 अप्रैल को बताया कि इस धनराशि का प्रभावित लोगों की देखभाल, समुदायों को आवश्यक जन स्वास्थ्य संदेश देने में और निगरानी मजबूत करके इस विषाणु को फैलने से रोकने में भारत की मदद के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • इस सहायता का उपयोग आपातकालीन तैयारियों और इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए नवीन वित्त पोषण तंत्र जुटाने में भी किया जा रहा है।
  • यह अमेरिका द्वारा पिछले 20 वर्षों में भारत को मुहैया कराई करीब 2.8 अरब डॉलर की कुल सहायता का हिस्सा है जिसमें 1.4 अरब डॉलर से अधिक की स्वास्थ्य सहायता भी शामिल है।
  • दक्षिण एशिया में अमेरिका ने जिन देशों को कोविड-19 से निपटने के लिए सहायता मुहैया कराई हैं उनमें अफगानिस्तान (1.8 करोड़ डॉलर), बांग्लादेश (96 लाख डॉलर), भूटान (पांच लाख डॉलर), नेपाल (18 लाख डॉलर), पाकिस्तान (94 लाख डॉलर) और श्रीलंका (13 लाख डॉलर) शामिल हैं।

भारत में कोविड-19 की स्थिति

  • देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 14,000 के आंकड़े को पार गई है।
  • पिछले 24 घंटे में 991 नए मामले सामने आए हैं और 43 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद देशभर में कोरोना संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 14,378 हो गई है। जिसमें 11,906 सक्रिय हैं, 1992 लोग स्वस्थ हो चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 480 लोगों की मौत हो गई है।
DSGuruJi - PDF Books Notes

Leave a Comment