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सामयिकी: 14 मई 2020

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Current Affairs: 14 May 2020

1. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने का किया आह्वान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 के कारण जो संकट उभर कर सामने आया है, वह अप्रत्याशित है, लेकिन इस लड़ाई में हमें न केवल अपनी रक्षा करने की जरूरत है, बल्कि निरंतर आगे भी बढ़ते रहना होगा।

  • कोविड काल से पहले और बाद की दुनिया का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के सपने को पूरा करने के लिए यह सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़ना है कि देश आत्मनिर्भर हो जाए।
  • संकट को एक अवसर में बदलने की बात कहते हुए उन्होंने पीपीई किट और एन-95 मास्क का उदाहरण दिया, जिनका भारत में उत्पादन लगभग नगण्य से बढ़कर 2-2 लाख पीस प्रतिदिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

आत्मनिर्भर भारत के पांच स्तंभ

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के दृढ़ संकल्प की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत इन पांच स्तंभों पर खड़ा होगा:

i)   अर्थव्यवस्था, जो वृद्धिशील परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबी छलांग सुनिश्चित करती है;

ii)  बुनियादी ढांचा, जिसे भारत की पहचान बन जाना चाहिए;

iii) प्रणाली (सिस्टम), जो 21वीं सदी की प्रौद्योगिकी संचालित व्यवस्थाओं पर आधारित हो;

iv) उत्साहशील आबादी, जो आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है;

v)  मांग, जिसके तहत हमारी मांग एवं आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की ताकत का उपयोग पूरी क्षमता से किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग बढ़ाने के साथ-साथ इसे पूरा करने के लिए भी आपूर्ति श्रृंखला के सभी हितधारकों को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया।

आत्मनिर्भर भारत अभियान

  • प्रधानमंत्री ने एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की और आत्मनिर्भर भारत  बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोविड संकट के दौरान सरकार द्वारा इससे पहले की गई घोषणाओं और आरबीआई द्वारा लिए गए निर्णयों से जुड़ी राशि को मिला देने पर यह पैकेज 20 लाख करोड़ रुपये का है, जो भारत की जीडीपी के लगभग 10% के बराबर है।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पैकेज भूमि, श्रम, तरलता और कानूनों पर भी फोकस करेगा। यह कुटीर उद्योग, एमएसएमई, मजदूरों, मध्यम वर्ग, उद्योगों सहित विभिन्न वर्गों की जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने बताया कि पैकेज का विवरण वित्त मंत्री द्वारा कल से ही आने वाले कुछ दिनों तक पेश किया जाएगा।

2. सीएसआईआर- नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (एनएएल), बेंगलूरु ने वेंटिलेटर ‘स्वस्थ वायु’ किया विकसित

सीएसआईआर की एक घटक प्रयोगशाला सीएसआईआर – नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (एनएएल), बेंगलूरु ने कोवडि-19 रोगियों के इलाज के लिए 36 दिनों के रिकॉर्ड समय में नॉन इनवेसिव बीआईपीएपी (BiPAP) वेंटिलेटर विकसित किया है। इसे ‘स्वस्थ वायु’ नाम दिया गया है।

  • इस प्रणाली को सुरक्षा और प्रदर्शन के लिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा प्रमाणित किया गया है। एनएएल हेल्थ सेंटर में इस प्रणाली के कड़े बायोमेडिकल परीक्षण और बीटा क्लिनिकल परीक्षण किए गए हैं।
  • इस मशीन का प्रमुख लाभ यह है कि यह सस्ती और काम्पैक्ट है और इसे बिना किसी विशेष नर्सिंग सहायता के इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही इसे अधिकांश स्वदेशी पुर्जों के साथ तैयार किया गया है।
  • यह वार्डों में कोविड-19 के मरीजों को इलाज करने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। साथ ही भारत में कोविड-19 के मौजूदा परिदृश्य में इसका उपयोग अस्पतालों, औषधालयों और घरों में कारोनावायरस के रोगियों के उपचार में किया जा सकता है।

‘स्वस्थ वायु’ वेंटिलेटर की विशेषताएं

  • बीआईपीएपी नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर एचईपीए फिल्टर (Highly Efficient Particulate Air Filter- अत्यधिक कुशल पार्टिकुलेट एयर फिल्टर) के साथ माइक्रोकंट्रोलर आधारित एक सटीक बंद-लूप वाला एडप्टिव कंट्रोल सिस्टम है जिसमें बायोकंपैटिबल ‘3डी प्रिंटेड मेनिफोल्ड एंड कॉपुलर’ लगा है।
  • ये अनोखी विशेषताएं वायरस के फैलने की आशंका को कम करने में मदद करती हैं। इसमें ऑक्सीजन सांद्रता अथवा संवर्धन इकाई को बाहर से जोड़ने की सुविधा है। साथ ही इसमें स्पॉन्टेनियस, सीपीएपी, टाइम्ड, ऑटो बीआईपीएपी मोड जैसी विशेषताएं भी हैं।
  • सीएसआईआर-एनएएल इसे मंजूरी के लिए नियामक अधिकारियों के पास भेजने की प्रक्रिया में है और जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। सीएसआईआर-एनएएल ने बड़े पैमाने पर इसके उत्पादन के लिए सार्वजनिक/ निजी क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों के साथ बातचीत पहले ही शुरू कर दी है।

3. राजस्थान में कुम्भकारों ने मटकों के जरिये कोरोना जागरूकता फैलाने का उठाया बीड़ा

राजस्थान राज्य के कुंभकार परिवारों ने अपने हुनर से कोरोना के प्रति जागरूकता फैलाने का बीड़ा उठाया है। इन परिवारों द्वारा घड़े जाने वाले मटकों पर कोविड-19 से बचाव के संदेश को उकेरा गया है।

  • मटकों पर “घर रहें सुरक्षित रहें”, “कोरोना को हराना है बार-बार साबुन से हाथ धोना है” “मास्क का प्रयोग करें” जैसे संदेश लिखे गए है। इन कुम्भकार परिवारों का मानना है कि व्यक्ति जितनी बार पानी पीएगा उतनी बार इन संदेशों को पढ़ेगा और कोरोना से सचेत रहेगा। गर्मी बढ़ने के साथ ही मटकियों की बिक्री भी बढ़ेगी और उनका संदेश ज्यादा लोगों तक पहुँच सकेगा।
  • पहले जनजाति बहुल बाराँ जिले और अब बाड़मेर के कुम्भकार परिवारों की ओर से की गई यह पहल छोटी ही सही लेकिन असरदार और प्रशंसनीय है। विदित है कि ये परिवार केंद्र सरकार के खादी और ग्रामोद्योग आयोग की योजना “कुम्हार सशक्तिकरण कार्यक्रम” से जुड़े हैं।

कुम्हार सशक्तिकरण कार्यक्रम

  • यह कार्यक्रम राजस्थान के 12 जिलों में चलाया जा रहा है जिनमें जयपुर, कोटा, बाराँ, झालावाड़, श्रीगंगानगर, बाड़मेर प्रमुख है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कुम्हार समुदाय के हुनर को बेहतर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए उन्हें मिट्टी को गूंधने के लिए मशीनें और मटके तथा अन्य उत्पाद बनाने के लिए इलेक्ट्रिक चाक दिये गए है।
  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना के अनुसार“कुम्हार सशक्तिकरण कार्यक्रम” से जुड़ने के बाद कुंभकारों की आय में सात से आठ गुना वृद्धि हुई है। इस कार्यक्रम से करीब 60 हजार परिवारों को फायदा हो रहा है।

4. कोरोना से जंग लड़ने के लिए भारत को 100 करोड़ डॉलर का लोन देगा NDB

ब्रिक्स देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक ने भारत को एक अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता राशि देगा, ताकि भारत को कोविड-19 के प्रसार को रोकने में मदद मिले और कोरोना वायरस महामारी से होने वाले मानवीय, सामाजिक और आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।

  • आपातकालीन सहायता कार्यक्रम ऋण के तहत भारत को  यह कर्ज NDB निदेशक मंडल द्वारा 30 अप्रैल को अनुमोदित किया गया था।
  • यह कोविड-19 द्वारा उत्पन्न खतरे की परिकल्पना, रोकथाम, पता लगाने में काम आएगा और भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षमता को बढ़ाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों की तैयारी को मजबूत करेगा और कमजोर और प्रभावित समूहों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करेगा।

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)

  • NDB विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका द्वारा स्थापित पहला बहुपक्षीय विकास बैंक है जिसकी स्थापना 2014 में हुई थी।
  • बैंक का उद्देश्य ब्रिक्स और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना है इसके अलावा वैश्विक विकास और विकास के लिए बहुपक्षीय और क्षेत्रीय वित्तीय संस्थानों के मौजूदा प्रयासों के पूरक के रूप में कार्य करना हैं।
  • भारत बैंक में 20% हिस्सेदारी रखने वाले संस्थापक सदस्यों में से एक है। बैंक का मुख्यालय शंघाई में है।
  • अब तक, भारत का NDB का स्वीकृत ऋण अनुपात 28% है, जो कि ब्रिक्स देशों में चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक है। मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और असम जैसे राज्य बैंक से धन प्राप्त कर रहे हैं।

5. झारखंड की सोहराई खोवर पेंटिंग और तेलंगाना के तेलिया रुमाल को जीआई टैग

हाल ही में झारखंड की सोहराई खोवर पेंटिंग और तेलंगाना के तेलिया रुमाल को चेन्नई में भौगोलिक रजिस्ट्री मुख्यालय द्वारा भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग दिया गया है।

सोहराई खोवर पेंटिंग

  • सोहराई खोवर पेंटिंग झारखंड के हजारीबाग जिले में फसल और शादी के मौसम के दौरान आदिवासी महिलाओं द्वारा उकेरी जाने वाली प्रचलित एक पारंपरिक और अनुष्ठानिक भित्ति कला है जिसमें स्थानीय और प्राकृतिक रूप से विभिन्न रंगों की मिट्टी का उपयोग किया जाता है।

तेलिया रुमाल

  • तेलंगाना के पोचमपल्ली में तेलिया रुमाल के निर्माण का कार्य केन्द्रित है जिसमें कॉटन लूम के साथ जटिल हस्तनिर्मित कार्य शामिल है  इसे तीन विशेष रंगों (लाल, काले और सफेद) में विभिन्न प्रकार के डिजाइन और रूपांकनों के साथ प्रदर्शित किया जाता है।

क्या है भौगोलिक संकेतन?

  • भारत में भौगोलिक संकेतन वस्तुओं के भौगोलिक संकेत अधिनियम 1999 (पंजीकरण और सुरक्षा) के आधार पर प्रदान किए जाते हैं। यह एक ऐसा संकेत है जो वस्तुओं की पहचान सुनिश्चित करता है यह पहचान कृषि उत्पाद, विनिर्मित उत्पाद तथा प्राकृतिक वस्तुओं को उनके विशेष क्षेत्र (राज्य/देश) में उत्पन्न होने के कारण प्रदान की जाती है।
  • शिल्पकार दरअसल भारतीय हस्तशिल्प सेक्टर की रीढ़ हैं और उनमें विशेष कौशल, तकनीकी एवं पारंपरिक शिल्पकला अंतर्निहित है।
  • भौगोलिक संकेतक सामान्यत: 10 वर्ष के लिए दिया जाता है 10 साल के बाद इसका नवीनीकरण कराना होता है।

क्या होता है भौगोलिक संकेतन का फायदा?

  • इससे उत्पाद की विश्वसनीयता में बढ़ावा होता है तथा उत्पाद को विशेषता प्राप्त होती है। इसके माध्यम से पुरानी जानकारी, उत्पादों, विनिर्माण की प्रक्रिया को रक्षित किया जाता है।
  • भौगोलिक संकेतन से संबंधित उत्पाद के उत्पादन के निवेश के लिए निवेशक आसानी से मिल जाते हैं। इससे संबंधित क्षेत्र का विकास होता है तथा संबंधित क्षेत्र में समृद्धता आती है।
  • इससे उपभोक्ता को भी फायदा होता है उन्हें विशुद्ध उत्पाद प्राप्त होते हैं और उन्हें जाली उत्पादों से छुटकारा मिलता है।

6. मध्य प्रदेश में ‘एफआईआर-आपके द्वार’ योजना शुरु

मध्य प्रदेश पुलिस ने घर बैठे हुए ही प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए ‘एफआईआर-आपके द्वार’ योजना की शुरुआत की है। इस प्रकार की अनूठी योजना लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

  • इसे पायलट प्रोजेक्ट (प्रायोगिक परियोजना) के रूप में प्रदेश के 23 थानों से शुरू किया गया है। इसके तहत शिकायत प्राप्त होते ही ‘डायल 100’ टीम शिकायतकर्ता के घर जाकर प्राथमिकी दर्ज करेगी।
  • एफआईआर-आपके द्वार’ योजना 31 अगस्त तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलेगी। इसके बाद इसका आकलन किया जाएगा और सकारात्मक परिणाम आने पर व्यवस्था को पुख्ता बनाकर आवश्यक सुधार व परीक्षण के बाद पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा।
  • पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने कहा कि डायल 100 में प्राथमिकी दर्ज करने के लिये प्रशिक्षित प्रधान आरक्षक रहेंगे। सामान्य प्रकार की शिकायतों की डायल 100 द्वारा मौके पर ही प्राथमिकी दर्ज की जायेगी। गंभीर शिकायतों पर वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त कर निर्णय लिये जायेंगे।

7. वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि कोविड-19 संक्रमण कैसे बनता है मौत का कारण

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी के लक्षण, उसके निदान और शरीर पर उसके असर करने के तरीके का पता लगाने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड- 19 के कारण लोगों की मौत मुख्य रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता के अत्यधिक सक्रिय हो जाने की वजह से होती है।

  • पत्रिका ‘फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने चरणबद्ध तरीके से यह बात बताई है कि यह वायरस कैसे श्वास मार्ग को संक्रमित करता है, कोशिकाओं के भीतर कई गुणा बढ़ जाता है और गंभीर मामलों में प्रतिरोधी क्षमता को अतिसक्रिय कर देता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘साइटोकाइन स्टॉर्म’ कहा जाता है।
  • ‘साइटोकाइन स्टॉर्म’ श्वेत रक्त कोशिकाओं की अतिसक्रियता की स्थिति है। इस स्थिति में बड़ी मात्रा में साइटोकाइन रक्त में पैदा होते हैं। विदित है कि सार्स और मर्स जैसे संक्रमण के बाद भी ऐसा ही होता है। आंकड़े दर्शाते हैं कि कोविड-19 से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को ‘साइटोकाइन स्टॉर्म सिंड्रोम’ हो सकता है।
  • इस अध्ययन के लेखक एवं चीन की ‘जुन्यी मेडिकल यूनीवर्सिटी’ में प्रोफेसर दाइशुन लियू ने कहा, ‘‘बेहद तेजी से विकसित साइटोकाइन अत्यधिक मात्रा में लिम्फोसाइट और न्यूट्रोफिल जैसी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को आकर्षित करते हैं, जिसके कारण ये कोशिकाएं फेफड़ों के ऊतकों में प्रवेश कर जाती है और इनसे फेफड़ों को नुकसान हो सकता है।’’
  • अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि ‘साइटोकाइन स्टॉर्म’ से तेज बुखार और शरीर में खून जमना जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि श्वेत रक्त कोशिकाएं स्वस्थ ऊतकों पर भी हमला करने लगती हैं और फेफड़ों, हृदय, यकृत, आंतों, गुर्दा और जननांग पर प्रतिकूल असर डालती हैं जिनसे वे काम करना बंद कर देते हैं।
  • उन्होंने कहा कि कई अंगों के काम करना बंद कर देने के कारण फेफड़े काम करना बंद कर सकते हैं। इस स्थिति को ‘एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम’ कहते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि कोरोना वायरस से अधिकतर मौत का कारण श्वसन प्रणाली संबंधी दिक्कत है।

8. 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज सभी क्षेत्रों को करेगा समृद्ध

कोरोना संकटकाल में मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का आगाज किया है। इसके लिए उन्होंने 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी।

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में किया जाएगा और किसे कितनी राशि मिलेगी।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि मार्च के महीने में सरकार पहले ही 1.7 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज ला चुकी है। इस पैकेज के जरिए सरकार की कोशिश हर शख्स की पेट भरने की थी। इसके तहत जनधन खाते में तीन महीने के लिए 500-500 रुपये डाले जा रहे हैं। पीएम किसान योजना की किस्त जमा की गई है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना के तहत तीन महीने के लिए गैस सिलिंडर मुफ्त में बांटे जा रहे हैं।

मुख्य बिंदु

  • निर्माण के काम के लिए छह महीने तक के लिए एक्सटेंशन दिया जा रहा है। निर्धारित समय में किए जाने वाले काम को तय तारीख से छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा 25 मार्च 2020 के बाद जो भी रजिस्ट्रेशन और कंस्ट्रक्शन के लिए आगे बढ़े हैं, उन्हें छह महीने के लिए फायदा होगा। बिल्डरों को भी मकान पूरा करने के लिए अतिरिक्त वक्त दिया जाएगा।
  • डिस्कॉम यानी पावर जनरेटिंग कंपनियों को कैश फ्लो की दिक्कत हो रही है इसलिए उनके लिए 90 हजार करोड़ की सहायता तय की गई है।
  • एनबीएफसी को 45,000 करोड़ की पहले से चल रही योजना का विस्तार होगा। आंशिक ऋण गारंटी योजना का विस्तार होगा। इसमें डबल ए या इससे भी कम रेटिंग वाले एनबीएफसी को भी कर्ज मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि एनबीएफसी के लिए सरकार की 30 हजार करोड़ की स्पेशल लिक्विडिटि स्कीम है। एनबीएफसी के साथ हाउसिंग फाइनेंस और माइक्रो फाइनेंस को भी इसी 30 हजार करोड़ में जोड़ा गया है। इनकी पूरी गारंटी भारत सरकार देगी।
  • एमएसएमई को तीन लाख करोड़ रुपये का लोन दिया जाएगा। एमएसएमई के लिए सरकार छह कदम उठाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि 31 अक्तूबर 2020 से एमएसएमई को लोन की सुविधा मिलेगी। बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ तक का लोन दिया जाएगा और 45 लाख एमएसएमई को इसके तहत फायदा होगा।

9. 2021 में होगा फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप का आयोजन

वैश्विक महामारी कोरोना के कारण भारत में इस साल (2020) होने वाले महिला अंडर-17 फुटबॉल विश्व कप को स्थगित कर दिया गया था। मगर अब महिला अंडर-17 फुटबॉल विश्व का आयोजन अगले साल 17 फरवरी से 7 मार्च तक होगा फीफा ने इस बात की घोषणा की है।

  • फीफा (इंटरेनशनल फेडरेशन ऑफ असोसिएशन फुटबॉल) ने चार अप्रैल को इस साल नवंबर में भारत में होने वाले अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप टूर्नामेंट को स्थगित करने का एलान किया था। तय समय के मुताबिक यह टूर्नामेंट इस साल 2 नवंबर से 21 नवंबर के बीच खेला जाना था।
  • कोलकाता, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और नवी मुंबई में इस टूर्नमेंट के मुकाबले होने प्रस्तावित हैं जिसमें मेजबान भारत समेत 16 टीमें हिस्सा लेंगी।

10. आईसीसी ने महिला एकदिवसीय और पुरुष अंडर-19 क्वालीफायर किए स्थगित

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने कोविड-19 महामारी के कारण 2021 महिला विश्व कप और 2022 पुरुष अंडर-19 विश्व कप के जुलाई में होने वाले क्वालीफाइंग टूर्नामेंटों को स्थगित कर दिया है।

  • महिला क्वालीफाइंग प्रतियोगिता श्रीलंका में तीन से 19 जुलाई तक होनी थी जिसमें मेजबान श्रीलंका सहित 10 टीमों ने हिस्सा लेना था। अन्य टीमें बांग्लादेश, आयरलैंड, नीदरलैंड, पाकिस्तान, पापुआ न्यू गिनी, थाईलैंड, अमेरिका, वेस्टइंडीज और जिंबाब्वे थी।
  • आईसीसी अंडर-19 विश्व कप 2022 की क्वालीफाइंग प्रक्रिया की शुरुआत 24 से 30 जुलाई तक डेनमार्क में होने वाले यूरोपीय क्षेत्रीय क्वालीफायर के साथ होनी थी।
  • इन टूर्नामेंटों का आयाजन कब किया जा सकता है इसके लिए आईसीसी प्रतिस्पर्धी देशों से सलाह मशविरा करेगा। यह विश्व कप वेस्टइंडीज में होने प्रस्तावित है।
  • आईसीसी के प्रतियोगिता प्रमुख क्रिस टेटली ने कहा, ‘‘यात्रा लेकर जारी पाबंदियों, वैश्विक स्वास्थ्य चिंताओं और सरकार तथा जन स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह पर हमने कोविड-19 महामारी के कारण आगामी दो क्वालीफाइंग प्रतियोगिताओं को स्थगित करने का फैसला किया है।’’
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