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सामयिकी: 13 मई 2020

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Current Affairs: 13 May 2020

1. 10 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों की 177 नई मंडियां ई-एनएएम प्लेटफॉर्म से जुड़ी

केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, नरेन्द्र सिंह तोमर ने कृषि विपणन को मजबूत करने और किसानों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी फसल की उपज बेचने की सुविधा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) के साथ 177 नई मंडियों को जोड़ने की घोषणा की है।

  • जोड़ी गई 177 मंडियों में गुजरात (17), हरियाणा (26), जम्मू और कश्मीर (1), केरल (5), महाराष्ट्र (54), ओडिशा (15), पंजाब (17), राजस्थान (25), तमिलनाडु (13) और पश्चिम बंगाल (1) की मंडियां शामिल हैं। इसके साथ ही देश भर में राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) मंडियों की कुल संख्या 962 हो गई है।
  • इससे पहले, 785 मंडियों को 17 राज्यों और 2 संघ शासित प्रदेशों में ईएनएएम के साथ जोड़ा गया था, जिसका उपयोग करने वाले 1.66 करोड़ किसान, 1.30 लाख व्यापारी और 71,911 कमीशन एजेंट थे।
  • अपने पहले चरण (585 मंडियों को जोड़ने) में ई-एनएएम की उपलब्धियों को देखते हुए, यह 15 मई 2020 से पहले सरकार 415 अतिरिक्त मंडियों को जोड़ने के साथ अपने पंख फैलाकर विस्तार के मार्ग पर अग्रसर है। जहाँ 18 राज्यों और 3 संघ शासित प्रदेशों में ईएनएएम मंडियों की कुल संख्या 1,000 से अधिक की जानी है।

ई-नाम (eNAM)

  • ई- राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (Electronic – National Agriculture Market) कृषि विपणन में एक अभिनव पहल है, जो किसानों की डिजिटल पहुंच को कई बाजारों और खरीदारों तक डिजिटल रूप से पहुंचाता है और कीमत में सुधार के इरादे से व्यापार लेनदेन में पारदर्शिता लाता है, गुणवत्ता के अनुसार कीमत और कृषि उपज के लिए “एक राष्ट्र-एक बाजार”  की अवधारणा को विकसित करता है।
  • केंद्र सरकार द्वारा 14 अप्रैल 2016 में ई-नाम (eNAM) नामक पोर्टल की शुरुआत की गई थी। इसके तहत किसान अपने नज़दीकी बाज़ार से अपने उत्पाद की ऑनलाइन बिक्री कर सकते हैं तथा व्यापारी कहीं से भी उनके उत्पाद के लिये मूल्य चुका सकते हैं।
  • राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और सफल योजना है इससे क्रेता और विक्रेता के बीच सूचना की असमानता को समाप्त कर और वास्तविक मांग और आपूर्ति के आधार पर वास्तविक समय मूल्य खोज को बढ़ावा देकर एकीकृत बाजार में प्रक्रियाओं को सरल बनाकर कृषि विपणन में एकरूपता को बढ़ावा दिया जा सकता है
  • इसके परिणामस्वरूप व्यापारियों की संख्या में वृद्धि होगी जिससे प्रतिस्पर्द्धा में भी बढ़ोतरी होगी जिससे उचित मूल्यों का निर्धारण भलीभाँति किया जा सकता है तथा किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होगा।

2. सरकार ने गांधी शांति पुरस्कार 2020 के लिए नामांकन की अंतिम तिथि बढ़ाई

संस्कृति मंत्रालय गांधी शांति पुरस्कार के लिए हर साल नामांकन आमंत्रित करता है। गांधी शांति पुरस्कार के लिए नामांकन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुरूप होने चाहिए।

  • वर्ष 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2020 थी। कोविड-19 के कारण देश भर में लॉकडाउन के कारण गांधी शांति पुरस्कार 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15.6.2020 तक बढ़ा दी गई है।

गांधी शांति पुरस्कार

  • अहिंसा के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूपांतर के लिए गांधी शांति पुरस्कार की स्थापना 1995 में  गांधी जी के 125वें जन्म-दिवस पर की गई थी। पुरस्कार के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की धनराशि और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। भारत के प्रधानमंत्री, ज्यूरी के अध्यक्ष हैं, जो विजेताओं का चयन करती है।
  • यह वार्षिक पुरस्कार समाज के कमजोर तबको में शांति, अहिंसा और मानवीय कष्टों को समाप्त करने के लिए कार्य करने वाले संगठनों, संस्थाओं, संघों या व्यक्तिगत स्तर पर दिया जाता है। इस पुरस्कार के लिए सभी व्यक्ति योग्य हैं। इसके चयन में राष्ट्रीयता, भाषा, जाति, वर्ग, समुदाय या लिंग का विभेद नहीं किया जाता है।
  • प्रथम गाँधी शांति पुरस्कार 1995 में तंजानिया के प्रथम राष्ट्रपति के जूलियस नायरेरे को प्रदान किया गया था।  गांधी शांति पुरस्कार वर्ष 2015 के लिए विवेकानंद केन्द्र, कन्याकुमारी, 2016 के लिए संयुक्त रूप से अक्षय पात्र फाउंडेशन व सुलभ इंटरनेशनल, 2017 के लिए एकल अभियान ट्रस्ट तथा 2018 के लिए जापान के योहेई ससाकावा को प्रदान किया गया था।
  • वर्ष 2004, 2006, 2007, 2008, 2009, 2010, 2011 और 2012 में पुरस्कार नहीं दिए गए थे।

3. अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के 5 वर्ष पूरे

भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना ‘अटल पेंशन योजना’ (एपीवाई) ने सफल कार्यान्वयन के पांच साल पूरे कर लिए हैं। 9 मई 2015 को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों को वृद्धावस्था आय सुरक्षा देने और 60 वर्ष की आयु के बाद न्यूनतम पेंशन की गारंटी प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी।

  • यह योजना भारत में वृद्धजनों की तेजी से बढ़ती आबादी की चुनौतियों से निपटने के लिए नि:संदेह महत्वपूर्ण है। इन पांच वर्षों में एपीवाई की यात्रा अभूतपूर्व रही है और 9 मई 2020 तक, इस योजना के तहत कुल 2,23,54,028 नाम दर्ज किए गए हैं।
  • इसकी शुरूआत के पहले दो वर्षों के दौरान, लगभग 50 लाख ग्राहकों के नाम दर्ज किए गए थे जो तीसरे वर्ष में दोगुने होकर 100 लाख हो गए और चौथे वर्ष में यह संख्या 1.50 करोड़ पर पहुंच गई। पिछले वित्तीय वर्ष में योजना के तहत लगभग 70 लाख ग्राहकों के नाम दर्ज किए गए थे।

अटल पेंशन योजना (एपीवाई)

  • अटल पेंशन योजना (एपीवाई) की शुरुआत 9 मई 2015 को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई थी। एपीवाई को 18-40 वर्ष की आयु का कोई भी ऐसा भारतीय नागरिक ले सकता है जिसके पास बैंक खाता है और इसकी विशिष्टता तीन विशिष्ट लाभों के कारण है।
  • सबसे पहले, यह 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की न्यूनतम गारंटीकृत पेंशन प्रदान करता है, दूसरी बात यह है कि ग्राहक की मृत्यु पर पति या पत्नी को आजीवन पेंशन की राशि की गारंटी दी जाती है और अंत में, दोनों ग्राहकों की मृत्यु की स्थिति में और पति / पत्नी, पेंशन की पूरी राशि नामित व्यक्ति को भुगतान कर दी जाती है।
  • इस योजना को पूरे देश में बड़े पैमाने पर लागू किया गया है, जिसमें सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है और इसमें पुरुष के साथ महिला सदस्यता अनुपात 57:43 है।

4. ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय हेल्पलाइन “भरोसा” की शुरूआत

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने नई दिल्ली में एक आभासी मंच के माध्यम से ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूओ) हेल्पलाइन “भरोसा” का शुभारंभ किया है ।

  • “भरोसा” हेल्पलाइन का उद्देश्य कोविड-19 महामारी के कठिन समय के दौरान छात्र समुदाय की परेशानियों को दूर करना है। यह हेल्पलाइन ओडिशा के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों को संज्ञानात्मक भावनात्मक पुनर्वास सेवाएं (Cognitive Emotional Rehabilitation Services) प्रदान करेगा।
  • इस समय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति चिंता करना बहुत जरूरी है और ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किया गया हेल्पलाइन इस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
  • डॉ. अरुण कुमार साहू उच्च शिक्षा विभाग मंत्री, ओडिशा सरकार ने ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि यह छात्रों को कोविड-19 के दौरान परेशानियों से बाहर निकलने में मदद करेगा।

5. ओडिशा के समुद्री तट पर दिखे ओलिव रिडले कछुए

हाल ही में ओडिशा के गंजाम जिले के ऋषिकुल्या नदी के समुद्री संगम स्थल पर सैकड़ों की संख्या में अलिव रिडले कछुए रेत के अंदर बने अपने घरों से समुद्र की ओर जाते हुए नजर आये है।

  • वन विभाग के अनुसार इस वर्ष कुल 2 लाख 6 हजार से अधिक अलिव रिडले कछुए यहां अण्डादान किया था। जिससे वन विभाग ने आम नागरिकों से कछुओं की सुरक्षा की अपील करते हुए समुद्र तट से दूर रहने के लिये कहा था।
  • करीब चार किलोमीटर में फैले इस समुद्री तट पर प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में ओलिव रिडले कछुए प्रजनन के लिये अपना बसेरा बनाते हैं। ओलिव रिडले कछुए अपने मूल निवास-स्थान से हज़ारों किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ओडिशा के तट पर पहुँचते हैं।

ओलिव रिडले कछुए

  • ओलिव रिडले समुद्री कछुओं को ‘प्रशांत ओलिव रिडले समुद्री कछुओं’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से प्रशांत, हिन्द और अटलांटिक महासागरों के गर्म जल में पाए जाने वाले समुद्री कछुओं की एक मध्यम आकार की प्रजाति है। ये माँसाहारी होते हैं।
  • आईयूसीएन द्वारा जारी रेड लिस्ट में इसे Vulnerable प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया है।
  • ओलिव रिडले कछुए हज़ारों किलोमीटर की यात्रा कर ओडिशा के गंजम तट पर अंडे देने आते हैं और फिर इन अंडों से निकले बच्चे समुद्री मार्ग से वापस हज़ारों किलोमीटर दूर अपने निवास-स्थान पर चले जाते हैं।
  • दरअसल अपनी यात्रा के दौरान भारत में गोवा, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों से गुज़रते हैं, लेकिन प्रजनन करने और घर बनाने के लिये ओडिशा के समुद्री तटों की रेत को ही चुनते हैं।
  • ओलिव रिडले समुद्री कछुओं की उन पांच प्रजातियों में से एक है जो प्रजनन के लिए भारतीय तटों का रुख करते हैं भारत के वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के तहत उनकी सुरक्षा की गारंटी की गई है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती के चुंबकीय क्षेत्र और समंदर की लहरें इन कछुओं को यहां आने में मदद करते हैं। चुंबकीय क्षेत्र उन्हें उस जगह आने को प्रेरित करता हैं, जहां की रेत को उन्होंने पहली बार देखा था।

6. 12 मई को मनाया गया अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस

हर साल 12 मई के दिन दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। बीमारों को जिंदगी देने में डॉक्टर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है लेकिन नर्सों का योगदान डोक्टरों से कम नहीं कहा जा सकता है। इस वर्ष का विषय – ‘नर्सिंग द वर्ल्ड टू हेल्थ’ है।

  • कोविड-19 महामारी नर्सों की महत्वपूर्ण भूमिका को फिर से रेखांकित कर रहा है। नर्सों और दूसरे स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं के बिना हम इस महामारी से लड़ाई नहीं जीत सकते। सतत विकास का लक्ष्य और सभी को स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे में लाने का लक्ष्य इनके बिना हासिल नहीं किया जा सकता।
  • दुनिया की महान नर्स फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर नर्सिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली नर्सों को फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाता है।

फ्लोरेंस नाइटिंगेल

  • फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म 12 मई, 1820 को इटली के फ्लोरेंस में हुआ था। उनके पिता का नाम विलियम नाइंटिगेल और मां का नाम फेनी नाइटिंगेल था। 13 अगस्त, 1919 को फ्लोरेंस नाइटिंगेल का निधन हो गया था।
  • फ्लोरेंस नाइटिंगेल को दुनिया में नर्सिंग के पेशे की संस्थापक माना जाता है। उन्होंने पहले सेक्युलर नर्सिंग स्कूल की स्थापना की थी।
  • फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने 1854 में क्रीमिया  युद्ध के मरीजों की देखभाल में दिन-रात एक कर दिया था। रात के समय में जब सब सो रहे होते थे, वह सैनिकों के पास जातीं थीं और यह देखतीं थीं कि सैनिकों को कोई तकलीफ तो नहीं है। इस वजह से सैनिकों ने उनको ‘लेडी विद लैंप’ भी कहा जाता है।

7. सूक्ष्म लघु एंव मद्यम उद्यम मंत्रालय ने चैंपियन्स पोर्टल किया शुरू

एक बड़ी पहल के तहत सूक्ष्म,लघु एंव मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने चैंपियन्स पोर्टल शुरु किया है। इस पोर्टल के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र से जुडी समस्त जानकारियां एक स्थान पर उपलब्ध कराई गई हैं।

  • यह प्रौद्योगिकी आधारित एक प्रबंधन सूचना प्रणाली है जिसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को राष्ट्रीय और  वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाने ,गुणवत्ता हासिल करने और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने में मदद करना है।
  • आधुनिक तकनीक के सांमजस्यपूर्ण अनुप्रयोंगों के साथ छोटे उद्योगों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाने के मूल लक्ष्य के अनुरुप इस पोर्टल को चैंपियन्स का नाम दिया गया है।
  • एमएसएमई मंत्रालय ने यह संकेत दे दिया था कि वर्तमान कठिन परिस्थितियों में देश के छोटे उद्योगों  की मदद करने के लिए एक आईसीटी आधारित प्रणाली स्थापित की जाएगी जो उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारेाबारी क्षमता बढाने में मदद करेगी। इस प्रणाली का प्रायोगिक परीक्षण 9 मई को शुरु किया गया।

चैंपियन्स पोर्टल की विशेषताएं

  • यह एक प्रौद्योगिकी पैक नियंत्रण कक्ष-सह-प्रबंधन सूचना प्रणाली है जिसे टेलीफोन, इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसे आईसीटी टूल्स के अलावा, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग द्वारा सक्षम बनाया गया है।
  • इसे भारत सरकार की मुख्य केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) और एमएसएमई मंत्रालय की अन्य वेब प्रणालियों के साथ सीधे जोडा गया है। इस पूरी प्रणाली को बिना किसी लागत के एनआईसी की मदद से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। इसकी भौतिक अवसंरचना रिकॉर्ड समय में मंत्रालय में ही तैयार की गई है।
  • सूचना प्रणाली में कंट्रोल रूम का एक नेटवर्क हब एंड स्पोक मॉडल में बनाया गया है। हब नई दिल्ली में एमएसएमई सचिव के कार्यालय में स्थित है और राज्यों में मंत्रालय के विभिन्न कार्यालयों को इससे जोडा गया है। इस नियंत्रण प्रणाली के हिस्से के रूप में अब तक, 66 राज्यों में स्थानीय स्तर के नियंत्रण कक्ष बनाए जा चुके हैं।

8. जाने-माने इतिहासकार हरिशंकर वासुदेवन का निधन

जाने-माने इतिहासकार हरिशंकर वासुदेवन का 68 वर्ष की उम्र में कोरोना निधन हो गया है। प्रोफेसर हरिशंकर वासुदेवन को चार अप्रैल को कोरोना के लक्षण दिखने के बाद साल्ट लेक के अमरी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

  • हरिशंकर वासुदेवन कोलकाता यूनिवर्सिटी में इतिहास विभाग के प्रोफेसर और चीनी केंद्र के निदेशक रहे थे। इससे पहले वो मौलाना अबुल कलाम आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज कोलकाता के निदेशक रहे थे।
  • प्रोफेसर हरि वासुदेवन रूसी और यूरोपीय इतिहास और भारत-रूस संबंधों के एक प्रमुख विशेषज्ञ थे। वह प्रतिष्ठित, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के विजिटिंग फैलो और, इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज, कोलकाता के प्रेसिडेंट रह चुके थे।
  • उन्होंने संस्कृति मंत्रालय, एमएचआरडी, वाणिज्य मंत्रालय और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की परियोजनाओं / संस्थानों के साथ औपचारिक परामर्श में शामिल होने के दौरान अपनी पहचान बनाई वह एनसीईआरटी की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक विकास समिति के 2005 से अध्यक्ष थे।

9. अखिल कुमार फिर से नाडा अनुशासन पैनल में शामिल

राष्ट्रमंडल खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज अखिल कुमार को राष्ट्रीय डोपिंगरोधी एजेंसी (नाडा) के अनुशासन पैनल में फिर से शामिल किया गया है। वह इससे पहले 2017 से 2019 तक इस पैनल के सदस्य थे।

  • अर्जुन पुरस्कार विजेता ओलिंपियन अखिल भारतीय खेलों में अपनी अलग पहचान रखते हैं। वह 2017 से 2019 तक मुक्केबाजी के सरकारी पर्यवेक्षक भी रहे थे। वर्तमान में अखिल हरियाणा पुलिस में कार्यरत हैं और अभी गुरुग्राम में एसीपी हैं।
  • इससे पहले इस मुक्केबाज ने डोपिंग को अपराध घोषित करने की वकालत की थी। नाडा अनुशासन पैनल में ट्रैक एवं फील्ड की ऐथलीट और अर्जुन पुरस्कार विजेता अश्विनी नचप्पा भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय डोपिंग रोघी एजेंसी (NADA)

  • राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी [एनएडीए] को भारत सरकार ने नशा मुक्त खेल के दर्शन के लिए भारत के स्वतंत्र संगठन के रूप में कार्य करने के उद्देश्य से स्थापित किया था। यह नियंत्रण में सुधार की योजना, समन्वयन, क्रियान्वयन, निगरानी की वकालत करता है इसकी स्थापना 2005 में हुई थी।
  • राष्ट्रीय एन्टी डोपिंग एजेंसी को भारत में डोप मुक्त खेल के लिए अनिवार्य किया गया है इसका प्राथमिक उद्देश्य वाडा (World Anti-Doping Agency) कोड के अनुसार डोपिंग विरोधी नियम लागू करना, डोप नियंत्रण कार्यक्रम को विनियमित करना, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना और डोपिंग और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
  • राष्ट्रीय एंटी डोपिंग एजेंसी के के अध्यक्ष किरन रिजीजू तथा सचिव रवि मित्तल है। इसके ब्रांड ऐम्बेस्डर सुनील शेट्टी हैं।

10. सानिया मिर्जा ने जीता फेड कप हार्ट अवॉर्ड

टेनिस स्टार सानिया मिर्जा 11 मई को फेड कप हार्ट अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं जिन्हें यह पुरस्कार मां बनने के बाद कोर्ट पर सफल वापसी के लिए मिला है।

  • हर वर्ग में पुरस्कार विजेता को दो हजार डॉलर मिलते हैं। उन्होंने इस जीत से मिला पैसा तेलंगाना सीएम रिलीफ फंड में देने का फैसला किया है।
  • सानिया को एशिया ओसियाना क्षेत्र के लिए अवॉर्ड दिया गया है। उन्हें कुल 16985 में से 10 हजार से अधिक वोट मिले हैं। फेड कप हार्ट अवॉर्ड के विजेता का चयन प्रशंसकों के वोट के आधार पर होता है।
  • सानिया ने चार साल बाद फेड कप में वापसी की थी और इतिहास में पहली बार भारत ने प्लेऑफ में जगह बनाई थी। अपने बेटे इजहान को अक्टूबर 2018 में जन्म देने के बाद सानिया ने इस साल जनवरी में कोर्ट पर लौटीं थीं और नादिया किचेनोक के साथ होबार्ट इंटरनेशनल खिताब जीता था।

 

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