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सामयिकी: 12 मई 2020

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Current Affairs: 12 May 2020

1. भारतीय रेलवे ने 11 मई, 2020 तक देश भर में 468 ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें चलाईं

देश के विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों की आवाजाही के संबंध में गृह मंत्रालय के आदेश के बाद भारतीय रेलवे ने ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया था।

  • 11 मई 2020 तक  देश भर के विभिन्न राज्यों से कुल 468 ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें चलाई गई हैं, जिनमें से 363  ट्रेनें अपने गंतव्य तक पहुंच भी चुकी हैं  और 105 ट्रेनें फिलहाल अपने-अपने गंतव्यों की ओर अग्रसर हैं।
  • इन 363 ट्रेनों का परिचालन विभिन्न राज्यों में पहुंचने पर समाप्त हुआ, जैसे कि आंध्र प्रदेश (1 ट्रेन), बिहार (100 ट्रेनें), हिमाचल प्रदेश (1 ट्रेन), झारखंड (22 ट्रेनें), मध्य प्रदेश (30 ट्रेनें), महाराष्ट्र (3 ट्रेनें), ओडिशा (25 ट्रेनें), राजस्थान (4 ट्रेनें), तेलंगाना (2 ट्रेनें), उत्तर प्रदेश (172 ट्रेनें), पश्चिम बंगाल (2 ट्रेनें) और तमिलनाडु (1 ट्रेन)।
  • इन स्पेशल ट्रेनों ने प्रवासियों को अनेक शहरों तक पहुंचाया है जिनमें तिरुचिरापल्ली, टिटलागढ़, बरौनी, खंडवा, जगन्नाथपुर, खुर्दा रोड, प्रयागराज, छपरा, बलिया, गया, पूर्णिया, वाराणसी, दरभंगा, गोरखपुर, लखनऊ, जौनपुर, हटिया, बस्ती, कटिहार, दानापुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा इत्यादि शामिल हैं।

‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन

  • देश के विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों को उनके घर तक पहुचाने के लिए गृह मंत्रालय के आदेश के बाद भारतीय रेलवे ने ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों का संचालन  किया है इन ट्रेनों में  प्रवासी श्रमिकों के संख्या सबसे ज्यादा है।
  • एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अधिकतम करीब 1200 यात्री यात्रा कर सकते हैं। ट्रेन में सवार होने से पहले यात्रियों की उचित तरीके से जांच सुनिश्चित की जाती है। यात्रा के दौरान यात्रियों को भोजन और पानी मुफ्त में दिया जाता है।
  • सरकार द्वारा “श्रमिक दिवस” से “श्रमिक स्पेशल” ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया था। सरकार के अनुसार श्रमिकों का किराया 85 प्रतिशत रेल मंत्रालय द्वारा तथा 15 प्रतिशत सम्बंधित राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जायेगा।

2. पर्यटन मंत्रालय ने ‘निला नदी की खोज’ पर ‘देखों अपना देश’ वेबिनार श्रृंखला के 17वें सत्र का आयोजन किया

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा 9 अप्रैल 2020 को ‘निला नदी की खोज’ शीर्षक पर ‘देखों अपना देश’ वेबिनार के 17वें सत्र का आयोजन किया गया इसका उद्देश्य यात्रियों के लिए सार्थक यात्रा अनुभवों को प्रदर्शित करना था जिनकी पेशकश ऐसे स्थानों द्वारा की जाती है जहां अपेक्षाकृत कम यात्रा की गई हो।

  • प्रस्तुत वेबिनार ने प्रतिभागियों को केरल में भारतपुझा के रूप में विख्यात नदी निलासो के तटीय क्षेत्र के कम ज्ञात शहरों और गांवों की यात्रा कराई जो समझदार यात्रियों और खोजकर्ताओं को प्रमाणिक और अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
  • ‘निला नदी की खोज’ की कहानी जिम्मेदार पर्यटन के सिद्धांतों को प्रदर्शित करने पर आधारित थी जो किसी स्थान, वहां रहने वाले लोगों से संबंधित अनूठेपन की खोज करते हैं और उसे उन लोगों के साथ साझा करते हैं, जो वहां की यात्रा करते हैं।
  • वेबिनार में जिन स्थानों को प्रदर्शित किया गया, वे केरल के पालाक्कड, त्रिसूर एवं मालापुरम जिलों में स्थित हैं जहां कोयंबटूर, कोच्चि एवं कोझिकोड हवाई अड्डों के जरिये हवाई जहाजों से आसानी से पहुंचा जा सकता है और वे रेल तथा सड़क नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़े हैं।
  • विदित है कि देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला का उद्देश्य घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देना है। वर्तमान लॉकडाउन अवधि के दौरान, पर्यटन मंत्रालय पर्यटन उद्योग के हितधारकों एवं देश के नागरिकों के साथ जुड़ने की हरसंभव कोशिश कर रहा है जिससे कि यात्रा प्रतिबंधों पर लगे प्रतिबंधों के हटने के बाद भारत के भीतर यात्रा को लेकर उनकी दिलचस्पी बना कर रखी जा सके। इन वेबिनारों के प्रतिभागियों में पर्यटन हितधारकों, छात्रों और पूरे देश के आम लोग शामिल हैं।

निला नदी/भारतपुझा नदी

  • भारतपुझा नदी भारत के केरल राज्य में प्रवाहित होने वाली नदी है। पालक्काड ज़िले का एक बड़ा क़स्बा ओट्टापालम भारतपुझा नदी के किनारे पर ही स्थित है। इस नदी को ‘नीला नदी’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • भारतपुझा नदी पेरियार के बाद केरल की दूसरी सबसे बड़ी नदी है। इसकी लम्बाई लगभग 250 किलोमीटर है। नदी का उद्गम स्थान तमिलनाडु के अन्नामलाई पहाड़ियों में है उद्गम राज्य में यह 41 किलोमीटर तक बहती है।
  • वर्तमान समय में इस नदी का अस्तित्व संकट में है। उत्तर भारत की अनेक सूखी, रेत भरी नदियों के समान ही इसका भी हाल बेहाल है।

3. 11 मई को मनाया गया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैधानिक निकाय प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से 11मई 2020 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक उच्च स्तरीय डिजिटल कॉन्फ्रेंस ‘रिबूटिंग द इकॉनोमी थ्रू साइंस एंड टैक्नोलॉजी एंड रिसर्च ट्रांसलेशन्स- रीस्टार्ट’ का आयोजन किया गया।

  • केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धनइस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। इस कार्यक्रम में सदस्य विज्ञान, नीति आयोग डॉ. वी. के. सारस्वत; प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार प्रो. के. विजयराघवन; डब्ल्यूएचओ में मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने भी भाग लिया था।
  • यह कॉन्फ्रेंस वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, सरकारी अधिकारियों, राजनयिकों, डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय उद्योग, अनुसंधान संस्थाओं और अकादमिक संस्थाओं की गणमान्य हस्तियों को एक मंच पर लाई है जो वर्तमान महामारी को दूर करने में भारत की मदद कर सकते हैं।
  • इस दौरान डिजिटल कॉन्फ्रेंस के अलावा, उन कंपनियों के साथ एक आभासी प्रदर्शनी की योजना बनाई गई थी जिनकी प्रौद्योगिकियां टीडीबीद्वारा समर्थित हैं। विभिन्न संगठनों और कंपनियों द्वाराडिजिटल बी2बी लाउंज के माध्यम से प्रदर्शनी में अपने उत्पादों को प्रदर्शन किया गया। दुनिया भर के लोग कॉन्फ्रेंस के स्टॉल्स को देख सकते थे।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से, टीडीबीदेश में नवाचारों और तकनीकी उत्कृष्टता की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाता है।
  • इस दिन का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भी है, क्योंकि 11 मई 1998 को ही भारत ने पोखरण में सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षणों को अंजाम देकर बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की थी।
  • इसके अलावा, इसी दिन बैंगलोर में पहले स्वदेशी विमान “हंसा-3” ने परीक्षण उड़ान भरी थी; और इसी दिन भारत ने त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण प्रक्षेपण भी किया था। इस दिन को 1999 से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
  • प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाना वैज्ञानिक जांच, प्रौद्योगिकीय रचनात्मकता और नवाचारों भारत की जद्दोजहद तथा राष्ट्रीय सामाजिक-आर्थिक लाभ और वैश्विक उपस्थिति में इन घटनाक्रमों के एकीकरण का प्रतीक है।

4. डीआरडीओ लैब ने स्वचालित यूवी सिस्टम किया विकसित

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रमुख प्रयोगशाला, रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई), हैदराबाद ने एक स्वचालित व संपर्करहित यूवीसी सेनेटाइजेशन कैबिनेट विकसित किया है, जिसे डिफेन्स रिसर्च अल्ट्रावायोलेट सेनेटाइज़र (डीआरयूवीएस) नाम दिया गया है।

  • इसे मोबाइल फोन, आईपैड, लैपटॉप, करेंसी नोट, चेक, चालान, पासबुक, कागज, लिफाफे आदि को कीटाणुमुक्त करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • डिफेन्स रिसर्च अल्ट्रावायोलेट सेनेटाइज़र (डीआरयूवीएस) कैबिनेट का संपर्क रहित संचालन किया जाता है जो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सेंसर स्विच तथा दराज को खोलने और बंद करने की सुविधा इसके संचालन को स्वचालित और संपर्क रहित बनाती है।
  • कैबिनेट के अंदर रखी गई वस्तुओं पर यूवीसी का सभी तरफ से असर (360 डिग्री एक्सपोजर) होता है। कीटाणुमुक्त करने की प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद सिस्टम स्लीप मोड में चला जाता है इसलिए संचालन करने वाले को उपकरण के पास इंतजार करने या खड़े होने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • चूंकि डीआरयूवीएस का उपयोग करके नोटों के बंडलों को कीटाणुमुक्त किया जा सकता है, हालांकि इसका उपयोग करते हुए प्रत्येक करेंसी नोट को कीटाणुमुक्त करने की इस प्रक्रिया में काफी समय लगेगा। इसके समाधान के लिए रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) ने एक स्वचालित यूवीसीकरेंसी नोट सैनिटाइजिंग उपकरण भी विकसित किया है, जिसे नोट्सक्लीन नाम दिया गया है।
  • इसके तहत उपकरण के इनपुट स्लॉट में नोटों के बंडल को खुले रखना है। उपकरण एक-एक करके नोटों को लेता है और उन्हें पूर्ण रूप से कीटाणुमुक्त करने के लिए यूवीसी लैंप की एक श्रृंखला से होकर ले जाता है।

5. हिन्द महासागर के देशों के साथ रिश्ते प्रगाढ़ करेगा “मिशन सागर”

कोविड-19 महामारी के बीच भारत सरकार के साथ समन्वय कायम करते हुए,भारतीय नौसेना का जहाज ‘केसरी’ खाद्य वस्तुएं, एचसीक्यू गोलियों सहित कोविड सम्बन्धित दवाएं और विशेष आयुर्वेदिक दवाओं और चिकित्सा सहायता दलों के साथ 10 मई 2020 को मालदीव,मॉरीशस, सेशेल्स, मेडागास्कर और कोमोरोस रवाना हो गया है।

  • ‘मिशन सागर’ के रूप में यह समन्वय क्षेत्र में पहले उत्तरदाता (First Responder) के रूप में भारत की भूमिका के अनुरूप है और कोविड-19 महामारी और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न कठिनाइयों से मुकाबला करने के लिए इन देशों के बीच मौजूदा उत्कृष्ट संबंधों को विकसित करती है।
  • यह अभियान रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और भारत सरकार की अन्य एजेंसियों के साथ नजदीकी समन्वय के साथ प्रगति पर है।
  • मिशन सागर के हिस्से के रूप में, भारतीय नौसेना का जहाज केसरी मालदीव गणराज्य के पोर्ट ऑफ माले में प्रवेश करेगा, ताकि उन्हें 600 टन खाद्य प्रदान किया जा सके। विदित है कि भारत और मालदीव अत्यंत मजबूत और सौहार्दपूर्ण रक्षा और राजनयिक संबंधों के साथ करीबी समुद्री पड़ोसी हैं।

प्रष्ठभूमि

  • केसरी जहाज की यह तैनाती प्रधानमंत्री की क्षेत्र में सभी की सुरक्षा और विकास ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) की संकल्पना के अनुरूप है और भारत द्वारा उसके पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के महत्व को रेखांकित करता है और मौजूदा बंधन को और मजबूत करता है।

6. भारत ने विकसित की स्वदेशी एंटीबॉडी टेस्ट किट

 

भारत में कोरोना की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने स्वदेशी तकनीक पर आईजीजी एलिसा (IgG ELISA) टेस्ट किट को विकसित किया है। इससे मानव शरीर में कोरोना वायरस के एंटीबॉडी की मौजूदगी का पता लगेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने इसकी घोषणा की है।

  • इस जांच किट के जरिए ढाई घंटे की एक पाली में 90 नमूनों की जांच की जा सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य पेशेवर बीमारी के मद्देनजर ज्यादा तेजी से अगले जरूरी कदम उठा सकेंगे।
  • इस किट को मुंबई में 2 साइटों पर वैलिडेट यानी टेस्ट किया गया था और इसमें उच्च संवेदनशीलता और सटीकता है। इसके अलावा, इसमें 2.5 घंटों के एक ही रन में 90 नमूनों का एक साथ परीक्षण कर सकते है।
  • आईसीएमआर ने इस स्वदेशी टेस्ट किट एलिसा परीक्षण किट के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए Zydus Cadila फार्मास्यूटिकल कंपनी के साथ साझेदारी की है। इसके लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कमर्शियल प्रोडक्शन और मार्केटिंग की मंजूरी भी दे दी है।
  • दूसरी तरफ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ मिलकर देश में ही कोविड-19 के लिए वैक्सीन तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। दोनों की कोशिश है कि कोरोना के इलाज के लिए देश में ही वैक्सीन तैयार की जाए।

चीन की रैपिड टेस्ट किट में हैं कई खामियां

  • देश में चीन में बने हुए रैपिड टेस्ट किट से कोरोना की जांच को प्रतिबंधित किया जा चुका है। कई राज्यों में चीनी टेस्ट किट से हुई जांच में त्रुटि पाई गई थी। जिसके बाद आईसीएमआर ने इससे राज्यों को जांच न करने की सलाह दी थी।

7. कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी चुने गए लोक लेखा समिति के अध्यक्ष

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष चुने गए हैं। संसद की इस समिति के अध्यक्ष का पद परंपरा के तौर पर विपक्ष के पास रहता है।

  • जारी विज्ञप्ति के अनुसार 20 सदस्यीय लोक लेखा समिति में 15 सदस्य लोकसभा के हैं और पांच राज्यसभा के सदस्य है जबकि दो स्थान अभी रिक्त हैं। समिति का कार्यकाल एक मई 2020 से शुरू हो चुका है जो 30 अप्रैल 2021 तक रहेगा।
  • लोकसभा के सदस्यों में अधीर रंजन चौधरी के अलावा टी आर बालू , भृतहरि महताब, जयंत सिन्हा , विष्णु दयाल शर्मा , राहुल रमेश शवले , जगदम्बिका पाल, रामकृपाल यादव , वी बलेश्वरी, सत्यपाल सिंह, सुधीर गुप्ता, सुभाषचंद्र बहेड़िया, दर्शन विक्रमजी दरवेश, अजेय मिश्र , राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन और विष्णु दयाल राम हैं जबकि राज्यसभा के सदस्यों में भूपेंद्र यादव , राजीव चंद्रशेखर , सी एम रमेश, नरेश गुजराल और सुखेन्दु शेखर राय शामिल है।

लोक लेखा समिति

  • लोक लेखा समिति भारत सरकार के खर्चों की लेखा परीक्षा करने वाली समिति है। इसका गठन भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत पहली बार 1921 में हुआ था।  इस समिति में 22 सदस्य होते हैं जिसमें से 15 लोकसभा से तथा 7 राज्यसभा से होते हैं।
  • यह सभी पक्षों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है क्योंकि इसके सदस्यों का चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली द्वारा किया जाता है तथा इसका अध्यक्ष विपक्षी पार्टी का सदस्य होता है।
  • समिति के कार्यों के अंतर्गत नियंत्रक तथा महालेखापरीक्षक के वार्षिक प्रतिवेदनों की जाँच प्रमुख है, जो राष्ट्रपति द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है। यह समिति जांच में सुनिश्चित करती है  –

(क) कि लेखाओं में व्यय के रूप में दिखाया गया धन उस सेवा या प्रयोजन के लिए विधिवत उपलब्ध और लगाए जाने योग्य था जिसमें यह लगाया गया है या पारित किया गया है;

(ख) कि व्यय उस प्राधिकार के अनुसार है जिसके वह अधीन है;

(ग) कि प्रत्येक पुनर्विनियोग सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्मित नियमों के अंतर्गत इस संबंध में किए गए उपबंधों के अनुसार किया गया है।

समिति का यह भी कर्तव्य होगा

(क) कि वह राज्य निगमों, व्यापारिक और विनिर्माण योजनाओं, संस्थाओं एवं परियोजनाओं के आय और व्यय कोदर्शाने वाले लेखाओं के विवरण तथा लाभ और हानि लेखाओं के तुलनपत्रों और विवरणों की, जिसे राष्ट्रपति ने तैयार करने की अपेक्षा की हो अथवा जिन्हें विशेष निगम, व्यापारिक या विनिर्माण योजना या संस्था या परियोजना के वित्तपोषण को विनियमित करने वाले सांविधिक नियमों के प्रावधानों के अंतर्गत तैयार किया जाता हो, और उन पर नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदन की जांच करे।

(ख) कि वह स्वायत्त और अर्द्धस्वायत्त निकायों के आय और व्यय को दर्शाने वाले लेखाओं के विवरण तथा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा, या तो राष्ट्रपति के निर्देशों अथवा संसद की संविधि के अंतर्गत, की जानेवाली लेखापरीक्षा की जांच करें; और

(ग) कि वह उन मामलों में नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदन पर विचार करे जहां राष्ट्रपति ने किन्हीं प्राप्तियों की लेखापरीक्षा करवाने अथवा भंडारों की लेखाओं की जाचं करवाने की अपेक्षा की हो।

  • उपर्युक्त शक्तियों के बावजूद समिति की कुछ सीमाएँ है, जैसे- यह व्यापक अर्थों में नीतिगत प्रश्नों से अलग है। दैनंदिन प्रशासन में इसकी कोई भूमिका नहीं होती है। धन खर्च हो जाने के बाद उसकी जाँच करती है। इसकी अनुशंसा बाध्यकारी नहीं है। इसे विभागों द्वारा किये गए खर्चों को सीमित या प्रतिबंधित नहीं करने की शक्ति नहीं है।

8. चेचक उन्मूलन की 40वीं वर्षगांठ पर स्मारक डाक टिकट जारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र की डाक एजेंसी ने चेचक के उन्मूलन की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है।

  • वैश्विक स्वास्थ्य संस्था के प्रमुख ने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मूल के एक शीर्ष अधिकारी अतुल खरे का आभार व्यक्त किया जिनके प्रयासों से स्मारक टिकट जारी हो पाया है।
  • यह डाक टिकट चेचक से लड़ने में वैश्विक एकजुटता की एक पहचान है और एक साथ काम करने वाले लाखों लोगों को सम्मान करता है।

चेचक उन्मूलन

  • चेचक (शीतला, बड़ी माता, स्मालपोक्स) एक विषाणु जनित रोग है। जो दो वायरस प्रकारों, व्हेरोला मेजर और व्हेरोला माइनर के कारण होती है। यह अत्यधिक संक्रामक है और जो श्वसन तंत्र से या चेचक के द्वारा त्वचा के घावों के फफोलों से निकले तरल पर्दाथ से फैलता है।
  • प्रभावित व्यक्तियों को बुखार और खुजली के लाल चकत्ते रहते है। लाल चकत्ते आमतौर पर 5 दिनो मे विकसित होते है और साथ मे फफोले बन जाते है और पहले यह सिर की त्वचा पर और चेहरे पर निकलते है, और फिर धड़ और उसके बाद हाथो और पैरो पर निकलते हैं।
  • मई 1980 में, 33वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने अपनी आधिकारिक घोषणा जारी कर कहा था कि विश्व के सभी लोगों ने चेचक से मुक्ति पा ली है।
  • यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के 10 साल के वैश्विक प्रयास के बाद संभव हो पाया, जिसमें दुनिया भर के हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया गया और 50 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया गया था।

9. खाली स्टेडियम में शुरू हुई यूएफसी

अमेरिका में कोरोना वायरस महामारी के कारण लगभग दो महीने तक खेल गतिविधियां ठप्प रहने के बाद अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (यूएफसी) खाली स्टेडियम में शुरू हो गई जो पहली बड़ी पेशेवर लीग है जिसे कोविड-19 के प्रकोप के बाद शुरू किया गया है।

  • मिश्रित मार्शल आर्ट प्रतियोगिता यूएफसी 249 हालांकि सुरक्षा के नए नियमों के साथ शुरू हुई है जिसमें दर्शकों को स्टेडियम में आने की इजाजत नहीं है और साथ ही स्टेडियम में मौजूद अधिकतर लोगों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है।
  • अमेरिका में लगभग आठ हफ्तों तक किसी प्रतियोगिता का सीधा प्रसारण नहीं हुआ था जिसके कारण यूएफसी के शुरू होने से खेल प्रेमियों को कुछ राहत मिली है।
  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएफसी को मुकाबले दोबारा शुरू करने के लिए बधाई दी थी जिसके लगभग पांच घंटे बाद मुख्य मुकाबले में जस्टिन गेथजे ने प्रबल दावेदार टोनी फर्ग्युसन को 26-4 से हराकर उलटफेर किया है।

10. एफआईएच अध्यक्ष के तौर पर नरिंदर बत्रा का कार्यकाल बढ़ा

  • भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा का अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) के प्रमुख के रूप में कार्यकाल अगले साल मई तक बढ़ा दिया गया है क्योंकि इसकी सालाना कांग्रेस कोविड-19 महामारी के चलते स्थगित हो गई है।
  • कांग्रेस को स्थगित करने का फैसला 08 मई को एफआईएच कार्यकारी बोर्ड की ऑनलाइन बैठक में लिया गया था। इस स्थगन का मतलब है कि सभी एफआईएच अधिकारियों के कार्यकाल को अगले साल की कांग्रेस तक बढ़ा दिया जाएगा।
  • बत्रा को नवंबर 2016 में एफआईएच का अध्यक्ष चुना गया था जो अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (IOC) के भी सदस्य हैं।
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