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सामयिकी: 09 मई 2020

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Current Affairs: 09 May 2020

1. डॉ. हर्ष वर्धन ने ‘आयुष संजीवनी’ ऐप का किया शुभारम्भ

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने ‘आयुष संजीवनी ऐप’ और कोविड-19 के संबंध में दो आयुष आधारित अध्ययनों का शुभारम्भ किया है। ‘आयुष संजीवनी ऐप’ को आयुष मंत्रलाय और एमईआईटीवाई (MEITY) द्वारा विकसित किया गया है। अभी इसकी पहुंच 50 लाख लोगों तक होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • ‘आयुष संजीवनी’ मोबाइल ऐप से लोगों के बीच आयुष से संबंधित सिफारिशों और कदमों की स्वीकार्यता तथा उपयोग के साथ ही कोविड-19 के उन्मूलन में इनके प्रभाव से जुड़ी जानकारियां जुटाने में सहायता मिलेगी।

आयुष आधारित दो अध्ययन

  • डॉ. हर्ष वर्धन ने ऐप के अलावा दो वैज्ञानिक अध्ययनों का भी शुभारम्भ किया है। इनमें से एक रोग निरोधक के रूप में और कोविड-19 के मानक उपचार (एड ऑन) में आयुर्वेद के उपयोग पर सहयोगात्मक नैदानिकी अनुसंधान अध्ययन है, जो आईसीएमआर के तकनीक सहयोग से वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान (सीएसआईआर) के माध्यम से आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की संयुक्त पहल होगी।
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वाइस चेयरमैन डॉ. भूषण पटवर्धन की अध्यक्षता वाली इंटरडिसीप्लिनेरी आयुष आरएंडडी टास्क फोर्स ने अश्वगंधा, यशतीमधु, गुदुची+पीपली और एक पॉलि हर्बल फॉर्मूलेशन (आयुष-64) जैसी चार विभिन्न औषधियों के अध्ययन के लिए देश के विभन्न संगठनों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से कोविड -19 पॉजिटिव मामलों में रोग निरोधक अध्ययन और एड-ऑन उपचार के लिए नैदानिकी प्रोटोकॉल तैयार किए गए हैं।
  • दूसरा डॉ. ज्यादा जोखिम वाली जनसंख्या में कोविड-19 संक्रमण के उन्मूलन के लिए आयुष के रोग निरोधक हस्तक्षेप के प्रभाव पर जनसंख्या आधारित पारंपरिक अध्ययन है।
  • इसके मुख्य उद्देश्यों में कोविड-19 के लिए आयुष हस्तक्षेपों की निवारक क्षमता का आकलन और भारी जोखिम वाली आबादी में जीवन की गुणवत्ता में सुधार का आकलन करना शामिल है।
  • इस अध्ययन को आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली चार अनुसंधान परिषदों और देश के 25 राज्यों में स्थित संस्थानों तथा कई राज्य सरकारों के माध्यम से 5 लाख लोगों पर कराया जाएगा। इस शोध के निष्कर्षों से वैज्ञानिक प्रमाणों के माध्यम से कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान आयुष के उपायों की उन्मूलन क्षमता के आकलन का मार्ग प्रशस्त होगा।

2. वाणिज्यिक उपयोग के लिए भूमिगत जल अवैध रूप से निकालने पर लगे रोक: राष्ट्रीय हरित अधिकरण

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह वाणिज्यिक उपयोग के लिए भूमिगत जल के अवैध रूप से निकालने पर रोक लगाए। साथ ही अधिकरण ने इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान का आकलन करने का भी निर्देश दिया है।

  • अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति शिवकुमार सिंह की पीठ ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये एक मामले की सुनवाई करते हुए अनधिकृत बोरवैल को सील करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना वसूलने को भी कहा है।
  • अधिकरण ने दिल्ली के एक निवासी नंद कुमार की याचिका पर दक्षिणी जिले के उपायुक्त और दिल्ली जल बोर्ड की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अपना आदेश सुनाया है। हरित अधिकरण ने 31 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है और इस मामले की सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की है।
  • इससे पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को निर्देश दिया था कि वह भूमिगत जल के संरक्षण और अवैध बोरवैल को बंद करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल करके कार्रवाई करे।

क्या कहा गया था याचिका में?

  • याचिका में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली व्यवसायिक उपयोग के लिए बड़े पैमाने पर अवैध रूप से भूमिगत जल निकाला जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 141 अवैध बोरवैल में से अब तक सिर्फ चार को सील किया जा सका है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना 18 अक्तूबर, 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।  इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संबंधी मुद्दों का तेज़ी से निपटारा करना है, जिससे देश की अदालतों में लगे मुकदमों के बोझ को कुछ कम किया जा सके।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का मुख्यालय दिल्ली में है, जबकि अन्य चार क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल, पुणे, कोलकाता एवं चेन्नई में स्थित हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के अनुसार, यह अनिवार्य है कि NGT पास आने वाले पर्यावरण संबंधी मुद्दों का निपटारा 6 महीनों के भीतर हो जाए।
  • इस न्यायिक निकाय में अध्यक्ष, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं, जिनका कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति के लिये केंद्र सरकार द्वारा एक चयन समिति बनाई जाती है।

3. आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने बनाया एनसेफ मास्क, 50 बार किया जा सकता है इस्तेमाल

कोविड-19 के लगातार फैलते संक्रमण के चलते पिछले कुछ समय से बाजारों में मास्क की कमी की कई खबरे आईं थीं। क्योंकि आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फेस मास्क को एक बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इस परेशानी को देखते हुए आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने ऐसा मास्क बनाया है जिसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप नैनोसेफ सॉल्यूशंस ने ‘एन सेफ’ नामक इस मास्क को लॉन्च किया है। इसे नैनोसेफ सॉल्यूशंस के साथ जुड़ीं आईआईटी दिल्ली की पूर्व छात्रा डॉ. अनसुया रॉय और प्रो. मंगला जोशी ने मिलकर तैयार किया है।
  • इसे डिटर्जेंट से धोकर और धूप में सुखाकर फिर से प्रयोग किया जा सकता है। इसका उत्पादन भी शुरू हो चुका है। इस एंटी वायरस मास्क को 50 बार तक प्रयोग किया जा सकता है।

मास्क में क्या है विशेष?

  • एन सेफ मास्क एक अत्यधिक इंजीनियर्ड मास्क है, जिसकी तीन परतें हैं। मास्क की सबसे आंतरिक परत हाइड्रोफिलिक है, जिसे इस बात को ध्यान में रखकर बनाया गया है कि पहनने वाले को सांस लेने में आराम हो।
  • वहीं बीच वाली परत रोगाणुरोधी गतिविधियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। सबसे बाहर वाली परत को पानी और तेल विकर्षण के लिए बनाया गया है।
  • इस मास्क में 99.2 प्रतिशत बैक्टीरियल निस्पंदन दक्षता है। यह अमेरिकन सोसायटी फॉर टेस्टिंग एंड मटीरियल (एएसटीएम) के मानकों के आधार पर श्वसन और स्प्लैश प्रतिरोधक क्षमता वाला मास्क है।
  • इस मास्क को पहनने के बाद इससे सांस लेने में किसी प्रकार की कठिनाई का भी सामना नहीं करना पड़ता है। डॉ. जोशी ने बताया कि यह सूती में बना भारत का पहला माइक्रोबेरियाल मास्क है जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

4. पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की मनाई गई जयंती

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 05 मई को पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की 104 वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रपति भवन में ज्ञानी जैल सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। 05 मई मई को 1916 भारत के सातवें राष्ट्रपति का जन्म हुआ था।

ज्ञानी जैल सिंह

  • ज्ञानी ज़ैल सिंह सिख धर्म के विद्वान व भारत के 7वें राष्ट्रपति थे वे 1982 में भारत के इस गौरवमयी पद पर आसीन हुए थे। 1987 तक के अपने कार्यकाल के दौरान इन्हें ‘ब्लूस्टार ऑपरेशन’ एवं इंदिरा गांधी की हत्या जैसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों से गुजरना पड़ा था।
  • वर्ष 1986 में संसद ने “भारतीय पोस्ट ऑफिस (संशोधन) विधेयक पारित किया था इस पर तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने पॉकेट वीटो का उपयोग किया था।
  • उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले राष्ट्रपति वेंकटरमण ने उसे पुनर्विचार के लिए संसद को लौटा दिया था तब तक, वह सरकार चली गई जिसने विधेयक पेश किया था और वर्ष 1989 में एक नई सरकार चुनकर आ गयी थी जो एक गठबंधन सरकार थी और उसने इस विधेयक पर विचार नहीं किया। इस प्रकार, जैल सिंह के द्वारा विधेयक को स्वीकृति देने के निर्णय में विलम्ब करने का वास्तविक परिणाम यह हुआ कि यह विधेयक कानून नहीं बन सका।

5. तमिलनाडु के एटीएम जैसी मशीनों से मास्क उपलब्ध कराने की एक नई पहल

तमिलनाडु के तुत्तुकुडी नगर निगम में एटीएम जैसी मशीनों से स्वास्थ्य रक्षा के काम आने वाले मास्क उपलब्ध कराने की एक नई पहल की गयी है। इसके तहत शहर के पांच व्यस्त स्थानों पर इस तरह के मास्क बेचने वाली पांच स्वचालित मशीनें स्थापित की गयी हैं।

  • मास्क की बिक्री के लिए ये स्वचालित मशीनें कोयम्बटूर से मंगायी गयी हैं जहां भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के तहत इनका विकास और निर्माण किया गया है।
  • ये मशीनें नगर निगम कार्यालय, अम्मा कैंटीनों जैसे व्यस्त स्थानों में लगायी गयी हैं जहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। एक मास्क की कीमत पांच रुपया होगी और एक बार में मशीन में 120 मास्क रखे जा सकेंगे।
  • मास्क बेचने वाली इन स्वचालित मशीनों के नंबर पैड और छूए जाने वाले अन्य हिस्सों की समय-समय पर सफाई करने की व्यवस्था भी की गयी है।

क्यों जरूरी है मास्क?

  • सरकार की सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस से जुड़ी एक नियमावली कहती है कि एक व्यक्ति के दूसरे व्यक्ति से संपर्क में आने पर कोविड-19 वायरस आसानी से फैलता है। वायरस को ले जाने वाली बूंदें इसे तेजी से फैलाती हैं और हवा में जीवित रहते हुए यह आखिरकार विभिन्न सतहों के संपर्क में आ जाता है। कोविड-19 को फैलाने वाला वायरस सार्स-कोव-2 किसी ठोस या तरल सतह (एयरोसोल) पर तीन घंटे तक और प्लास्टिक व स्टेनलेस स्टील पर तीन दिन तक जीवित रहता है।
  • इस नियमावली में कहा गया है कि मास्क के उपयोग से संक्रमित व्यक्ति से निकले द्रव कणों में मौजूद वायरस के किसी दूसरे व्यक्ति के श्वसन तंत्र में प्रवेश की आशंका कम हो जाती है। सुरक्षित मास्क पहनकर वायरस के सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश की संभावनाएं कम हो जाती हैं, जो इसके प्रसार को रोकने के लिहाज से अहम हो सकता है। हालाँकि, ,मास्क को ऊष्मा, यूवी लाइट, पानी, साबुन और अल्कोहल के एक संयोजन के उपयोग से स्वच्छ किया जाना जरूरी है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का हवाला देते हुए इस नियमावली में कहा गया है कि “मास्क उन्हीं लोगों पर प्रभावी हैं जो अल्कोहल युक्त हैंडवॉश या साबुन और पानी से हाथ साफ करते हैं। यदि आप मास्क पहनते हैं, तो आपको इसके इस्तेमाल और इसके उचित निस्तारण के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।
  • इस नियमावली में यह भी कहा गया है अगर 50 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो सिर्फ 50 प्रतिशत आबादी को ही कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। पर, 80 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो इस महामारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जा सकती है।

6. जियो प्लेटफॉर्म्स में विस्टा इक्विटी पार्टनर्स में खरीदेगी 2.32 प्रतिशत हिस्सेदारी

विस्टा इक्विटी पार्टनर्स रिलायंस समूह के जियो प्लेटफॉर्म्स में 11,367 करोड़ रुपये में 2.32 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। इससे पहले फेसबुक और सिल्वर लेक, समूह की इस डिजिटल इकाई में क्रमश: 9.99 और 1.15 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा कर चुकी हैं।

  • सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने जियो में 43,574 करोड़ रुपये का निवेश कर 9.99 प्रतिशत और विश्व की सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी निवेशक सिल्वर लेक ने 5,665.75 करोड़ रुपये का निवेश कर 1.15 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज और फेसबुक के बाद विस्टा इक्विटी पार्टनर्स की जियो प्लेटफॉर्म्स में सबसे बड़ी हिस्सेदार होगी। विदित है कि तीन हफ्ते से भी कम अवधि में जियो प्लेटफॉर्म्स वैश्विक निवेशकों से 60,596.37 करोड़ रुपये का निवेश जुटा चुकी है।
  • कंपनी ने एक बयान में कहा,‘‘इसके लिए जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर आधारित मूल्य (इक्विटी वैल्यू) 4.91 लाख करोड़ रुपये है जबकि उद्यम मूल्य (एंटरप्राइज वैल्यू) 5.16 लाख करोड़ रुपये आंका गया है।’’किसी कंपनी की इक्विटी वैल्यू उसकी मौजूदा और भविष्य की क्षमताओं को दिखाती है जबकि एंटरप्राइज वैल्यू कंपनी की वास्तविक बैलेंस शीट की तरह ही होती है।

प्रष्ठभूमि

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज के पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स एक अगली पीढ़ी की डिजिटल प्रौद्योगिकी कंपनी है। इसमें कंपनी की जियो एप, डिजिटल पारिस्थितिक और दूरसंचार एवं तेज गति की इंटरनेट सेवा शामिल है। कंपनी की दूरसंचार सेवा के देशभर में करीब 38.8 करोड़ उपभोक्ता हैं।
  • विस्टा की भारत में पहले से मौजूदगी है। उसके निवेश वाली कंपनियों में करीब 13,000 लोग नौकरी करते हैं।

7. त्रिपोली में गोलाबारी में पांच नागरिकों की मौत

लीबिया की पूर्वी सेना की गोलाबारी में राजधानी त्रिपोली में पांच से अधिक नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए हैं। देश की संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित सरकार के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

  • पिछले साल शहर पर कब्जा करने की कवायद में एक अभियान शुरू करने वाले पूर्वी सेना के कमांडर खलीफा हफ्तार द्वारा त्रिपाली पर यह ताजा हमला है। हाल के महीनों में इस लड़ाई में सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं।
  • यह संघर्ष पूर्वी सेना के नेता खलीफा हफ्तार और संयुक्त राष्ट्र की ओर से मान्यता प्राप्त सरकार के प्रमुख फायेज अल सराज के बीच चल रहा है। 12 जनवरी को दोनों के प्रयासों से दोनों गुटों के बीच संघर्षविराम हुआ था। इसी संघर्षविराम को कायम करने के लिए हाल ही में जर्मनी के बर्लिन में एक शिखर सम्मलेन हुआ था।

प्रष्ठभूमि

  • लीबिया में तब से अराजकता का माहौल है, जब 2011 में एक गृह युद्ध में लंबे समय तक तानाशाह रहे मोहम्मद गद्दाफी को सत्ता से उखाड़ फेंका गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी।
  • इसके बाद देश 2015 से पूर्व और पश्चिम के प्रतिद्वंद्वी प्रशासनों के बीच बंट गया है। प्रत्येक प्रशासन को किसी न किसी विदेशी शक्ति का समर्थन प्राप्त है।
  • हालांकि सराज की सरकार को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन है लेकिन देश के ताकतवर गुटों का समर्थन हफ्तार को मिला है और इसकी वजह से लीबिया में घरेलू विवाद अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के छद्मयुद्ध में बदलने का खतरा पैदा हो गया है।
  • क्योंकि जहाँ रूस हफ्तार का समर्थन करता है तो तुर्की सराज के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करता है।

8. लॉकडाउन ने भी ली 300 से अधिक लोगों की जान :अध्ययन

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देशव्यापी बंद के दौरान मौत के 300 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं जो प्रत्यक्ष तौर पर तो कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़े नहीं हैं, लेकिन इससे जुड़ी अन्य समस्याएं इनका कारण है।

  • शोधकर्ताओं के समूह में पब्लिक इंटरेस्ट टेक्नोलॉजिस्ट तेजेश जीएन, सामाजिक कार्यकर्ता कनिका शर्मा और जिंदल ग्लोबल स्कूल ऑफ लॉ में सहायक प्रोफेसर अमन शामिल हैं। इस समूह का दावा है कि 19 मार्च से ले कर दो मई के बीच 338 मौतें हुईं है, जो लॉकडाउन से जुड़ी हुई हैं।
  • अध्ययन के अनुसार आंकडें बताते हैं कि 80 लोगों ने अकेलेपन से घबरा कर और संक्रमित पाए जाने के भय से खुदकुशी कर ली है। इसके बाद मरने वालों का सबसे बड़ा आंकड़ा है प्रवासी मजदूरों का है। बंद के दौरान जब ये अपने घरों को लौट रहे थे तो विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में 51 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई है। विड्रॉल सिम्टम्स (शराब नहीं मिलने से) से 45 लोगों की मौत हो गई और भूख एवं आर्थिक तंगी से 36 लोगों की जान गई है।
  • इस समूह ने समाचार पत्रों, वेब पोर्टलों और सोशल मीडिया की जानकारियों को मिला कर ये आंकडें तैयार किए हैं। उल्लेखनीय है कि देश में कोविड-19 से 56,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए है, जिनमें से 1,800 लोगों की मौत हो गई है।
  • अध्ययन में दो मई तक हुए मौत के मामलों को ही शामिल किया गया है। इसके बाद भी कई लोगों की मौत लॉकडाउन या कोरोना वायरस से जुड़ी समस्याओं के कारण हुई है।
  • ऐसी ही एक घटना में महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में 08 मई को एक मालगाड़ी की चपेट में आने के बाद 14 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई है। जालना से भुसावल की ओर पैदल जा रहे मजदूर मध्य प्रदेश लौट रहे थे।

9. भारत में एक महीने से अधिक समय तक फंसे रहने के बाद स्वदेश लौटे माइक हेसन

इंडियन प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के क्रिकेट संचालन निदेशक माइक हेसन भारत में एक महीने से भी अधिक समय तक फंसे रहने के बाद न्यूजीलैंड लौट गए हैं।

  • न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर और कोच हेसन आईपीएल के नए सत्र के लिए पांच मार्च को भारत आए थे लेकिन कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन और विमान सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण वह यहीं फंसे रहे गए थे।
  • कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए भारत और न्यूजीलैंड ने पिछले महीने अपने अपने देशों में लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। इनमें यात्रा पाबंदियां भी शामिल थी जिससे 45 वर्षीय हेसन को बेंगलुरु में ही रुकना पड़ा था। भारत में अब भी लॉकडाउन है लेकिन न्यूजीलैंड ने इसमें ढील दे दी है।

10. वुड्स, मिकेलसन चैरिटी मैच से वायरस राहत के लिये एक करोड़ डालर जुटाएंगे

दुनिया के दिग्गज गोल्फर टाइगर वुड्स और फिल मिकेलसन 24 मई को मेडलिस्ट गोल्फ क्लब में चार खिलाड़ियों के बीच होने वाले मैच में हिस्सा लेकर कोविड-19 राहत कोष के लिये एक करोड़ डालर जुटाएंगे।

  • टर्नर स्पोर्ट्स ने घोषणा की है कि ‘द मैच: चैंपियन्स फॉर चैरिटी’ में वुड्स और पेटन मैनिंग का मुकाबला मिकेलसन और टॉम ब्राडी से होगा। इस मैच का कई टेलीविजन चैनलों पर प्रसारण किया जाएगा।
  • वार्नर मीडिया और ये चारों गोल्फर मिलकर एक करोड़ डालर का दान करेंगे जिनका उपयोग स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राहत कार्यों में किया जाएगा।
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