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मुख्यमंत्री नियुक्ति, योग्यता, वेतन, कार्यकाल

जिस प्रकार संघ की मंत्रीपरिषद का प्रधान भारत का प्रधानमंत्री होता है, उसी प्रकार राज्य की मंत्रिपरिषद का प्रधान एक मुख्यमंत्री होता है. 1935 ई. के अधिनियम के अंतर्गत, मुख्यमंत्री को भी प्रधानमंत्री की संज्ञा दी गई थी. उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री का पद नहीं था. संविधान के निर्माताओं ने संघ में प्रधानमंत्री के पद का प्रावधान करते हुए राज्यों में मुख्यमंत्री के पद का प्रावधान किया है. कार्य, अधिकार तथा शक्ति की दृष्टि से दोनों में साम्य है. संघ शासन में जो स्थान भारत के प्रधानमंत्री का है, राज्य के शासन में वही स्थान राज्य के मुख्यमंत्री का है. राज्य की कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग मुख्यमंत्री ही करता है, राज्यपाल तो सिर्फ एक सांविधानिक प्रधान है. मुख्यमंत्री का स्थान महत्त्वपूर्ण है.

मुख्यमंत्री की नियुक्ति

संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है. परन्तु, व्यवहार में राज्यपाल की वह शक्ति अत्यधिक सीमित है. चूँकि राज्यों में उत्तरदायी अथवा संसदीय स्वरूप की कार्यपालिका की व्यवस्था की गई है, अतः विधानमंडल में जिस दल का बहुमत होता है, राज्यपाल उसी दल के नेता को मुख्यमंत्री का पदग्रहण और मंत्रिपरिषद के निर्माण के लिए आमंत्रित करता है. सामान्यतः, मुख्यमंत्री विधान सभा का सदस्य होता है, परन्तु इसके अपवाद भी हैं और विधान परिषद् के सदस्य भी मुख्यमंत्री के पद  पर नियुक्त हुए हैं. यदि विधान सभा में किसी दल का स्पष्ट बहुमत न हो या किसी दल का सर्वमान्य नेता न हो, तो मुख्यमंत्री की नियुक्ति में राज्यपाल को कुछ स्वतंत्रता हो सकती है

मुख्यमंत्री की योग्यता, वेतन, कार्यकाल

संविधान में मंत्रियों के लिए कोई योग्यता निर्धारित नहीं की गई है. केवल इतना ही कहा गया है कि प्रत्येक मंत्री को अनिवार्यतः राज्य के विधानमंडल का सदस्य होना चाहिए. यदि नियुक्ति के समय कोई मंत्री विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य न हो, तो उसे नियुक्ति की तिथि के छह महीनों के अंतर्गत किसी सदन का सदस्य बनना पड़ेगा, अन्यथा मंत्रिपद त्यागना होगा. व्यवहार में वही व्यक्ति मंत्री नियुक्त होता है, जो अपने दल में प्रभावी व्यक्ति होता और मुख्यमंत्री का विश्वासपात्र होता है. मंत्रियों को राज्य के विधानमंडल द्वारा निर्मित विधि के अनुसार वेतन, भत्ते आदि मिलते हैं. संविधान में मंत्रियों की अवकाश-आयु, शिक्षा-सम्बन्धी योग्यता तथा कार्यकाल निश्चित नहीं किये गए हैं. सामान्यतः मंत्रियों का कार्यकाल 5 वर्ष है, जो विधान सभा की अवधि है. संविधान में कहा गया है कि मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत अपने पद पर रहेंगे. परन्तु, मंत्रियों को पदच्युत करने में राज्यपाल की स्वतंत्रता बहुत सीमित है. चूँकि मंत्री विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं, इसलिए जब तक उन्हें विधान सभा के बहुमत का समर्थन प्राप्त है और मुख्यमंत्री उन्हें चाहता है तब तक राज्यपाल उन्हें पदच्युत  नहीं कर सकता. यदि राज्यपाल ऐसा करे, तो समस्त मंत्रिपरिषद त्यागपत्र देकर सांविधानिक संकट उपस्थित कर सकती है. हाँ, विधानमंडल मंत्रियों के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव पास कर उन्हें पदच्युत कर सकता है

मुख्यमंत्री के कार्य

  1. मुख्यमंत्री का प्रथम कार्य मंत्रिपरिषद का निर्माण करना है. वह मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या निश्चित करता है और उसके लिए नामों की एक सूची तैयार करता है.
  2. वह मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या निश्चित करता है और उसके लिए नामों की एक सूची तैयार करता है. इस कार्य में वह प्रायः स्वतंत्र है; परन्तु व्यवहार में उसके ऊपर भी प्रतिबंध लगे रहते हैं. उसे अपने दल  के प्रभावशाली व्यक्तियों, राज्य के विभिन्न भागों तथा सम्प्रदायों के प्रतिनिधियों को मंत्रिपरिषद में सम्मिलित करना पड़ता है.
  3. इसके अतिरिक्त, उसे अपने दल की कार्यकारिणी समिति का भी परामर्श लेना पड़ता है. उस दल के कुछ वयोवृद्ध अनुभवी व्यक्तियों तथा नवयुवकों को भी मंत्रिपरिषद में सम्मिलित करना पड़ता है.
  4. मुख्यमंत्री राज्यपाल की औपचारिक स्वीकृत से मंत्रियों के बीच विभागों का वितरण करना है. इस कार्य में उसे बहुत कुछ स्वतंत्रता रहती है; परन्तु उसे अपने सहयोगियों की इच्छा का आदर करना ही पड़ता है.
  5. मुख्यमंत्री मंत्रियों से पारस्परिक सहयोगपूर्वक कार्य करता है, उनके मतभेद और विवाद का निर्णय करता है. उसे सभी विभागों के कार्यों की निगरानी और सामंजस्य का व्यापक अधिकार प्राप्त रहता है. वह विधान सभा का नेता होता है. अतः, विधेयक को पारित कराने, धनराशि की स्वीकृति आदि में उसका व्यापक प्रभाव पड़ता है.
  6. वह राज्यपाल को विधान सभा को विघटित करने का परामर्श दे सकता है.
  7. वह विधान सभा का प्रमुख प्रवक्ता होता है. अतः, उसके आश्वासन प्रामाणिक माने जाते हैं. वह विधान सभा में सरकार की नीति या अन्य आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण विषयों पर भाषण देता है.
  8. संविधान के अनुसार नियुक्ति के जो अधिकार राज्यपाल को प्राप्त हैं, उनका प्रयोग मुख्यमंत्री ही करता है. उदाहरण के लिए, राज्य के महाधिवक्ता, राज्य लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष, सदस्य तथा राज्य के अन्य मुख्य पदाधिकारियों की नियुक्ति में मुख्यमंत्री का हाथ रहता है.
  9. मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद की बैठकों का सभापतित्व करता है तथा सरकार के नीति-निर्धारण में उसका महत्त्वपूर्ण हाथ रहता है. वह मंत्रिपरिषद और राज्यपाल के बीच संपर्क की कड़ी है. वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों एवं अन्य शासन-सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण विषयों की सूचना राज्यपाल को देता है.
  10. राज्य की सर्वोच्च कार्यपालिका शक्ति मुख्यमंत्री के हाथों में है. वह राज्य का वास्तविक शासक होता है. यहाँ तक कि राज्यपाल कोई भी कार्य मुख्यमंत्री के विश्वास तथा सम्मान का पात्र बनकर ही कर सकता है.

पद विमुक्ति

सामान्यत: मुख्यमंत्री अपने पद पर तब तक बना रहता है, जब तक उसे विधानसभा का विश्वास मत प्राप्त रहता है। अत: जैसे ही उसका विधानसभा में बहुमत समाप्त हो जाता है, उसे त्यागपत्र दे देना चाहिए। यदि वह त्यागपत्र नहीं देता है, तो राज्यपाल उसे बर्ख़ास्त कर सकता है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री निम्नलिखित स्थितियों में बर्ख़ास्त किया जा सकता है–

  1. यदि राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधानसभा का अधिवेशन बुलाने तथा उसमें बहुमत सिद्ध करने की सलाह दे और यदि राज्यपाल के द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर मुख्यमंत्री विधानसभा का अधिवेशन बुलाने के लिए तैयार नहीं हो, तो राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्ख़ास्त कर सकता है।
  2. यदि राज्यपाल अनुच्छेद356 के अधीन राष्ट्रपति को यह रिपोर्ट दे कि राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता या राष्ट्रपति को अन्य स्रोतों यह समाधान हो जाए कि शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता, तो राष्ट्रपति मुख्यमंत्री को बर्ख़ास्त करके राज्य का शासन चलाने का निर्देश राज्यपाल को दे सकता है।
  3. जब मुख्यमंत्री के विरुद्ध राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पारित हो जाए और मुख्यमंत्री त्यागपत्र देने से इन्कार कर दे, तब राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्ख़ास्त कर सकता है।

मुख्यमंत्री से सम्बन्धित प्रश्न पिछले एक्जाम में पुंछे हुए 

  • 1. मुख्यमंत्री की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है ? – राज्यपाल द्वारा
  • 2. मुख्यमंत्री की नियुक्ति संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत की जाती है ? – अनुच्छेद 163
  • 3. सामान्यतः राज्यों के मुख्यमंत्री होते हैं ? – विधान सभा में बहुमत दल के नेता
  • 4. राज्य के शासन का वास्तविक अध्यक्ष होता है ? – मुख्यमंत्री
  • 5. राज्य मंत्रि परिषद् का निर्माता, संहारक तथा प्राणदाता कौन होता है? – मुख्यमंत्री
  • 6. राज्य के राज्यपाल तथा मंत्रिपरिषद् के बीच कड़ी का कार्य कौन करता है ? – मुख्यमंत्री
  • 7. किसी राज्य के मंत्रिपरिषद् की बैठक की अध्यक्षता कौन करता है ? – मुख्यमंत्री
  • 8. राष्ट्रीय विकास परिषद् की बैठक में राज्य का प्रतिनिधित्व कौन करता है ? – मुख्यमंत्री
  • 9. राज्य का मुख्यमंत्री किसके प्रति उत्तरदायी होता है? – विधानसभा के
  • 10. किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री पद पर सर्वाधिक दिनों तक आसीन रहने वाले व्यक्ति हैं ? – ज्योति बसु
  • 11. किस भारतीय राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी ? – उत्तर प्रदेश
  • 12. राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री कौन थी ? – सुचेता कृपलानी
  • 13. बिहार राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे ? – डाॅ. श्रीकृष्ण सिंह
  • 14. बिहार के प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी ? – राबड़ी देवी
  • 15. भारत के किसी राज्य में मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त होने वाली प्रथम दलित महिला है ? – सुश्री मायावती
  • 16. उड़ीसा राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी ? – नन्दिनी सत्यपथी
  • 17. मध्यप्रदेश राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी ? – उमा भारती
  • 18. राजस्थान राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी ? – वसुन्धरा राजे सिंधिया
  • 19. राज्य विधानमंडल की ऊपरी सदन है ? – विधान परिषद
  • 20. भारत के कितने राज्यों में द्विसदनात्मक विधानमंडल है ? – छः
  • 21. विधान परिषद की सदस्य संख्या कम-से-कम कितनी होनी चाहिए ? – 40
  • 22. किस राज्य में विधान परिषद की सदस्य संख्या सर्वाधिक है ? – उत्तर प्रदेश
  • 23. किस राज्य में विधान परिषद् की सदस्य संख्या सबसे कम है ? – जम्मू-कश्मीर
  • 24. जम्मू-कश्मीर में विधान परिषद् में सदस्यों की संख्या है ? – 36
  • 25. बिहार विधान परिषद् में सदस्यों की संख्या कितनी है ? – 75
  • 26. महाराष्ट्र विधान परिषद में सदस्यों की संख्या है ? – 78
  • 27. उत्तरप्रदेश में विधान परिषद् में सदस्यों की संख्या कितनी है ? – 99
  • 28. किसी राज्य में विधानपरिषद् की व्यवस्था संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत की जाती है? – अनुच्छेद 169
  • 29. किसे समाप्त किया जा सकता है, पर भंग नही ? – विधान परिषद को
  • 30. भारत में विधान परिषद् को समाप्त करने वाला अंतिम राज्य कौन है ? – तमिलनाडू
  • 31. कौन-सा राज्य में 1957 में विधान परिषद् का सृजन और 1985 में उत्सादन किया गया ? – आन्ध्र प्रदेश में
  • 32. विधान परिषद् के सदस्य कितने वर्षो के लिए निर्वाचित होते हैं ? – 6 वर्ष के लिए
  • 33. विधान परिषद् का सदस्य होने के लिए कम-से-कम कितनी आयु सीमा होनी चाहिए ? – 30 वर्ष
  • 34. विधान परिषद् के कितने सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष अवकाश ग्रहण करते हैं ? – 1/3 सदस्य
  • 35. विधान परिषद् की गणपूर्ति (कोरम) कुल सदस्य संख्या का कितना भाग होता है ? – 1/10 भाग
  • 36. विधान परिषद् की एक वर्ष में कम-से-कम कितनी बैठकें होना अनिवार्य है ? – दो
  • 37. किसी राज्य में विधान परिषद् की संरचना अथवा विघटन किया जा सकता है ? – संसद द्वारा राज्यपाल की अनुशंसा पर
  • 38. राज्य विधान परिषद् के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किसके द्वारा किया जाता है? – परिसीमन आयोग द्वारा
  • 39. राज्य के विधान परिषद् के कितने सदस्य विधानसभा द्वारा चुने जाते है ? – 1/3 सदस्य
  • 40. भारत में राज्य विधान परिषद् के सदस्यों का कितना हिस्सा स्थानीय निकायों द्वारा चुना जाता है ? – एक तिहाई सदस्य
  • 41. विधान परिषद् के कितने सदस्य राज्य के राज्यपाल द्वारा मनोनीत किये जाते हैं ? – 1/6 सदस्य
  • 42. विधान परिषद् की कुल सदस्य संख्या का कितना हिस्सा राज्य के विश्वविद्यालयों के स्नातकों द्वारा चुना जाता है ? – 1/12 सदस्य
  • 43. यदि किसी राज्य विधान परिषद् का सभापति अपने पद से त्यागपत्र देना चाहे तो वह अपना त्यागपत्र किसको देगा ? – उपसभापति को
  • 44. विधान परिषद् साधारण विधेयक को अधिक से अधिक कितने माह तक रोक सकती है ? – चार माह तक
  • 45. यदि विधान परिषद् धन विधेयक को 14 दिनों के अन्दर नही लौटाती है, तब – दोनों सदनों द्वारा पारित माना जायेगा
  • 46. भारत में विधान सभा चुनाव किस आधार पर होते हैं ? – वयस्क मताधिकार
  • 47. संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राज्य विधान सभा का गठन किया जाता है ? – अनुच्छेद 170 के
  • 48. किसी राज्य की विधान सभा में अधिकतम कितने सदस्य हो सकते हैं ? – 500
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