आज के टॉप करेंट अफेयर्स

सामयिकी: -17 मार्च 2020

1. 15 मार्च को मनाया गया “विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस”

  • समस्त विश्व में 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस हर वर्ष उपभोक्ताओं के अधिकारों और आवश्यकताओं के प्रति विश्व में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।
  • इसका दिवस का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों का सम्मान करना और बाजार में उनके शोषण को रोकना है। इस वर्ष का विषय सदैव सजग उपभोक्ता (The Sustainable Consumer) है।
  • एक उपभोक्ता को माल या सेवाओं की गुणवत्ता, सामर्थ, मात्रा, कीमत और उसके मानक के बारे में पूरी जानकारी रखने का अधिकार होता है। यदि किसी खरीदे गए सामान में कोई खराबी है व्यक्ति को शर्तों के अनुसार सुविधा नहीं मिल रही, या कोई हानि हुई है तो आप इनके खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। शिकायत दर्ज करा सकते हैं, इसलिए ये जरूरी है कि लोग अपने इन अधिकारों के प्रति सजग रहें। इसी के आलोक में सरकार ने उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 पारित किया था।
  • भारत में 24 दिसम्बर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है। 9 दिसंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पारित किया गया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बार देशभर में लागू हुआ। राष्ट्रपति ने 15 मार्च को ही ऐतिहासिक उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अधिनियम को स्वीकारा था।

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की प्रष्ठभूमि

  • पहली बार अमेरिका में रल्प नाडेर द्वारा उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत की गई, जिसके फलस्वरूप 15 मार्च 1962 को अमेरिकी कांग्रेस में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा उपभोक्ता संरक्षण पर पेश किए गए विधेयक पर अनुमोदन दिया था।
  • इस विधेयक में चार विशेष प्रावधान थे जिसमें उपभोक्ता सुरक्षा के अधिकार, सूचना प्राप्त करने का अधिकार, उपभोक्ता को चुनाव करने का अधिकार और सुवनाई का अधिकार शामिल था। बाद में इसमें 4 और अधिकारों को जोड़ा गया था।

2. जीएसटी परिषद की 39वीं बैठक दिल्ली में संपन्न

  • केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 39वीं बैठक नई दिल्ली में संपन्न हो गई है। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों एवं वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस बैठक में भाग लिया था।
  • जीएसटी परिषद ने वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर जीएसटी दरों में बदलाव के बारे में निम्नलिखित निर्णय लिए:

i)        मोबाइल फोन, जूते, कपड़ा और उर्वरक जैसी विभिन्न वस्तुओं पर प्रतिलोमित शुल्क (इन्वर्टेड ड्यूटी) संरचना को सही करने हेतु जीएसटी दर संरचना में उचित समायोजन करने के लिए फिटमेंट कमेटी की सिफारिश को चर्चा के लिए जीएसटी परिषद के समक्ष रखा गया था। परिषद ने इस पर विस्तृत चर्चा की। चर्चा के बाद परिषद ने मोबाइल फोन और इसके निर्दिष्ट कलपुर्जों पर जीएसटी दर को मौजूदा 12% से बढ़ाकर 18% की शिफारिश की है।

(a) इन्वर्टेड ड्यूटी – इन्वर्टेड ड्यूटी की स्थिति तब बनती है जब किसी कच्चे माल पर देय शुल्क उसी कच्चे माल से तैयार उत्पाद पर देय शुल्क से कहीं ज्यादा होता है। यही नहीं, जब भी शुल्क ढांचा इन्वर्टेड होता है तो वैसी स्थिति में संबंधित उत्पाद का उत्पादन देश में ही करने के बजाय उसके आयात को तरजीह दी जाने लगती है।

(b) फिटमेंट कमेटी – फिटमेंट कमेटी में केंद्र और राज्य सरकारों के कर अधिकारी शामिल होते हैं। इसका कार्य जीएसटी के तहत विभिन्न आपूर्ति के लिए दरों को निर्धारित करने के लिए एक सिद्धांत और एक उपयुक्त पद्धति विकसित करना है।

ii)   सभी प्रकार की माचिस (हाथ से तैयार और इसके अलावा अन्य माचिस) पर जीएसटी दर को तर्कसंगत करके 12% कर दिया गया है। इसके तहत जीएसटी दर को हाथ से तैयार माचिस पर 5% से और अन्य माचिस पर 18% से संशोधित करके 12 प्रतिशत किया गया है। इससे वर्गीकरण का मुद्दा सुलझ जाएगा। इससे पहले 37वीं बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया था और इस पर निर्णय लंबित था।

iii)  विमान के संबंध में रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) सेवाओं पर जीएसटी दर को पूर्ण आईटीसी के साथ 18% से घटाकर 5% करने की सिफारिश की गई है और बी2बी सेवाओं के लिए आपूर्ति के स्थान को बदलकर प्राप्तकर्ता का स्थान किया गया है। इस बदलाव से भारत में एमआरओ सेवाएं शुरू करने में मदद मिलने की आशा है।

iv)  इसके अलावा, घरेलू एमआरओ को सीमा शुल्क अधिनियम, 1975 की धारा 3 (7) के तहत ज्यादातर आयातित वस्तुओं (मरम्मत के लिए विदेश भेजी गईं) पर संरक्षण भी मिलेगा क्योंकि क्रेडिट के लिए यह टैक्स उपलब्ध नहीं है।

जीएसटी परिषद

  • गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के लिए जीएसटी परिषद का गठन किया गया है। यह देशभर में लागू होने वाले एक समान टैक्स यानी जीएसटी की रेट तय करने पर निर्णय लेती है। इस परिषद का गठन संविधान के अनुच्छेद-279 (ए) के तहत किया गया है। परिषद का सचिवालय नई दिल्ली में है और राजस्व सचिव इसके पदेन सचिव होते हैं।
  • इस परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होते हैं। इसके अलावा केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री राजस्व प्रभारी, वित्त एवं कर संबंधी मंत्री या अन्य कोई मनोनीत मंत्री और प्रत्येक राज्य के वित्त मंत्री या प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं। काउंसिल में एक तिहाई वोटिंग का अधिकार केंद्र के पास है और दो तिहाई राज्यों के पास हैं। लेकिन, कोई प्रस्ताव पास करने के लिए कम से कम तीन-चौथाई बहुमत जरूरी होता है।

3. देश में सडक दुर्घटनाओं के मामले 10 प्रतिशत घटे

  • देश में सडक दुर्घटनाओं की संख्या में दस प्रतिशत तक की कमी आई है। राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि संशोधित मोटर वाहन अधिनियम 2019 के लागू होने से यह संभव हुआ है।
  • सडक दुर्घटनाओं में 24 प्रतिशत की कमी के साथ तमिलनाडु इस मामले में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने बताया कि दो राज्यों के अलावा सभी राज्यों में सडक दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।

मोटर व्हीकल संशोधन अधिनियम 2019

  • यातायात सुरक्षा के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 , 01 सितम्बर से लागू किया गया था। इस अधिनियम में शराब पीकर गाड़ी चलाने, ओवरस्पीड, ओवरलोडिंग आदि में कई गुना अधिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसमें ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन की प्रक्रिया को भी पहले से आसान बनाया गया है।
  • यह विधेयक मोटर यान विधेयक 1988 से संशोधित करता है। यह विधेयक सड़क हादसों में पीड़ित को कैशलैस इलाज को सुनिश्चित करता है ताकि पीड़ित को गोल्डन आवर (Golden Hour) में ईलाज सुनिश्चित किया जा सके।
  • गोल्डन आवर को विधेयक में परिभाषित किया गया है जिसमें बताया गया है कि हादसे के बाद का एक घण्टा जिसमें पीड़ित की बचने की संभावना सर्वाधिक होती है गोल्डन आवर है। विधेयक के अनुसार केन्द्र सरकार तृतीय पात्र की क्षतिपूर्ति के लिए योजना बना सकती है।
  • हिट एण्ड रन केस मे यह अधिनियम मृतक के परिवार को 2 लाख की क्षतिपूर्ति एवं चोट लगने पर 50000 की क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • यह अधिनियम एक मोटर यान दुर्घटना निधि (Motor Vehicle Accident fund) की व्यवस्था करता है जिससे दुर्घटना में घायल के ईलाज, मृतक के परिवार को क्षतिपूर्ति तथा हिट एण्ड रन में घायल को क्षतिपूर्ति सुनिश्चित का जा सकेगी।
  • इस अधिनियम में गुड समारितन (Good Samaritan) के द्वारा हादसे में घायल का ईलाज कराने पर या मरीज की सहायता करने पर यदि मरीज की मौत हो जाती है तो गुड समारितन को पुलिस द्वारा प्रताड़ित करने से सुरक्षा प्रदान की गई है। इसमें गुड समारितन के रूप में ऐसे व्यक्ति को परिभाषित किया गया है जो आपातकाल समय में पीड़ित की चिकित्सकीय, अचिकित्सकीय या आर्थिक सहायता बिना किसी प्रतिफल के करता है।
  • यह अधिनियम केन्द्र सरकार को अधिकार देता है कि वह संबंधित वाहन कंपनी से वाहन वापस लेने को कह सकती है यदि वाहन दोषयुक्त है। कंपनी को ये वाहन रिप्लेस करने होंगे या वाहन का मूल्य उपभोकता को वापस करना होगा। इसके साथ यह अधिनियम केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय वाहन नीति विकसित करने की बात करता है जिसे वह राज्य सरकारों के साथ बातचीत करके विकसित कर सकती है।
  • यदि कोई वाहन निर्माता कम्पनी निर्धारित मानकों के अनुसार वाहन निर्मित नहीं कर रही है तो उस पर 100 करोड़ तक का जुर्माना किया जा सकता है साथ ही 1 साल का कारावास या दोनों।
  • नाबालिग को लेकर मोटर वाहन एक्ट के 199 A में एक नया सेक्शन बनाया गया है। नाबालिग अगर यातायात नियम तोड़ते पाया गया तो कार मालिक और अभिभावक पर 25 हजार का जुर्माने का प्रावधान किया गया है। रैश ड्राइविंग पर अभी 1000 रुपये की जगह अब 5000 रूपए का दंड देना प्रस्तावित किया गया है।
  • यदि ठेकेदार निर्धारित मानकों के अनुसार रोड़ डिजाइन नहीं करता है तो उस पर 1 लाख तक का जुर्माना किया जा सकता है। विधेयक में ऑनलाइन टैक्सीसर्विस को शामिल किया गया है और उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के अनुसार सेवा प्रदान करने को कहा गया है।

प्रष्ठभूमि

  • भारत विश्व में सबसे ज्यादा सड़क हादसे वाला देश है जहाँ 2015 में लगभग 5 लाख सड़क हादसे हुए थे जिसमें 1.5 लाख लोगों की जान गई थी तथा लगभग 5 लाख से ज्यादा लोग घायल हुए थे केन्द्र सरकार द्वारा इन्हें रोकने के लिए लाया गया विधेयक एक अच्छा कदम है। वैसे भी भारत ब्राजीलिया घोषणा पत्र का हस्ताक्षरकर्ता है जो सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।

4. महाराष्ट्र के भउचा धक्का से मांडवा के बीच रोपेक्स सेवा की शुरूआत

  • केंद्रीय पोत परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनसुख मांडविया ने महाराष्ट्र के भउचा धक्का में रोपेक्स सेवा का दौरा किया। मांडविया ने रोपेक्स टर्मिनल का भी दौरा किया तथा भउचा धक्का और मांडवा के बीच शुरू हो रहे रोपेक्स सेवा के लिए यात्रियों के लिए निर्मित सुविधाओं का जायजा लिया।
  • रोपेक्स सेवा पूर्वी तटवर्ती विकास के अंतर्गत जल परिवहन सेवा परियोजना है। इस सेवा से यात्रा में समय कम लगेगा, वाहन उत्सर्जन में कमी आएगी और सड़क पर ट्रैफिक भी कम होगा। सड़क से मुंबई और मांडवा के बीच की दूरी 110 किलोमीटर है। इस यात्रा में 3 से 4 घंटे का समय लगता है, जबकि जलमार्ग से यह दूरी केवल 18 किलोमीटर है और यात्रा में सिर्फ 1 घंटे का समय लगता है।
  • वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख यात्री नौका (कैटामारैन) और मोटरबोट (लॉन्च) से गेटवे ऑफ इंडिया से मांडवा की यात्रा करते है। इस मार्ग में यात्रियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड ने इस जलमार्ग के महत्व को पहचाना और सरकार की सहायता से मुंबई (भउचा धक्का) और मांडवा के बीच रोपेक्स सेवा शुरू करने का निर्णय लिया।
  • मुंबई बोर्ड ट्रस्ट ने 31 करोड़ रूपये की लागत से भउचा धक्का में रोपेक्स जेटी और टर्मिनल सुविधाओं का विकास किया है। महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड ने 135 करोड़ रूपए की लागत से मांडवा में ब्रेकवाटर, रोपेक्स जेटी और टर्मिनल सुविधाओं का विकास किया है।

रोपेक्स (ROPAX)

  • रोपेक्स वेसल एम 2 एम- 1 का निर्माण सिंतबर 2019 में यूनान में किया गया था। इस पोत की गति 14 नॉट है और यह एक तरफ की यात्रा 45 मिनट से 1 घंटे के समय में  पूरा कर सकता है। यह पोत एक बार में 1000 यात्रियों और 200 कारों को ले जा सकता है।
  • इस पोत के दोनो तरफ रैंप लगे है, जिससे कारों को आसानी से अंदर बाहर किया जा सकता है। इस प्रकार लोग अब अपनी कारों के साथ रोपेक्स सेवा का आंनद ले सकते है। यह सेवा मानसून में भी संचालित की जायेगी जिससे अलीबाग क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा।
  • रोपेक्स सेवा शुरू हो जाने से मुंबई से अलीबाग/गोवा के बीच सड़क ट्रैफिक में कमी आयेगी। इससे ईधन की खपत और वाहन उत्सर्जन में कमी आयेगी। यह कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में भी एक कदम है।

5. जम्मू एवं कश्मीर में आरक्षण मुद्दों पर एक आयोग का शीघ्र किया जाएगा गठन

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार जम्मू एवं कश्मीर के सर्वांगीण विकास के लिए सभी कदम उठाएगी।
  • इस अवसर पर गृह मंत्री ने कहा कि आरक्षण मुद्दों पर एक आयोग का शीघ्र गठन किया जाएगा और दोहराया कि गुज्जरों, खानाबदोशों और अन्य समुदायों के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। अतः गठित आयोग गुज्जरों व उसके जैसी खानाबदोश जनजातियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।

गुर्जर बकरवाल

  • जम्मू-कश्मीर के मैदानी इलाकों में इस समुदाय के लोग रहते हैं। यह समुदाय गुर्जर जाति से तालुक रखता है। गुर्जर समाज के एक बड़े और रसूखदार तबके को ‘बकरवाल’ कहा जाता है।
  • यह नाम कश्मीरी बोलने वाले विद्वानों द्वारा दिया गया है। गुर्जर बकरवाल समुदाय के लोग भेड़-बकरी चराने का काम करते है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में गुर्जर बकरवाल की कुल आबादी लगभग 12 लाख के करीब है यानी कुल जनसंख्या का 11 प्रतिशत है।
  • गुर्जर बकरवाल परिवार गर्मियों में जम्मू के मैदानी इलाकों से कश्मीर और दूसरे पहाड़ी इलाकों की तरफ रुख़ करते हैं गर्मियों के दिन बिताकर ये लोग नवम्बर महीने में मैदानी इलाकों में लौट आते हैं। ऊपरी इलाकों में बर्फ़बारी शुरू होने के साथ ही यह अपना डेरा बदल लेते हैं।
  • जम्मू श्रीनगर राष्ट्र मार्ग पर जगह जगह ये लोग अपने माल मवेशी के साथ चलते दिखाई दे जाते हैं। कुछ लोग सड़क मार्ग छोड़कर सीधे पहाड़ी रास्तों के ज़रिये अपनी मंज़िल का सफ़र करते हैं।
  • जहां रुकने की जगह मिलती है कुछ देर के लिए ये लोग वहीं अपना डेरा जमा लेते हैं। कुछ देर आराम कर अपने मवेशियों को पानी पिलाकर फिर अगले पड़ाव की और निकल पड़ते हैं।
  • गुर्जर और बकरवालों को तीन हिस्सों में बाँटा जा सकता है –

i)        प्रथम श्रेणी के गुर्जर और बकरवाल पूरी तरह से खानाबदोश (फुली नोमेड) होते हैं। ये लोग सिर्फ जंगलों में गुज़र बसर करते हैं और इनके पास कोई ठिकाना नहीं होता।

ii)   दूसरी श्रेणी में आंशिक खानाबदोश (सेमी नोमेड) आते हैं। ये वो लोग हैं जिनके पास कहीं एक जगह रहने का ठिकाना है और वो आस पास के जंगलों में कुछ समय के लिए चले जाते हैं और कुछ समय बिताकर वापस अपने डेरे पर आ जाते हैं।

iii)  तीसरी श्रेणी में शरणार्थी ख़ानाबदोश (माइग्रेटरी नोमेड) आते हैं जिनके पास पहाड़ी इलाकों में धोक (रहने का ठिकाना) मौजूद है और यहां मैदानी इलाकों में भी रहने का ठिकाना है।

6. आर बी आई ने बदले क्रेडिट, डेबिट कार्ड से जुड़े नियम

  • डेबिट और क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग व डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े फ्रॉड को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए नियम 16 मार्च से लागू हो हो गए हैं। 15 जनवरी 2020 को RBI ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था। नए नियम सभी डेबिट-क्रेडिट कार्ड (फिजिकल और वर्चुअल) पर लागूं होंगे, इनमें रि-इश्यू कार्ड भी शामिल हैं।
  • आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे डेबिट-क्रेडिट कार्ड इश्यू/रीइश्यू करते समय उन्हें केवल देश में एटीएम और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल्स पर ट्रांजैक्शन के लिए ऐक्टिवेट करें। अतः नए नियम के अनुसार, अब ग्राहक डेबिट और क्रेडिट कार्ड का सिर्फ एटीएम और पीओएस टर्मिनल पर इस्तेमाल कर सकेंगे।
  • अगर ग्राहक को विदेश में ट्रांजैक्शंस, ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस तथा कॉन्टैक्टलेस ट्रांजैक्शंस की सेवा चाहिए तो उसे ये सुविधाएं अपने कार्ड पर अलग से लेनी होंगी। इसका मतलब यह है कि अगर आपको विदेश में या ऑनलाइन या कॉन्टैक्टलेस ट्रांजैक्शंस की सुविधा चाहिए तो आपको यह सेवा अलग से लेनी होगी।
  • इसी तरह से अभी तक जिन डेबिट और क्रेडिट कार्ड धारकों ने अपने कार्ड का इस्तेमाल किसी ऑनलाइन लेन-देन के लिए नहीं किया है तो उनकी ये सुविधा भी डिसेबल हो जाएगी। उन्हें इसे इनेबल या चालू कराना होगा। जो ग्राहक ऑनलाइन लेन-देन करते रहते हैं उनकी सुविधा चालू रहेगी लेकिन उनके पास इसे जब चाहे बंद कराने और चालू करने का विकल्प मौजूद रहेगा।
  • आरबीआई के मुताबिक 31 मार्च, 2019 तक भारत में 92 करोड़ 50 लाख डेबिट कार्ड और चार करोड़ 70 लाख क्रेडिट कार्ड जारी हो चुके हैं। डेबिट कार्ड के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है।
  • आरबीआई ने अधिसूचना में कहा है कि उसने ये कदम कार्ड लेनदेन की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए है इसका मकसद कार्डधारकों को ज़्यादा सुरक्षित बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना है।  ध्यातव्य है कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड को लेकर तरह-तरह की धोखाधड़ी की जाती है ये धोखाधड़ी ऑनलाइन ज़्यादा होती है ऐसे में आरबीआई का ये नियम ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने में मदद कर सकता है।

7. राज्य सभा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 पारित

  • राज्य सभा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 पारित कर दिया गया है  राज्यसभा ने इस लगभग ढाई घंटे की चर्चा के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया है।
  • पिछले साल दिसंबर महीने में इस विधेयक को लोकसभा/इस सदन से पारित किया गया था। दिसंबर 2019 में जब इस बिल को लोकसभा में पारित किया गया तो रमेश पोखरियाल ने कहा था कि संस्कृत केवल एक भाषा मात्र नहीं है, यह हमारे अतीत और वर्तमान को जोड़ने वाली कड़ी है।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 के प्रावधान

  • इस विधेयक के तहत नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (स्थापना 1970), लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ (स्थापना 1962) और तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (स्थापना 1961) को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।
  • •  अतः यह विधेयक अधिनियम बन जाने के बाद ये तीन डीम्ड यूनिवर्सिटी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में बदल जायेंगीं। अभी तीनों संस्थान संस्कृत अनुसंधान के क्षेत्र में अलग-अलग कार्य कर रहे हैं। संस्कृत विश्वविद्यालयों का काम संस्कृत भाषा के ज्ञान का प्रसार करना और संस्कृत भाषा को और उन्नत बनाना होगा।
  • इन विश्वविद्यालयों में मानविकी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान के एकीकृत पाठ्यक्रम के लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा। इसके अलावा इन विश्वविद्यालयों द्वारा संस्कृत भाषा और उससे संबद्ध विषयों के समग्र विकास और संरक्षण के लिए लोगों को ट्रैनिंग दी जाएगी।
  • संस्कृत विश्वविद्यालयों के लिए 15 सदस्यी कार्यकारी परिषद का गठन किया जाएगा यह कार्यकारी परिषद मुख्य कार्यकारी निकाय का हिस्सा होगी। यह परिषद केंद्रीय विश्वविद्यालयों का कुलपति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय का एक संयुक्त सचिव संस्कृत भाषा के दो विद्वान तथा अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगी।
  • यह कार्यकारी परिषद ही शिक्षकों की भर्ती कर सकेगी और विश्वविद्यालय के लिए फाइनेंस का भी प्रबंधन करेगी। कार्यकारी परिषद ही अकादमी नीतियों को सुपरवाइज करने का काम करेगी। इसके साथ ही एक पाठ्यक्रम समिति बनाई जाएगी, जो रिसर्च के लिए विषयों को मंजूरी देगी और शिक्षा के स्तर को बढ़ाने में मदद करेगी।

8. अमेरिका में शुरू हुआ कोरोना वायरस के टीके का परीक्षण

  • अमेरिकी सरकार ने कोरोना वायरस से बचाने के लिए बनाए गए टीके का नैदानिक परीक्षण 16 मार्च से शुरू कर दिया है। परीक्षण के पहले प्रतिभागी को प्रायोगिक टीका दिया जाएगा।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) इस परीक्षण के लिए धन मुहैया करा रहा है और यह सिएटल में ‘कैसर परमानेंट वॉशिंगटन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट में हो रहा है। जन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित टीके की पुष्टि में एक साल से 18 महीने तक का वक्त लगेगा।
  • यह परीक्षण 45 युवा एवं स्वस्थ स्वेच्छाकर्मियों के साथ शुरू होगा जिन्हें एनआईएच और मॉर्डर्ना इंक के संयुक्त प्रयासों से विकसित टीके लगाए जाएंगे हालांकि प्रत्येक प्रतिभागी को अलग-अलग मात्रा में सुई लगाई जाएगी। इस बात की कोई संभावना नहीं है कि कोई भी प्रतिभागी इससे संक्रमित होगा क्योंकि इस टीके में वायरस नहीं है।
  • इस परीक्षण का लक्ष्य सिर्फ यह जांचना है कि टीकों को कोई चिंताजनक दुष्प्रभाव न हो और फिर इस आधार पर बड़े पैमाने पर परीक्षण किया जा सके। कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच विश्व भर के दर्जनों शोध संगठन टीका विकसित करने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।

नोवेल कोरोना वायरस/ कोविड-19

  • चीन में पाए गए इस वायरस को पहले ‘नोवेल कोरोनावायरस’ नाम दिया गया था। इस वायरस से प्रभावित व्यक्ति में निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जुकाम, बुखार, खांसी, कंपकंपी आदि इस वायरस की चपेट में आने के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
  • कोविड-19 की पहली बार चीन की सरकार ने दिसम्बर 2019 में पुष्टि की थी। इसे नोवेल भी कहा गया है क्योंकि इस तरह का वायरस पूरी दुनिया में पहली बार मिला है।
  • यदि इसके नामकरण की बात करें तो कोरोनावायरस (कोविड-19)  को इसका नाम लैटिन शब्द से मिला है। लैटिन में कोरोना का मतलब क्राउन (Crown) होता है। इस वायरस की सतह पर भी क्राउन की तरह स्पाइक्स की सीरीज बनी होती है। यहीं से इसे कोरोना नाम मिला है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्राथमिक जांच से मिली जानकारी इस वायरस को समुद्री खाद्य बाजार से जोड़ती है। कोरोना वायरस विषाणुओं का परिवार है। यह वायरस ऊंट, बिल्ली तथा चमगादड़ सहित पशुओं में पाया जाता है। दुर्लभ स्थिति में पशु कोरोना वायरस बढ़कर लोगों को भी संक्रमित कर सकता है।
  • अभी तक कोरोना वायरस का कोई विशेष इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। इस विषाणु से होने वाली बीमारी की रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन भी नहीं खोजी गई है।
  • ये वायरस कुछ बीमारियों के रोगियों को गंभीर परिणाम दे सकता है, जैसे- सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS)

9. ताईवान की ताइ-ज़ू-यिंग ने जीता ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियनशिप का सिंगल्स खिताब

  • बर्मिंघम में ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में ताईवान की ताइ-ज़ू-यिंग ने महिला सिंगल्स खिताब जीत लिया है। यिंग ने 44 मिनट तक चले मुकाबले में चीन की चेन यूफेई को 21-19, 21-15 से हराकर यह ख़िताब जीता है।
  • वहीँ पुरूष सिंगल्स के खिताबी मुकाबले में डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसन ने चाइनीज ताइपे के तेन चेन चोउ को हराकर ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप का पुरुष एकल खिताब जीत लिया है। टूर्नमेंट के दूसरे सीड खिलाड़ी एक्सेलसन ने पहली सीड चोउ को 46 मिनट के अन्दर 21-13, 21-14 से हराकर यह खिताब जीता है।
  • टूर्नमेंट का महिला युगल खिताब जापान की युकी फुकुशियामा और सायाका हिरोता ने जीता है। सायाका और युकी ने चीन की यूई दू और यिन हुई ली को 46 मिनट में 21-13, 21-15 से हराकर यह खिताब जीता है।
  • प्रतियोगिता में भारत की चुनौती तब ही समाप्त हो गई थी, जब पी. वी. सिंधु को क्वार्टर फाइनल में जापान की नोजोमी ओकुहारा से हार का सामना करना पड़ा था।

10. भारत के अचंत शरत कमल ने जीता ओमान ओपन टेबल टेनिस टूर्नामेंट का पुरूष सिंगल्स खिताब

    • भारत के अचंत शरत कमल ने ओमान ओपन टेबल टेनिस टूर्नामेंट में पुरूषों का सिंगल्स खिताब जीत लिया है। मस्कट में आयोजित किये गए फाइनल में शरत कमल ने शीर्ष वरीयता प्राप्त पुर्तगाल के मार्कोस फ्रेटस को चार-दो से हराकर ख़िताब पर कब्ज़ा किया है।
    • 37 साल के शरत ने अपना अंतिम खिताब 2010 में मिस्र ओपन में जीता था। इसके बाद वह 2011 मोरक्को ओपन और 2017 इंडिया ओपन में दो बार सेमीफाइनल में पहुंचे थे,लेकिन ट्रॉफी हासिल नहीं कर पाये थे।
    • सेमीफाइनल में शरत कमल ने रूस के किरिल स्काककोव को, जबकि मार्कोस फ्रेटस ने भारत के हरमीत देसाई को हराया था। इस टूर्नामेंट में महिला सिंगल्स का खिताब जापान की हितोमी सातो ने जीता है।
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