संघ एस्केल्मिथीज या निमेटोडा Phylum Aschelminthes or Nematoda

इन्हें साधारणतः गोलकृमि (Round worm) कहते हैं। Nematos = Thread, helminthes = worm अर्थात इन्हें सूत्र कृमि (Thread worm) भी कहते हैं। इस संघ के अंतर्गत लगभग 12000 जातियाँ (species) ज्ञात हैं। इस संघ के अन्तर्गत पाये जाने वाले जन्तुओं के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं-

  • इस संघ के जन्तु जलीय, स्थलीय या परजीवी होते हैं।
  • इस संघ के जन्तुओं का शरीर अखण्डित, लम्बे-पतले धागे जैसा बेलनाकार होता है तथा दोनों सिरे नुकीले होते हैं।
  • इनके शरीर पर कड़ा उच्चर्म (Cuticle) होता है।
  • इनका शरीर अखण्डित तथा द्विपार्श्व सममित होता है।
  • इनमें एपीडर्मिस (Epidermis) के नीचे अनुदैर्ध्य मांसपेशियाँ (Longitudinal muscles) होती है।
  • इनमें कृत्रिम देहगुहा (Pseudocoel) होती है।
  • इनमें आहारनाल विकसित तथा मुखद्वार एवं गुदा (Anus) भी उपस्थित होते हैं।
  • इनमें रक्त परिसंचरण तंत्र और श्वसन तंत्र नहीं पाए जाते हैं।
  • इनके तंत्रिका तंत्र में एक अग्रतंत्रिका वलय (Nerve ring) एवं 6 अनुदैर्ध्य तंत्रिका रज्जु (Nerve cord) होती है।
  • ये एकलिंगी (Unisexual) होते हैं, अर्थात् नर एवं मादा जनन अंग अलग-अलग शरीर में पाये जाते हैं।
  • ये अधिकांशतः परजीवी (Parasites) होते हैं तथा अपने पोषकों (hosts) में रोग उत्पन्न करते हैं।

उदाहरण- ट्राइकिनेला (Trichinella spiralis), एस्केरिस (Ascaris), ऐंकाइलोस्टोमा (Ancylostoma), वूचेरीया (wuchereria) आदि।

महत्वपूर्णतथ्य

  • ट्राइकिनेला मनुष्य, सूअर आदि स्तनपायी जन्तुओं की आँत में पाया जाता है एवं ट्राइकिनोसिस (Trichinosis) नामक रोग उत्पन्न करता है।
  • ऐस्केरिस (Ascaris) मनुष्य की छोटी आँत में पाया जाता है तथा ऐस्केरिएसिस (Ascariasis) रोग उत्पन्न करता है।
  • वूचेरीया (wuchereria) द्वारा मनुष्य में फाइलेरिया रोग उत्पन्न होता है।
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